आपकी चोटी के पेंच किसी नागन से कम नहीं। कोई आप से टकरा जाए किसी में इतनी शामत नहीं।।
आपकी चोटी के पेंच किसी नागन से कम नहीं। कोई आप से टकरा जाए किसी में इतनी शामत नहीं।।
जो अपनी खुद की पहचान छिपाये बैठे है। वो नासमझ मेरे वजूद पर शर्त लगाये बैठे है।।
सबने अपने किरदार पर पर्दे डाल रखे है। फैसला मेरा करेगे यह वहम भी पाल रखे है।
उदासी मधुमक्खी के छत्ते सा है ये ज़हान , यहां सब, मतलब से झांकने वाले हैं। अब किसे मैं यहां अपना कहूं, यहां सब काटने वाले हैं । मां को छोड़कर, सब लोभी है, ढोंगी […]
मेरी ख्वाहिशें समुंदर जैसी गहरी हैं, और तेरा प्यार आँखों के आँसू जितना छिछला।
मैं लिखता हूँ रात भर कविता तू सुबह पढ़ कर खुश होती है। मैं जब कभी हँसता हूँ खुशियों में मुझे तू हँसता देख कर रोती है।
ख्वाइशें पूरी करूंगा मैं तेरी आखिरी दम तक साथ निभाऊंगा तेरा धरती से फलक तक
सूरज की किरणें भी सुबह-सुबह कयामत ढा रही हैं, पूछ रही हैं, कैसे हैं वो? जिनकी तुम्हें याद आ रही है।
बुरा उन्हें कहूँ तो ये बिल्कुल गलत बात होगी……. शायद मैं ही बुरा हूँ तो उनसे मुलाकात क्यों होगी..?
जरूरत पड़ने पर आज मुकर गये हो तुम, जमाने की तरह कितना बदल गये हो तुम। दोस्त!ये मंजर भी गुजर जायेंगे किसी तरह से, पर आज चुप रहकर बहुत दर्द दे गये हो तुम।।
आरज़ू नहीं रखता कि पूरी कायनात में मशहूर हो शक्सियत मेरी। जनाब! आप जितना जानते हो सच में उतनी ही है पहचान मेरी।।
संवर कर आऊँगा जब तुम्हारी महफिल में , निगाहें तुम्हारी सिर्फ मुझ पर ठहर जायेगी। देखेंगे जब सब तुम्हारे होंठो पर हल्की-सी हँसी, महफ़िल में हमारी मोहब्बत ही चर्चा बन जायेगी।
उम्मीदों का दीया जलाकर इस आशा में बैठे हैं कल सूरज खुशियाँ लाएगा चाँद सजाकर बैठे हैं
तेरी सारी सच्चाई जानता हूँ मैं पर तेरी खुशी की खातिर मुझे अनजान बनना अच्छा लगता है। मैं चाहता हूँ तू अपने मुंह से अपनी सच्चाई बता! तुझे बेवफा बुलाना ना मुझे खराब लगता है।
सच बोलने वालों की जहां में कदर नहीं होती इमानदारों के पास मखमल की चादर नहीं होती। सो जाते हैं वह तो धूप की चादर बिछाकर उनके सपनों में पंखों की उड़ान नहीं होती।
तुझसे लंबी जुदाई सही ना जाएगी तेरे जाने से मेरी आँख भी भर आएगी हो ना जाना कहीं दूर मुझसे तू तेरे बिन यह दीवानी मर ही जाएगी।
शाम से ढूंढती थी मैं तुझको तू न जाने कहाँ खो गया मैं तुझे प्रेम की धरती समझती थी तू नफ़रत का आसमान हो गया।
तुम्हारी ख्वाहिशों को पूरा करने आऊंगा जरूर ना उतरा है ना उतरेगा तुम्हारी आँखों का सुरूर
संकल्प लें कि समाज में शिक्षा का संदेश फैलाएंगे, बेटा हो या बेटी सभी को एक साथ पढ़ाएंगे।
किसी की अहमियत हमें तभी होती है जब वह हमें छोड़ कर चला जाता है। ——————————————– और किसी की चाहत हमें तभी होती है जब वह हमारे मुकद्दर में नहीं होता है।
नारी का सम्मान करो हर पल आने ना दो उसकी आँखों में आँसू, ना धन चाहे ना दौलत चाहे वह तो है प्रेम-पिपासु।
तुम्हारे सपनों में कोई आता है क्या? तुम्हारे ख्वाब कोई सजाता है क्या? जिस तरह मैं तुम्हारे आगे बिना गलती घुटने टेक देता हूँ उस तरह तुम्हें कोई प्यार जताता है क्या?
सीमा पर यह बम बारूदें बंद करो लड़ना है तो सामने आकर जंग करो हम भारतवासी हैं तुम को धूल चटा देंगे तुमको तुम्हारी सीमा पर आकर मिट्टी में मिला देंगे
अत्याचार खत्म करने का एक ही है उपाय घर-घर में शिक्षा का करें प्रचार-प्रसार। शिक्षा ही वह दीपक है जो हर घर में उजाला करती है शिक्षा ही है जो जानवर को इंसान बना देती […]
रक्तरंजित इश्क में हज़ार होते हैं ख्वाब मगर पूरे नहीं होते।
ख्वाब सो जाते हैं छत पर जब तू उदास होता है। जब तू मुस्कुराता है तो सुकून पास होता है। काव्य सौंदर्य:-मानवीकरण
तेरी मोहब्बत में कुछ यूँ हुआ असर एक-एक पल शताब्दियों सा लगता है।
मेरे हृदय में तेरे नाम से कुछ यूँ स्पंदन होता है मेरी आँखों से आँसू बहते हैं जब-जब तू रोता है।
तुझसे धोखा खाकर प्यार में कुछ यूँ असर हुआ मुझ पर पीछे मुड़कर नहीं देखता हूँ मैं जिसे छोड़ आया बस छोड़ आया।
हकीकत कुछ इस तरह बयां हुई मेरे होठों से मैं तुझसे मिलकर अकेला हो गया। काव्य सौंदर्य:- विरोधाभास
तेरे प्यार में झरनों से बहता जा रहा हूँ मैं। न जाने किस सागर की ओर जा रहा हूँ मैं। उपमा अलंकार
मेरा प्रेम तुम्हारी स्मृतियों से कभी वंचित नहीं होता मैं आज भी किसी और के ख्वाबों में नहीं खोता।
यही अंजाम होना था मेरी मोहब्बत का जब पथ्थर से पसीजने की उम्मीद लगाये बैठे थे
कभी तो खैरियत पूछ लिया करो मेरी क्या पता आज तुम्हारा हूँ, कल किसी और का हो जाऊँ।
मुझे दोस्ती भी पसंद है और दुश्मनी भी। पर जो भी करना शिद्दत से करना, क्योंकि मुझे हर काम में वफादारी पसंद है।
E-Dil Tu Kyun Rota Hai ! yah Duniya Hai Yahan To Aisa Hi Hota..
है आज भी दरिया मेरे दिल में तेरी मोहब्बत का, तू जब चाहे डूब कर देख ले।
काश! कुछ देर तू मेरे पास बैठता मैं तेरी आँखों में डूब जाता। तेरा नशा यूँ चढ़ता मैं शराब तक भूल जाता।
काश! कुछ देर तू मेरे पास बैठता मैं तेरी आंखों में डूब जाता। तेरा नशा यह चढ़ता मैं शराब तक भूल जाता।
अधूरा रह गया मैं तेरे ख्वाबों को पूरा करते-करते कितना जी गया मैं तेरी आरजू करते-करते।
आज 13-7 है.. पर तेरा साथ कब मिलेगा मुझे? यही खुदा से पूछता रहता हूँ मैं
मोहब्बत पूरी हुई चलो अब जख्म गिनते हैं। जो अरमान टूटे उन्हें फिर से बुनते हैं।
मिलने को तो दुनिया में कई चेहरे मिले… पर तुम-सी मुहब्बत मैं खुद से भी ना कर पाया…
चला जाऊंगा जैसे खुद को अकेला छोड़कर.. मैं रात में उठकर यूँ खुद को देखता हूँ..
धुन सुकून की और धमाके का धंधा… मयस्सर खुशियाँ उसे जो दौलत में अन्धा…
किस्मत हम अपनी खुद लिखते हैं खुदा तो बस लिखने में मदद करते हैं।
हर किसी की निगाहों में उठते-उठते कई लोग दुनिया से उठ गए हमने जब से छोड़ दी दुनिया की फिकर अपने जहान के बादशाह बन गए।
अंदाजे से नापिए किसी इंसान की काबिलियत को, क्योंकि ठहरे हुए दरिया अक्सर गहरे होते हैं।
बहुत-बहुत सुंदर है वो, प्यार का समंदर है वो , फीखा है हर रिश्ता , पर उसका कोई तोड़ नहीं, देखी होगी आपने बहुत सी देवियां , पर मेरी मां की कोई होड़ नहीं, मेरी […]
मेरे अपनों से ही तो प्रेरित हैं मेरे शब्दों की गहराईयाँ वर्ना हर बात पर अक्सर हम बेज़ुबां हो जाते थे ©अनीता शर्मा अभिव्यक़्ति बस दिल से
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.