गम के आँसू सदा हीं बरसता रहा। मेरा जीवन खुशी को तरसता रहा।। मैंने मांगा था कोई ना सोने का घर प्यार की झोपड़ी को तरसता रहा। ना तुम्हारा रहा ना हमारा रहा गेन्द-सा दिल […]

दिलों का खेल मत खेलो न कोई इसमें जीता है। सभी बदनाम होते हैं, दर्द-ए-जाम पीते हैं मुनासिब अब यही होगा कोई दिल को लगाए ना, दिलों की दिल्लगी करके खुद को यूं सताए ना।

आज की होली का रंग बस लाल है यह खून है या गुलाल है दिल वालों का शहर आज वीरान है लोगों के पागलपन देखों रोटी कीमती और सस्ती अभी जान है मौत पर आज […]

बेहिसाब दर्द देकर मेरी रूह को वो मेरे ज़ख्मों पर मरहम लगाने आया है उससे पूछो मरहम ही है नमक छिड़कने तो नही आया है।

सड़के फैली, नदियां सिमटी क्या अच्छा संदेश गया घट गई सर्दी ,बढ़ गई गर्मी और भंवर में देश गया अपने कर्तव्यों से हटकर अपना हित ही सोंचा है चंद पैसों के खातिर भविष्य देश का […]

1. पहली ही सीढ़ी पर एहसास हुआ, सर पर खुला आसमां हो भले ही अब – पैर तले ज़मीन नहीं 2. चाहे-अनचाहे उग आए हैं संबंधों में अपरिचय के विंध्याचल ; हम भी जो पा […]

उम्मीदों की मंज़िल है समझौतों का रास्ता है नाराज़ हो रहे अपने हैं कुछ बुने कुछ टूटे सपने हैं अंधेरे का वास्ता है, उजाले का रास्ता है फिर भी, हालात बदल जायेंगे जज़्बात संभल जायेंगे […]

आप सब की नज़र को आख़िर , क्या हुआ है शहर को आख़िर . नफरतों की लिए चिंगारी , लोग दौड़े कहर को आख़िर . चाँदनी चौक की वह दिल्ली , आज भूखी गदर को […]

फिर आज गुलालों के खातिर बदरंग बनेगे होली में । अंग अंग पर रंग सजा हुड़दंग करेगे होली में ।। न जानेगे कितने रंग नये चेहरों पर खिल जायेगे । न जाने कितने टूटेंगे कितने […]

फुलवारी संग महकता सावन बाबगीयो मे खिलता सावन फल की मिठास जैसा सावन पवन संग उभरता सावन पतझड का है मौसम सावन चिडीयो का है मौसम सावन कोयल की गुंज सा मंधूर सावन कभी हषॆ […]

इतना भी आसान नहीं होता पुरुष होना। जिम्मेदारियों का बोझ उठाकर हरदम मुस्कुराना होता है। एक पुरुष को सशक्त होना पड़ता है अपने परिवार के लिए। वह समस्याओं बाधाओं की शिकायत नहीं करता बल्कि खुद […]

मिले हैं विरासत में आंसू मुझे पता न चला कि दोस्त कैसे बने उनका सैलाब है आशियां मेरा हंसी से नाता न मेरा रहा। जब पहुंचे मंज़िल से आगे कभी रहे याद दोस्ती सहारा बनी […]

सुनते आए हैं – अपनों का पर्व है होली मेरे आंगन जली होलिका मैं ही पंडित, मैं ही पूजा मैं ही कुंकुम, अक्षत औ” रॊली; सूनी गलियां, सूने गलियारे, सूने हैं आंगन सारे कौन संग […]

“सारे जहाँ से अच्छा “जो कह दे वो इकबाल कहाँ से लाऊँ? “हिन्दोस्तां हमारा ” कह दे वो इकबाल कहाँ से लाऊँ? अपने देश को अपना कहो तो आखिर क्या घट जाएगा? ध्वजा तिरंगा के […]

क्यों एक बेटी की विदाई तक ही एक पिता उसका जवाबदार है ? क्यों किस्मत के सहारे छोड़ कर उसको कोई न ज़िम्मेदार है? क्यों घर बैठे एक निकम्मे लड़के पर वंश का दामोदर है […]

मुझे वो लाज़मी सा सब कुछ दिलवा दो जो यूं ही सबको मिल जाता है न जाने कौन बांटता है सबका हिस्सा जिसे मेरे हिस्सा नज़र नहीं आता है बहुत कुछ गैर लाज़मी तो मिला […]

जो तू चाहे वो तेरा हो, रोशन रातें और खूबसूरत सवेरा हो, जारी रहें हमारी दोस्ती का सिलसिला, कामयाब हर मंजिल पर दोस्त मेरा हो|*

सपने भी हकीकत मे बदल सकते है। छूटे हुये लोग फिर से मिल सकते है।। गर हौसला है और खुदा पर यकीन । तो रेगिस्तान मे भी फूल खिल सकते है।