कभी कभी दिख भी जाया करो हुज़ूर,डर रहता है कहीं देखने की चाहत ही ना खत्म हो जायें |
कभी कभी दिख भी जाया करो हुज़ूर,डर रहता है कहीं देखने की चाहत ही ना खत्म हो जायें |
ღღ__बहुत खामोश रहते हो, तुम भी आज-कल “साहब”‘; . ख़ुदा से है शिकायत या, खुदी से नाराज़ रहते हो !!…..#अक्स .
वो ज़माना गया जब एक नारी अपने हक़ के लिए लड़ा करती थी। वो ज़माना गया जब एक नारी अपनी जगह बनाने के लिए मरा करती थी। आज की नारी इतनी सक्षम है कि गलत […]
वो माँ है आँखों में छुपी हमारी हर ख़ुशी , हर मुस्कराहट का राज़ है तो वो माँ है, गम हो की दुख़,दर्द ही क्यों न हो दिल मे , उस दर्द में छुपे हर […]
ज़िन्दगी में रिश्ते भी अक्सर आते जाते हैं! चाहो जिसे भी उम्रभर वे लोग भूल जाते हैं! जब हालात के तूफान से गुजरता है कोई, उसका दर्द देखकर तो बस लोग मुस्कराते हैं! Composed By […]
ღღ__मोहब्बत थी तुझसे ही, तुझसे ही हर गिला रहा; . उम्र-ए-शब-ए-रोज़ का, बस यही सिल-सिला रहा !!……#अक्स .
वक्त की कलम से जिन्दगी के हँसी पल लिखने जा रहा हूँ मैं, गमों की परछाई पर खुशियों के साये सा छाने जा रहा हूँ मैं, गर समझ हो तो आ जाना मेरे साथ , […]
ღღ__बिछड़कर देर तक तुझसे, उस दिन मैं सोंचता रहा “साहब”; . मोहब्बत गर ना हुई होती तो, मेरा क्या हुआ होता !!……#अक्स .
रेत के महलों की तरह ,हरदम ढहती है ये ख्वाइशें फिर भी हर पल क्यों सजती सवरती है ये ख्वाइशें उम्मीदे इन्ही ज़िंदा रखती सांसों में रचती -बसती पलती-बढ़ती सब चुपचाप सहती है ये ख्वाइशें […]
हम उन लम्हों की याद को जेहन में यु संजोये बैठे है रहकर भी दूर जैसे आँखों में बसता है कोई उन लम्हों की सांसें हमें हरदम चलती नज़र आती है जो अहसास कराती है […]
कल भी हम थे ,ये जमीं थी पर वो पाँव नहीं थे ढूंढ सकते जो तेरे क़दमों के निशाँ हालात फिर बदले इन पाँव को मिली कोई मंज़िल जो थी तेरे पलकों की महफ़िल हालात […]
छोड़ आया थी अपनी तन्हाई को भींड में लुत्फ़ अब ले रहां हूँ तन्हाई की भीड़ में राजेश ‘अरमान’
अजीब इत्तफ़ाक़ है अजीब इत्तफ़ाक़ है तेरे जाने और सावन के आने का अजीब इत्तफ़ाक़ है तेरी चुप और मौसम के गुनगुनाने का अजीब इत्तफ़ाक़ है मेरे माज़ी और मेरे मुस्कराने का अजीब इत्तफ़ाक़ है […]
चलो चुप लफ्जों को मिल के बाँट लेते है चल निकले लफ्जों को मिटटी से पाट देते है वो तेरा कहना मुझे मौसम की तरह चल तीर को किसी शाख पे गाड़ देते है वो […]
न माथे पे कोई बिंदिया न हाथों में कोई कंगन न होठों पे कोई लाली न पोशाक में तेरी खुश्बू न जुल्फें सवरी हुई न माथे पे कोई टीका न आँखों में काजल न पैरों […]
मैं संघर्ष कर रहा हूँ मैं संघर्ष कर रहा हूँ एक ‘मैं’ हूँ अपने ही जैसा एक ‘मैं’ और भी है इन दोनों ‘मैं’ में तालमेल बिलकुल भी नहीं फिर भी मैं रखता हूँ दोनों […]
गर वाबस्ता हो जाता रूहे-अहसास से जमाना न कोई शायरी होती न कोई ग़ज़ल होती गर वफ़ा करने की आदत होती जहाँ में न कोई शायरी होती न कोई ग़ज़ल होती गर न तेरे शिकवे […]
बिखरे बिखरे ख्वाब सुलगते सुलगते आंसूं सीने में तूफ़ान दिल में बस कशिश काफिले यादों के लम्बे कोई शै मुकम्मल नहीं तनहा तनहा सफर लम्बी लम्बी रातें न वफ़ा का इल्म न जफ़ा का तजुर्बा […]
वर्तमान ही सत्य बाकी सब मिथ्या है. भूत तो बिन बाती तेल का दीया है मत सोच में डुबो, तुझे किसी से क्या मिला कर हिसाब तूने किसी को क्या दिया है राजेश ‘अरमान’
फरियाद बन के निकली मेरी वफ़ा तेरी गली में कौन सुनता मेरे दिल की सदा तेरी गली में यूँ तो बस आवाज़ हूँ एक बुतखाने की कौन बख्सेगा यूँ मेरी खता तेरी गली में दरो-दीवार […]
ग़मे-ए-मुदाम से इस कदर परेशां न हो , सुना है हर गम के पंख भी होते है राजेश’अरमान’
तेरे साथ गुज़ारे चंद लम्हों की जागीर की बस मिल्कियत रखता हूँ ये अलग बात है खुद को सबसे अमीर अब भी समझता हूँ राजेश’अरमान’
वो समझते रहे ताउम्र, बस एक किस्सा मुझे हम वहम् में रहे वो समझते है ,अपना हिस्सा मुझे फरेब खाने की तो तालीम अपनी बड़ी पुरानी है हम फूलों की तरह मिलते, वो दिखाते काटों […]
तूफां मन के अंदर हो या समुन्दर में लहरें कुछ न कुछ खींच के ले ही जाती है राजेश ‘अरमान’
मैंने खुद ही खींची लकीरें अपने दरम्या मैंने खुद ही बना दिये इतने धर्म मैंने खुद ही सीखा दिया भूर्ण को छल कपट मैंने खुद ही गिरा दिए अपने संस्कार मैंने खुद ही मिटा दिए […]
बंदगी तेरी यूँ मेरे काम आ गई अब किसी दुआ की जुस्तजू न रही राजेश’अरमान’
मन की चेतना आत्मा की वेदना सत्य का भेदना अधीर प्रश्न बुझे उत्तर बिलखते प्रश्नचिन्ह निष्कर्ष कुंठित आज का आदमी राजेश ‘अरमान’
जिनके आने के ख्वाब में हम पलकों को बिछाये बैठे हैं , वो किसी और के ख्वाबों को पलकों पर सजायें बैठे हैं चलों ये गुस्ताखी भी हम माफ करें , गुफ्त़गू के लिये मुलाकात […]
मासूम निगाहें पलकों पर आश सजोयें अब भी राह ताकती होंगी, सबके खो जाने के गम में छुप – छुप कर दर्द बाँटती होंगी, वो यादें बड़ी सुनहरी है उनको मैं बार बार दोहराता हूँ, […]
सपनों में बच्चे देखना सुखद हो सकता है ; लेकिन ; बच्चों में सपने देखना आपकी भूल है जैसे; सपने…… सिर्फ़ सपने बच्चे : साकार नहीं करते वैसे ही; बच्चों में सपने साकार करना फिजूल […]
लबों पर जब कोई आता है अक्सर! रगों में कोई उतर जाता है अक्सर! उम्र बीत जाती है जिसकी यादों में, गली से तेरी मुकर जाता है अक्सर! Composed By #महादेव
ღღ__कभी फुरसत मिले जो ‘साहब’, तो पूरी ये अहद कर दो; . कुछ इस हद तक मुझे चाहो, कि बस “हद” कर दो !!…..#अक्स .
आँखों में रखा बुलंदिओं का जोश है यहाँ हर इंसा खुद में मदहोश है वहां से निकल तो आया था जहाँ शोर था कैसे निकलू जो अपने ही अंदर सरफ़रोश है कौन सी दुनिया को […]
aankhon mein rakha bulandion ka josh hai yahan har insaa khud mein madhosh hai wahan se nikal to aaya tha jahan shor tha kaise nikaloon jo apne hi ander sarfarosh hai kaun si duniya ko […]
!!!! SAGAR KE DIL SE !!!! patjhar main bhi kuch patte shakho par reh jaate hai bhure waqt main bhi kuch dost saath nibha jaate hai maut se sangharsh aur jeewan se pare ek naya […]
!!!! SAGAR KE DIL SE !!!! phir ek baar sagar shant hai kisi khaas lehar ka intzaar hai baitha hun baahain failaaye kinaare par dil uss se aalingan karne ko baitaab hai @@ SAGAR @@ […]
जब अंधे;आपस में मिल बैठकर , : संध्या बांचते हैं कुत्ते : पत्तल चाटते हैं……….. यही तो है ; हमारी व्यवस्था ! कि; अंतिम पंक्ति का अंतिम व्यक्ति डरा–सहमा जड रह जाता है उसे धकिया […]
Ummar ho gayi Par wo nahi dekh paya kabhi Jo bachpan main dekha payar Maa ki aankhon main Wo ahsaas aaj bhi mujhe Skoon deta hai Aaj bhi maa ko mere paasa Hone ka saboot […]
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