आज भी वो दिल तुम्हारी और जाता है जो तुमने तोड़ दिया था आज भी तुम्हारे गुण गाता है जिसका मुँह चुप कर दिया था आज भी तुम्हारी गलियों में रहता है जिसको कही और […]

कोरोना कोरोना कहते हो कोरोना से क्यों डरते हो। शाम सवेरे जब देखो कोरोना चालीसा भजते हो।। कोरोना के डर से तुम कोरोना की उपासना करते हो। सोते जागते उठते बैठते कोरोना चालीसा भजते हो।। […]

प्रस्तुत है हाइकु विधा में रचना :- जिसका जो हो कर्म करे मानव ना करे चोरी जीत ले बाजी हर दांव की वह ना थके कभी संघर्ष करे नित जीवन में वो ना रुके कभी […]

प्रस्तुत है हाइकु विधा में कविता:- मजदूर हूँ पैदल चल पड़ा घर की ओर विपदा आयी सबने छोड़ दिया मौत की ओर आशावादी हूँ खुद ही जीत लूँगा यह युद्ध भी तुम कौन हो? समाज […]

गजल- भूख के मारे हुये है | भूख ले आई शहर हम भूख के मारे हुये है | छोड़ चले शहर को हम भूख के सताये हुये है | कोरोना के कहर ने बदल दी […]

दिल में जगह की कमी नहीं होती यह तो खुला आसमान है खूब पंख फैलाओ यहाँ बाटने वाली जमीन नहीं होती

यूँ कहना तो बड़ा आसान है भूल जाना सारे बन्धनों को जाति -पाति को छोड़ देना परंतु सच्चाई यह है की जाति- पाति के ताने-बाने हमने ही बनाये हैं और उनको हम ही पोषित करते […]

एक बाद कहूँ गर सुनते हो तुम मुझे अच्छे अच्छे लगते हो जब होते हो नाराज़ कभी तो प्यारे प्यारे लगते हो एक बात कहूँ गर सुनते हो तुम मुझे भोले -भाले लगते हो

कहीं खो से गए हैं सपने और जाग पड़ी हैं नींदे लॉक डाउन में जैसे सहम गये हैं जीवन के माइने कहीं रिश्तों की डोरी ने मजबूत हो रही है तो कहीं टूटने लगी है […]

आओ इस कल्पना की दुनिया में खो जाये हम सब एक हो जाये ये जात पात सब मिट जाये आओ सब अपने दुःख सुख में एक हो जाये आओ इस कल्पना की दुनिया में खो […]

कहते हैं किसको हँसना गमगीन ज़िन्दगी है। मिट्टी करे समर्पित अश्कों से बन्दगी है। हरदम रहे वो गीला उसका सदा हीं जून है। क्या नाम दूँ मैं उसको वो एक गोरकुन है।।

मेरे देश की मिट्टी किसी सोने से कम नहीं। खेतो में लगी फसल किसी हीरे मोती से कम नहीं।। यही धरती की गोद में खेले पले हुए हम जवां। हिमालय से निकली गंगा किसी अमृत […]

सीता का हाँथ देते समय जनक ने कभी नहीं सोचा होगा की जनक दुलारी सीता यूंँ वन में कष्ट भोगेगी कन्द मूल खायेगी और घास की सेज पर सोयेगी पर होतब्यता देखो यह सब हुआ […]

लाॅकडाउन बढ़ाते रहो अध्यादेश लगाते रहो आखिर जो आप मंत्री ठहरे। मजदूरों को भगाते रहो शराबियों को अजमाते रहो आखिर जो आप मंत्री ठहरे।।

आत्मनिर्भर बना स्वावलंबी बनो लाकडाउन 4.00 का यही है मंत्र मास्क लगा घर से निकलो हाथों को हरदम स्वच्छ रखो अपने पैरों पर खड़े होकर जिंदगी में आगे बढ़ो

धृतराष्ट्र की महत्वाकांक्षाओं ने ही बीज बोया महाभारत का धृतराष्ट्र आंखों से अंधे थे उन्होंने दुर्योधन के व्यक्तित्व को अंधा बना दिया इतिहास धृतराष्ट्र को ही महाभारत का जिम्मेदार ठहराता है गलत नहीं है क्योंकि […]

आओ साथी मास्क लगाए। अपनो से दो गज की दूरी बनाये।। स्वस्थ खुशहाल तो देश खुशहाल। यही मंत्र सभी को काम आए।। हर मर्ज के दवा है हमारे पास। बस थोड़ा सावधानी बरती जाए।। कोरोना […]

कामयाबी के डगर पे चल पड़ी है, नये जमाने की नयी बेटियाँ। बेटी से नफरत करने वाले जालीम समाज, देख आसमां में छा गयी आज की नयी बेटियाँ।। वो जमाना गया जब हम जुल्म के […]

मैं आज जो निकली राहों पर यह राह मुझे बात सुनाती है कहे शर्म तो आती ना होगी मेरा घ्रणा से नाम बुलाती है कहे घूम रही चौराहों पे कोई वजह है या आवारा है […]