किसी को मत गिराया करो
लंगड़ी देकर,
किसी को मत रोका करो
टंगड़ी दे कर।
दुनिया में तो कैसे कैसे पहलवान हैं,
कमजोर को
मत डराया करो
धमकी देकर।
Category: शेर-ओ-शायरी
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किसी को मत गिराया करो
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शायरी
तूम सागर हो तो ,
हम लहर है तुम्हारी।
तुम वजा हो; उसकी ,
जो लगी है हमें बीमारी।
शायद ही कोई लम्हा हो,
जब आए ना याद तुम्हारी।
अब ख़ुदा ही जाने ,
क्या खता हुई हमसे ,
जो आई ना याद तुमें हमारी। -
आज पहली बार
हंसता चहरा रो दिया,
आचंल पूरा भीगो दिया,
आज पहली बार।
बन्जर है अब दिल की जमीं,
शायद कुछ थी हम में ही कमी,
मायूस दिल है रो दिया,
लगता कुछ है खो दिया,
आज पहली बार……….। -
आत्मा
बैरन हुई है दुनिया जब से तुम से नजर मिली
तेरे प्रेम जाल में फंस कर ही यह आत्मा स्वतंत्र हुई। -
दर्द की भावुकता
दर्द की भी भावुकता देखो,
दर्द से मेरे वो पिंघल गया।
काश तुम्हें वो मिल जाए,
इतनी सी दुआ, वो भी कर गया। -
विश्वास
हुक्के सी हैं लत्त तुम्हारी,
लगी जो ; हम से छुट्टे ना ।
और रेशम-सा हैं विश्वास हमारा
कभी जो तुमसे टूटे ना ।……… -
चमन
बारिश की बूँदों से डरना कैसा।
बिन पतछड़ का चमन कैसा। -
मंजिल
दोस्तो ! मेहनत मे दिन- रात देखा नही जाता।
मंजिल हो करीब तो मैदान छोड़ा नही जाता।। -
स्वागत
आये है आप तो स्वागत हम करेंगे।
मेहमान नवाज़ी का फ़र्ज अदा करेंगे।। -
प्रेम
चलो फिर से एक- दूजे से बिछड़कर देखते है,
प्रेम मे वियोग की पराकाष्ठा को हम देखते है। -
रियासत
रियासत है मेरी यह याद रखना,
तहजीब का चलन बरकार रखना। -
शायरी
आजकल वफ़ा और कदर सोने के भाव है,
मगर धोखा यहां पुलिस की तरह ,
हर चौराहे पर मिलता है। -
शायरी
एक दूसरे से प्यार करना ,
फिर एक दूसरे को समझना,
फिर शादी कर लेना,
और फिर खुशहाल जीवन जीना,
ये सब काल्पनिक सा लगता है। -
Nazar
NAZAR KO HAMANE NAZAR SE EK DIN
NAZAR MILATE NAZAR SE DEKHA MILI
NAZAR JO NAZAR UNKE NAZAR CHURATE NAZAR SE DEKHA -
अपनें मतलब ! स्वार्थ
अरे तुम होगें ,खिलाड़ी किसी बड़े मैदान के!
मगर मेरे अपनों से मुकाबला कहा होगा,
वो दिलो के साथ बहुत अच्छा खेलते हैं! -
एक बूंद
आ कर कब्र पे बेरहम एक बूंद 💧 आंसू गिरा दिया।
बिजली चमक के गिर पड़ी सारा जिस्म जला दिया।। -
वफ़ा की उम्मीद
हम अपनी बेबसी पर,
बेबस रहना पसंद करते हैं।
ज़माना लाख बेवफाई करें हमसे ,
हम अब भी वफ़ा की उम्मीद करते हैं।
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इल्तिजा
आशिक़ो के मज़ार के करीब,
ए खुदा दो गज़ ज़मीन दे देना।
गर हो गए वो वफा से बे- वफा,
तो सुन मुझे वहीं दफ़ना देना।। -
मिजाज
मत उछालो मेरे ज़हन को;
मत उछालो मेरे ज़हन को,
खिलौना समझ कर,
मेरा मिजाज कुछ कोयले सा है!
कब लपट बनजाए कुछ पता नहीं। -
बेचैनी
ए ‘ग़ालिब’ कहीं गिरे ,अश्क के सैलाब।
तो कहीं किसी के लिए , दिल है बेताब।। -
जमाना
ना रुकेगा ये वक्त
ना जमाना बदलेगा
सुख जायगा जब पेड़
तो ये परिंदा ठिकाना बदलेगा– हिमांशु ओझा
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बदले दोस्त
दोस्तों में दुश्मनी ने घर कर लिया,
ना जाने कैसे और कब कर लिया
मौसम बदले वो भी बदले,
उन्होंने दोस्ती का दूसरा दर कर लिया -
तबियत
इज़्ज़त कमाने निकला था
गुरुर कमा आया
पैसे कमाने के चकर में
तबियत बिगड़ आया– हिमांशु ओझा
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तुम्हारे हुस्न के मुट्ठीगंज में फंसकर
तुम्हारे हुस्न के मुट्ठीगंज में फंसकर
इश्क़ अरैल घाट में डूब जाता है।
दिल धड़कता था सिविल लाइन सा,
अब यादों का कंपनी बाग बन जाता है।।~सुरेंद्र जायसवाल (प्रतापगढ़)
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जहां ए इश्क
न बंदिशें रोक पायी तुझे
न मिन्नतों का असर हुआ तुझ पर
ए दिल बता आखिर
जहां ए इश्क में ऐसा किया दिखा -
जाँबाज
बज उठी सन सैंतालीस में, वह आज़ादी का डंका था।
हिमालय पे गाड़ दिए थे हम, वह भारत का तिरंगा था।। -
मन भौरा
शुभ रात्रि मैं कहता हूँ
पर अँखियों में है नींद नहीं।
मन भौरा है कैद में
ये कारा है अरविंद नहीं।। -
कहानी लापता है
कहानी लापता है, किरदार की खबर नहीं
फिर भी वहम है कि मेरा जाता ही नहीं -
शामत
आपकी चोटी के पेंच किसी नागन से कम नहीं।
कोई आप से टकरा जाए किसी में इतनी शामत नहीं।। -
नासमझ
जो अपनी खुद की पहचान छिपाये बैठे है।
वो नासमझ मेरे वजूद पर शर्त लगाये बैठे है।। -
किरदार
सबने अपने किरदार पर पर्दे डाल रखे है।
फैसला मेरा करेगे यह वहम भी पाल रखे है।
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उदासी
उदासी
मधुमक्खी के छत्ते सा है
ये ज़हान ,
यहां सब, मतलब से
झांकने वाले हैं।
अब किसे मैं यहां अपना कहूं,
यहां सब काटने वाले हैं ।
मां को छोड़कर,
सब लोभी है, ढोंगी है,
फरेबी है ।
जरा संभल कर ‘ मानुष ‘
यहां सब पीछे से झपटने वाले हैं।
——–मोहन सिंह मानुष
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ख्वाहिशें
मेरी ख्वाहिशें समुंदर जैसी गहरी हैं,
और तेरा प्यार आँखों के आँसू जितना छिछला। -
मैं लिखता हूँ रात भर
मैं लिखता हूँ रात भर कविता
तू सुबह पढ़ कर खुश होती है।
मैं जब कभी हँसता हूँ खुशियों में
मुझे तू हँसता देख कर रोती है। -
साथ निभाऊंगा तेरा
ख्वाइशें पूरी करूंगा मैं
तेरी आखिरी दम तकसाथ निभाऊंगा तेरा
धरती से फलक तक -
सूरज की किरण
सूरज की किरणें भी सुबह-सुबह कयामत ढा रही हैं,
पूछ रही हैं, कैसे हैं वो? जिनकी तुम्हें याद आ रही है।
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बुरा उन्हें कहूँ
बुरा उन्हें कहूँ तो ये बिल्कुल गलत बात होगी…….
शायद मैं ही बुरा हूँ तो उनसे मुलाकात क्यों होगी..?
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बदल गए हो तुम
जरूरत पड़ने पर आज मुकर गये हो तुम,
जमाने की तरह कितना बदल गये हो तुम।दोस्त!ये मंजर भी गुजर जायेंगे किसी तरह से,
पर आज चुप रहकर बहुत दर्द दे गये हो तुम।। -
शख्सियत मेरी
आरज़ू नहीं रखता कि पूरी कायनात में मशहूर हो शक्सियत मेरी।
जनाब! आप जितना जानते हो सच में उतनी ही है पहचान मेरी।। -
संवर कर
संवर कर आऊँगा जब तुम्हारी महफिल में ,
निगाहें तुम्हारी सिर्फ मुझ पर ठहर जायेगी।देखेंगे जब सब तुम्हारे होंठो पर हल्की-सी हँसी,
महफ़िल में हमारी मोहब्बत ही चर्चा बन जायेगी। -
दीया
उम्मीदों का दीया जलाकर
इस आशा में बैठे हैं
कल सूरज खुशियाँ लाएगा
चाँद सजाकर बैठे हैं -
तेरी सच्चाई
तेरी सारी सच्चाई जानता हूँ मैं
पर तेरी खुशी की खातिर मुझे
अनजान बनना अच्छा लगता है।
मैं चाहता हूँ तू अपने मुंह से
अपनी सच्चाई बता!
तुझे बेवफा बुलाना ना मुझे खराब लगता है। -
पंखों की उड़ान
सच बोलने वालों की जहां में कदर नहीं होती
इमानदारों के पास मखमल की चादर नहीं होती।
सो जाते हैं वह तो धूप की चादर बिछाकर
उनके सपनों में पंखों की उड़ान नहीं होती। -
जुदाई
तुझसे लंबी जुदाई सही ना जाएगी
तेरे जाने से मेरी आँख भी भर आएगी
हो ना जाना कहीं दूर मुझसे तू
तेरे बिन यह दीवानी मर ही जाएगी। -
आसमान हो गया
शाम से ढूंढती थी मैं तुझको
तू न जाने कहाँ खो गया
मैं तुझे प्रेम की धरती समझती थी
तू नफ़रत का आसमान हो गया। -
सुरूर
तुम्हारी ख्वाहिशों को पूरा करने आऊंगा जरूर
ना उतरा है ना उतरेगा तुम्हारी आँखों का सुरूर -
संकल्प लें
संकल्प लें कि समाज में शिक्षा का संदेश फैलाएंगे,
बेटा हो या बेटी सभी को एक साथ पढ़ाएंगे। -
अहमियत
किसी की अहमियत हमें तभी होती है
जब वह हमें छोड़ कर चला जाता है।
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और किसी की चाहत हमें तभी होती है
जब वह हमारे मुकद्दर में नहीं होता है। -
प्रेम-पिपासु
नारी का सम्मान करो हर पल
आने ना दो उसकी आँखों में आँसू,
ना धन चाहे ना दौलत चाहे
वह तो है प्रेम-पिपासु। -
तुम्हारे सपने
तुम्हारे सपनों में कोई आता है क्या?
तुम्हारे ख्वाब कोई सजाता है क्या?
जिस तरह मैं तुम्हारे आगे बिना गलती घुटने टेक देता हूँ
उस तरह तुम्हें कोई प्यार जताता है क्या?