Category: शेर-ओ-शायरी

  • मंज़र

    “गौर से देख तू इस दिल के उजड़े मंज़र को,
    है जो खंडहर कभी आबाद हुआ करता था..
    वो जिसे ‘अदना सा शागिर्द’ लोग कहते हैं,
    वो कभी इश्क में उस्ताद हुआ करता था..”

    – प्रयाग

    मायने :
    मंज़र – दृश्य
    अदना सा – मामूली/छोटा सा
    शागिर्द – शिष्य

  • यूँ बना खुद को..

    ‘यूँ बना खुद को के खुदा से भी ये कह सके,
    अब देखता हूँ तेरी आँधियों का करना क्या है..’

    – प्रयाग

  • कोई मुझे समझाओं…..

    कोई मुझे समझाओं,
    मैं समझना चाह रहा हूं,
    ये ग़म की आंधी है,
    वो उड़ जाएंगी,
    ज़रा सा दिल्लासा दो,
    मैं तड़पे जा रहा हूं।
    अरे! कोई थोड़ा सा तो प्यार
    जताओ मुझे
    मैं तरसे जा रहा हूं।

  • तज़ुर्बा

    ‘दिखा दिया ये तज़ुर्बा भी ज़िन्दगी ने हमें,
    हैं कितने शख्स ज़हर, और दवा है कितने..
    न रोशनी को इल्म, न ही चिरागों को पता,
    है कितने बुझने और मंज़ूर-ए-हवा हैं कितने..’

    – प्रयाग

    मायने :
    इल्म – ज्ञान

  • खुदगर्ज़ी

    ‘यही चलन सा हो गया है अब ज़माने का,
    हो जो खुदगर्ज़ी तो एहसान घट ही जाता है..
    रास्ता कौन बदलता है किसी की खातिर,
    जो पेड़ बीच में आता है कट ही जाता है..’

    – प्रयाग

  • सहारा उनका

    ‘देखें ठोकर या फिर हम देखें सहारा उनका,
    कभी-कभी यूँ भी गिराते हैं संभालने वाले..’

    – प्रयाग

  • बे-लौस

    ‘बे-लौस किस ज़ुबाँ से कहें आज बशर को,
    साये में बैठकर भी काट डाला शजर को..’

    – प्रयाग

    मायने :
    बे-लौस – नि:स्वार्थ
    बशर – इंसान
    शजर – पेड़

  • औकात

    ‘है ऐसा कुछ भी नही जिसको तू उजाड़ सके,
    मेरी नज़र में तूफाँ अब तेरी औकात नही..’

    – प्रयाग

  • मुसलसल

    ‘उथल-पुथल सी मुसलसल है ज़ेहन में मेरे,
    सुकून-ए-इश्क मगर बेशुमार है मुझमे..’

    – प्रयाग

    मायने :
    मुसलसल – सिलसिलेवार/लगातार
    ज़ेहन – दिमाग
    सुकून ए इश्क – इश्क का सुकून

  • खालीपन

    ‘वो शख्स, खुद ही जो खाली हो अपने अंदर से,
    वो दूसरों को खालीपन के सिवा क्या देगा..
    झूठ की परतों को परतों पे चढ़ाने वाले,
    तेरे किए का सिला अब वो आसमाँ देगा..:

    – प्रयाग

  • हादसे

    ‘किनारे रखके ज़माने की नेमतें ए खुदा,
    मैं तुझसे माँगता फिरता था बस उसे लेकिन..
    मेरी मासूम हसरतों को अधूरा करके,
    दर्द के काम आ गए वो हादसे लेकिन..’

    – प्रयाग

    मायने :
    नेमतें – वरदान

  • गमों की बात ही न कर

    गमों की बात ही न कर
    तू मेरे आगे,
    मुझे गम की नहीं
    उत्साह की जरूरत है।
    तेरी गलियों में आया
    चाह लेकर,
    मुझे बस
    प्यार की जरूरत है।

  • बदल गया

    ‘कुछ इस तरह ज़िन्दगी का फसाना बदल गया,
    वो क्या बदला कि सारा ज़माना बदल गया..
    रिश्तों पर बेरूखी का असर कुछ यूँ हुआ,
    उसका रूठना बदला तो मेरा मनाना बदल गया..’

    – प्रयाग

  • अग्यार

    ‘शायद कि उन ने जीस्त को बाजार था माना,
    वो हो अग्यार जिन्हें यार था माना..’

    – प्रयाग

    मायने :
    जीस्त – ज़िन्दगी
    अग्यार – पराए लोग

  • न दुआ लगती है

    ‘न दुआ लगती है, न मुझको दवा मिलती है
    ज़ख्म दुखता है अगर उसको हवा मिलती है..
    किसी तरह से उसे दिल से निकाला था मगर,
    वो अगले पल ही मुझे मुझमे रवाँ मिलती है.’

    – प्रयाग

  • गाँव

    ‘गाँव में हाथ, कई हाथ थामे रखते हैं,
    शहर में खींचने को सिर्फ पांँव होता है..
    तरक्की कहने को कितनी ही की हो शहरों ने,
    यूँ कुछ भी कह लो मगर गाँव, गाँव होता है..’

    – प्रयाग

  • किरदार

    ‘ऐसे किरदार का यूँ भी है महकना वाजिब,
    कि नाम जिसका महज़ खुशबुओं से लिखा हो..
    आखरी खत ये जो खाली सा नज़र आता है,
    यूँ भी हो सकता है कि आँसुओं से लिखा हो..’

    – प्रयाग

  • इतना तो दे दे वक्त

    ‘तुझे तो रोक न पाया, किसी तरह लेकिन
    शायद मैं तेरी याद को नाकाम कर सकूँ..
    तू खुद नही मौजूद तो तेरा खयाल है,
    इतना तो दे दे वक्त के कुछ काम कर सकूँ..’

    – प्रयाग

  • अयादत

    ‘तेरे खयाल से बस ये सवाल पूछा है,
    किसी तरह से यूँ खुद को संभाल, पूछा है
    नही मिला है जब, कोई हमें अयादत को,
    तेरी ही बेरुखी से अपना हाल पूछा है..’

    – प्रयाग

    मायने :
    अयादत : हाल चाल पूछना

  • आबो-हवा

    ‘कुछ दुआ का असर है, कुछ दवा का असर है
    या फिर ये तेरे शहर की हवा का असर है..
    दस्तकें देने लगी मोहब्बत ज़िन्दगी में अब,
    ये तेरे और मेरे दरमियां का असर है..’

    – प्रयाग

  • उम्मीद

    न उसे छोड़कर गया, न कभी जाऊँँगा
    इसी उम्मीद पर शायद वो ऐतबार करे..
    मैं किये जा रहा हूँ अब भी मोहब्बत उससे,
    होके मजबूर वो कभी तो मुझसे प्यार करे..

    – प्रयाग

  • इरादे

    मंजिल दूर है “राहत “, फिर भी इरादे बुलंद है।
    इसलिए तो आज भी मेहनत ज़िंदाबाद है।।

  • कैसे मैं अकेला कर दूँ

    ‘आज कहता है दिल कि एक फैसला कर दूँ
    तुझे दुनियाँँ के सारे सुख कहीं से लाकर दूँ..
    तूने उस उम्र में सीने से लगाया हर पल,
    तुझे इस उम्र में कैसे मैं अकेला कर दूँ..’

    #वृध्द माँ

    – प्रयाग

  • न कोई सबूत

    न कोई सबूत ओ गवाह और ना कोई था निशां,
    सामने बैठकर कोई दिल को चुराया न करे..

  • खफा यूँ थे..

    खफा यूँ थे कि आज तक ज़िन्दगी ने,
    जो कुछ भी कहा, हमने माना ही नही..

  • शेर

    बुरे वक्त में जो छोड़ जाए ,
    सपने दिखाए और दिल तोड़ जाए,
    फिर अच्छे वक्त में वापिस लौट आए ,
    उसे स्वार्थ ना कहें तो क्या कहें!

  • बात बहुत छोटी सी……..(शेर)

    बात बहुत छोटी सी,
    मगर कंकड़ का पहाड़ बना देती है वो,
    कब तक उस पर अपना हक जताएं ,
    पल भर में ही बेगाना बना देती है वो

  • ठोकरें हमें क्या ठोकर मारेंगी

    मुश्किलों का कोई गम नही हमें,
    कि हर रास्ते पर मुस्कुरा कर चलते हैं..
    ठोकरें हमें क्या ठोकर मारेंगी,
    हम तो खुद उन्हें ठुकरा कर चलते हैं..

    – प्रयाग

  • अज़ीज़

    मैं कितना अज़ीज़ था ये इस बात से ज़ाहिर हुआ,
    लगा के आग मुझे कुछ देर, कोई भी रुका नही..

  • आँसू

    रुकने नही दिया किसी की पलकों ने हमें,
    जब भी किसी की आँख का आँसू बने हैं हम..

  • चूड़ियाँ

    कोई कह दे उनसे कि यूँ चूड़ियाँ खनकाया ना करें,
    पलट पलट कर देखता हूँ सुनकर मैं नाम अपना..

  • अगर दबा है कोई दर्द……(शेर)

    अगर दबा है कोई दर्द हाले दिल में ,
    तो खुलकर रो लीजियेगा
    हमदर्द होते हैं; ये आंसू हमारे,
    ज़ख्मों को जरा धो लिजियेगा‌।

  • इन आँखों में..

    ना जाने क्या है इन आँखों में
    कुछ ठहर-सा गया है..
    रोती हैं तेरी यादों में
    पर वक्त गुजर-सा गया है..

  • हिचकी पे हिचकी

    दिल का मचलना बार बार हिचकी पे हिचकी आना।
    बता “राहत ” किधर जाना इधर जाना या उधर जाना।।

  • अंजुमन

    खत्म हुआ खेल मुहब्बत का।
    गिर गया पर्दा मेरे अंजुमन का।।

  • अफ़सोस (शायरी)

    मैं किसी फटी डायरी के पन्नों सा,
    जो हवा में उड़ रहे है इधर- उधर,
    मगर अफसोस ! पढ़ने वाला कोई नहीं।

    ……..मोहन सिंह मानुष

  • एक शब्द (शायरी)

    एक शब्द ने मुझे हिला डाला ,
    अच्छी चल रही थी जिंदगी,
    मगर रुला डाला।
    ये शब्द बड़ा मीठा सा, तीखा सा,
    बड़ा परेशान करे ,नींदों को हराम करें,
    शोहरत से बदनाम हुए,
    और वजूद को पूरा हिला डाला,
    एक शब्द ने मुझे हिला डाला।

  • हाल-ए-दिल

    शब्दों का पिटारा तो हम रखकर बैठें हैं
    लेकिन वो शब्द नहीं, जो हाल-ए-दिल बयां कर सके

  • किधर जाऊँगा

    मत निकाल अपने दिल से मुझे,
    मैं तो वक्त हूँ, गुज़र जाऊँगा
    इस भरे शहर में कोई आशना नही,
    ये जगह भी गई तो किधर जाऊँगा ?

    मायने :
    आशना – परिचित

  • लफ़्ज

    लफ़्ज अक्सर लवों पर ही ठहर जाते है
    जमाने के खौफ़ है कि क्या कहेगा सुनकर

  • ओ घिरे बादल

    इतना प्यार मत बरसा तू
    मुझ पर ओ घिरे बादल,
    मैं तो पूरी की पूरी भीग कर
    तर हो चुकी हूँ अब।

  • नाजुक कली

    हसीन अदा इनके अंग अंग में,
    अल्हड़पन सी लगती भली है।
    माना इन पर चढ़ी नही जवानी,
    फिर भी यह नाजुक कली है।।

  • शायरी (जाने माने)

    जिन्हें समझते थे हम औरों से अलग,
    वो भी आज, ज़माने से निकले।
    जिनसे थी हमें चन्द खुशियों की आरज़ू,
    वो भी आज ,दर्द के जाने माने से निकले।

  • मीलों का सफर

    ‘तुमसे तो चंद कदम तय भी हो सके ना कभी,
    मैंने मीलों का सफर चलके ही गुज़ारा है..
    कम से कम तुम पर किसी कत्ल का इल्ज़ाम नही,
    मैंने तो उम्र भर ही ख्वाहिशों को मारा है..’

  • शुरुआत की खातिर

    गम-ए-हयात की खातिर या किसी बात की खातिर,
    हम तो खामोश रहे इक नई शुरुआत की खातिर..
    कुछ रहे पास, खुदा से ये भी बर्दाश्त ना हुआ,
    उसने आंँसू भी ले लिए मेरे, बरसात की खातिर..

    मायने :
    गम-ए-हयात – ज़िन्दगी के गम

  • तन्हाई

    इस मायूस दिल को कौन समझाये
    मोहब्बत में बस तन्हाई ही मयस्सर है

  • हर हाल में…

    हर हाल में मुस्कुराना हमें आता है,
    अपने .गम भी छिपाना हमें आता है।
    छोटी सी कश्ती में घूम कर भी ख़ुश हो जाती है”गीता,”
    और, बड़े- बड़े सागर भी पार करना हमें आता है।

  • ऐतबार

    वो कफन था जो दामन-ए-यार बना फिरता था,
    मेरा वहम मेरे अंदर ऐतबार बना फिरता था..
    कुछ दिखा नही ज़माने में सिवाए मतलब के,
    एक मैं ही था जो दिलों में प्यार बना फिरता था..

  • झूठ भीतर छुपाए हुए हैं

    एक चेहरे से पहचान मत
    हम मुखौटा लगाए हुए हैं,
    सच नहीं है हमारा दिखावा
    झूठ भीतर छुपाए हुए हैं।

  • बेगुनाह

    बेगुनाही में अपने पास रख असर इतना,
    आसमाँ खुद कहे कि हाँ ये सही है बंदा..

New Report

Close