ढूंढती रह गई बस तुझे हर दर पर तू मिला नहीं तो देख मैं चांद में खो गई तुझे ढूंढने की चाहत में मैं खुद सितारा हो गई।
ढूंढती रह गई बस तुझे हर दर पर तू मिला नहीं तो देख मैं चांद में खो गई तुझे ढूंढने की चाहत में मैं खुद सितारा हो गई।
तेरे बिन जिंदगी कैसे बताऊंगी तू तो दूर चला गया पर मैं दूर कैसे जाऊंगी। मेरी हर सांस की अमानत हो तुम समझ नहीं आता तुझ बिन कैसे जी पाऊंगी।
धरती से उठ कर हमीद हो गया। माँ तेरा लाल आज शहीद हो गया।।
जंगबाजों से पूछ कितना मजा हैं देश के कुर्बानी में। हम मर कर भी अमर है हिन्दुस्तान के इतिहास में।।
ए माँ देख आज हम भी, अपने वतन पे शहीद हो गए। इतिहास के पन्ने पे फिर, एक सिपाही के नाम जुड़ गए।।
है कोई दरवाजा जो अभी तक बंद है मेरे दिल को अभी तुमने देखा ही कहां है
जरूर वहाँ कोई खड़ा है, रात के अंधेरे में। लगता है डर घेर लो, अपने बांहो के घेरों में।।
जब राहत के दवा लाया राहत इन्दौरी से । तब उतरने लगा इश्क़ ए बुखार मेरे सिर से।।
ए सनम स्याही नहीं है तो क्या हुआ । तेरी नैनो के स्याही से काम चला लुंगा।।
जिसकी कामयाबी का चर्चा चारों ओर हो गया वह जाने क्यों अब खामोश हो गया जाने कैसा सितम ढाया होगा इस जिंदगी ने उस पर जो महफिलों का सितारा था वह सितारों में खो गया
इन कलाकारों की दुनिया में जाने कितने ही दुख होते हैं मुस्कान मुखौटा पहन लिया अब भीतर- भीतर रोते हैं
जब कमी हो जाती है अपनों से साथ निभाने में तब दुख के दलदल में डूबे तो मौत ही साथ निभाती है
ए खुदा तू ने जो उन्हें, खुबसुरती से बनाई। लूट गयी कई शायरों की, खुद की खुदाई।।
हम तो लूट गए ” फिराक ” इश्क़ के बाजार में। मरज़ीना जब जीना दुशवार किया कायनात में।।
कहीं दिल पे नश्तर , तो कहीं नश्तर पे दिल। ज़माना खराब है ग़ालिब जरा संभल के मिल।।
दो गज के फंदे से खुदको क्यों मार गए इस बेरहम दुनिया ने अब क्या किया जो खुद से ही हार गए चंद शब्द कहता हूँ RIP सुशांत सिंह राजपूत के लिए 🙏🙏
सिक्के इकट्ठा करके कोई धनवान नहीं होता। एक हीरा हीं काफी है जहाने अमीरी के लिए।।
कुछआम ऐसे होते हैं जो खाए नहीं जाते। जब खास के साथ हो तो सताए नहीं जाते।।
वो इंसान अपने हर काम में फंसता है जो दुसरो के दुःख पे हँसता है !
मुहब्बत के नश्तर मिटाने वाले, तुझे क्या पता है चाहत ए आलम। तू ने कभी मुहब्बत 💘की ही नहीं, तू क्या समझे मेरे दर्द ए आलम।।
फ़रेबी से पूछो फ़रेब के सुत्र। बहुत दिव्य है ए मूल मंत्र।।
कहते है इश्क़-ए-लत, बहुत बुरी बला है। फिर भी लोग,अपने को कहाँ सँभाला है।।
भूतकाल के डर को वर्तमान में ख़तम कर भविष्य आगे भड़ाना है तुझे कुछ कर दिखाना है तुझे कुछ कर दिखाना है दुनिया के जाल से निकलकर तुझे अपना मान बढ़ाना है तुझे कुछ कर […]
ऐ ज़िन्दगी मैंने तुझको दिया क्या है तेरे लिए किया क्या है तूने मेरे गम पे खुशियों के वस्त्र ढक दिए तेरे लिए मैंने सिया किया है ना रखा तुझे खुश ना रखा ऐशो आराम […]
तुम्हारी जुल्फों की कैद मिले तो हर गुनाह कर जाऊं । कत्ल करूं कातिल बनूं फिर तेरे पहलू में आऊं। वीरेंद्र
कोई किसी के सुख में सुखी ना होये ना होये किसी के दुःख में दुखी बदल रहे नकाब बस कुछ मतलबी
नजरों को बस तेरी ही तलाश रहती है सुकून भी बस तेरे ही साथ आता है, मुलाकात भले ही ना होती हो हमारी पर सारा वक्त तेरी याद में गुजरता है।
सितम गैरों की बस्ती में सही मेरा भी नाम हो जाए मेरी नींदें छीन कर चैन से सोने वाली आज की रात तेरी नींद भी हराम हो जाए वीरेंद्र
हर बीमारी का हल दवा नहीं होती हर छोटी चीज़ रवा नहीं होती भुज जाते है दीये कभी तेल की कमी से हर बार कुसूरवार हवा नहीं होती – हिमांशु ओझा
जिन्हें पाने की चाहत में, मैं सदा अपनों से लड़ता था वो देंगे दग़ा हमको कभी हमने ना सोचा था मिला आघात भी हमको उस मोड़ पे जा के जहां से लौट के आना बड़ा […]
कब्र की रात 🌃 है ,या कयामत की रात है। पूछ तो लूं मीर इशारा, आखिर किस तरफ है।।
शायद फिर किसी का आशियाना जला। जनाजे के संग फिर बे -वफा रोते चला।।
अश्कों के समंदर में ए ग़ालिब, गोता लगाए जा रहा हूँ मै। शाहील मुकद्दर में है या नहीं, बस यही सोचे जा रहा हूँ मैं।।
बनके दुश्मन बहार का नजारे बहार ढूँढते है। दिल में रख वैमनस्य जनाब प्यार ढूँढते हैं।।
जब लिखता था मैं, ग़ज़ल मयखाने में, तब सुबह से शाम हो जाया करता था। ए दोस्त जब वह आते थे सज धज कर, तब मेरी जान में जान आ जाया करता था।।
बड़ों की इज़्ज़त करने से इज़्ज़त कम नहीं होती, बल्कि कई गुना बढ़ जाती है।
हर तरफ तेरी याद का दर्द गहरा है ना जाने किस बात पर ये दिल ठहरा है, तेरी आँखों में ठहरे आंसुओं की कसम ए दोस्त! ये दर्द का रिश्ता बहुत ही गहरा है।
आजाद फिज़ाओ में बस है एक ही नाम बाँके बिहारी राधे राधे श्याम
बेबाक निशानियाँ रह गई बस तेरी याद ही रह गई बस
गूंजती फ़िजाओ में रंग कितनें बिखरे हैं और रेशम के धागे भी उलझे हैं, कितनी मशरूफ है ज़िन्दगी अपनी हम भी उलझे हैं वो भी उलझे हैं ।
डूब जाना तो आसान है मगर डूब कर पार होना बड़ा मुश्किल ।
चप्पे-चप्पे पर नज़र रखता हूँ मैं तो कश्ती हूँ जो हर दरिया पार करता हूँ ।
मोहलत कम दी है खुदा ने तुझे मनाने की पर तुझे तो आदत है बिन वजह रूठ जाने की ।
गिले शिकवे मत करो आज मोहब्बत का इरादा है तेरा इश्क भी कम है मेरा दर्द ज़्यादा है
गिले शिकवे मत करो आज मोहब्बत का इरादा है तेरा इश्क भी कम है मेरा दर्द ज़्यादा है
अफसोस नहीं होता है मुझे तेरे दूर जाने का मै तो शुक्र गुजार हू तेरे बेवफ़ा हो जाने का
सोचता हूँ मैं कि कब आयेगी बहार बगिया में? कब महकेंगे सुगंधित सुमन दिल के आँगन में?
अपनी मासूमियत पर भी शक करते हैं लोग हम जो पानी भी पियें तो शराब कहते हैं लोग ।
मैं अपने फ़ैसले खुद लेता हूँ और कोशिश करता हूँ कि उन फैसलों पर कभी पछताना ना पड़े ।
इरादा बुलंद रखता हूँ मेहनत खूब करता हूँ ऊपर वाले की मोहलत के हिसाब से सब करता हूँ ।
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