धन दौलत की चाह में, काट रहा गला इंसान राह में। अपना पराया का कर ना पाया भेद, हवस की खोपड़ी भरने के चक्कर में।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
धन दौलत की चाह में, काट रहा गला इंसान राह में। अपना पराया का कर ना पाया भेद, हवस की खोपड़ी भरने के चक्कर में।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
हाथ बढ़े है देखो सकड़ौ, धन के पोटली के चाह में। एक दुसरे को धकेल कर, भटक रहें है देखो कितने राह में।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
सत्य कि राह दिखाते बुध्द, बिछड़ों को मिलाते बुध्द । परेशान आत्मा को गले लगाकर, दुःख दर्द को सारे हर लेते बुध्द।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
जिस जिसका हैं आत्मा शुद्ध, उसी में बसते हैं गौतम बुद्ध । चालबाज फरेबी भटक रहें, ईश्वर के निगाह में खटक रहें।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
पैसे की चाह में टूट रहें है रिश्तें, पैसे के राह में बेगाने हुए फरिश्ते। पैसे की ताकत से संबंध बिगड़ते, पैसे के धधकते राह पर चलो आहिस्ते।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
जग में मिलते विभिन्न विचार के प्राणी, शुध्द आत्मा विचार को समझना हैं भारी, ना जाने कितने रंग के हैं चोले ओढ़े, देख दुनिया करतुतों को दंग हुयी है सारी।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
न्याय बिकता है अन्ययाय बिकता है, मेरे भारत देश में स्वाभिमान बिकता है। कानून बिकता है कानून ब्यवस्था बिकता है, नेता जी का इमान सुबह शाम बिकता है।। महेश गुप्ता जौनपुरी
अर्थतंत्र पर लोकतंत्र को हावी कर दो यार । जातिवाद को छोड सदा मानवता का बनाओ संसार ।। झूठ फरेब छल दम्भ से होगा माया का विस्तार । दया धर्म समता से बनेगा न्याय का […]
वक्त की नुमाइश मंदि हम क्या करेंगे, वक्त तेरे पीछे – पीछे हम भी चल पड़ेगें। वक्त जरा तमिज सिखा देना मुझे भी, वक्त तेरे आने पर सरीखे हम भी सीख लेंगे।। महेश गुप्ता जौनपुरी
कभी इन राहों पर भी आया करो… क्या ये भी बैरन हैं तेरी मेरी तरह….
कानून के रक्षक भी अब भक्षक हो गए , करें भरोसा आखिर किस पर? खाकी वर्दी भी गुलाम बन हुक्म बजाती सफेदपोश की। काले कोट के जेब बड़े हो गए, करें भरोसा आखिर किस पर? […]
बिछड़ने से जरा पहले तुम्हें कुछ याद है हमदम तुम आये थे मुझसे मिलने बिछड़ने के इरादे से
जिसे हम भूल जाते हैं खुदा भी रूठ जाता है चैन उसको नहीं मिलता लोग भी मुँह चिढ़ाते हैं
मेरा प्रेम तुम्हारी स्मृतियों से अतृप्त है अभी कुछ और समेटना है मुझे सफ़र के लिए
ये सन्नाटा चुभता है मेरे दिल को तुम्हारा बोलते रहना ही अच्छा लगता है
मेरे ह्रदय में स्पंदन होता है हे राम! अब हर दम होंठो पर बस नाम तुम्हारा होता है
करुँ कितना भी श्रिंगार पर जानती हूँ तेरे आगे कुछ भी नहीं हूँ मैं दीद जिस दिन नहीं होती तेरी चांद छत पर नहीं आता आईना जितनी दफ़ा देखूँ तेरा ही चेहरा नज़र आता
उम्मीदों का दीया जलाकर इस आशा में बैठे हैं कल सूरज खुशियाँ लाएगा चाँद सजाकर बैठे हैं
मेरी ज़िन्दगी की अधूरी कहानी है तू मेरी आँखों में मौजूद पानी है तू मेरे जीवन का मुन्तजिर है मेरी ख्वाइशों की पैमाइश है तू
रात की दीवार पर लिखा ख्वाबों का संदेश ए चंदा पहुंचा देना ‘अपने’ रहते परदेस…..
इंतज़ार झिलमिलाता रहा रातभर आंखों में! तुम नहीं तुम्हारा पैग़ाम आया ‘आज न सही, कल की बात रही’। चलो मान लेते हैं; एक और झूठ तुम्हारे नाम पर जी लेते हैं
लोग कहते हैं कि मैं बड़ा कमाल लिखती हूँ मैं उसका ही दिया हर दर्द उसके नाम लिखती हूँ
रात भी खत्म हो गई बस तेरा जिक्र बाकी है तूने तो मुझे मार डाला पर मेरी साँस बाकी है
ख्वाइशों के जुगनू पकड़कर बोतल में बंद कर दिए चिराग दिल के बुझाए बैठे हैं रफ्ता रफ्ता चल रही हैं सांसें सारे ख्वाब छुपाये बैठे हैं
खामोशी भी एक सिलसिला -ए-गुफ्तगू ही है खैर छोड़ो तुम्हारे बस की बात नहीं…….
मैनें हर रिश्ते को शिद्दत से निभाया है जिसने मुझे प्यार किया उसे अपनाया है जिसने दिल से जाना चाहा उसे, उसे रब का वास्ता भी दिलाया है ।
इंतिहा खत्म हुआ मेरी बेसब्री का मुलाकात भी हुई उनसे मगर कोई बात ना हुई वह आकर चले गए मगर मेरे होंठ सिले के सिले ही रह गए
बैर भाव से ऊपर उठकर आओ रंग लगाते हैं, होली है त्यौहार मिलन का मिलकर इसे मनाते हैं।
हम चिलमन से ही झांकते रह गए वो रंगने हमें आये थे पर पड़ोसन को रंग गए
एक उनके खातिर हमने मोहब्बत का आशियाना बनाया था वो आए और ढहा कर चले गए….
किसी को किसी की खबर नहीं है ए खुदा! ये कैसा ज़माना आया इन्सान तो है मगर इन्सानो में इंसानियत नहीं है तौबा ।
हम रंग नहीं खेलते कुछ बात हो गई हम राज़ नहीं खोलते कुछ बात हो गई मिली जब नज़र उनसे फिर नज़र ना हटी हम देखते ही रह गए कुछ बात हो गई
नज़र तो आओ कभी नज़र को नजरों से मिलाओ कभी सपने तो बहुत दिखाये तुमने, एक सपना सच कर जाओ कभी।
रात पर छाई खुमारी बौने सपने हो गये उम्र बीती तेरी आरजू में सपने सपने हो गए
मुड़ कर ना देखेंगे दोबारा रोज़ यही फैसला किया करते हैं पर जब तुम्हारी याद है तो हौसले टूट जाते हैं
एहसास प्यार ❣️ मोहब्बत का एहसास रूह ❣️ तमन्ना का एहसास 💞खूबसूरत💞 ख्याल का एहसास 🌹मन🌹 के जज्बात का एहसास 🌕धूप🌕 के छांव का एहसास तुम्हारे 💞दिल💞 के धड़कन का एहसास 🤝विश्वास🤝 के शब्दों का […]
भाल लेकर तैनात रहो, भारत देश के जवानों तुम, जीभ खिंच कर काट लो, जो देश के खिलाफ बात करें। महेश गुप्ता जौनपुरी
अपने स्वेद से सींच कर बोई थी मोहब्बत की फ़सल शक के एक झोंके ने सब बर्बाद कर दिया।
क्या अपने जज़्बात बयाँ करना भी गुनाह है जब वक्त होता है तो कह सुन लेते हैं हम यारों से।
चलो तुम जीत जाओ हमें हराकर यही खुशी है तुम्हारी तो हम तुमसे हार कर भी जीत जायेगें ।
बड़ी शिद्ददत से लगे है वो हमे हराने मे हमे भी अब अंजाम का इंतजार है……….
श्याम मेरे तेरा साँवला रंग मेरे मन को मोह गया तू दिल में मेरे बसा रहा और आंखों का काजल बहता रहा ….
गहराई का आलम न पूछो दोस्त ! सहारा तिनके को है या तिनके का सहारा किसी को न मालूम………
नजर को भी नजर लग जाएगी उसकी नुमाइश इतना भी ना करो…….
ऐ पुरूष सुन! स्त्री हूं पतंग नहीं कि जिसकी डोर सदैव तुम्हारे हाथ में रहेगी…….
सुना है साथ छोड़कर जाने वाले आज अकेले हैं, कमबख्त मुझ में भी अब दोबारा धोखा खाने की हिम्मत कहां है……..
1. कदम छोटा हे या बड़ा हर मोड़ पर इंतज़ार है ज़िंदगी को – चुन लिए जाने का 2. राम लिखा सुनहरा इतिहास ने तुम्हारा नाम ; तुमने – गढ़ ली सीता सोने की ! […]
1. पहली ही सीढ़ी पर एहसास हुआ, सर पर खुला आसमां हो भले ही अब – पैर तले ज़मीन नहीं 2. चाहे-अनचाहे उग आए हैं संबंधों में अपरिचय के विंध्याचल ; हम भी जो पा […]
छुप कर आंसू बहाते हैं रो-रोकर जातेहैं सपने मेरे तड़पकर टूटते जा रहे हैं या खुदा हम तेरे पास आ रहे हैं
तुम्हें क्या पता के हमें छोड़ कर तुमने क्या खोया है कोहिनूर को शीशा समझ कर तुमने हीरा खोया है। सिर्फ़ उसे पाने की खातिर जो चन्द दिनों के लिए तेरा है।
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