फिर से बचपन में लौटना है आज मुझे कुछ पल फुर्सत के जीना है आज मुझे मां की गोद में रखकर सिर सोना है आज मुझे बहन की चोटी खींच आज फिर दौड़ लगाना है […]

जो भी मेरी कविता पढ़ता था पूछता था एक मुस्कान- सी आती थी चेहरे पर आज उन्होंने भी पढ़ा:- और पूछा:-‘ किसके लिये लिखती हो? मेरा ज़िस्म ऊपर से नीचे तक कांप उठा… ज़ज्बात जागे […]

उसने कुछ यूं देखा मुझको जैसे रूह तक झांक लिया हो… कुछ कहा तो नहीं मगर सब कह भी दिया कुछ ऐसी थी उसकी नज़रें… दूरियाँ जरूर हैं हमारे बीच लेकिन ये सच है मुझे […]

जो भी मेरी कविता पढ़ता था पूछता था एक मुस्कान- सी आती थी चेहरे पर आज उन्होंने भी पढ़ा:- और पूछा:-‘ किसके लिये लिखती हो? मेरा ज़िस्म ऊपर से नीचे तक कांप उठा… ज़ज्बात जागे […]

कोमल मन और आत्मा से आवाज़ दे रही है आहटे कुछ पन्ने किताबों के पलट कर वक़्त आया है मिलने…… सिसकियां खामोश होकर गुनगुना रही हैं कल के किस्से और तन्हाइयां बटोर लाई हैं तमाम […]

कुछ तुम सुनाओ कुछ मैं सुनाऊँ कुछ तुम कहो कुछ मैं कहूँ चुरा कर कुछ पल तन्हाईयों से खेलें आँख-मिचौनी कुछ तुम गुनगुनाओ कुछ मैं गुनगुनाऊँ गूँज उठेगी शहनाईयाँ मन के झर्झर खंडहरों में फिर […]

आहिस्ता-आहिस्ता रखना कदम इन नाजुक पगडंडियों में वक्त सो रहा है रात के सन्नाटे में चांदनी रात के आँचल तले खोया है कांच के सपनों की दुनिया में तुम्हारे क़दमों की इक आहट से कहीं […]

कभी बनकर कोई ख़्वाब मेरी निंदिया तू चुरा लेता कभी बनकर हवा का झोंका आँचल को तू खींच लेता बता तो सही तू है कौन कभी बारिश की बूँद बनकर कोमल बदन को भिगो देता […]

हिमालय के उतुंग शिखर से सिंह ने भरी ऊँची दहाड़ है तूफान क्या टकराएगा उससे जो स्वयं फौलादी पहाड़ है सारे जहाँ में अब भगवा ही लहराएगा माटी का लाल अब तिरंगा फहराएगा सौगंध इस […]

ढो रही हूं एक बोझ सिर से लेकर पांव तक खोज रही हूं एक दिशा धूप से मैं छांव तक मीलों सा लंबा सफर जिंदगी का है मेरी फिर भी रुकी है वहीं जहां शुरू […]