‘तू करले जितना अपने दिल पे इख़्तियार मगर, निगाह जानती है उसकी, अपना वार मगर.. ये भी मुमकिन है आज पहली दफा बच जाए, मगर बचेगा कहाँ और कितनी बार मगर..’ – प्रयाग मायने : […]

गमज़दा सा हूं ;उसके लिए जो तुमने मेरे साथ किया। और बहुत ही निशब्द सा है, यह दर्द जो तुमने मुझे हर पल दिया। मगर रहे तू हमेशा बाग़-बाग़ , चल छोड़ो ! हमने तुम्हें […]

‘तेरे एहसास में रहूँगा मैं असर बनकर, या कभी दिल में ही साँसों की रवानी बनकर.. संभालकर मुझे रखना है इम्तेहान तेरा, अब मैं रहूँगा तेरी आँखों में पानी बनकर..’ – प्रयाग मायने : रवानी […]

हम खूबसूरती को अलग पैमाने से आंकते हैं, वे चेहरा देखते हैं, हम दिल में झांकते हैं। 1। हजारों बार कान भरे फिर भी हमें बदल नहीं पाये वे ऐसा क्यों करते हैं आशय नहीं […]

दूसरे को ठेस देने से पहले यह याद रखो चोट दिल पर लगेगी अहसास रखो चार दिन की जिंदगी में नफरत नहीं प्रेम पास रखो ककड़ी सी शीतल तासीर रखो जलेबी सी गर्म मिठास रखो […]

‘सोचता हूँ तो हर वजह ही बेवजह सी लगे, मेरी साँसों से मेरे दिल का वास्ता न होता तो क्या होता…? मुझ पर से गुज़र कर न जाने कितने चले गए, मैं औरो के मक़ाम […]

‘ये चाहता मैं भी हूँ के ठोकरें लगती रहें तेरी, तुझे मैं याद रख सकूँ, ये आग जलती रहे मेरी.. मेरे सब्र को मेरी बेबसी की इन्तेहाँ मत समझना, ये तूफाँ का इशारा है जो […]

‘इतना कुछ लिखा गया फितरत किताबी आ गई, ज़िंदगी के मंच पर जुर्रत खिताबी आ गई.. उंगलियाँ उठी तो अल्फाजों को ताकत मिल गई, सवाल इतने उठ गए हाज़िरजवाबी आ गई..’ – प्रयाग मायने : […]

‘लड़ा था खुद से ज़मीं पर तेरी खुशी के लिए, फलक में रहके खुदा से भी जंग वही होगी..’ – प्रयाग मायने : फलक – आसमान

“गौर से देख तू इस दिल के उजड़े मंज़र को, है जो खंडहर कभी आबाद हुआ करता था.. वो जिसे ‘अदना सा शागिर्द’ लोग कहते हैं, वो कभी इश्क में उस्ताद हुआ करता था..” – […]

कोई मुझे समझाओं, मैं समझना चाह रहा हूं, ये ग़म की आंधी है, वो उड़ जाएंगी, ज़रा सा दिल्लासा दो, मैं तड़पे जा रहा हूं। अरे! कोई थोड़ा सा तो प्यार जताओ मुझे मैं तरसे […]

‘दिखा दिया ये तज़ुर्बा भी ज़िन्दगी ने हमें, हैं कितने शख्स ज़हर, और दवा है कितने.. न रोशनी को इल्म, न ही चिरागों को पता, है कितने बुझने और मंज़ूर-ए-हवा हैं कितने..’ – प्रयाग मायने […]

‘उथल-पुथल सी मुसलसल है ज़ेहन में मेरे, सुकून-ए-इश्क मगर बेशुमार है मुझमे..’ – प्रयाग मायने : मुसलसल – सिलसिलेवार/लगातार ज़ेहन – दिमाग सुकून ए इश्क – इश्क का सुकून

‘वो शख्स, खुद ही जो खाली हो अपने अंदर से, वो दूसरों को खालीपन के सिवा क्या देगा.. झूठ की परतों को परतों पे चढ़ाने वाले, तेरे किए का सिला अब वो आसमाँ देगा..: – […]

‘किनारे रखके ज़माने की नेमतें ए खुदा, मैं तुझसे माँगता फिरता था बस उसे लेकिन.. मेरी मासूम हसरतों को अधूरा करके, दर्द के काम आ गए वो हादसे लेकिन..’ – प्रयाग मायने : नेमतें – […]

‘कुछ इस तरह ज़िन्दगी का फसाना बदल गया, वो क्या बदला कि सारा ज़माना बदल गया.. रिश्तों पर बेरूखी का असर कुछ यूँ हुआ, उसका रूठना बदला तो मेरा मनाना बदल गया..’ – प्रयाग

‘न दुआ लगती है, न मुझको दवा मिलती है ज़ख्म दुखता है अगर उसको हवा मिलती है.. किसी तरह से उसे दिल से निकाला था मगर, वो अगले पल ही मुझे मुझमे रवाँ मिलती है.’ […]

‘गाँव में हाथ, कई हाथ थामे रखते हैं, शहर में खींचने को सिर्फ पांँव होता है.. तरक्की कहने को कितनी ही की हो शहरों ने, यूँ कुछ भी कह लो मगर गाँव, गाँव होता है..’ […]

‘तुझे तो रोक न पाया, किसी तरह लेकिन शायद मैं तेरी याद को नाकाम कर सकूँ.. तू खुद नही मौजूद तो तेरा खयाल है, इतना तो दे दे वक्त के कुछ काम कर सकूँ..’ – […]

‘तेरे खयाल से बस ये सवाल पूछा है, किसी तरह से यूँ खुद को संभाल, पूछा है नही मिला है जब, कोई हमें अयादत को, तेरी ही बेरुखी से अपना हाल पूछा है..’ – प्रयाग […]

‘कुछ दुआ का असर है, कुछ दवा का असर है या फिर ये तेरे शहर की हवा का असर है.. दस्तकें देने लगी मोहब्बत ज़िन्दगी में अब, ये तेरे और मेरे दरमियां का असर है..’ […]

न उसे छोड़कर गया, न कभी जाऊँँगा इसी उम्मीद पर शायद वो ऐतबार करे.. मैं किये जा रहा हूँ अब भी मोहब्बत उससे, होके मजबूर वो कभी तो मुझसे प्यार करे.. – प्रयाग

‘आज कहता है दिल कि एक फैसला कर दूँ तुझे दुनियाँँ के सारे सुख कहीं से लाकर दूँ.. तूने उस उम्र में सीने से लगाया हर पल, तुझे इस उम्र में कैसे मैं अकेला कर […]