तुम्हें क्या पता के हमें छोड़ कर तुमने क्या खोया है कोहिनूर को पीतल समझ कर तुमने हीरा खोया है। सिर्फ़ उसे पाने की खातिर जो चन्द दिनों के लिए तेरा है।
तुम्हें क्या पता के हमें छोड़ कर तुमने क्या खोया है कोहिनूर को पीतल समझ कर तुमने हीरा खोया है। सिर्फ़ उसे पाने की खातिर जो चन्द दिनों के लिए तेरा है।
हर रोज़ बदलता है वो अपनी फितरत को कमबख्त सारे रंग एक जैसे ही हैं उसकी फितरत के……..
जीवन की कड़वी सच्चाई एक माला चढ़ी तस्वीर में छिपी है कुछ समय पश्चात हो तस्वीर भी नहीं रहेगी। याद का क्या है याद तो आती जाती रहेगी, धूमिल हो जाएगी दूर जाती रेलगाड़ी की […]
मेरे देश मुझे तेरे आंचल में अब रहने को दिल करता है जो जख्म दिए अंगारों ने उसे सहने को दिल करता है कांटो पर जब तू चलता था हम चैन से घर में सोते […]
🌺”प्रेम एक पूर्ण शब्द है अपूर्णता से पूर्णता की ओर ले जाने वाला। जितना अधूरा उतना कामयाब अखंड ज्योति सा हृदय में उम्र भर सुलगने वाला।”” – निमिषा🌺
ज्यादा मजबूत हृदय का दावा करने वाले अक्सर बंद कमरे में रोया करते हैं। निमिषा सिंघल
पलके तेरी झुकी थी, ओठों पर था तुफान। संग चलने का इरादा किया, मुझ पर था एहसान। इस कदर एक साथ में चलें, हर मुश्किल हालात में चलें। आई जितनी परेशानियाँ, उन्हें कुचल हर हाल […]
निश्चित छोड़ अनिश्चित को धावे । मुट्ठी से निश्चित खोवे अनिश्चित हाथ न आवे । “विनयचंद “धैर्य बिना क्या पावे?
हमने बुलाया भी नहीं तो तुम आये भी नहीं ये दिल तो तुम्हारा आशियाना था हमनें रोका भी नहीं तो तुम ठहरे भी नहीं
वक्त का मारा हूं,हालात का मारा हूं मौत भी आ जाए तो गम नहीं ए दोस्त! मैं तो जिंदगी का मारा हूं
गुजरे कल की बातें लेकर तुम भी क्या बैठे रहते हो नया साल आने वाला है तुम आज भी कल में जीते हो।
जीने को यूँ जीती हूँ जैसे कोई गुनाह किये जा रही हूँ मैं। गीत भी गा रही हूँ, ईद भी मना रही हूँ। ज़िन्दगी की बज़्म फ़िर सजा रही हूँ मैं।
खुश रहने की वजह ढूंढ़ोगे, तो कम ही मिलेंगें। यहाँ हर चेहरा हस रहा बाहर से, पर अन्दर तो गम ही मिलेंगें।। झाँक कर देखोगे दिल की बस्ती में, तो बस खाली शहर ही मिलेंगें। […]
फूलों से भी ज्यादा कोमल है ह्रदय शब्दों के बाण से मत छेदो प्रेम की रसधार से जीवन की बगिया सींचो
क्यों छोटी -छोटी बातों को बड़ा बनाते हो? भोली-भाली जनताओं से बगावत कराते हो।। क्या कभी जनताओं को सत्य से रुबरू कराते हो? कोड़े कागज पर दस्तखत से पहले शर्त समझाते हो? फिर क्यों छोटी […]
ममता का आँचल सर पर हरदम रख लेती है! मुझको ज्यादा देकर वो खुद कम रख लेती है! माँ से बढ़कर कोई नई है इस दुनियां में दूजा- सारी खुशियाँ देकर वो खुद गम रख […]
ना कोई मुकदमा, ना कोई सुनवाई। ना कोई चीख पुकार, ना कोई दुहाई। तुरंत फैसला और मौके पर ही न्याय, दुष्कर्म के ख्याल से ही रूह काँप जाए। देवेश साखरे ‘देव’
इश्क़ अधूरा है क्यों अब तलक हमारा उजालों को नफरत है क्यों, फैला है अँधेरा इश्क़ में जलकर, चलो चांदनी रात करें आओ हम मोहब्बत क़ी बात करें
क्या आरजू है दिल की क्या बताएं बस इक आह है जो दिल में बसी है
हे लक्ष्मी तुम कितनी चंचला हो? खुद भी नहीं ठहरती एक जगह पर और औरों को भी भटकाती। घर से दफ्तर जाकर भी भटके भर दिन गाँव नगरऔर इधरोधर फिर भी बाक बाण छेदे छाती। […]
आँसुओं से भीगे हुए, तकिये को हटा लो, तुम आस के रूठे हुए, पंछी को बुला लो, अन्मनी रातों के चांद बुझा दोगे तुम, ये रात ढ़ल जायेगी गर, तुम धूप बुला लो ।। copyright@ […]
शब्दों से शब्द निकलते जाते हैं, रिश्ते रिश्तों को समझते जाते हैं, चलती है इसी रफ़्तार से ज़िन्दगी, राही हम सब आगे बढ़ते जाते हैं।।
चुप मत रहो इतना के नाम गुम नाम हो जाये, तुम्हारे हिस्से की ज़मी किसी के नाम हो जाये, नाकामयाबी के सफर से बाहर निकल आओ, कहीं ऐसा न हो कामयाबी की शाम हो जाये।। […]
बत्ती लाल नीली पीली का फर्क जानते नहीं, कुछ मेरे देश के युवा खुद को पहचानते नहीं, जिंदगी के चौराहे पर खड़े ट्रैफिक हवलदार, जैसे खुद के बनाये नियमों को मानते नहीं॥ राही अंजाना
सावधान करती हूं कवियों को ना लेना पड़ जाए लिखने से जोग हवा झूठ की चल पड़ी है सच्चे शब्दों से रुठे हैं लोग. कितना समझा लोगे तुम उनको जमाना बहुत ही संगदिल है जिस […]
उड़ने नहीं दोगे आज तो कल उड़ना भूल जाएंगे, परिंदे अपनी ही शाख से मिल जुलना भूल जाएंगे, घर बनाने के हुनर के साथ जो पैदा हुए हैं बन्दे, गर पिंजरे में बन्द रहे तो […]
अपनी ही आजादी के आदी बन गए जाने हम क्यों बागी बन गए बेबसी की रस्सी पर लटक कर कई ख्वाब मेरे खुदकुशी कर गए. धकेलो कितनी भी जोर से मुझे संभलना सीख गई हूं […]
अपने को आप से मिलाने का जरिया है आईना । जज्बातों से लड़ने का दरिया है आईना ।।
ठोकर लगने पर भी आगे मैं बढ़ता जाऊंगा कैसा भी हो कामयाबी का रास्ता हर तरीके को अपनाउँगा जरूरत पड़ी तो खुद को मैं जलाऊंगा छू लूंगा आसमान धुआं मैं बन जाऊंगा
अगर धर्मात्मा इतने ही हो तुम तुम्हें पूरा हिंदुस्तान दिलवाएँगे पर करनी होगी देश की सेवा हर गली में नारा लगवाएँगे तुम बस भड़काने वालों में से हो जो आग लगाकर पीछे हट जाएंगे बनवा […]
इंतज़ार मे सब खड़े है जाने क्या निकलेगा अयोध्या की गहराई में. जैसे-जैसे खुदाई गहरी होती जाती है लोगों के दिल की धड़कन बढ़ती जाती है जाने अब क्या निकल आएगा खुदाई में. परिणाम अपने […]
राम – राम कहके ही मिलना अच्छा लगता है, राम – नाम का धागा ही एक सच्चा लगता है, पृथ्वी पर आने जाने का एक रस्ता दिखता है, मानव रूप में राम रंग ही एक […]
किताबें दोस्त थी मेरी, दुख सुख की साथी, अकेलेपन में किसी की कमी ना खलने देने वाली, हंसती मुस्कुराती। मुझे जहां भी कोई किताब मिल जाती मेरे पुस्तकालय में सुशोभित हो जाती। इंटरनेट ने तो […]
सोचो अगर हर जीव खुदगर्ज हो जाता पल पल हर पल थम सा जाता ना पेड़ देता फल कोई वह पेड़ पर ही सड़ जाता वह जाओ ना देते तो पथिक रास्ता कैसे तय कर […]
उड़ चलता है हर पक्षी घोंसला बनाने होते ही उम्मीदों का सवेरा श्याम को थक्कर ढूंढता फिरे अपना ही रैन बसेरा भटकती फिरे हर मधुमक्खी फूल फूल पत्ता पत्ता करके शहद इकट्ठा हजारों फूलों को […]
बाला घट भरने चल पड़ी भौर की लालिमा नभ मे बिखर पड़ी पगो से रोंदते हुए ओंस की बूँद बाला पनघट की ओर मुड़ चली. रस्सी खींचती सुकोमल हाथों से बिन कहे ही कहती बातें […]
मेरे घर के सामने मजदूरो का जमावड़ा लगा था ईंटो का ढेर बड़ा था शायद कोई बंगला बन रहा था. कोई मजदूर ईंटे ढो रहा था कोई दीवार चिन रहा था हर मजदूर काम मे […]
जीवन की राह को नंगे पैर ही नापना पड़ता है मिटटी की गर्मी को छूकर ही भापना पड़ता है चलते चलते कभी रेत के टीले राह रोक लेते है मै डर जाऊ मै घबराऊ इसका […]
मन्दिर बांटा मस्जिद बांटा बांट दिया संसार, बोली भाषा रहन सहन बांट दिया इंसान , जाति धर्म मजहब बांट दिया भगवान , ईश्वर अल्ला का धर्म बताकर कर दिया सत्यानाश , महेश गुप्ता जौनपुरी
हौसले कि उड़ान अभी बाकी है , मेरे जज़्बातों का ख्याल अभी बाकी है , चन्दा मामा हम फिर से आयेंगे , अभी मेरे दिल का हाल बाकी है , महेश गुप्ता जौनपुरी
तू होनहार था तू सबसे होशियार था सबका तू गुरुर था अपनी प्यारी सी जिंदगी मे सपना तूने भी कोई देखा तो जरूर था झुक गया गमों के आगे दुनिया नाचे पैसे के आगे तब […]
जब तू पालने मे खेलता था कई खिलोने तेरे सराहने रहते थे खुश होती तुझे देख- देख मेरे नन्हे हाथ तेरे सर को सहलाते रहते थे. जब तू थोड़ा बड़ा हुआ मेरे खेल का साथी […]
वो आतिशबाजी किस काम कि जो कानो को बहरा कर दे अगले ही दिन प्रदूषण से वातावरण को धुए से भर दे. मै तो चाहूँ ऐसी लड़ी जलाना कि जिंदगी फुलझड़ी जैसी जगमग हो चाहूँ […]
हम अपने घरों का का कोना कोना चमकाते है ताकि अच्छे से मना सके दीपावली का दिन और कितना कूड़ा फैला देते है दीपावली के दिन ही दिन. छिड़कते है गंगाजल वातावरण स्वच्छ बनाने को […]
औरत तेरी कहानी जैसे बहता पानी महानता तेरी जगमानी वेग है तू जबरदस्त तूफानी. पर्वतों मे तू नदी वेगवाहिनी मैदानों मे तू स्थिर विरानी खेतो मे तू अन्न गर्भ धारणी महान होकर भी तू सदाचारणी. […]
गलियों मे चुनाव प्रचार के ढ़ोल आजकल बजते रहते है वोट मुझे ही देना भाई, सभी यही कहते है मीठा बोलने से उनके, भावनाओ मे हम नहीं बहते है जब दाल ना गले उनकी, हमपर […]
जीवन बहुत कठिन है गरीबो का आगे बढ़ना मुश्किल है शरीफों का सीखना जरुरी है जीवन के सलीखो का डटकर खंडन करती हूँ बेईमान तरीको का. सिर्फ मांगने से हक मिलता कभी ना पैसे के […]
मैं तेरी सूरत का दीवाना हूँ कबसे। मैं तेरी चाहत का अफ़साना हूँ कबसे। अंज़ामें-बेरुख़ी से बिख़री है ज़िन्दग़ी- मैं तेरे ज़ुल्मों का नज़राना हूँ कबसे। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
आज बहुत सुन्दर लग रही हो तुम इस चाँद से चेहरे पर कुछ कहना चहुँ तो पहले ही शर्मा कर हाथो से चेहरे को ढक लेती हो तुम. मुझे देखकर जो तेरे चेहरे की लालिमा […]
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.