Category: मुक्तक

  • रात पर छाई खुमारी

    रात पर छाई खुमारी
    बौने सपने हो गये
    उम्र बीती तेरी आरजू में
    सपने सपने हो गए

  • हौसले

    मुड़ कर ना देखेंगे दोबारा
    रोज़ यही फैसला किया करते हैं
    पर जब तुम्हारी याद है तो
    हौसले टूट जाते हैं

  • मुक्तक

    एहसास प्यार ❣️ मोहब्बत का
    एहसास रूह ❣️ तमन्ना का
    एहसास 💞खूबसूरत💞 ख्याल का
    एहसास 🌹मन🌹 के जज्बात का
    एहसास 🌕धूप🌕 के छांव का
    एहसास तुम्हारे 💞दिल💞 के धड़कन का
    एहसास 🤝विश्वास🤝 के शब्दों का
    एहसास 💔अनजाने❣️ रिस्तो का

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मुक्तक

    भाल लेकर तैनात रहो,
    भारत देश के जवानों तुम,
    जीभ खिंच कर काट लो,
    जो देश के खिलाफ बात करें।

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  • स्वेद

    अपने स्वेद से सींच कर
    बोई थी
    मोहब्बत की फ़सल
    शक के एक झोंके ने
    सब बर्बाद कर दिया।

  • क्या????

    क्या अपने जज़्बात बयाँ करना भी
    गुनाह है
    जब वक्त होता है तो
    कह सुन लेते हैं हम यारों से।

  • चलो तुम

    चलो तुम जीत जाओ
    हमें हराकर
    यही खुशी है तुम्हारी तो
    हम तुमसे हार कर भी जीत जायेगें ।

  • शिद्दत

    बड़ी शिद्ददत से लगे है वो हमे हराने मे
    हमे भी अब अंजाम का इंतजार है……….

  • श्याम मेरे

    श्याम मेरे तेरा साँवला रंग
    मेरे मन को मोह गया
    तू दिल में मेरे बसा रहा
    और आंखों का काजल
    बहता रहा ….

  • सहारा तिनके का

    गहराई का आलम न पूछो दोस्त !
    सहारा तिनके को है या तिनके का सहारा किसी को न मालूम………

  • नजर को नजर

    नजर को भी नजर लग जाएगी
    उसकी नुमाइश इतना भी ना करो…….

  • स्त्री हूं पतंग नहीं

    ऐ पुरूष सुन!
    स्त्री हूं पतंग नहीं कि जिसकी डोर सदैव तुम्हारे हाथ में रहेगी…….

  • सुना है

    सुना है साथ छोड़कर जाने वाले
    आज अकेले हैं,
    कमबख्त मुझ में भी अब दोबारा
    धोखा खाने की हिम्मत कहां है……..

  • क्षणिकाएं

    1.

    कदम छोटा हे या बड़ा
    हर मोड़ पर
    इंतज़ार है ज़िंदगी को –
    चुन लिए जाने का

    2.

    राम
    लिखा सुनहरा
    इतिहास ने तुम्हारा नाम ;
    तुमने –
    गढ़ ली सीता सोने की !

    ( तज दी सीता सोने सी !!! )

  • क्षणिकाएं

    1.

    पहली ही सीढ़ी पर
    एहसास हुआ,
    सर पर खुला आसमां हो भले ही
    अब –
    पैर तले ज़मीन नहीं

    2.

    चाहे-अनचाहे उग आए हैं
    संबंधों में
    अपरिचय के विंध्याचल ;
    हम भी जो
    पा लेते थोड़ा सा
    अगस्त्य का बौनापन !!!

  • छुप कर

    छुप कर आंसू बहाते हैं
    रो-रोकर जातेहैं
    सपने मेरे तड़पकर टूटते
    जा रहे हैं या खुदा हम तेरे पास आ रहे हैं

  • तुम्हें क्या पता

    तुम्हें क्या पता के हमें
    छोड़ कर तुमने क्या खोया है
    कोहिनूर को शीशा समझ कर
    तुमने हीरा खोया है।
    सिर्फ़ उसे पाने की खातिर
    जो चन्द दिनों के लिए
    तेरा है।

  • कोहिनूर

    तुम्हें क्या पता के हमें
    छोड़ कर तुमने क्या खोया है
    कोहिनूर को पीतल समझ कर
    तुमने हीरा खोया है।
    सिर्फ़ उसे पाने की खातिर
    जो चन्द दिनों के लिए
    तेरा है।

  • फितरत

    हर रोज़ बदलता है वो अपनी फितरत को
    कमबख्त सारे रंग एक जैसे ही हैं उसकी फितरत के……..

  • तस्वीर

    जीवन की कड़वी सच्चाई एक माला चढ़ी तस्वीर में छिपी है कुछ समय पश्चात हो तस्वीर भी नहीं रहेगी।
    याद का क्या है याद तो आती जाती रहेगी,
    धूमिल हो जाएगी दूर जाती रेलगाड़ी की तरह।
    इस जग में अमर रहने के लिए,
    कुछ अच्छे कर्म जरूरी है।
    जो आपको जिंदा रखेंगे युगों युगों तक
    आपको सिर्फ तस्वीर नहीं बनना यह याद रहे।
    निमिषा सिंघल

  • क्रांति की धारा

    मेरे देश मुझे तेरे आंचल में
    अब रहने को दिल करता है
    जो जख्म दिए अंगारों ने
    उसे सहने को दिल करता है

    कांटो पर जब तू चलता था
    हम चैन से घर में सोते थे
    हम देश पराए जाते थे
    तेरी आंख में आंसू होते थे

    क्रांति की आग में अर्थी थी
    यह खून से रंग दी धरती थी
    हर मां की आंख में आंसू थे
    चौराहे लाश गुजरती थी

    सीने पर जख्म हजारों थे
    सुनसान यह गलियां रहती थी
    यह वेद कुरान भी ठहर गए
    आंसू की नदियां बहती थी

    मैंने हिमालय की धरती पर
    सिंहासन लगाकर देखा था
    हथियार की महफिल सजतिथी
    हर गली में बैठा पहरा था

    यह धरती फिर आजाद हुई
    इसे थाम लिया रणधीरओं ने
    विजय आजादी का आकर
    आगाज किया था वीरों ने

    आज विदेशी छोड़ दिया
    स्वदेशी का आगाज हुआ
    है मेरा नमन उन वीरों को
    जिसने भारत आजाद किया

    🇹🇯 जय हिंद 🇹🇯

  • प्रेम

    🌺”प्रेम एक पूर्ण शब्द है
    अपूर्णता से पूर्णता की ओर ले जाने वाला।
    जितना अधूरा उतना कामयाब
    अखंड ज्योति सा
    हृदय में उम्र भर सुलगने वाला।””
    – निमिषा🌺

  • मुक्तक

    ज्यादा मजबूत हृदय का दावा करने वाले
    अक्सर बंद कमरे में रोया करते हैं।
    निमिषा सिंघल

  • साथी

    पलके तेरी झुकी थी,
    ओठों पर था तुफान।
    संग चलने का इरादा किया,
    मुझ पर था एहसान।

    इस कदर एक साथ में चलें,
    हर मुश्किल हालात में चलें।
    आई जितनी परेशानियाँ,
    उन्हें कुचल हर हाल में चलें।

    धीरे-धीरे ही सही,
    वर्ष कई बीत गयें।
    कई उलझनें भी आई,
    कदम हमेशा टिक गयें।

    जब भी मैं भुखा रहा,
    तुम भी भुखी सोई थी।
    ढ़ाढस बंधाकर तुमने,
    हर दु:ख हमारा धोई थी।

    तेरे जैसे साथी पाकर,
    धन्य हुआ भाग्य हमारा।
    तुझपर मैं लुटा दूँ,
    अगले कई जन्म हमारा।

  • धैर्य

    निश्चित छोड़ अनिश्चित को धावे ।
    मुट्ठी से निश्चित खोवे अनिश्चित हाथ न आवे ।
    “विनयचंद “धैर्य बिना क्या पावे?

  • आशियाना

    हमने बुलाया भी नहीं
    तो तुम आये भी नहीं
    ये दिल तो तुम्हारा आशियाना था
    हमनें रोका भी नहीं
    तो तुम ठहरे भी नहीं

  • वक्त का मारा

    वक्त का मारा हूं,हालात का मारा हूं
    मौत भी आ जाए तो गम नहीं
    ए दोस्त! मैं तो जिंदगी का मारा हूं

  • नया साल

    गुजरे कल की बातें लेकर
    तुम भी क्या बैठे रहते हो

    नया साल आने वाला है
    तुम आज भी कल में जीते हो।

  • बज़्म

    जीने को यूँ जीती हूँ जैसे
    कोई गुनाह किये जा रही हूँ मैं।
    गीत भी गा रही हूँ,
    ईद भी मना रही हूँ।
    ज़िन्दगी की बज़्म फ़िर सजा रही हूँ मैं।

  • दिल की बस्ती

    खुश रहने की वजह ढूंढ़ोगे,

    तो कम ही मिलेंगें।

    यहाँ हर चेहरा हस रहा बाहर से,

    पर अन्दर तो गम ही मिलेंगें।।

    झाँक कर देखोगे दिल की बस्ती में,

    तो बस खाली शहर ही मिलेंगें।

    नवीन’ नही कोई जहाँ में अपना ,

    यहाँ बस पराये ही मिलेंगें।।

  • जीवन की बगिया

    फूलों से भी ज्यादा
    कोमल है ह्रदय
    शब्दों के बाण से मत छेदो
    प्रेम की रसधार से जीवन की
    बगिया सींचो

  • क्यों छोटी छोटी बातों को बड़ा बनाते हो

    क्यों छोटी -छोटी बातों को बड़ा बनाते हो?
    भोली-भाली जनताओं से बगावत कराते हो।।
    क्या कभी जनताओं को सत्य से रुबरू कराते हो?
    कोड़े कागज पर दस्तखत से पहले शर्त समझाते हो?
    फिर क्यों छोटी -छोटी बातों को बड़ा बनाते हो?
    जनताओं को हथियार की तरह इस्तेमाल मत करो।
    भारी पलड़ा से उठा -उठा कर अपनी जेब मत भड़ो।।
    हल्के को भारी करने का क्या यही एक तरीक़ा है?
    दंगा और बगावत फैला कर जीवन का रंग फीका है।।
    जब हर बात बात में कानून बतियाते हो।
    फिर क्यों छोटी छोटी बातों को बड़ा बनाते हो?

  • माँ

    माँ

    ममता का आँचल सर पर हरदम रख लेती है!
    मुझको ज्यादा देकर वो खुद कम रख लेती है!
    माँ से बढ़कर कोई नई है इस दुनियां में दूजा-
    सारी खुशियाँ देकर वो खुद गम रख लेती है!

    राजेन्द्र मेश्राम “नील”

  • न्याय

    ना कोई मुकदमा, ना कोई सुनवाई।
    ना कोई चीख पुकार, ना कोई दुहाई।
    तुरंत फैसला और मौके पर ही न्याय,
    दुष्कर्म के ख्याल से ही रूह काँप जाए।

    देवेश साखरे ‘देव’

  • इश्क़ अधूरा है क्यों अब तलक हमारा

    इश्क़ अधूरा है क्यों अब तलक हमारा

    उजालों को नफरत है क्यों, फैला है अँधेरा

    इश्क़ में जलकर, चलो चांदनी रात करें

    आओ हम मोहब्बत क़ी बात करें

  • आरजू

    क्या आरजू है दिल की क्या बताएं
    बस इक आह है जो दिल में बसी है

  • घर: एक मंदिर

    हे लक्ष्मी तुम कितनी चंचला हो?
    खुद भी नहीं ठहरती एक जगह पर
    और औरों को भी भटकाती।

    घर से दफ्तर जाकर भी
    भटके भर दिन गाँव नगरऔर इधरोधर
    फिर भी बाक बाण छेदे छाती।

    झल्ला के घर को आया
    बैठी थी दुर्गा दरवाजे आसन लगाकर
    शीश चूम मुख माथे सहलाती।

    आँगन में बैठी काली रूप
    आव भगत से दुखरे को लेती हर
    मधुर शब्द कह स्वरा बहलाती।

    मिल जाए नव तन मन
    “विनयचंद ” रे सब सुख बसे जहाँ पर
    वो दुनिया बस घर कहलाती।

  • तुम धूप बुला लो

    आँसुओं से भीगे हुए, तकिये को हटा लो,
    तुम आस के रूठे हुए, पंछी को बुला लो,
    अन्मनी रातों के चांद बुझा दोगे तुम,
    ये रात ढ़ल जायेगी गर, तुम धूप बुला लो ।।

    copyright@ नील पदम्

  • राही

    शब्दों से शब्द निकलते जाते हैं,
    रिश्ते रिश्तों को समझते जाते हैं,

    चलती है इसी रफ़्तार से ज़िन्दगी,
    राही हम सब आगे बढ़ते जाते हैं।।

  • कामयाबी

    चुप मत रहो इतना के नाम गुम नाम हो जाये,
    तुम्हारे हिस्से की ज़मी किसी के नाम हो जाये,

    नाकामयाबी के सफर से बाहर निकल आओ,
    कहीं ऐसा न हो कामयाबी की शाम हो जाये।।

    राही अंजाना

  • बत्ती

    बत्ती लाल नीली पीली का फर्क जानते नहीं,
    कुछ मेरे देश के युवा खुद को पहचानते नहीं,

    जिंदगी के चौराहे पर खड़े ट्रैफिक हवलदार,
    जैसे खुद के बनाये नियमों को मानते नहीं॥

    राही अंजाना

  • वक्त्त

    सावधान करती हूं कवियों को
    ना लेना पड़ जाए लिखने से जोग
    हवा झूठ की चल पड़ी है
    सच्चे शब्दों से रुठे हैं लोग.

    कितना समझा लोगे तुम उनको
    जमाना बहुत ही संगदिल है
    जिस तरह गीले कागज पर
    शब्दों का लिख पाना मुश्किल है.

    सच्चा साथ निभा कर
    दुआएं बहुत सी ले आना
    धन दौलत कमा कर क्या करोगे
    मुश्किल है इसको ऊपर ले जाना.

    झूठ का चाहे कितना भी चढ़े फितूर
    सच की राह पर चलना हुजूर
    वक्त तो रेत की तरह फिसलता रहता है
    एक दिन वक्त भी बदलेगा जरूर.

  • घरोंदा

    उड़ने नहीं दोगे आज तो कल उड़ना भूल जाएंगे,
    परिंदे अपनी ही शाख से मिल जुलना भूल जाएंगे,

    घर बनाने के हुनर के साथ जो पैदा हुए हैं बन्दे,
    गर पिंजरे में बन्द रहे तो घरोंदा बुनना भूल जाएगे।।

    राही अंजाना

  • बागी

    अपनी ही आजादी के आदी बन गए
    जाने हम क्यों बागी बन गए
    बेबसी की रस्सी पर लटक कर
    कई ख्वाब मेरे खुदकुशी कर गए.

    धकेलो कितनी भी जोर से मुझे
    संभलना सीख गई हूं मैं
    मुझे जलाना मुश्किल होगा
    कागज की तरह भीग गई हूं मैं.

    ऐ खुदगर्ज जमाने जो तुम मेरा दिल ना दुखाते
    तो मेरे शब्द यूं शोले ना बरसाते
    उडूं मै आसमान में या तेरुं बहती नदी में
    मिले हो तुम हमेशा मेरी राह में जाल बिछाते.

    कलम की नोक को सूई की तरह चुभाया
    दुश्मनों के साथ-साथ अपनों को भी रुलाया
    जान लो यारो मैं तो हूं बागी
    जो रिश्ते निभाने के लिए भी ना होते राजी.

    सब सूखा बंजर सा दिखता मुझे
    चाहे कितनी भी हरी-भरी हो वादी
    जो ना किसी से सहमत हो
    वो मैं ही हूँ एक बागी.
    ✍️✍️✍️✍️नीतू कंडेरा ✍️✍️✍️✍️✍️

  • आईना

    अपने को आप से मिलाने का जरिया है आईना ।
    जज्बातों से लड़ने का दरिया है आईना ।।

  • कामयाबी

    ठोकर लगने पर भी
    आगे मैं बढ़ता जाऊंगा
    कैसा भी हो कामयाबी का रास्ता
    हर तरीके को अपनाउँगा
    जरूरत पड़ी तो
    खुद को मैं जलाऊंगा
    छू लूंगा आसमान
    धुआं मैं बन जाऊंगा

  • नाक घुसाओगे

    अगर धर्मात्मा इतने ही हो तुम
    तुम्हें पूरा हिंदुस्तान दिलवाएँगे
    पर करनी होगी देश की सेवा
    हर गली में नारा लगवाएँगे
    तुम बस भड़काने वालों में से हो
    जो आग लगाकर पीछे हट जाएंगे
    बनवा दो पूरे भारत में
    इंसानियत के मंदिर मस्जिद
    करोड़ों लोगों की दुआएं तुम्हें दिलवाएंगे
    पर तुम्हें वास्ता अलगाव से है
    बस अयोध्या की 66 करोड़ एकड़
    जमीन मे ही अपनी नाक घुसाओगे.

  • अयोध्या

    इंतज़ार मे सब खड़े है
    जाने क्या निकलेगा अयोध्या की गहराई में.
    जैसे-जैसे खुदाई गहरी होती जाती है
    लोगों के दिल की धड़कन बढ़ती जाती है
    जाने अब क्या निकल आएगा खुदाई में.
    परिणाम अपने आप ही निकल आएगा
    देखे कितना सच है किसकी
    कितनी सच्चाई मे.
    अयोध्या को खोदने की जरूरत कभी ना पड़ती
    वही स्मारक बन जाते
    हिन्दू मुसलमान की यादों की अच्छाई में.

  • राम नाम

    राम – राम कहके ही मिलना अच्छा लगता है,
    राम – नाम का धागा ही एक सच्चा लगता है,

    पृथ्वी पर आने जाने का एक रस्ता दिखता है,
    मानव रूप में राम रंग ही एक पक्का लगता है।।

    राही अंजाना

  • दर्द

    दर्द

    #kavita #poetry #Shayari #poetrywithpanna

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