बेवफाओं की कोई सूरत क्या होती है? नाखुदाओं की कोई मूरत क्या होती है? जब कौम की जागीरों में बँटा है आदमी, इंसानियत की कोई जरुरत क्या होती है? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

बेवफाओं की कोई सूरत क्या होती है? नाखुदाओं की कोई मूरत क्या होती है? जब कौम की जागीरों में बँटा है आदमी, इंसानियत की कोई जरुरत क्या होती है? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मौत हासिल होती है इंसान के मरने पर! मिलता है अंधेरा उजालों के गुजरने पर! क्यों खौफ-ए-नाकामी है हर वक्त जेहन में? जब दर्द ही रहबर है खुशियों के मुकरने पर! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

अरे ,ओ जिन्दगी से निऱाश आदमी सुनो— सड़क पर भटकते हो क़्यो सुनो। कुछ तो कर्म करो—– अपने स्थिति को देखो कुछ तो शर्म करो।। कब –तक कोसते रहोगे,अपने भाग्य को, अंधकार से निकलने का […]

मेरा इस दुनिया मे कोई ना रहा , मै बेसहारा हो गया। जो मुझे रास्ते दिखा रहे थे , वही पराया हो गया।। कैसे चलुँ,—–कैसे चलूँ मै तो बेसहारा हो गया, ऐ जमाने ना हँसों […]

टूटते ख्वाबों के अफसाने बहुत से हैं! चाहत की शमा के परवाने बहुत से हैं! एक तू ही नहीं है आशिक पैमानों का, जामे‍‌-मयकशी के दीवाने बहुत से हैं! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

दर–दर ठोकर खाया हूँ, जीवन से भी मै हारा हूँ। दे–दे सहारा —- तेरे पास मै आया हूँ।। नही मंजिल मिली नही किनारा,मुझे दे–दे सहारा, मेरा कोई नही ठिकाना है! मै हूँ बेसहारा– मुझे दे– […]

दर–दर ठोकर खाया हूँ, जीवन से भी मै हारा हूँ। दे–दे सहारा —- तेरे पास मै आया हूँ।। नही मंजिल मिली नही किनारा,मुझे दे–दे सहारा, मेरा कोई नही ठिकाना है! मै हूँ बेसहारा– मुझे दे– […]

तेरी याद है दिल में दर्दे–तन्हाई सी! ख्वाहिशों की शक्ल में तैरती परछाई सी! चाहत हर पल गूँजती है मेरे सीने में, तेरी तमन्नाओं की जैसे शहनाई सी! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

पटना, छपरा दरभंगा तक सुख गया दाऱू का प्याला, हाजीपुर के पुल पर केले अब बेच रही मधुशाला। महफिल भी रूठ ग़यी , और नाच खत्म नागिन वाला। शांत– शांत अब लगे बराती—– जैसे लग […]

सुन ले पाकिस्तान, कश्मीर का ख्याल भी दिल मे मत लना। वरना जो भी दिये है,वो भी छीन लेगे पाकिस्तान।। अबकी बार कोई गलती मत करना कश्मीर पर वरना छीन लेगे—— १ अलतीत फोर्ट २ […]

आज की नारी पड़ गयी भारी, कोई ना पार पाए ऐसी करती होशियारी। जीवन इसका WhatsApp पर व्यस्त रहता , चल जाए भाड़ मे दुनिया सारी। आज की नारी– फैशन की बात इससे ना पुछो […]

छोड़कर सब कुछ यहीं पर एक दिन जाना है, लगा एक अजीब सा सदमा। आज तक जो किया कुछ ना हो सका अपना।। अगर यही हकीकत है,तो क्यो खुनी रात खेलते है,हम। तो क्यो खेत […]

आओ करीब तुम नूरानी रात हुई है! चाहत की फिर से दीवानी रात हुई है! तोड़कर जमाने की जंजीर-ए-रस्म को, आओ करीब तुम मस्तानी रात हुई है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मैने उसको, जब-जब देखा । सजते देखा, धजते देखा, संभलते देखा !! मैने उसको, गलियो मे सदियो से किसी का इंतजार करते देखा। मैने उसको जब– जब देखा हाथो मे पत्थर देखा।। ये जमीन तुने […]

हुआ बहुत अत्याचार —– अब हर घर से भगत सिह , सुखदेव निकलना चाहिए। रोज जो चेहरे बदलते है,लिबाजो कि तरह अब उसको फाँसी पर चढ़ाना चाहिए।। भगत, सुखदेव तुझ पर बहुत हुए अत्याचार, अब […]

मैं कैसे कह दूँ तुमसे प्यार नहीं रहा! तेरी गुफ्तगूं का इंतजार नहीं रहा! हर वक्त खिंचती हैं जब तेरी अदाऐं, मैं कैसे कह दूँ दिल बेकरार नहीं रहा! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तुम जो मुस्कुराती हो नजरें बदलकर! नीयत पिघल जाती है मेरी मचलकर! चाहत धधक जाती है जैसे जिगर में, हर बार जुस्तजू की आहों में ढलकर! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मैं कबतलक तेरा इंतजार करता रहूँ? मैं कबतलक तुम पर ऐतबार करता रहूँ? मुझे खौफ सताता है तेरी बेरुखी का, मैं कबतलक खुद को बेकरार करता रहूँ? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मैं कबतलक तेरा इंतजार करता रहूँ? मैं कबतलक तुम पर ऐतबार करता रहूँ? मुझे खौफ सताता है तेरी बेरुखी का, मैं कबतलक खुद को बेकरार करता रहूँ? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

एक उम्मीद फिर हाथ से छुट गयी, देखते ही देखते एक और रिस्ता टुट गई। इस तरह तोड़ा है— मतलबी दुनिया मेरा दिल । अब जिन्दगी भी हमसे ऱूठ गयी।।

हम जिंदगी में गम को कबतक सहेंगे? हम राह में काँटों पर कबतक चलेंगे? कदम तमन्नाओं के रुकते नहीं मगर, हम मुश्किले-सफ़र में कबतक रहेंगे? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मैं जी रहा हूँ तुमको पाने की आस लिए! मैं जी रहा हूँ सीने में तेरी प्यास लिए! यादें बंधी हुई हैं साँसों की डोर से, चाहत के रंगों में तेरा एहसास लिए! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

असतील तुझ्या साठी हे फक्त दोन शब्द.. पण मी तुला मानलंय माझं आयुष्य, तुझं नाव जरी कोणाकडून ऐकलं, तर चेहऱ्यावर येत माझ्या हास्य… तू आहेस माझ्यासाठी खूप खास, करतोस तू माझ्या प्रत्येक श्वासात वास.. वाटतंय […]

आई तुझ्यासाठी मी काय लिहू, कसे लिहू आणि किती लिहू, तुझ्या महतीसाठी शब्दच अपुरे आहेत, तुझ्या समोर सगळे जगच फिके आहे ।। आई तुझ्याबद्दल बोलायला मला, शब्दच उरणार नाहीत, आणि तुझे उपकार फेडायला मला हजारो […]

मैं जागता क्यों रहता हूँ तन्हा रातों में? नींद उड़ जाती है ख्वाहिशे-मुलाकातों में! सीने में नजरबंद हैं वस्ल़ की यादें, बेखुदी में रहता हूँ तेरे ख्यालातों में! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मैं जागता क्यों रहता हूँ तन्हा रातों में? नींद उड़ जाती है ख्वाहिशे-मुलाकातों में! सीने में नजरबंद हैं वस्ल़ की यादें, बेखुदी में रहता हूँ तेरे ख्यालातों में! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

टूट गया हूँ मैं गमे-अंजाम देखकर! टूट गया हूँ मैं गमे-नाकाम देखकर! रो रही है चाहत राहे-तन्हाई में, तेरी बेवफाई का पैगाम देखकर! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

टूट गया हूँ मैं गमे-अंजाम देखकर! टूट गया हूँ मैं गमे-नाकाम देखकर! रो रही है चाहत राहे-तन्हाई में, तेरी बेवफाई का पैगाम देखकर! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

टूट गया हूँ मैं गमे-अंजाम देखकर! टूट गया हूँ मैं गमे-नाकाम देखकर! रो रही है चाहत राहे-तन्हाई में, तेरी बेवफाई का पैगाम देखकर! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तेरी जिन्दगी में हरपल कमी सी है! अश्क की आँखों में हरपल नमी सी है! दौर है कायम अभी तेरी यादों का, दर्द की ख्यालों में हरपल जमीं सी है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मेरे सितमगर फिर से कोई वादा न करो! मेरे दिल़ को तोड़ने का इरादा न करो! क्यों इम्तिहान लेते हो कई बार सब्र का? चाहत की बेचैनी को और ज्यादा न करो! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

जब पास तेरे कुछ ना हो उम्मीद किसी से कुछ ना हो अमावस की रात हो काला घाना अंधकार हो तब खुद को तू सवारना हिम्मत कभी ना हारना। जब मायूसियो की आंधी हो मुश्किलो […]

जख्म जिन्दा है तेरी याद भी आ जाती है! बेकरार पल में तेरी आरजूू सताती है! मैं तन्हा हो गया हूँ गमें-अंजाम से मगर, ख्वाबों की चुभन से मेरी आँख भर आती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तेरी तस्वीर से मेरी नजर हटती ही नहीं! तेरे दीदार की हसरत कभी मिटती ही नहीं! मैं जोड़ता रहता हूँ तेरी यादों के टुकड़े, गम-ए-इंतजार की तन्हाई कटती ही नहीं! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तू जबसे गैर की बाँहों में चली गयी है! जिन्दगी जख्मों की आहों में चली गयी है! यादें चुभती हैं जिग़र में शीशे की तरह, शाम मयखानों की राहों में चली गयी है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मेरी जिंदगी को अंजान सा रहने दो! दिल में जुस्तजू का तूफान सा रहने दो! टूटे हुए से ख्वाब हैं पलकों में लेकिन, अश्कों में यादों को निशान सा रहने दो! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

एक तू ही नहीं है जो वक्त से हारा है! हर शख्स दुनिया में हालात का मारा है! हर-पल बदल रही है तस्वीर-ए-जिंदगी, टूटते दिलों का हैरान सा नजारा है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तुम मेरी जिन्दगी का ऐतबार बन गयी हो! तुम मेरी मंजिलों का इंतजार बन गयी हो! शामों-सहर नज़र आता है रंग यादों का, तुम मेरी तमन्नाओं का संसार बन गयी हो! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मैं खुद को यादों में भुलाकर रह गया हूँ! मैं खुद को दर्द से रूलाकर रह गया हूँ! हर कोशिश नाकाम है दीदार की जबसे, मैं अश्क को आँखों में लाकर रह गया हूँ! मुक्तककार- […]

तेरी चाहत मेरे गुनाह की तरह है! तेरी तिश्नगी दिल में आह की तरह है! खींच लेती है खुशबू तेरे ख्यालों की, तेरी याद बेखुदी की राह की तरह है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मेरी हर कोशिश तुम्हें पाने के लिए थी! तेरी जुल्फों के तले आने के लिए थी! लेकिन समझ न पाया मैं तेरी दिल्लगी, तेरी हर अदा तो तड़पाने के लिए थी! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

हमें दर्द जिंदगी में मिलते रहेंगे! हम राहे-मंजिलों पर चलते रहेंगे! डरते नहीं किसी से रंग मौसमों के, फूल तमन्नाओं के खिलते रहेंगे! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय