अब जीवन का अवकाश रहेगा कल से मेरे पास रहेगा __________क्षुब्ध होकर अपंग से तेरे बोल के टेसू अब ना सूखेगे मेरे आँगन में ______कुसुम का बंदन ना महकेगा प्राणवायु के दामन में गलियारों की […]

हम मुर्दा हैं या जीवित तुम्हें कोई फर्क नहीं तुम्हें इस बात का कोई इल्म नहीं के हम किस हाल में रहते हैं सब दिल का खेल है तुम्हें मेरे जीवन की भी खबर नहीं […]

अम्बर झुका हुआ है और वसुंधरा है बसंती कोपल की तरह प्रस्फुटित हो रहा है मन हर शाख पर खिल रहा है सुमन । हर पत्ता बूटा भीगा है लतपत है उपवन वृन्त से पृथक […]

ख़ुशी से मेरा पता दे रही है यह कैसी उदासी है जो दिल छू रही है सब छोड़ गए मेरा साथ पर यह नहीं छोड़ती जानती हूं यही है मेरी हमराज़ कोई जिंदगी में नहीं […]

भिगोकर बादाम दूध में केसर छिड़क दिया खुदा ने कुछ यूं ही तुमको बनाया होगा अफसोस ना कर तेरा रंग श्याम है मैंने कुछ ऐसे भी लोग देखे हैं जो दिल के काले होते हैं

काश! तुम मेरी मजबूरियाँ समझ पाते जो मेरे दिल में था वो कह पाते क्यूँ सिमट जाती मेरी ज़िन्दगी यूँ कोने में क्यूँ दर्द होता मेरे सीने में ना हम अपनी मजबूरी का हवाला देते […]

प्रारब्ध ——— सदियों से ठंडी, बुझी, चूल्हे की राख में कुछ सुगबुगाहट है। राख़ में दबी चिंगारियों से चिंतित हूं मैं! अपने गीले- सूखे मन की अस्थियों का पिंजर… दबा आयी थी मैं उस गिरदाब […]

अपमान करें कोई तेरा सम्मान उसे ही तुम देना जो कोई बुराई तेरी करें बदला ना बुराई से लेना गीता मैं यही और रामायण मैं और धर्म सभी यह कहते है जो त्यागी है वह […]

देखो रितुराज ने अपने हाथों कैसे प्रकृति का सिंगार किया। रंग बिरंगे फूलों से कुदरत का रूप सँवार दिया।। हार गले में गेन्दा के और कर कंगन कचनार दिया। बेली चमेली जूही के बालों में […]

शोभे सरोवर राजहंस से बगिया शोभे कोयलिया से। ज्ञानी जन से सभा की शोभा दुनिया शोभे मधुर बोलिया से।।

मां देख! पहले गांव छोटे थे अब शहर छोटे हो गए हैं पहले कमरे छोटे थे, अब घर छोटे हो गए हैं सच कहूं ! तो पहले लोग सच्चे थे अब अपने झूठे हो गए […]

भरोसा अपना पर नहीं गैरों पर कर लीजिएगा जनाब “अपने” अपने कहलाने के लायक नहीं है। रूठना है तो खुद मान जाइएगा जनाब यहां कोई मनाने के लिए नहीं है।

माना की नियत के कच्चे हो फिर भी कुछ तो मान करो आते हैं जो मेहमान देश में उनका ना अपमान करो सामान तो पार किया देश को भी बदनाम किया अपनी हरकतों से भारत […]

मैं कुछ भूलता नहीं ,मुझे सब याद रहता है अजी, अपनों से मिला गम, कहाँ भरता है सुना है, वख्त हर ज़ख़्म का इलाज है पर कभी-२ कम्बख्त वख्त भी कहाँ गुज़रता है मैं अब […]

तुम्हारे घर आने की बड़ी बेसब्री थी मगर जब वापस आ रही थी तो कोई मेरे कदम पीछे को खींच रहा था वो मेरा दिल था कदम भारी थे रास्ता बहुत कठिन और दिल में […]

तुम्हारा इंतजार किया आम पकने की तरह तुम रोज ख्वाब में आए शाम की चाय की तरह तुम खो गए चाभी के जैसे मगर मैनें ढूंढा है तुम्हें मूंगफली के दाने की तरह