धरती का श्रृंगार है हरियाली पेड़-पौधे लगाकर चारों तरफ फैलाओ खुशहाली
धरती का श्रृंगार है हरियाली पेड़-पौधे लगाकर चारों तरफ फैलाओ खुशहाली
पेड़ पौधे लगाओ चारों तरफ फैलाओ हरियाली इस तरह करो पर्यावरण की रखवाली
तुम आए बदरा छाए नैनमा दीप जले गेहूं की बाली खेतन मां लहराए जब लागी प्रीत बिरहा की तो फसल ओला से गिर जावे मनमोहन तेरी आंख है बस तुम पर विश्वास है कर दो […]
हम नाइ खाइब आजु ते तंबाकू तुमहू छोड़ि देउ ओ बाबू
हम नाइ खाइब आजु ते तंबाकू तुमहू छोड़ि देउ ओ बाबू
तंबाकू खाने से होता है टीवी कैंसर इसलिए इसे खाना करो आज से कैंसिल
तंबाकू निषेध दिवस है आज आज प्रण करो तंबाकू सेवन मत करो वरना सब लुट जायेगा तेरी तलब ही तेरे मौत का कारण बन जाएगी
लेते तम्बाकू देखकर नकल न करना बाप के। जान चली जाएगी तेरी साथ न जाएंगे कोई आपके।।
ना बनो ना बनो बीड़ी सिगरेट का आदी। दमा टीबी कैंसर से होगी तेरी बर्बादी।।
मत कर रे जिन्दगानी तू हवाले तम्बाकू के। पत्थर वाले दांत तुम्हारे टूटेंगे बिन चाकू के।।
दूर रहो सब सदा सर्वदा तम्बाकू से कोसो कोस। जीवन सुखमय होंगे तेरे नहीं करोगे कभी अफसोस।।
ये धरती पे अंधकार है छाया देख सूरज नया सवेरा है लाया तेरी ज़िन्दगी में नया अवसर है आया जो करे कोशिश अवसर उसने ही पाया कर कोशिश उस अवसर को पाने की कर कोशिश […]
Love
Love
इंसा के भावनाओं में तर्क बहुत है, प्रेम और बैर में फ़र्क बहुत है, सेवा धर्म प्यार से उपजे प्रेम का संगीत, कांटे चाटे स्वान से उपजता ईष्र्या में प्रेम है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
सच है तुम्हरा इरादा भी मगर मैं तो इश्क के बगैर जी ही नहीं सकता।
खाने पीने ऐंसो आराम को समझे सभी सुखी संसार, गहरी निद्रा मोह माया को समझे है उपहार। दुःख की गठरी बांध कबीरा चिंतन करके सोवे, झूठे विचार को सच्चा समझे प्रभु भक्ति खोवे।। ✍महेश गुप्ता […]
लड़ाई किस्मत से है तुझसे नहीं ए ज़िन्दगी! तू परेशान बेकार होती है ।
सदैव बचकर रहना दो विचारों वाले प्राणी से, मोह माया के संसार में छल ही जाते हैं ये। अपने झूठे वादों में सबको रखना चाहते, खुद के घिनौने इरादों से राज करना चाहें ये।। ✍महेश […]
स्वार्थ के चक्कर में पड़कर, बल बुद्धि विद्या खो देता इंसान। अपने द्धारा बनाये कटिलें जाल में फंसकर कैद हो जाता इंसान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मेहनत करते जाओ परिणाम अपने आप ही मिल जाएगा जो बोया है वही तो मिलेगा बिन मेहनत कोई क्या पायेगा?
बहरूपियों से क्या डरना जब सर पर हाथ है मां का उसके पैरों तले है आसमां जिसके सिर पर हाथ है मां का
गिरगिट के रंग को समझ, अपने आप को अलग रखना। संसार के चतुर प्राणी का, याद रखो साथ बहुत है खलता।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बहरूपियों को पहचानने की आदत डालो, अपने आप पास के शोहदों को कम मत आंकिए। चेहरे से दिखते मियां मिट्ठू मन के काले रहते, समय के बदलते चक्र में याद इतना रखिए।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मैं हर बात समझती हूं दिमाग की थोड़ी कच्ची हूं नादानियां कूट-कूट कर भरी है मुझमें फिर भी दिल की अच्छी हूँ मैं हर बात समझती हूं कल्पनाओं में विचरण करती हूं खट्टे मीठे सपनों […]
घात लगाये बैठे हैं स्वार्थ के सारे पुजारी, बचकर रहना मेरे अनमोल मित्र तुम। ये दुनिया में बहरूपिए के शक्ल में बहुत है, जालसाज कुत्ते भेड़िए से बचकर रहना तुम।। महेश गुप्ता जौनपुरी
लोभ मोह माया में खोता है इंसान, मदिरा के लत में जलाता है इंसान। खुद के महानता में अंधा होता है इंसान, संसार के कलह से मर जाता है इंसान।। महेश गुप्ता जौनपुरी
साथ निभाने वाले सच्चें दोस्त को परखों, ज्वहरी की तरह सोने की शुद्धता समझो। मन के काले जो रहते चोर की तरह छिपते, उनके खूबी बखुबी और अच्छाईयों को समझो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
श्वान हमारे आस पास के ही, लगाकर बैठते घात यहां। मौका पाते काम कर जाते, समझते नहीं दुःख दर्द यहां।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
इश्क के दो पन्ने मैं भी लिखूंगी तुम्हारी याद में रात भर मैं भी जागूंगी। —————————— प्रीत की चादर ओढ़ कर अंबर के तले, तेरे सपने मैं भी बुनूँगी इश्क के दो पन्ने मैं भी […]
ये तो महानता है आपका, जो खुद के अवगुणों को पा रहें। यहां लोग बैठे हैं घात लगाये, एक दुसरे की गलती गिना रहें।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बातों में अमृत का रसपान, घात लगाये देखो बैठे यहां। मनुज है बढ़कर एक से एक, मन को रखते कुलक्षित यहां।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
वृक्ष लगाकर खुशीयां बांटो धरा को हरा भरा करो, भूमण्डल को स्वच्छ बनाकर धरा के सारे पाप हरो। एक एक कदम बढ़ाकर हाथों हाथ वृक्ष लगाओ, नन्हें अंकुरित को सहरा देकर धरा को सिंचित करो।।
जब मैं उदास होता हूँ तेरे कितने पास होता हूँ रात भर रोती हैं आंखें इश्क में आदमी तब खास होता हूँ ।
जब हमें तुम याद आये रात भर आंसुओं ने ग़म बहाये रात भर। ख़्वाब कितने ही सजाये रात भर जिनको चाहा वो न आये रात भर। एक सूरज ढल गया जब शाम को चांद तारे […]
रोते हो अब काश। पकड पाते जाता समय। अँधेरा हुआ ढल गई है शाम यौवन की। रात मिलेगा प्रियतम मुझको चांद जलेगा। आ जाओ तुम एक दूजे मैं मिल हो जाएं ग़ुम। पहाड़ी बस्ती अंधेरे […]
बेपरवाह है फिरता दर दर रमता जोगी। चलते जाओ यही तो है जीवन नदिया बोली जनता से ही करता है सिस्टम आंखमिचोली। घूमो जाकर किसी ठेठ गांव में भारत ढूँढ़ो। लक्ष्य है पाना तुम एक […]
कितनी ही मेहनत करके दो जून रोटियां पाते हैं भाग्य विधाता लोकतंत्र के सड़कों पर रात बिताते हैं। अफ़सोस नहीं हो रहा उन्हें जो कद्दावर बन बैठे इन्हीं के पोषित देश भूमि के जो सत्ताधर […]
सुनो संगी चमन वीरों तुम्हारा सत्य हो सपना हौसला दिल में उम्मीदें निगाहें लक्ष्य पर रखना। जो है संकल्प करता तू अटल स्वलक्ष्य पाने को रगो में जोश इतना भर हो सक्षम नभ झुकने को […]
भारत माता सुनो वीरों की कहानी, अपनो का जो हुए शिकार l कालापानी सावरकर को मिला, हृदय तोड़ने वाला दर्द मिला l सहम उठा दिल मेरा, अनूठा देश प्रेम जो देखा l मन विभोर हो […]
अब मैसेज से ही काम चलाना। यही कहे आज कोरोना जमाना।।
संभल संभल दिल ए नादान। यहाँ कोई नहीं इश्क़ ए क़द्रदान।।
बारह वर्ष की बब्ली कोचिंग पढ कर घर आयी। वह चुपचाप अपने कमरे में जा कर रोने लगी। जब बब्ली की माँ को पता चला कि, बब्ली अपने कमरे में रो रही है। वह दौड़ती […]
” वियोगी होगा शायद पहला कवि, दुःख से निकला होगा गायन ! गिर कर आसु़ंं अॉखो से चुपचाप, कविता बनी होगी कोई अनजान !” ..
अपने-अपने मां सब परे हमरी सुधि नाइ कोई लेइ। ओ बांसुरी बजावई वाले तनिक हमरीउ सुधि लेउ।।
क्या कहूँ!! दिल में कितनी उदासी छाई है, तेरी बेरुखी मेरी जान पर बन आयी है। ———————————— मैं एक गुमशुदा सी शाम हूँ और, तू मेरी रुसवाई है। ——-‐———–‐—————- इन तूफानों के आगे, दिल में […]
कामधेनु आनन्दी माता। सुरभि कन्या जग विख्याता।।५।।
गिरिजापति गोधाम बनाया। हरिपूजन अभिषेक कराया।। ४।।
पागल, आवारा, लोफर, दीवानापन, यही इनाम मिला है मुझे। कागज की किश्ती दरिया में नहीं चलती, यही कहते हैं वो मुझे।।
शिव सत धाम गई एकबारा। शिव कीन्हा गोकुल विस्तारा।। ३।।
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