दक्ष सुता सुरभि कल्याणी। कश्यप भार्या बहु सुखदानी।। २।।
दक्ष सुता सुरभि कल्याणी। कश्यप भार्या बहु सुखदानी।। २।।
जय गौ माता जनकल्याणी। नहि कोई तुम सम वरदानी।। १।।
गण गौरी माँ शारदे गुरुवर अरु गोपाल। चरणनि मस्तक धार के गोगुण गाऊँ पाल।।
आज मेरा जन्मदिन है आप लोगो ने मुझे बहुत कुछ सिखाया उसके लिए धन्यवाद्
यूँ ना बुलाओ करके नजर के इशारे इस दिल पे तो डाका पर जाएगा। भला तुम्हारा क्या बिगड़ेगा मेरा सब कुछ लुट जाएगा।।
यह घटना बिहार जिले में स्थित समस्तीपुर की है। बैशाख का महीना था। गाँव के लोग गर्मी से व्याकुल थे। उसी गाँव के ३५ वर्ष के युवक महेश गर्मी से परेशान हो कर रात के […]
ज़िन्दगी में गर किसी को, कोई खाश नहीं रहता। किसी को आज किसी का, इंतजार ही क्यों रहता।।
पूव बहति कोशी महारानी उत्तर पर्वतराज हिमालय । पच्छिम गंडकी गंग नारायणी दक्षिण सुरसरि गंग नीरालय।। मध्य विदेहक धाम विराजित सुन्दर अति सुखधाम। ‘विनयचंद ‘ई छथि मिथिलाधाम।।
पूव बहति कोशी महारानी उत्तर पर्वतराज हिमालय । पच्छिम गंडकी गंग नारायणी दक्षिण सुरसरि गंग नीरालय।। मध्य विदेहक धाम विराजित सुन्दर अति सुखधाम। ‘विनयचंद ‘ई छथि मिथिलाधाम।।
धन केर बाजे घाँटी। ई बात अहाँ केर खाँटी।।
सुने घर में फिर बाजी किलकारी आंगन में पायल छनकारी टुकुर टुकुर देख आ रही छोटी बहन प्यारी सामने उसको पाए सारे दुःख दूर हो जाये जब भी वो मुस्कुराये खुशियों की लहर है आये […]
वृक्ष लगाकर खुशीयां बांटो धरा को हरा भरा करो, भूमण्डल को स्वच्छ बनाकर धरा के सारे पाप हरो। एक एक कदम बढ़ाकर हाथों हाथ वृक्ष लगाओ, नन्हें अंकुरित को सहरा देकर धरा को सिंचित करो।।
तुम्हारे भोलेपन से हीं मुझको बहुत प्यार है। वरना इस दुनिया में दिल लगाने को बथेरे यार हैं।
आकर अंधेरों में डराता है सूनापन मुझे सहारा चाहिए चिल्लाता है सूनापन एक ऐसा सहारा जो हर कदम पर साथ रहे मैं जब भी डगमगाऊ संभालने मैं उसका हाथ रहे। जो नदियों के भीतर का […]
”मेरा भोला प्रियतम” जिनकी नज़रों से ललित कलाएं निकलती हैं, अधरों पर राग अंगड़ाइयां लेते हैं। केशों से बसंत दुग्ध पान करती है, और रात अठखेलियां करती है जिनसे। जिनकी एक चितवन मात्र से, बिजलियां […]
आज दादी की बहुत याद आई! वो बेचैन आत्मा ना जाने कहाँ घूमती होगी…. ब्रह्मांड के किन कोनों से गुजरती होगी… कोई नहीं जानता… जब मैं भूखी होती थी तो दादी मां अपने हाथों से […]
प्रकृति और पर्यावरण मानव आज हो रहा है, आज स्वार्थ प्रधान प्रकृति और पर्यावरण का, नहीं है किसी को ध्यान प्रकृति ही देती है सबको, सुरक्षा और जीवन दान उसकी कृपा से ही, चहकता है […]
ई जेठक मास आ आमक गाछी। गेया केॅ संग संग चरावति बाछी।। सब किछु मोन परति अछि कोना बताएव हम सब का छी।।
Maa aaj bhi sunai deti hai teri aahat mujko, Abhi bhi yaad hai teri wo baate mujko, Himat deta hai maa tera saaya mujko, Maa ab bhi roshan hai teri yad se gar ke kamre, […]
अनजान सी रुक्मणि बेचैन सी मीरा राधा ही जाने श्याम की पीड़ा हिमांशु के कलम की जुबानी
Jindagi ki raho me kahi to daga kha gaye ham , jaha se chale the fir wahi aa gaye ham.🤔
पर्वत से निकली खिल-खिल गंगा सागर में जाकर शांत हो गई। जान गई जंजाल में तो उड़ती चिड़ियाँ भी शांत हो गई।।
ना छेड़ कुदरत को कुदरत परेशान हो जाएगी। इसकी परेशानी के संग संग तेरी जान जाएगी।।
कुदरत के संग बदफेली के खुद हीं हम शिकार हो गए। आबोहवा संग धरती भी तो दूषित हो गई और हम बीमार हो गए।
वईसी डेरु बईठा अइसी शरम हमका घेरे हई ना वई द्याखइ ना हमहे देखी
सीडियाँ अनगिनत चढ़नी पड़तीं हैं, जब पानी होती है इश्क की मंज़िल ।
किस ओर गया मेरा सुकून फकत इतना-सा बता दे कोई, दिन-रात आगोश में रहता हूँ बेचैनी के ।
ले गया दिल ए नशाद! मुझे जाने कहाँ , जब एक निगाह उसने कर दी मेरी तरफ।
ली गया दिल ए नशाद! मुझे जाने कहाँ जब एक निगाह उसने कर दी मेरी तरफ
रहने देंगे हम तुम्हें लोगों के करीब तुम खुमार में रह लो थोड़ा शरीक
जैसा कहिये वैसा करिये ऐसे लोग जहां में कम ही होते हैं अपनी कथनी और करनी में जो कोई फर्क न करे ऐसे लोग बड़ी मुश्किल से मिलते हैं
मिठे बचन सदैव बोलिए, सुख की उत्पत्ति होय । बसीकरन मंत्र जाप करें, जग का सदा हित होय ।। महेश गुप्ता जौनपुरी
रमता साधु का जात ना पुछो, पुछ लो ज्ञान की बात । तलवार के वजन को ना आंकिए, जोरदार घाव से करें बात ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
जमाने का हित हम करते रहें, लोग हमें गुनहगार समझते रहें। मिठी बाणी बोलकर मुझसे, पीठ पीछे मुझे ही ठगते रहें।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कटु वचन को तांक में रखकर, करता मैं दिन का शुरुआत । हृदय को अपने स्वच्छ रखकर, कुरितियों को देता मैं मात ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
अपराध को सहना पाप है, जुल्म को सहना महापाप। सच्चाई का दामन पकड़ कर, करो नारायण का जाप ।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
संयम वाणी है साधु का पहचान, गलत कार्य में बांधा डाल देते ज्ञान। साधु संगत जीवन में रस को घोले, वाणी के विष का कर ना सकत विज्ञान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मिठे बचन सदैव बोलिए, कटु वचन का करें त्याग। आत्मा के मिठे विचार से, मन के बुझाये जलते आग।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
धर्म अध्यात्म का साथ देकर, करें अपने संस्कृति का सम्मान। विज्ञान के अनुठे खोज पर, करें सदैव वैज्ञानिक पर अभिमान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
गोविन्द गोपाल चरावत गैया, बंसी के धुन से समझावत मैया। वृंदावन के गलीयन में मुरारी, लागत नटखट नंद दुलारे कन्हैया।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
तन मन की मोह माया विष के है सामान, गुरु के कटू बात लागे है अमृत समान। गुरु सदैव है वन्दनीय यही मिला है ज्ञान, गुरु के लिए न्योछावर है यह मेरा जान।। ✍महेश गुप्ता […]
गुरु गुणों के खान हैं, इस तन में ज्ञान से ही जान है। खाली गागर चटक है जाता, ज्ञान से ही मानव का पहचान है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
अज्ञानता का जीवन विष समान, गुरु मिले देते हैं अमृत का खान। गुरु के चरणों को छूकर करो रसपान, ज्ञान के भण्डार का तुम करो सदैव सम्मान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
गुरु से ही चलता यह संसार, गुरु ही देते अज्ञज्ञानी को ज्ञान। गुरु का करो सब मिलकर सम्मान, गुरु से ही है यह जग और विधान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कान्हा के बंशी के तान पर, सुध बुध खोए वृन्दावन के नर नारी। मधुबन के बागियां में गाय चराते कान्हा, बंशी बजाकर मन मोहित करते दुनिया सारी।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
सांवली सुरत वंशी वाले, हुए तुम्हारे हम दिवाने। राश रचैया मोहन प्यारे, याद आते सारे अफसाने।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कान्हा तेरे हम हुए दिवाने, वंशी की तान सुना दो प्यारे। मिटा कर मेरे विपदा प्यारे, हर लो मेरे दुःख दर्द सारे ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
गुरु सदैव है वन्दनीय, करो गुरु का सम्मान। ज्ञान की पोटली बांधकर, गुरु के लिए लुटा दो जान।। महेश गुप्ता जौनपुरी
ज्ञान की अभिलाषा रख लें मनवा, गुरु नहीं मिलते बारम्बार । जीवन के अंधियारे को मिटा ले, गुरु का छाया मिलें ना बार बार।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कृष्ण जीवन को अपनाएं, जीवन को खुशहाल बनाएं। छल कपट की रेखा को मिटा, जीवन को अपने सत्य बनाएं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
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