यह घटना बिहार जिले में स्थित समस्तीपुर की है। बैशाख का महीना था। गाँव के लोग गर्मी से व्याकुल थे। उसी गाँव के ३५ वर्ष के युवक महेश गर्मी से परेशान हो कर रात के […]

पूव बहति कोशी महारानी उत्तर पर्वतराज हिमालय । पच्छिम गंडकी गंग नारायणी दक्षिण सुरसरि गंग नीरालय।। मध्य विदेहक धाम विराजित सुन्दर अति सुखधाम। ‘विनयचंद ‘ई छथि मिथिलाधाम।।

पूव बहति कोशी महारानी उत्तर पर्वतराज हिमालय । पच्छिम गंडकी गंग नारायणी दक्षिण सुरसरि गंग नीरालय।। मध्य विदेहक धाम विराजित सुन्दर अति सुखधाम। ‘विनयचंद ‘ई छथि मिथिलाधाम।।

सुने घर में फिर बाजी किलकारी आंगन में पायल छनकारी टुकुर टुकुर देख आ रही छोटी बहन प्यारी सामने उसको पाए सारे दुःख दूर हो जाये जब भी वो मुस्कुराये खुशियों की लहर है आये […]

वृक्ष लगाकर खुशीयां बांटो धरा को हरा भरा करो, भूमण्डल को स्वच्छ बनाकर धरा के सारे पाप हरो। एक एक कदम बढ़ाकर हाथों हाथ वृक्ष लगाओ, नन्हें अंकुरित को सहरा देकर धरा को सिंचित करो।।

आकर अंधेरों में डराता है सूनापन मुझे सहारा चाहिए चिल्लाता है सूनापन एक ऐसा सहारा जो हर कदम पर साथ रहे मैं जब भी डगमगाऊ संभालने मैं उसका हाथ रहे। जो नदियों के भीतर का […]

”मेरा भोला प्रियतम” जिनकी नज़रों से ललित कलाएं निकलती हैं, अधरों पर राग अंगड़ाइयां लेते हैं। केशों से बसंत दुग्ध पान करती है, और रात अठखेलियां करती है जिनसे। जिनकी एक चितवन मात्र से, बिजलियां […]

आज दादी की बहुत याद आई! वो बेचैन आत्मा ना जाने कहाँ घूमती होगी…. ब्रह्मांड के किन कोनों से गुजरती होगी… कोई नहीं जानता… जब मैं भूखी होती थी तो दादी मां अपने हाथों से […]

प्रकृति और पर्यावरण मानव आज हो रहा है, आज स्वार्थ प्रधान प्रकृति और पर्यावरण का, नहीं है किसी को ध्यान प्रकृति ही देती है सबको, सुरक्षा और जीवन दान उसकी कृपा से ही, चहकता है […]

संयम वाणी है साधु का पहचान, गलत कार्य में बांधा डाल देते ज्ञान। साधु संगत जीवन में रस को घोले, वाणी के विष का कर ना सकत विज्ञान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

धर्म अध्यात्म का साथ देकर, करें अपने संस्कृति का सम्मान। विज्ञान के अनुठे खोज पर, करें सदैव वैज्ञानिक पर अभिमान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

तन मन की मोह माया विष के है सामान, गुरु के कटू बात लागे है अमृत समान। गुरु सदैव है वन्दनीय यही मिला है ज्ञान, गुरु के लिए न्योछावर है यह मेरा जान।। ✍महेश गुप्ता […]

अज्ञानता का जीवन विष समान, गुरु मिले देते हैं अमृत का खान। गुरु के चरणों को छूकर करो रसपान, ज्ञान के भण्डार का तुम करो सदैव सम्मान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

कान्हा के बंशी के तान पर, सुध बुध खोए वृन्दावन के नर नारी। मधुबन के बागियां में गाय चराते कान्हा, बंशी बजाकर मन मोहित करते दुनिया सारी।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी