Category: शेर-ओ-शायरी

  • यह न समझो

    यह न समझो हम कभी रोये नहीं
    आसुंओं से चेहरा धोए नहीं।
    पी गए भीतर ही भीतर अश्रुजल
    बस दिखावे के लिए रोये नहीं।

  • अंधेरा इतना भी नहीं था

    अंधेरा इतना भी नहीं था कि रोशनी में अपनी जगह बना सके,
    और रोशनी भी इतनी नहीं थी कि अंधेरे को मिटा सके,

  • तुम्हें तुम्हारी ताजगी मुबारक…

    तुम्हें तुम्हारी ताजगी मुबारक ,
    मुझे सुखें पत्तों से प्यार है,
    तुम्हें नाज है अपनी खूबसूरती पर ,
    मुझे तेरी सीरत से प्यार है,
    तू खुश है इस नएपन से,
    मुझे तेरी नादानी से प्यार है।

  • इस कदर गुज़रेंं हैं..

    ‘इस कदर गुज़रेंं हैं हम इश्क के दौर से,
    दिल धड़कता है यहाँ, सदा आती है कहीं और से..’

    – प्रयाग

    मायने :
    सदा – आवाज़

  • दीवाने

    पत्थर को पत्थर से मारे तो क्या मारे ए दीवाने ।
    दिल को जरा शीशे बना कर वार करो तो जाने।।

  • हां मान लेता हूं…

    हां मान लेता हूं ,
    अब नहीं होता ,पहले जैसा,
    बार-बार वो इजहार करना ,
    मगर मैं उस कस्तूरी-सा
    जो कपड़ा फट जाए ,
    मगर खुशबू नहीं छोड़े।

  • शेर

    बेवफाई के बाजार में ए दोस्त
    वफाई नहीं मिलती।
    सब है यहाँ धोखेबाज़
    कोई प्रेम कली खिलती
    तो कैसे खिलती ।।

  • कभी खामोशी के साथ….

    कभी खामोशी के साथ ,
    चार कदम चल कर तो देखो !
    अपने वजूद का एहसास;
    पल भर में हो जाता है।

  • बदल कर रख दी मैंने.…

    बदल कर रख दी मैंने अपनी सारी आदतें ,
    मगर तुम पत्थर ही रहे..

  • मंजर

    आंखों को बंद करने से,
    दुखों का मंजर छुप नहीं जाता।
    तब और उभर कर नजर आती है,
    उनकी गहराईयां।

  • होश अब नहीं रहा…

    होश अब नहीं रहा इंसानियत का,
    बेसुध से सब हो गए हैं ,
    जाने कैसा है यह नशा
    अपने भी गुम हो गए हैं।

  • ए चाहत

    एक दिन दिल ने जब कहा ,
    वहाँ दग़ाबाज़ों का बसेरा है।
    नादान चाहत से तब मैं कहा ,
    संभल वहाँ जरूर कोई सपेरा है।।

  • जख्म

    हर जख्म छिपा करके
    हंसने की कोशिश कर रहा हूं|
    काश समझ लिया होता उसे भी,
    जो अब समझने की कोशिश कर रहा हूं|

  • कहीं न पा सकूं तो

    न बैठो दिल में मेरे
    इस तरह से आशा बन,
    कहीं न पा सकूं तो,
    दुःखी रहेगा मन।
    तुम्हारे साथ बिना
    रह नहीं सकता,
    तुम्हीं हो सांस मेरी
    तुम ही दिल की धड़कन।

  • अंधेरी रात में

    अंधेरी रात में
    आशा एक चिराग हो तुम,
    इस बियाबान में
    संगीत का एक राग हो तुम।

  • आस पलती रही

    वक्त थम सा गया, और ज़िन्दगी चलती रही।
    तेरी याद बहुत आई, तेरी कमी खलती रही।
    फ़िर ढूंढ़ने निकल पड़े तुझे, आंख के आंसू मेरे।
    खैर, तू मिला नहीं, पर मिलने की आस पलती रही।

  • जज़्बात

    आज कैसे – कैसे हुए जज़्बात के रोना आया,
    बीती किसी बात पे रोना आया।
    एक दुखती रग है, गर दबा देता है कोई,
    नहीं मिलती उस दर्द से निजात पे रोना आया…

  • पल दो पल

    कर ले ख्वाईश पुरी जो आज तुम्हारे दिल में है।
    क्या पता कल मैं रहूं या न रहूं ए किसने देखा है।।

  • अरमान भरे दिल

    कहीं खुशियों के दीप जले,
    कहीं अरमान भरे दिल।
    कहीं पे हो गईं, राहें लंबी,
    किसी को मिली मंज़िल।

  • नारी और कविता

    चलो हम फिर नारी पे, एक सुंदर कविता रचे।
    नारी जीवन से प्रेरित रचना ही कविता में सजे।।

  • घात

    मेरी मुहब्बत को उसने
    भरी महफिल में तमाशा बना दिया।
    मैने जब दी उसे तोहफ़ा,
    तब उसने ज़हरीली मुस्कान लेती हुई
    मेरे मुंह पे फेंक दिया।।

  • बहुत कुछ जान कर जाना है…..

    बहुत कुछ जान कर जाना है तुझको,
    बड़ी मुश्किल से पहचाना है तुझको।

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  • आज रह-रह के वही..

    ‘आज रह-रह के वही शख्स याद आता है,
    मैं उसे जब भी मनाता था, मान जाता था..
    मेरे ज़ाहिर से ग़म भी आज ना दिखे उसको,
    जो बारिशों में मेरे आँसू जान जाता था..’

    – प्रयाग

  • ठहरे पानी के ही मानिंद..

    ‘ठहरे पानी के ही मानिंद अपनी फितरत थी,
    न जगह छोड़ी और न ही किनारे तोड़े..’

    – प्रयाग

    मायने :
    मानिंद – तरह/समान

  • हिंदी के जहाज

    यूं ही नहीं चीर रहे हवाओं को जहाज हिंद के
    पाक की नापाक आंखों की तकरार जांचने बैठे हैं
    हम चीन की छोटी आंखों की गुस्ताखियां देखना चाहते हैं तभी आज घड़ी के कांटे की रफ्तार जांचने बैठे हैं

  • चमचों का हिस्सा

    मेरे देश पर भ्रष्टाचार की
    तलवार तो कुछ ऐसे पड़े
    थाली में भोजन से ज्यादा
    अब चमचे हिस्सा लेने खड़ी

  • हमें औरों-सा ना समझ…

    हमें औरों सा ना समझ,
    आंखों से और बातों से,
    इरादों को भांप लेते हैं।
    ये झाड़ पर चढ़ाना,
    मीठी-मीठी बातें बनाना,
    यहां नहीं चलेगा,
    हम स्वार्थ की चाह को,
    दिमाग़ से अपने; थोड़ा जांच लेते हैं।

  • मेरा रक़ीब

    मेरा दिल ही मेरा रक़ीब है,
    मैं भुलना चाहता हूं, उसे
    और ये याद करता रहता है।

  • तुम जाओगे…

    तुम जाओगे ,कल नहीं;
    आज चलें जाओ,
    छोड़ जाओ, रोकूंगा नहीं,
    मगर काम ज़रा-सा करके जाओ,
    फिर कभी टोकूंगा नहीं।
    ये यादें जो घर बनाएं बैंठी है दिल में,
    ज़रा मेहरबानी ! ले जाओ,
    फिर कभी भी; ईमान से, कोसूंगा नहीं।

  • प्यार कम होगा नहीं

    ये गिले -शिकवे कहूं तो
    मित्रता में लाजमी हैं,
    प्यार कम होगा नहीं,
    जो कल दिखे थे आज भी हैं।

  • देनी होगी ताकत अब..

    ‘देनी होगी ताकत अब दरख्तों को ज़िंदा रहने की,
    वो आज हमारी राख को मिट्टी समझ बैठे हैं..’

    – प्रयाग

    मायने :
    दरख्तों को – पेड़ों को

  • अगर मैं गलत निकली…

    अगर मैं गलत निकली तो
    कुछ भी हार जाऊंगी,
    लगा लो शर्त मुझसे तुम
    यकीनन हार जाओगे..

  • मेरी सखियां..

    मेरी क्या मजबूरियां हैं
    कैसे बताऊं तुम्हें!
    मेरी सखियां भी कहती हैं
    तुम बात क्यों नहीं करती …

  • ऐतबार..

    कैसे होगा ऐतबार उन्हें
    वफा पर मेरी,
    आजकल बहुत झूठ
    बोलती हो !
    वो कहा करते हैं…

  • कांटे बिछाते क्यों हो?

    जब तुम्हारे और मेरे रास्ते अलग हैं तो
    मेरे रास्तों में आकर कांटे क्यों बिछाते हो?
    कोई मोहब्बत नहीं है हमसे अगर
    तो एहसान जताते क्यों हो?

  • चीन

    फौज की तादात बढ़ाने से
    कुछ नहीं होगा चीन
    जंग जीतने के लिए
    शेर-सा जिगरा होना चाहिए..

  • आजकल

    आजकल वह बड़ा बेचैन रहते हैं..
    हम जो जरा हँसकर किसी से बोल देते हैं..

  • मेहनत करने वाले

    मेहनत करने वाले मंजिल को पा जाते हैं
    और बेचारे कामचोर गाल पीटते रह जाते हैं..

  • पतन की बात

    जो नाउम्मीदी की डगर से गुजरते हैं
    वो ही शक्स पतन की बात करते हैं..

  • खैरात

    मंजिल पाने के लिए मैंने किसी से खैरात
    नहीं मांगी..
    अपनी मेहनत से बुलंदियां हासिल की
    हैं..

  • एक अर्से के बाद

    बड़ी बदनामियां उठाने के बाद
    आज मैं फिर मुस्कुराई…
    एक अर्से के बाद जब मेरी
    जान लौट आई…

  • नाराजगी

    हम तो आपकी चाहत में ,
    फ़लक से सितारे तोड़ कर लाए है ।
    जरा चाँद से हो गई है नाराजगी,
    बस यही आपसे कहने आए है ।।

  • फरिश्ता

    नाउम्मीदी से अश्क का गहरा रिश्ता है।
    तभी तो बने है वो आज का फरिश्ता।।

  • ठोकर

    पत्थर समझ के ए ज़माना, मुझे ठोकर पे ठोकर न मार।
    कभी कभार पत्थर भी बन जाता है तलवार की धार।।

  • हुकुम

    🌹🌹आते रहा करो हुकुम है हजूर का🌹🌹
    अब कैसे कहें मिलने को हम खुद भी तरसते रहते हैं

  • आंख का पानी

    कभी नाउम्मीद हो जाती हूं जब उनसे,
    फकत दो बूंद गिरती हैं मेरी आंख से।
    चैन सा आता है,
    बहुत पानी है बॉडी में ,मेरा क्या जाता है।
    ———— फकत मतलब केवल
    विज्ञान के अनुसार हमारे शरीर में 70% पानी होता है।

  • मुश्किलें बस ये दिखाने को..

    ‘हैं जबकि और भी कितने ही दर ज़माने में,
    क्यूँ फकत मेरे ठिकाने को चली आती हैं..
    कितने मौजूद मददगार हैं यहाँ तेरे,
    मुश्किलें बस ये दिखाने को चली आती हैं..’

    – प्रयाग

    मायने :
    फकत – सिर्फ

  • आपको सपने में देखा

    आपको सपने में देखा
    क्या गलत देखा बताओ,
    दूर हमसे से हो गए हो,
    स्वप्न ही तो बन गए हो।

  • गंगा

    गंगा स्वच्छ है तो देश स्वच्छ है।
    यानी नारी ही देश की गंगा है।।
    इनके ही पवित्रता से ।
    हर दिन नया प्रभात उगा है ।।

  • दिल पर जो गुज़री थी..

    ‘ दिल पर जो गुज़री थी उसे कुछ और ही रंग दे दिया मैंने,
    आजकल बहुत खुश हूँ किसी ने पूछा तो कह दिया मैंने..’

    – प्रयाग

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