कल जो सम्पूर्ण था आज पूर्ण (Complete) रह गया है और आज का सम्पूर्ण (Perfect), कल पूर्ण रह जायेगा माँ बाप अपने विवेक अनुसार बच्चों को तैयार करते हैं वास्तुकार अपने कौशल से, वस्तु का […]

बादल ,बादल बन आया था बादल , बादल बन छाया था चहुँ ओर बरसकर बादल ने भारी कोहराम मचाया था बादल बादल बन लहर गया अरि मुंण्डो पर वह घहर गया चहुँ ओर मचा था […]

पैरों की अपने वो झुर्रियां छुपा लेता है, चेहरे पर झूठी वो हंसी सजा लेता है, बनाने को किस्मत की लकीरें बच्चों की, पिता हाथों की अपने लकीरें मिटा लेता है।। राही (अंजाना)

अदब से झुकने की कला भूल गए, मेरे शहर के लोग अपना गुनाह भूल गए, भटकते नहीं थे रास्ता कभी जो अपना, आज अपने ही घर का पता भूल गए, महज़ चन्द पैसों की चमक […]

कोई तंग है, कोई हैरान है जिंदगी आज कुछ इस तरह से परेशान है चेहरे हँस रहे है फिर भी रौनक उनमें कम है शायद मन ही मन वो बहुत उलझा सा खुद में ही […]

“आधी रात की आज़ादी की सुबह अभी तक मिली नही थी, दीवारें कई बार हिली, बुनियादें अब तक हिली नहीं थीं , गोरों की गुलामी से निकले तो, कुछ दीमक ऐसे लिपट गये, समझ सके […]

आज भी तेरी जिग़र में आरज़ू जवां है। आज भी निगाह में ख्व़ाबों का कारवां है। उल्फ़त के समन्दर में तूफ़ान हैं लेकिन- मुसीबत में ठहरने का हौसला रवां है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

जिस दिन से तुम्हारी नसीली आँख देख लिया ;मैने! लड़खराये –डगमगाये चलता हूँ।। चाहे चाय खाना से निकलु,, या तुम्हारे गली से निकलु। डगमगाये फिरता हूँ।। ज्योति

चलो महोब्बत की बजार चलता हूँ,, अपने दिल की दर्द को साथ ले चलता हूँ, देखता हूँ इस बजार मे कोई मेरे जैसा तन्नहा है,, अगर है! तो उसको अपने दर पर साथ ले चलता […]

चलो मिलकर एक नया मुल्क बनाते हैं, जहाँ सरहद की हर दिवार मिटाते हैं, छोड़ कर मन्दिर मस्ज़िद के झगड़े, हरा और भगवा रंग मिलाते हैं, चलो मिलकर एक….. जिस तरह मिल जाते हैं परिंदे […]

हर शाम के ढलते सूरज से, दुआ एक ही मांगी है। सवेरा हो अच्छा और खुशियों की हो बौछार। दिन हो शुभ और शाम हो कमाल। दोस्तों के साथ पल जो बिताए, वह याद मरते […]

मेरी गाँव मुझे बुला लो, मुझे अकेलपान अच्छा नही लगता मुझे बोला लो।। बुढ़े को खिजलाना खटीया इधर उधर करना,, ये मुझे याद आती मेरी गाँव मुझे बोला लो,, बाबु जी से चुड़ाकर सिगरेट पीना […]

इन्द्र देव इस बार कुछ, ज्यादा ही तबाही कर रहे हैं क्रोधित किसी अप्सरा ने किया, हम पर बरस रहे हैं कहीं पे सूखा पड़ा हुआ है, कहीं पे कहर बरपा रहे हैं अपनी हरकतों […]

ये मेरा बिहार है। ये मेरा शिवहर है। कुछ दिनों पहले एक दुर्घटना हुई शिवहर में, एक डिग्री कॉलेज के उद्घाटन किये मंत्री और अधिकारी पटना के। एक डिग्री कॉलेज मिला, मेरे घर के पास […]

वो ऊपर बैठ कर ही सारे हिसाब लिख देता है, इस ज़मी पर हम सबकी किताब लिख देता है, आता नहीं उतर कर कभी चेहरा अपना दिखाने, अंतर्मन के हमें पर वो सारे जवाब लिख […]

हम तेरी याद में रो भी लेते हैं। हम तन्हा गमज़दा हो भी लेते हैं। जब रंग सताता है तेरे हुस्न का- हम खुद को नशे में खो भी लेते हैं। रचनाकार- #मिथिलेश_राय

तुम जहां भी रहोगी निहारा करूँगा, तुम्हे ख्वाबों में अपने पुकारा करूँगा, दिखेंगी नहीं जब मुझे आँखे तुम्हारी, तुम्हें आईने में अपने उतारा करूँगा।। राही (अंजाना)

कभी कभी वक़्त ऐसा आता है कि हम उसको जाने नही देना चाहते और कभी ऐसा वक़्त भी आता है जिसको हम आने नही देना चाहते लेकिन वक़्त तो वक़्त है समय के साथ ही […]

नदी के दो किनारों पर मेरी नज़र टिकी थी, एक छोर पे मैं और दूजे छोर वो खड़ी थी, समन्दर था लहरें थीं कश्ती थी सामने, इन सब के मध्य भी मेरी मोहब्बत डटी थी।। […]