मुद्दत बाद आज ही नहाया हू़ँ अपने अश्क ए तालाब में।
कहीं कोई काली नैनो़ से देखा तो नहीं मुझे नहाते हुए।।
Category: शेर-ओ-शायरी
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अश्क ए तालाब
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जरा प्यार से……
पागल पुकारो आवारा पुकारो या तुम दीवाना पुकारो।
जो भी पुकारो जरा प्यार से अपना कह कर पुकारो।। -
कुव्वत-ए-दुआ
‘निकलती है नेक मकसद को, मुकम्मल वो दुआ होती है,
नही होती दुआ अकेली कभी, साथ क़ुव्वते-दुआ होती है..’– प्रयाग
मायने :
मुकम्मल – पूरी
क़ुव्वते दुआ – दुआ की ताकत -
कब तलक
‘दिल में छिपाए रखोगे, जज़्बात कब तलक,
इतनी ही हुई बात बस नज़रों से अब तलक..’– प्रयाग
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ज़रिया
‘देर न लगी मेरी हकीकत के मायने बदलने में,
मैं दरिया था कभी मोहब्बत का, आज दिल्लगी का ज़रिया हूँ..’– प्रयाग
मायने :
ज़रिया – साधन -
मैं…
चलो ‘मैं’ को,
‘मैं’ से लड़ाते हैं!
जीतकर ,
फिर ‘मैं’ से
‘हम’ बनाते हैं।विशेष–>
यमक अलंकार का प्रयोग
एक “मैं ” अपने आप के लिए
दूसरा ” मैं ” अहंकार के लिए -
चारागर
‘चारागरों, हम में से किसी एक का इलाज करो,
आज़ार उन्हें नफरत का है, तो हमें मोहब्बत का..’– प्रयाग
मायने :
चारागर – डॉक्टर
आज़ार – रोग -
इन्तजार..
वो ना जाने कहाँ रहते हैं आज कल,
हमें उनके दीदार का इन्तजार है…
बड़ा मीठा बोलतें हैं वो,
हमें उनकी हाँ का इन्तजार है.. -
मेरे इश्क के बीमार..
मेरे इश्क के बीमार नजर आ रहे हैं..
बड़े सीधे सरकार नजर आ रहे हैं.. -
यादें
आँखों से हुई थी अश्कों की बरसात।
याद है मुझे वो थी बरसात की रात ।। -
जुस्तजू
‘छोड़ गए थे इसी जगह, अब चलना मुनासिब नही,
वो लौट आए तो मेरी जुस्तजू में परेशां होंगें..’– प्रयाग
मायने :
जुस्तजू : तलाश -
शिकवा
शिकवा है मुझे उससे, जिसने लिखी हैं अधूरी कहानियां,
क्यों कराया था मिलन, गर परवान- ए- मोहब्बत की औकात ना थी।
AK -
वजह क्या हैं
बहुत आ रहे हैं लोग ;
आजकल ,पास तुम्हारे !
पहले तो नहीं आते थे ,
सच बताओ ये रजा क्यों है,
डॉक्टर हो शायद ,स्वार्थ के!
सच तो बताओ , वजह क्या हैं? -
माना शराफत भली है..…
माना शराफत भली हैं ,इंसानियत के लिए,
मगर, हे मानुष !
ज्यादा युधिष्ठिर ना बन,
तेरे आस-पास सुगनी बहुत रहते हैं। -
जिंदगी
जिंदगी कितनी सुलझी हुई है,
अगर हम माहिर हो उसे सुलझाने में। -
मौसम..
मेरे दिल ने एक सवाल किया..
आज लखनऊ का मौसम कैसा है?
हूबहू मेरे महबूब जैसा है.. -
शकुन
हम वो शख्स नहीं जो, गड़े मुर्दे को भी कब्र में सोने न दे।
मुद्दत बाद नींद आयी है कम से कम कुछ पल सोने तो दे।। -
शेर
हमने दर्द को दावत दे दिया अपनी गुलिस्ताँ में।
देखें क्या रंग लाती है इन अमीरों के अंजुमन में।। -
दर्द या हमदर्द
जो कभी दुश्मन था मेरा,
वो आज मुझसे हमदर्दी रखता,
ये मेरा दर्द ही अब मुझे ,
आजकल तसल्ली देता है। -
चाहत
आ सनम तुझे मैं आज, अपनी इन गेसूओं में छुपा लूं।
ए आँखें बंद होने से पहले, मैं तुझे आँखों में बसा लूं।। -
आंसू मेरे
जितना रोकूं उतना ही बहते ,
दर्द का किस्सा पल में कहते,
आंसू मेरे बड़े ही मनमाने-से,
जरा सी बात पर बहते रहते। -
नामाबर
‘ये रब करे कि मोहब्बत मेरी असर कर ले,
वो दिल को भेज दे, दिल को ही नामाबर कर ले..’– प्रयाग
मायने :
नामाबर – डाकिया -
नारी है वह..
नारी है वह यह मत समझ
वह तो हुनर की रात है…
एक बीमारी से वह लड़ रही है
बस यही दु:ख की बात है… -
उम्र में…
उम्र में एक छोटे जीव के पीछे बड़े दिग्गज पड़े हैं.
और कहते हैं हम रिश्ते में उनके करीबी ही रहे हैं… -
पहचान…
अगर दर्द समझता तू तो अपनी हरकतों पर
शर्मिन्दा होता..
अलग-अलग पहचान से यूँ ताने ना मार रहा होता… -
मर जाएगे..
दिल दुखाने की बात ना कर तो अच्छा है
एक दिन तुझे सब छोड़ जाएगे..
रह जाएगा बस तेरा ही निशान
बाकी तो सब तेरी बातों से ही मर जाएगे.. -
दर्द भी समझते हैं
खाली कविता नहीं करते हैं
दर्द भी समझते हैं,
दूसरों को दिया हुआ भी,
दूसरों से लिया हुआ भी। -
तुम्हारे दर्द पर
अपने दिल का हाल
हमें न सुनाओ,
हम तो मजाक बना देंगे,
बेदर्द राही हैं हम
तुम्हारे दर्द पर
कविता बना देंगे। -
इख्तियार
‘तू करले जितना अपने दिल पे इख़्तियार मगर,
निगाह जानती है उसकी, अपना वार मगर..
ये भी मुमकिन है आज पहली दफा बच जाए,
मगर बचेगा कहाँ और कितनी बार मगर..’– प्रयाग
मायने :
इख़्तियार – नियंत्रण -
गमज़दा सा
गमज़दा सा हूं ;उसके लिए
जो तुमने मेरे साथ किया।
और बहुत ही निशब्द सा है,
यह दर्द जो तुमने मुझे हर पल दिया।
मगर रहे तू हमेशा बाग़-बाग़ ,
चल छोड़ो !
हमने तुम्हें माफ़ किया। -
भीगते जज्बात हैं
रास्ते जलमग्न हैं
हर तरफ बरसात है,
दूसरे की छतरियों में
भीगते जज्बात हैं -
जीवन में..
जीवन में सबके होते हैं ऐसे लोग…
जो रिश्तों महज खिलौना ही समझते हैं..
जब तक मन करता है खेल लेते हैं..
जब जी चाहे रिश्ते तोड़ देते हैं.. -
रवानी
‘तेरे एहसास में रहूँगा मैं असर बनकर,
या कभी दिल में ही साँसों की रवानी बनकर..
संभालकर मुझे रखना है इम्तेहान तेरा,
अब मैं रहूँगा तेरी आँखों में पानी बनकर..’– प्रयाग
मायने :
रवानी – गतिशीलता -
कैसे रिश्ते?
कैसे रिश्ते और कहाँ के..
पल टूट ही जाते हैं..
अपना उल्लू ना सीधा हो तो
खुद ही रिश्तों से मुकर जाते हैं.. -
हम दिल में झांकते हैं
हम खूबसूरती को
अलग पैमाने से आंकते हैं,
वे चेहरा देखते हैं,
हम दिल में झांकते हैं। 1।हजारों बार कान भरे
फिर भी हमें बदल नहीं पाये
वे ऐसा क्यों करते हैं
आशय नहीं समझ पाये।2। -
जरा सा दाम कम कर
अपनी कुटिल मुस्कान से तू
मुस्कुरा मत आज हम पर
(भाजी बनाने को),
आलू जरूरी हैं
जरा सा दाम कम कर। -
मौज-ए-लहू
‘किसी की आह से महसूस हुआ है मुझको,
कि बहुत दूर तक पहुँची है आज मौज-ए-लहू..’– प्रयाग
मायने :
मौज ए लहू – खून की लहर -
बादलों ने घेर ली
रोशनी आई
अचानक बादलों ने घेर ली,
दे गए खुद ही दिलासा
आंख क्यों फिर फेर ली। -
प्रेम पास रखो
दूसरे को ठेस देने से पहले
यह याद रखो
चोट दिल पर लगेगी
अहसास रखो
चार दिन की जिंदगी में
नफरत नहीं
प्रेम पास रखो
ककड़ी सी शीतल तासीर रखो
जलेबी सी गर्म मिठास रखो । -
तो क्या होता..
‘सोचता हूँ तो हर वजह ही बेवजह सी लगे,
मेरी साँसों से मेरे दिल का वास्ता न होता तो क्या होता…?
मुझ पर से गुज़र कर न जाने कितने चले गए,
मैं औरो के मक़ाम का रास्ता न होता तो क्या होता..?’– प्रयाग
मायने :
मक़ाम – ठहरने/रुकने की जगह -
विभीषण जिंदा है (व्यंग्यात्मक)
बहुत दिनों से ढूंढ रहा था,
जिसे मैं डगर -डगर,
वह मुझे घर के पास ही मिल गया।कौन कहता है विभीषण मर गया ,
जिंदा है वो,
मुझे मेरे अपनो में ही मिल गया। -
एटीएम-सी जिंदगी (शायरी)
एटीएम सी है जिंदगी मेरी ,
जब तक कैश होता है,
तब तक प्रेम की बरसात
और लोगों की आवाजाही होती रहती है। -
ये तूफाँ का इशारा है..
‘ये चाहता मैं भी हूँ के ठोकरें लगती रहें तेरी,
तुझे मैं याद रख सकूँ, ये आग जलती रहे मेरी..
मेरे सब्र को मेरी बेबसी की इन्तेहाँ मत समझना,
ये तूफाँ का इशारा है जो इस वक्त खामोशी है मेरी..’– प्रयाग
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वफ़ा
‘हम तो समझ बैठे थे, ये काँटो की वफ़ा है,
पर शुक्र हैं कि कभी नंगे पैर न थे..’– प्रयाग
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हाज़िरजवाबी आ गई
‘इतना कुछ लिखा गया फितरत किताबी आ गई,
ज़िंदगी के मंच पर जुर्रत खिताबी आ गई..
उंगलियाँ उठी तो अल्फाजों को ताकत मिल गई,
सवाल इतने उठ गए हाज़िरजवाबी आ गई..’– प्रयाग
मायने :
अल्फाज़ो को – शब्दों को -
नाग-सा अभिमान शायरी
मुझे निगलने चला था ,
नाग-सा अभिमान मेरा,
मगर मोर से संस्कार;
मेरी मां के ,
मुझे बचा लेते हैं। -
फिसलन अधिक है आजकल
तल घिसा जूता समझ
मुझको पहन मत बे-अकल
काई लगे हैं रास्ते
फिसलन अधिक है आजकल। -
फलक
‘लड़ा था खुद से ज़मीं पर तेरी खुशी के लिए,
फलक में रहके खुदा से भी जंग वही होगी..’– प्रयाग
मायने :
फलक – आसमान -
तमन्ना
‘किस तरह रोकेगी गुज़रती हवा-ए-सर्द मुझे,
ओढ़कर उसकी तमन्ना घर से निकलता हूँ मैं..’– प्रयाग
मायने :
हवा ए सर्द – ठंडी हवा -
खफ़ा
इनायत की थी मैने कोई शिकायत नहीं।
बेवजह कह गए वो आपसे कोई रिश्ता नहीं।।