मैं खुद बनाता हूँ रास्ते अपने दूसरों के इशारों पर नहीं चला करता।
मैं खुद बनाता हूँ रास्ते अपने दूसरों के इशारों पर नहीं चला करता।
बाजुओं में दम रखने वाले मुकद्दर से नहीं डरा करते।
कितना गरूर था डगर को अपने लम्बे होने पर लेकिन एक गरीब के हौसले ने उसे कदमों में नाप दिया ।
गमे-फुर्सत जब से मिली बड़ा बेफिक्र सा रहता हूं, अब तो जहान बड़ा खूबसूरत लगता है और अनगिनत ख्वाबों को सच करता रहता हूं।
इस बंजर-सी धरती पर कुछ अश्कों के बीज बो लेता हूँ। जब जब तुहारी याद आती है तो छुप छुप के रो लेता हूँ।।
कभी कभी हम किसी को कुछ ऐसा कह देते हैं कि कहने के बाद पछताना पड़ता है बड़ी तकलीफ होती है ऐसे शब्द मुंह से निकालने के बाद बड़ा अफसोस होता है अपनी गलती पर।
किसकी की किस्मत है जो बस खुशियां ही खुशियां पाए खुशी और गम तो धूप और छांव की तरह जिंदगी के हर कदम पर आते जाते ही रहते हैं आज खुशी है तो कल गम […]
निष्ठुर है क्यों ये जहान मेरा कभी भी गम के सिवा कुछ दिया ही नहीं ।
कौन कहता है बहार- ए-चमन में फूल नहीं। हैं तो बहुत प्रीतम मगर वो सब तेरे समतूल नहीं।।
अकेला होता है जहान में हर कोई बस रिश्तो के झमेले होते हैं जिंदगी गुजारने को कुछ ख्वाब ही जरूरी होते हैं
तुम्हें तो कोई फिक्र ही नहीं बेपरवाह घूमते हो यहां दिन-रात गुजरते हैं बस तुम्हारी फिक्र में
बेचैनियां बटोर के सारे जहान की खुदा ने मेरा दिल बना दिया और खूबसूरती कल्पनाओं की मेरे मुकद्दर में डालकर मुझे शायर बना दिया।
तंबाकू खाने से होता है टीवी कैंसर इसलिए इसे खाना करो आज से कैंसिल
तंबाकू निषेध दिवस है आज आज प्रण करो तंबाकू सेवन मत करो वरना सब लुट जायेगा तेरी तलब ही तेरे मौत का कारण बन जाएगी
Love
सच है तुम्हरा इरादा भी मगर मैं तो इश्क के बगैर जी ही नहीं सकता।
लड़ाई किस्मत से है तुझसे नहीं ए ज़िन्दगी! तू परेशान बेकार होती है ।
जब हमें तुम याद आये रात भर आंसुओं ने ग़म बहाये रात भर। ख़्वाब कितने ही सजाये रात भर जिनको चाहा वो न आये रात भर। एक सूरज ढल गया जब शाम को चांद तारे […]
अब मैसेज से ही काम चलाना। यही कहे आज कोरोना जमाना।।
संभल संभल दिल ए नादान। यहाँ कोई नहीं इश्क़ ए क़द्रदान।।
पागल, आवारा, लोफर, दीवानापन, यही इनाम मिला है मुझे। कागज की किश्ती दरिया में नहीं चलती, यही कहते हैं वो मुझे।।
यूँ ना बुलाओ करके नजर के इशारे इस दिल पे तो डाका पर जाएगा। भला तुम्हारा क्या बिगड़ेगा मेरा सब कुछ लुट जाएगा।।
ज़िन्दगी में गर किसी को, कोई खाश नहीं रहता। किसी को आज किसी का, इंतजार ही क्यों रहता।।
तुम्हारे भोलेपन से हीं मुझको बहुत प्यार है। वरना इस दुनिया में दिल लगाने को बथेरे यार हैं।
Jindagi ki raho me kahi to daga kha gaye ham , jaha se chale the fir wahi aa gaye ham.🤔
पर्वत से निकली खिल-खिल गंगा सागर में जाकर शांत हो गई। जान गई जंजाल में तो उड़ती चिड़ियाँ भी शांत हो गई।।
ना छेड़ कुदरत को कुदरत परेशान हो जाएगी। इसकी परेशानी के संग संग तेरी जान जाएगी।।
कुदरत के संग बदफेली के खुद हीं हम शिकार हो गए। आबोहवा संग धरती भी तो दूषित हो गई और हम बीमार हो गए।
सीडियाँ अनगिनत चढ़नी पड़तीं हैं, जब पानी होती है इश्क की मंज़िल ।
किस ओर गया मेरा सुकून फकत इतना-सा बता दे कोई, दिन-रात आगोश में रहता हूँ बेचैनी के ।
ले गया दिल ए नशाद! मुझे जाने कहाँ , जब एक निगाह उसने कर दी मेरी तरफ।
ली गया दिल ए नशाद! मुझे जाने कहाँ जब एक निगाह उसने कर दी मेरी तरफ
रहने देंगे हम तुम्हें लोगों के करीब तुम खुमार में रह लो थोड़ा शरीक
जैसा कहिये वैसा करिये ऐसे लोग जहां में कम ही होते हैं अपनी कथनी और करनी में जो कोई फर्क न करे ऐसे लोग बड़ी मुश्किल से मिलते हैं
ए मेहज़बी , दिलनशी , मेहक़शी , ए गुलबदन । नजरे चार हो उससे पहले ले आए अपनी कफ़न ।।
उनका महकना भी एक अजीब अदा है। इसलिए तो हर शायर उन पर फ़िदा है।।
ए ग़ालिब जरा जरा देख तो सही, कहीं वो वही बे -वफा तो नहीं। जो कभी दिल के बदले दर्द दिया था, कहीं वो वही ज़हरीली नागन तो नहीं।।
माना अपनी जवानी पे जोड़ नहीं। फिर भी हम किसी से कम नहीं।।
नजरों से बातें होती है और जुबान खामोश है। अजीब सी दुनिया है ये मधुर प्रेम का आगोश है ।।
तन मन 💕 में आग 🔥लगाए ए जलता पानी। जरा थम थम के बरस ए बरखा रानी । ।
पूरब से बही सावन के बयार। झूम के आयी बरखा बहार।।
तेरी यादों में डूबी रहती हूँ , तेरे इश्क को ही मैं इबादत कहती हूँ ।
सावन के एक एक बूंद गिरा जो मेरे होंठों पे। कैसे बयां करू अपनी उल्फतें दासतां सुर्ख होंठों से।।
सिस्कियाँ लेता रहा मैं उसकी याद में रात भर वो पानी पी-पीकर हिचकियाँ लेती रही ।
अकेला रह जाऊँगा माँ मैं तेरे बिन तू छोड़ कर ना जाना मेरा दामन
जब पहुँचा था उनसे मिलने मैं बड़ा जोश में था , वापस आया तो लुटी हुई दुनिया लेकर ।
यह धरती बोले काँटे मत बोना हे मानव! फूल ही फूल उगाना बन कर महक तू हर ह्रदय को महकाना
खुदा! अगर थोड़ी मोहलत और दे मुझे तो मेरी तकदीर में कितनी मोहब्बत लिखी है देखना चाहती हूँ मैं ।
Geet ban kar gungunauga mai tumhare kaano me
तुम लाखपति हो गए कोरोना आखिर मेरे भारत में। हम मध्ययबर्गी मिल गए देखो आज कितने गारत में।।
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