गम के फसाने को तेरी खुशियों ने लूटा , तेरी हर दीद की उम्मीद ने अखियों को लूटा , उजाले की हर किरन को तूनें कनखियों से लूटा,तुझे पाने की हर कोशिश को तेरी सखियों […]
गम के फसाने को तेरी खुशियों ने लूटा , तेरी हर दीद की उम्मीद ने अखियों को लूटा , उजाले की हर किरन को तूनें कनखियों से लूटा,तुझे पाने की हर कोशिश को तेरी सखियों […]
दो सिसकियाँ हीं कभी काफ़ी हैं दिल हल्का करने को, दो साँसे हीं कभी काफ़ी हैं ज़िंदगी जी लेनो को
ღღ__तुमसे मिलने की तलब, कुछ इस तरह लगी है “साहब”; . जिस तरह से कोई मयकश, मयखाने की तलाश करता है !!…..#अक्स .
मेरी ज़िन्दगी मुझे ऐसा मुकाम दे दे! हरवक्त़ धड़कनों में सनम का नाम दे दे! मुझको फिकर नहीं है किसी दौर-ए-सितम का, मेरे लबों पर मयक़शी का जाम दे दे! Composed By #महादेव
कुछ गरीबों का आशना फिर जला है शायद राजा जी के महल में आज रोशनी कुछ और है ……यूई
कभी कभी दिख भी जाया करो हुज़ूर,डर रहता है कहीं देखने की चाहत ही ना खत्म हो जायें |
ღღ__बहुत खामोश रहते हो, तुम भी आज-कल “साहब”‘; . ख़ुदा से है शिकायत या, खुदी से नाराज़ रहते हो !!…..#अक्स .
वो ज़माना गया जब एक नारी अपने हक़ के लिए लड़ा करती थी। वो ज़माना गया जब एक नारी अपनी जगह बनाने के लिए मरा करती थी। आज की नारी इतनी सक्षम है कि गलत […]
वो माँ है आँखों में छुपी हमारी हर ख़ुशी , हर मुस्कराहट का राज़ है तो वो माँ है, गम हो की दुख़,दर्द ही क्यों न हो दिल मे , उस दर्द में छुपे हर […]
ज़िन्दगी में रिश्ते भी अक्सर आते जाते हैं! चाहो जिसे भी उम्रभर वे लोग भूल जाते हैं! जब हालात के तूफान से गुजरता है कोई, उसका दर्द देखकर तो बस लोग मुस्कराते हैं! Composed By […]
ღღ__मोहब्बत थी तुझसे ही, तुझसे ही हर गिला रहा; . उम्र-ए-शब-ए-रोज़ का, बस यही सिल-सिला रहा !!……#अक्स .
वक्त की कलम से जिन्दगी के हँसी पल लिखने जा रहा हूँ मैं, गमों की परछाई पर खुशियों के साये सा छाने जा रहा हूँ मैं, गर समझ हो तो आ जाना मेरे साथ , […]
ღღ__बिछड़कर देर तक तुझसे, उस दिन मैं सोंचता रहा “साहब”; . मोहब्बत गर ना हुई होती तो, मेरा क्या हुआ होता !!……#अक्स .
रेत के महलों की तरह ,हरदम ढहती है ये ख्वाइशें फिर भी हर पल क्यों सजती सवरती है ये ख्वाइशें उम्मीदे इन्ही ज़िंदा रखती सांसों में रचती -बसती पलती-बढ़ती सब चुपचाप सहती है ये ख्वाइशें […]
हम उन लम्हों की याद को जेहन में यु संजोये बैठे है रहकर भी दूर जैसे आँखों में बसता है कोई उन लम्हों की सांसें हमें हरदम चलती नज़र आती है जो अहसास कराती है […]
कल भी हम थे ,ये जमीं थी पर वो पाँव नहीं थे ढूंढ सकते जो तेरे क़दमों के निशाँ हालात फिर बदले इन पाँव को मिली कोई मंज़िल जो थी तेरे पलकों की महफ़िल हालात […]
छोड़ आया थी अपनी तन्हाई को भींड में लुत्फ़ अब ले रहां हूँ तन्हाई की भीड़ में राजेश ‘अरमान’
अजीब इत्तफ़ाक़ है अजीब इत्तफ़ाक़ है तेरे जाने और सावन के आने का अजीब इत्तफ़ाक़ है तेरी चुप और मौसम के गुनगुनाने का अजीब इत्तफ़ाक़ है मेरे माज़ी और मेरे मुस्कराने का अजीब इत्तफ़ाक़ है […]
चलो चुप लफ्जों को मिल के बाँट लेते है चल निकले लफ्जों को मिटटी से पाट देते है वो तेरा कहना मुझे मौसम की तरह चल तीर को किसी शाख पे गाड़ देते है वो […]
न माथे पे कोई बिंदिया न हाथों में कोई कंगन न होठों पे कोई लाली न पोशाक में तेरी खुश्बू न जुल्फें सवरी हुई न माथे पे कोई टीका न आँखों में काजल न पैरों […]
मैं संघर्ष कर रहा हूँ मैं संघर्ष कर रहा हूँ एक ‘मैं’ हूँ अपने ही जैसा एक ‘मैं’ और भी है इन दोनों ‘मैं’ में तालमेल बिलकुल भी नहीं फिर भी मैं रखता हूँ दोनों […]
गर वाबस्ता हो जाता रूहे-अहसास से जमाना न कोई शायरी होती न कोई ग़ज़ल होती गर वफ़ा करने की आदत होती जहाँ में न कोई शायरी होती न कोई ग़ज़ल होती गर न तेरे शिकवे […]
बिखरे बिखरे ख्वाब सुलगते सुलगते आंसूं सीने में तूफ़ान दिल में बस कशिश काफिले यादों के लम्बे कोई शै मुकम्मल नहीं तनहा तनहा सफर लम्बी लम्बी रातें न वफ़ा का इल्म न जफ़ा का तजुर्बा […]
वर्तमान ही सत्य बाकी सब मिथ्या है. भूत तो बिन बाती तेल का दीया है मत सोच में डुबो, तुझे किसी से क्या मिला कर हिसाब तूने किसी को क्या दिया है राजेश ‘अरमान’
फरियाद बन के निकली मेरी वफ़ा तेरी गली में कौन सुनता मेरे दिल की सदा तेरी गली में यूँ तो बस आवाज़ हूँ एक बुतखाने की कौन बख्सेगा यूँ मेरी खता तेरी गली में दरो-दीवार […]
ग़मे-ए-मुदाम से इस कदर परेशां न हो , सुना है हर गम के पंख भी होते है राजेश’अरमान’
तेरे साथ गुज़ारे चंद लम्हों की जागीर की बस मिल्कियत रखता हूँ ये अलग बात है खुद को सबसे अमीर अब भी समझता हूँ राजेश’अरमान’
वो समझते रहे ताउम्र, बस एक किस्सा मुझे हम वहम् में रहे वो समझते है ,अपना हिस्सा मुझे फरेब खाने की तो तालीम अपनी बड़ी पुरानी है हम फूलों की तरह मिलते, वो दिखाते काटों […]
तूफां मन के अंदर हो या समुन्दर में लहरें कुछ न कुछ खींच के ले ही जाती है राजेश ‘अरमान’
मैंने खुद ही खींची लकीरें अपने दरम्या मैंने खुद ही बना दिये इतने धर्म मैंने खुद ही सीखा दिया भूर्ण को छल कपट मैंने खुद ही गिरा दिए अपने संस्कार मैंने खुद ही मिटा दिए […]
बंदगी तेरी यूँ मेरे काम आ गई अब किसी दुआ की जुस्तजू न रही राजेश’अरमान’
मन की चेतना आत्मा की वेदना सत्य का भेदना अधीर प्रश्न बुझे उत्तर बिलखते प्रश्नचिन्ह निष्कर्ष कुंठित आज का आदमी राजेश ‘अरमान’
जिनके आने के ख्वाब में हम पलकों को बिछाये बैठे हैं , वो किसी और के ख्वाबों को पलकों पर सजायें बैठे हैं चलों ये गुस्ताखी भी हम माफ करें , गुफ्त़गू के लिये मुलाकात […]
मासूम निगाहें पलकों पर आश सजोयें अब भी राह ताकती होंगी, सबके खो जाने के गम में छुप – छुप कर दर्द बाँटती होंगी, वो यादें बड़ी सुनहरी है उनको मैं बार बार दोहराता हूँ, […]
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