उदासी    मधुमक्खी के छत्ते सा है ये ज़हान , यहां सब, मतलब से झांकने वाले हैं। अब किसे मैं यहां अपना कहूं, यहां सब काटने वाले हैं । मां को छोड़कर, सब लोभी है, ढोंगी […]

जरूरत पड़ने पर आज मुकर गये हो तुम, जमाने की तरह कितना बदल गये हो तुम। दोस्त!ये मंजर भी गुजर जायेंगे किसी तरह से, पर आज चुप रहकर बहुत दर्द दे गये हो तुम।।

संवर कर आऊँगा जब तुम्हारी महफिल में , निगाहें तुम्हारी सिर्फ मुझ पर ठहर जायेगी। देखेंगे जब सब तुम्हारे होंठो पर हल्की-सी हँसी, महफ़िल में हमारी मोहब्बत ही चर्चा बन जायेगी।

तेरी सारी सच्चाई जानता हूँ मैं पर तेरी खुशी की खातिर मुझे अनजान बनना अच्छा लगता है। मैं चाहता हूँ तू अपने मुंह से अपनी सच्चाई बता! तुझे बेवफा बुलाना ना मुझे खराब लगता है।

सच बोलने वालों की जहां में कदर नहीं होती इमानदारों के पास मखमल की चादर नहीं होती। सो जाते हैं वह तो धूप की चादर बिछाकर उनके सपनों में पंखों की उड़ान नहीं होती।

तुझसे लंबी जुदाई सही ना जाएगी तेरे जाने से मेरी आँख भी भर आएगी हो ना जाना कहीं दूर मुझसे तू तेरे बिन यह दीवानी मर ही जाएगी।

किसी की अहमियत हमें तभी होती है जब वह हमें छोड़ कर चला जाता है। ——————————————– और किसी की चाहत हमें तभी होती है जब वह हमारे मुकद्दर में नहीं होता है।

तुम्हारे सपनों में कोई आता है क्या? तुम्हारे ख्वाब कोई सजाता है क्या? जिस तरह मैं तुम्हारे आगे बिना गलती घुटने टेक देता हूँ उस तरह तुम्हें कोई प्यार जताता है क्या?

सीमा पर यह बम बारूदें बंद करो लड़ना है तो सामने आकर जंग करो हम भारतवासी हैं तुम को धूल चटा देंगे तुमको तुम्हारी सीमा पर आकर मिट्टी में मिला देंगे

अत्याचार खत्म करने का एक ही है उपाय घर-घर में शिक्षा का करें प्रचार-प्रसार। शिक्षा ही वह दीपक है जो हर घर में उजाला करती है शिक्षा ही है जो जानवर को इंसान बना देती […]

तुझसे धोखा खाकर प्यार में कुछ यूँ असर हुआ मुझ पर पीछे मुड़कर नहीं देखता हूँ मैं जिसे छोड़ आया बस छोड़ आया।

बहुत-बहुत सुंदर है वो, प्यार का समंदर है वो , फीखा है हर रिश्ता , पर उसका कोई तोड़ नहीं, देखी होगी आपने बहुत सी देवियां , पर मेरी मां की कोई होड़ नहीं, मेरी […]

मेरे अपनों से ही तो प्रेरित हैं मेरे शब्दों की गहराईयाँ वर्ना हर बात पर अक्सर हम बेज़ुबां हो जाते थे ©अनीता शर्मा अभिव्यक़्ति बस दिल से