आलसी लोग जो ना मेहनत करते दिन के उजयारो मे देखा रात को स्ट्रीट लाइट के निचे पड़ते एक बच्ची को अंधरे गलयारो मे. सर्द हवाओ में मैंने उसे देखा पढ़ते कांप -कांप कर जाने […]

हिमालय ताज सर पर सजा डटकर खड़ा अम्बर में सटा स्थिरता जिसकी पहचान है ऐसा ही हर भारतीय का रुझान है क्योंकि इस देश का कण-कण-सवर्ण महान है नम्र ह्रदय उच्च विचार मानते हम अतिथि […]

दिल और दिमाग के बीच सन्तुलन बैठाना मुश्किल था, पहली बार देखा था उसे अमलन छुपाना मुश्किल था, अकेले ही काटी थी यूँही राहों पर उम्र भर जो जिंदगी, मिला जो उनसे तो ठहरी अंजुमन […]

धड़ाधड़ अंधाधुन हो रहा पेड़ों की कटाई, मूक बाधिर बने रहे तनिक लाज नहीं आई, सूलग रहा आरे आज राजनीति के करतुतो से, पर्यावरण प्रेमी को दबोच रहें हैं आरे कालोनी से, महेश गुप्ता जौनपुरी

जीवन हर पल एक खेल होता है। यहाँ सभी के कर्मों का मेल होता है। जिंदगी के खेल बड़े निराले होते हैं। किश्मत का हर सिक्का हेड, टेल होता है। इस खेल में तो कोई […]

भूखे पेट जीना सीखा मैंने पेट भर खाने की जरुरत भी समझी नहीं | नंगे पैर दौड़ पड़े सफर में बस भागता रहा ना देखा, पाँव में चप्पल है के नहीं | बुझी मशालों को […]

मोर पखा सिर धरने वाले । उंगली पर गिरी रखकने वाले । है कान्ह हे नंद दुलारे हे यशुमति के प्यारे। कृष्णा, मोहन , श्याम सब हैं तेरे नाम द्वारिका, मथुरा , वृंदावन हैं तेरे […]

जलाकर रख दिए ख़त मगर यादों को अग्नि दगा दे गई, मुट्ठी में दबाकर रखी थी मगर खुशबू को हवा उड़ा ले गई, बेबाक यूँही नशे में गुज़र रही थी लडखड़ाती हुई ज़िन्दगी, आई एक […]

फूल लताओं को समेट कर रखता मेरा गांव नल कूप को सहेज कर रखता मेरा गांव रिस्ते को मदमस्त खुशहाल रखता मेरा गांव मिट्टी की खुशबू को सहेज कर रखता मेरा गांव महेश गुप्ता जौनपुरी

मेरे गलती पर साहब भौं भौं करके दौड़ लगाते, कानुनी नियम का पाठ पढ़ाकर पैसा जनता से खुब ऐंठते, ये कैसा कानून व्यवस्था है हमको भी बतलाओ यारों, नेता गिरी है या दादागिरी कोई तो […]

वह राणा अपना कहाँ गया , जो रण में हुंकारें भरता था। वह महा प्रतापी कहाँ गया, जिससे काल युद्ध में डरता था । जिसके चेतक को देख – देख , मृगराज दंडवत करता था। […]

लोगो की नफरतो के आगे, खुद्दार कभी झुकता नहीं| अडचन चाहे कितनी भी आये, चलते चलते वो रुकता नहीं| महफिलों की रौनको से, फर्क उसे पड़ता नहीं| संघर्ष की मशाल लिए वो, भागता हुआ थकता […]

सह आंखो से देखे तो पड़ जाता है पाला कोई हाथों से छीनकर खा जाता निवाला क्या होगा यहां उन मासूम पंख परिंदो का आज कल बस्तियो में खूब होता है घोटाला

छप्पन भोग लगा कर बेटा आज नदी के पास बैठा है पिण्ड बनाकर मेवे का ढोंग देखो रचा कर बैठा है जो मर गये एक निवाले के लिए घुट-घुट कर चार दिवारी में क्या क्या […]

सुनो आज तुम्हे सुनाऊ पानी की कहानी कीमती है पानी कहती थी मेरी नानी | कभी अमृत जैसा मीठा था मेरे गांव का ये पानी अब विषैला होता जा रहा हर घट- घट का पानी […]

ख़्वाब टूटते हैं मग़र यादें रह जातीं हैं। चाहतों की दिल में फ़रियादें रह जातीं हैं। देख़तीं रहतीं हैं आँखें राहें मंज़िल की- वस्ल की भटकी हुई मुरादें रह जातीं हैं। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

काश ! देश का शासन कलम चलती, निर्दोष को न्याय दिलाती, और दोषी पर कहर बरसाती, काश !देश का शासन कलम चलाती | अन्याय का नाम ना होता, भ्रष्टाचार का काम ना होता, दुष्ट नेताओं […]

फूल लताओं को समेट कर रखता मेरा गांव , नल कूप को सहेज कर रखता मेरा गांव , रिस्ते को मदमस्त खुशहाल रखता मेरा गांव , मिट्टी की खुशबू को सहेज कर रखता मेरा गांव […]

कोई कहे कैसे उसको ग़म नहीं है? जो कुछ मिल गया है उसको कम नहीं है। तुम हर तरफ़ ढूँढ़ लो इलाज़े-मर्ज़ को- इस दर्द का कोई भी मरहम नहीं है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

माँ बाप की क्या इच्छा होती है अपने बच्चों से थोड़ा सा प्यार थोड़ी सी इज्जत चाहते है उन गढ़े पक्के रिश्तो से दुख के दिनों मे तुम साथ दो ना दो तुम्हारे साथ सुख […]

मेरे दर्द को तेरा अफ़साना याद है। मेरे ज़ख़्म को तेरा ठुक़राना याद है। ख़ींच लेती है तलब मुझको पैमाने की- हर शाम साक़ी को मेरा आना याद है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

वाह री सरकार क्या गजब बनाए है तूने ट्रेफिक रूल. दिमाग मे बस चलता रहता हेलमेट, इंश्योरेंश, लाइसेंस कभी ना मै जाऊ भूल. वाह री सरकार सब्सिडी तो तूने give up करा दी पर सिलेंडर-चूल्हा […]

हम ज़िन्दग़ी में ग़म को कब तक सहेंगे? हम राह में काँटों पर कब तक चलेंगे? क़दम तमन्नाओं के रुकते नहीं मग़र- हम मुश्क़िले-सफ़र में कब तक रहेंगे? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

ए मन, ज़रा थम. तू चला है… थाम के, अपनी पतवार… नदी तो, बहती रहती, जो सतत् , चाहे जैसे भी हों रास्ते… कंकरीले.. पथरीले… पतवार ना छूटे, हाथों से… तू कौन?? तेरा वजूद क्या?? […]

कवि तो खुशिया फैलाने का जरिया था पर अब ऐसा वक्त आ गया कागज़- कलम को छोड़ सबने लेपटॉप कंप्यूटर को अपना लिया लिखने का कीमती वक्त तो Whats up twiter खा गया उंगलियां you […]

मै हूँ देश का युवा आतंकवाद को जवाब दे के रहूँगा मेरे देश के लिए दिलमे नफरत रखने वालो के सीने मे गोलियाँ उतार दूंगा ऐ पाकिस्तान तू मेरा नाम जान ले अपना परिचय तो […]

सारे पिंजरे तोड़ चुका वो . मन की मर्जी से जीता है. कवि तो उड़ता पंछी है जो उमंगो के आसमान मे उड़ता है कवि तो बहुत ही प्यासा है बस भावनाओ मे बहती नदी […]

अनजाने से संसार में खुशीयों को लो बटोर अपने पराये में ब्यर्थ ना करो रिस्ते का डोर समय बहुत मुल्यवान है करते रहो तुम प्रेम सहज ही उत्पत्ति होगी भाई बंधू का प्रेम महेश गुप्ता […]

ऊड़ न सकूँ, पंख कतरा मैं परिंदा हूँ। पर मरा नहीं अभी तक, मैं जिंदा हूँ। आजादी तुझे ही नहीं हमें भी है पसंद, तू ना सही, तेरे कृत्य पर मैं शर्मिन्दा हूँ।

सालो पहले मेने लगाया एक पौधा निश्चिंत होकर सालो से रहा मै सोता फिरसे देखने उसे साथ चल दिया मेरा पोता मिला नहीं वो मुझे कही ना ढूंढ़ पाया मेरा पोता प्रदूषण जो ना इतना […]

रूठो ना मुझसे तुम किस चीज की शिकायत है रूठने से पहले जान लो की बस इस दिल पर तुम्हारी ही रिवायत है प्यार की मंजिल tu तुझसे मेरी इनायत है रूठी हो मुझसे तुम […]

बीवी ने कहा आज मंगलवार है मन्दिर मुझे जाना है कुछ पेसो के फूल होंगे कुछ का गुलदाना है मेने कहा आज की तू टाल मार फिर से आएगा मंगलवार उसे क्या पता मै हूँ […]

ज़िन्दगी भी कैसे साँसे तलाश करती है, मौत की आहोश में बाहें तलाश करती है, यूँहीं बंध कर रहने वाली धकड़न मेरी, अक्सर आहें तलाश करती है, जिस्म से मोहब्बत करने वाली रूह, आज भी […]

मैं कतरा कतरा बिखर जाऊं मुझे गम नहीं मैं देश के लिए कुर्बान हो जाऊं मुझे गम नहीं मेरी ख्वाहिश है बस इतनी मेरा साथ देना दोस्तो मैं मर कर भी देश के लिए काम […]

लुटा मैं आज खजाना आबाद बैठी हूं तेरे रहमों करम से मैं बर्बाद बैठी हूं जरा सी इज्जत बची हो तो लगा लेना गले से नहीं तो मैं जिल्लत कि ज़िन्दगी अपना बैठी हूं महेश […]

बचपन लड़कपन की याद अभी वही हैं रिस्ते में दोस्ती की मिठास अभी वही हैं चन्द पल की ही तो दुरी हुयी हैं ऐ दोस्त मिलेगें फिर उसी गली में महफिल जमाने महेश गुप्ता जौनपुरी

वतन की मिट्टी पर हमने पैगाम लिख दिया, अपने वीर जवानो की पहचान लिख दिया, जो धर्म पर बँट गये वो गद्दार निकल गये, जो देश के लिए कुर्बान हुए जवान निकल गये, महेश गुप्ता […]

नारी शक्ती कि पहचान हो हिमा देश कि गौरव अभिमान हो हिमा बेटी नहीं तुम भाग्य कि लकिर हो हिमा साहस धैर्य सुर्य कि प्रकाश हो हिमा ये सिध्द किया हैं तुमने हिमा बेटी बेबस […]

कुल्हड़ कि चुस्की कुछ याद दिलाती हैं, दोस्त कि दोस्ती साथ निभाती हैं, महक मिट्टी कि वतन पर प्यार लुटाती हैं, चाय कि चुस्की बचपन जवानी कि कहानी सुनाती हैं, महेश गुप्ता जौनपुरी

तेरी मासुमियत का मैं हूं दिवाना तेरे प्यार में फिरता हूं आवारा ना समझ मुझे जाहिल निकम्मा सनम तेरे ही प्यार से मुझे गीले हैं सितम ‌‌‌‌ महेश गुप्ता जौनपुरी

आसमां कि बुलंदी पर पैगाम भेजा है अपने दोस्त को मैंने सलाम भेजा है ख़त को मेरे यार को ही पकड़ना ख़त में मैं दर्द जुदाई एहसास भेजा है महेश गुप्ता जौनपुरी

कुछ ऐसे ही हाल होने वाला हैं मानव तेरा , सांस थमेगा जब तेरा याद आयेगा मेरा , सिसक सिसक दम हैं मैंने तोड़ा , तेरी भी बारी आयेगी होने दे सवेरा , महेश गुप्ता […]