Pankaj
मेरा आज मेरा कल बनाएगा
August 17, 2024 in हिन्दी-उर्दू कविता
*मेरा आज मेरा कल बनाएगा*
मेरा आज मेरा कल बनाएगा
इसीलिए पढ़ो
इसीलिए गढ़ो
इसीलिए उठो
बीज सा फूटो
जर्जर हो टूटो
स्वयं से रूठो
स्वयं से पूछो
मेरा दिन आखिर कब आएगा
मेरा आज मेरा कल बनाएगा।
आग में तपो
बीज सा दबो
अन्न सा पको
बर्फ सी गलो
घड़ी सी चलो
नदी सी बहो
स्वयं से कहो
मेरा दिन आखिर कब आएगा
मेरा आज मेरा कल बनाएगा।
पंकज बिंदास
एक बार होता है
August 9, 2024 in ग़ज़ल
बार बार नही इजहार एक बार होता है
ज़िंदगी मे भी बस प्यार एक बार होता है.
कुछ लोग गिनाते अपनी ढेर सारी मुहब्बतें
पर वो वाला प्यार यार एक बार होता है.
आज हम दोनो को फुर्सत तू घड़ी मत देख
एक हप्ते मे इतवार एक बार होता है.
बिंदास ने जाना ये ठोकरें खा खाकर
किसी शख्स पर एतबार एक बार होता है.
पंकज बिंदास
चाहत
March 9, 2024 in गीत
तू ही तो है चाहत,तू ही तो है राहत,
पंछी मैं तू, भोर की पहली किरन.
तुझे न देखूं तो, दिल में उदासी,
जो देखूं तुझे, दिल में आशा-किरन.
चेहरों में इक तेरा, चेहरा सुहाना,
मिला है इन आंखों को, ख़ुशी का खजाना,
नज़र चेहरे से, कहती हैं कुछ तेरे,
जैसे हिमालय से कहे, सूरज-किरन.
दिल कहना चाहे पर धक-धक करे,
अपना मोल अपने से कब तक करे,
चांद तकता चकोर सा दिल बेचारा,
इक तरफा इश्क नादांं कब तक करे,
तू ही अब कह दे दिल से पागल हो गया,
जो इक दरिया पर पोखर मायल हो गया
मगर दिल फिर भी तो,आशिक दीवाना
तुझ पे चाहता है, खुद को मिटाना
छाए हैं बादल, मेरे इस दिल पर
बरसो या आने दो, दिल में किरन।
पंकज बिंदास
हास्य, व्यंग्य
March 9, 2024 in मुक्तक
वोट लेने आए नेता हमको जीता दो
अपनी भी समस्याएँ सारी हमको बता दो
लाऊँगा मै विकास आप सबके घरों में
मुझको उस विकास का बस पता बता दो.
पंकज बिंदास
महाशिवरात्रि
March 9, 2024 in मुक्तक
महादेव शिव भोले की है, महारात्रि भक्तों आई,
पावन दिन माँ गौरी जी हैं, अपने पति शिव को पाई,
शिवत्व शिखर चेतना का है, क्यों न सभी हम पा जाएँ,
कर कठिन तपस्या गौरी सी, निर्विकार हम हो जाएँ.
पंकज बिंदास