विधाता की विधि को न कोई जान सका अपरम्पार का पार कोई पा न सका -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
विधाता की विधि को न कोई जान सका अपरम्पार का पार कोई पा न सका -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
कर्म काजल से न करो मेहको तुम चन्दन से -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मेरी शान है बेटी अभिमान है बेटी हर मुश्किल में साथ है बेटी -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
पायल की खनक रुनझुन सुखद एहसास करती है आंगन में बेटी जब छन छन करती आती है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
कागज़ की नाव हम कश्ती तेरे हाथ में बंधन हूँ, मुक्ति तेरे हाथ में -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मजबूरी नहीं कोई फिर भी मजबूरी क्यों है आज़ाद हूँ फिर भी बेबसी क्यों है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
कब तक सहन करोगे अन्याय तो अन्याय है परिचय पालो खुद का न्याय करो,न्याय चलो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
कांच की दीवार सा जीवन दरार न आए चेहरा देखो आईने में, पहचान हो जाये -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
जाग्रति के इन पलों में जाग कर जाग्रत करेंगे -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
तुम नहीं थे कल वहां तो हम नहीं थे कल यहाँ जो कदम तेरे चले वो कदम मेरे चले -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
कल जो सम्पूर्ण था आज पूर्ण (Complete) रह गया है और आज का सम्पूर्ण (Perfect), कल पूर्ण रह जायेगा माँ बाप अपने विवेक अनुसार बच्चों को तैयार करते हैं वास्तुकार अपने कौशल से, वस्तु का […]
तेरी नसीली आँखो मे बसती है मेरी दुनिया! तु आँखो से आँसु मत बहा।
इस ख्ववाइशो की समंदर ने चखना-चुर किया है, अपने मीठी धारा मे फसाकर लहुँ-लुहाँन किया है। ज्योति
बादल ,बादल बन आया था बादल , बादल बन छाया था चहुँ ओर बरसकर बादल ने भारी कोहराम मचाया था बादल बादल बन लहर गया अरि मुंण्डो पर वह घहर गया चहुँ ओर मचा था […]
पैरों की अपने वो झुर्रियां छुपा लेता है, चेहरे पर झूठी वो हंसी सजा लेता है, बनाने को किस्मत की लकीरें बच्चों की, पिता हाथों की अपने लकीरें मिटा लेता है।। राही (अंजाना)
मैने अपनी मैं को हम कर लिया है, जिस पल से तुझको अपने संग कर लिया हैं, अपने ही घर में घर नहीं रहा मेरा, तेरे दिल में जब से मैने घर कर लिया है।। […]
अदब से झुकने की कला भूल गए, मेरे शहर के लोग अपना गुनाह भूल गए, भटकते नहीं थे रास्ता कभी जो अपना, आज अपने ही घर का पता भूल गए, महज़ चन्द पैसों की चमक […]
कोई तंग है, कोई हैरान है जिंदगी आज कुछ इस तरह से परेशान है चेहरे हँस रहे है फिर भी रौनक उनमें कम है शायद मन ही मन वो बहुत उलझा सा खुद में ही […]
“आधी रात की आज़ादी की सुबह अभी तक मिली नही थी, दीवारें कई बार हिली, बुनियादें अब तक हिली नहीं थीं , गोरों की गुलामी से निकले तो, कुछ दीमक ऐसे लिपट गये, समझ सके […]
आज भी तेरी जिग़र में आरज़ू जवां है। आज भी निगाह में ख्व़ाबों का कारवां है। उल्फ़त के समन्दर में तूफ़ान हैं लेकिन- मुसीबत में ठहरने का हौसला रवां है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
आओ वरण करो,मैं तुम्हारे सानिध्य में हूं धरा में हूं या अंतरिक्ष में आभास है तेरे प्रतिनिधित्व में हूं नहीं पता किस लोक में हूं
जिस दिन से तुम्हारी नसीली आँख देख लिया ;मैने! लड़खराये –डगमगाये चलता हूँ।। चाहे चाय खाना से निकलु,, या तुम्हारे गली से निकलु। डगमगाये फिरता हूँ।। ज्योति
चलो महोब्बत की बजार चलता हूँ,, अपने दिल की दर्द को साथ ले चलता हूँ, देखता हूँ इस बजार मे कोई मेरे जैसा तन्नहा है,, अगर है! तो उसको अपने दर पर साथ ले चलता […]
चलो मिलकर एक नया मुल्क बनाते हैं, जहाँ सरहद की हर दिवार मिटाते हैं, छोड़ कर मन्दिर मस्ज़िद के झगड़े, हरा और भगवा रंग मिलाते हैं, चलो मिलकर एक….. जिस तरह मिल जाते हैं परिंदे […]
रोज तोड़ कर मैं फिर बना लेता हूँ, जोड़ कर कुछ खांचे खिलौने का घर अपना, रोज खेल कर मैं फिर बहला लेता हूँ, जोड़ कर कुछ टुकड़े आईने सा मन अपना, रोज देख कर […]
हर शाम के ढलते सूरज से, दुआ एक ही मांगी है। सवेरा हो अच्छा और खुशियों की हो बौछार। दिन हो शुभ और शाम हो कमाल। दोस्तों के साथ पल जो बिताए, वह याद मरते […]
जब से तेरा चेहरा क्या देख लिया इन आँखों ने किसी और को पलकें उठा के देखना ही नही चाहतीं ।।
एक तेरा ही तो चेहरा है जिसको देख लूँ तो तो मेरा पूरा दिन बन जाता है।।
कभी दोस्त पर सवाल मत करना यारो, दोस्त मार भी लेगा, डाँट भी लेगा लेकिन तेरी भुखी आँख को पहचान लेगा यारो।।
मेरी गाँव मुझे बुला लो, मुझे अकेलपान अच्छा नही लगता मुझे बोला लो।। बुढ़े को खिजलाना खटीया इधर उधर करना,, ये मुझे याद आती मेरी गाँव मुझे बोला लो,, बाबु जी से चुड़ाकर सिगरेट पीना […]
इन्द्र देव इस बार कुछ, ज्यादा ही तबाही कर रहे हैं क्रोधित किसी अप्सरा ने किया, हम पर बरस रहे हैं कहीं पे सूखा पड़ा हुआ है, कहीं पे कहर बरपा रहे हैं अपनी हरकतों […]
इश्क करके उससे मुझे मलाल ही हुआ, जब हाथ मलता रह गया मैं उसके ठुकराने के बाद।। राही (अंजाना)
ये मेरा बिहार है। ये मेरा शिवहर है। कुछ दिनों पहले एक दुर्घटना हुई शिवहर में, एक डिग्री कॉलेज के उद्घाटन किये मंत्री और अधिकारी पटना के। एक डिग्री कॉलेज मिला, मेरे घर के पास […]
खटखटाते रहिये दरवाजा एक दूसरे का मुलाकातें ना सही, आहटें आती रहनी चाहिये
धीमे धीमे ही सही पर होती जा रही है, बारिश आज सबको मेरा दर्द बता रही है।। राही (अंजाना)
वो ऊपर बैठ कर ही सारे हिसाब लिख देता है, इस ज़मी पर हम सबकी किताब लिख देता है, आता नहीं उतर कर कभी चेहरा अपना दिखाने, अंतर्मन के हमें पर वो सारे जवाब लिख […]
begani bheed main rahi anjana, dudhey hain apni manjhil sahil tak jana kho ke pana hain sab kuch, ya sab kuch kho jana, yeh satat sangram hain, akhir tak jana laksya jab hain thik to […]
नदी के दो किनारों पर मेरी नज़र टिकी थी, एक छोर पे मैं और दूजे छोर वो खड़ी थी, समन्दर था लहरें थीं कश्ती थी सामने, इन सब के मध्य भी मेरी मोहब्बत डटी थी।। […]
हम तेरी याद में रो भी लेते हैं। हम तन्हा गमज़दा हो भी लेते हैं। जब रंग सताता है तेरे हुस्न का- हम खुद को नशे में खो भी लेते हैं। रचनाकार- #मिथिलेश_राय
तुम जहां भी रहोगी निहारा करूँगा, तुम्हे ख्वाबों में अपने पुकारा करूँगा, दिखेंगी नहीं जब मुझे आँखे तुम्हारी, तुम्हें आईने में अपने उतारा करूँगा।। राही (अंजाना)
आज रात है तो कल सवेरा भी होगा यकीन रख बन्दे जो होगा सब सही होगा।।
कभी कभी वक़्त ऐसा आता है कि हम उसको जाने नही देना चाहते और कभी ऐसा वक़्त भी आता है जिसको हम आने नही देना चाहते लेकिन वक़्त तो वक़्त है समय के साथ ही […]
नदी के दो किनारों पर मेरी नज़र टिकी थी, एक छोर पे मैं और दूजे छोर वो खड़ी थी, समन्दर था लहरें थीं कश्ती थी सामने, इन सब के मध्य भी मेरी मोहब्बत डटी थी।। […]
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