एक शब्द ने मुझे हिला डाला , अच्छी चल रही थी जिंदगी, मगर रुला डाला। ये शब्द बड़ा मीठा सा, तीखा सा, बड़ा परेशान करे ,नींदों को हराम करें, शोहरत से बदनाम हुए, और वजूद […]

जिन्हें समझते थे हम औरों से अलग, वो भी आज, ज़माने से निकले। जिनसे थी हमें चन्द खुशियों की आरज़ू, वो भी आज ,दर्द के जाने माने से निकले।

‘तुमसे तो चंद कदम तय भी हो सके ना कभी, मैंने मीलों का सफर चलके ही गुज़ारा है.. कम से कम तुम पर किसी कत्ल का इल्ज़ाम नही, मैंने तो उम्र भर ही ख्वाहिशों को […]

गम-ए-हयात की खातिर या किसी बात की खातिर, हम तो खामोश रहे इक नई शुरुआत की खातिर.. कुछ रहे पास, खुदा से ये भी बर्दाश्त ना हुआ, उसने आंँसू भी ले लिए मेरे, बरसात की […]

हर हाल में मुस्कुराना हमें आता है, अपने .गम भी छिपाना हमें आता है। छोटी सी कश्ती में घूम कर भी ख़ुश हो जाती है”गीता,” और, बड़े- बड़े सागर भी पार करना हमें आता है।

वो कफन था जो दामन-ए-यार बना फिरता था, मेरा वहम मेरे अंदर ऐतबार बना फिरता था.. कुछ दिखा नही ज़माने में सिवाए मतलब के, एक मैं ही था जो दिलों में प्यार बना फिरता था..

मैने वो तस्वीर फाड़ दी जिस तस्वीर को देख कर, हम कभी बेहतरीन ग़ज़ल लिख लिया करते थे। हकिक़त जब सामने आई तस्वीर को जोडना चाहा , तस्वीर ने कहा मुहब्बत के मामले तुम बहुत […]

आज मेरी मां के चेहरे पर मायूसी छाई है फिर भी देख कर मुझे वह मुस्कुराई है मेरी रोटी के खातिर जल जाते थे जो हाथ पहली बार मां के उन हाथों मे कम्पन अाई […]

वैसे नींंद नहीं आती , आजकल मुझे। जबसे देखा हैं , हमदम तुझे किस्मत में हैं, या नहीं तू पर कोशिशें  करता हूँ , अब सो जाने की काश इक पल सपनों में ही , मिल जाए […]

कोई गरीबी का मारा , कोई बदनसीबी का मारा , कोई वक्त से परेशान हैं , कोई अपनों का मारा । मगर वो बेपरवाह सा, मगन अपने दर्द में, जो है इश्क का मारा।

जीवन की आपाधापी में त्यौहार सांकेतिक हो गए, जबसे कोरोना आया है तब से ऑनलाइन हो गए। प्यार ऑनलाइन हो गया मुलाकात ऑनलाइन हो गई, राखी ऑनलाइन कलाई ऑनलाइन हो गई बस जज्बात ऑफ लाइन […]