चलो तमाशा बनाते हैं आज अपनी मोहोब्बत का, हम गिङगिङाएगे आप के सामने, और आप मुंह फैर लेना….!! -देव कुमार
चलो तमाशा बनाते हैं आज अपनी मोहोब्बत का, हम गिङगिङाएगे आप के सामने, और आप मुंह फैर लेना….!! -देव कुमार
गम, तन्हाई, रूसवाई, और तड़प ना जाने कितने गम पाल रखे है मेरे इस दिल ने….!! -देव कुमार
हार क्या होती है य़े तब हमने जाना, जब हम खुद हारे मोहोब्बत से लड़ते लड़ते…!! -देव कुमार
उदास क्यूँ रहते हो अपने गम को लेकर के दुनिया मैं किस के पास गम नही हैं साहीब…..!! -देव कुमार
पूछा जो उसने य़े गुलाब कितने का हैं, हमने हाथ का छाला उसको दिखा दिया रो कर उसने जो हमारा हाथ चूमा, सारे दर्द को मिटा दिया….!! -देव कुमार
आँखों मैं आंसू, और दिल मैं सदा रखते हैं कुछ लोग ऐसे भी अपनी मोहोब्बत को बया करते हैं….!! -देव कुमार
एे खुदा चल आज तू ही फैसला कर दे, मिला दे मुझको उससे य़ा सांसो को मुझसे जुदा कर दे….!! -देव कुमार
इतनी इज्ज़त न हमें बक्शो साहिब…. के मोहोब्बत की दुनिया में अपनी कोई इज्ज़त नहीं हैं….!! -देव कुमार
आँखों में मैं खुवाब लिए फिरता हू, इसलिये भी मोहोब्बत से मैं डरता हू….!! -देव कुमार
ज़रा सोच लेना, फिर फैसला सुनाना साहिब….! के सवाल ज़िन्दगी का नहीं, दिल, ज़जबात, और मोहोब्बत का भी हैं….!! -देव कुमार
सब कुछ पाया ज़िन्दगी में, सिवाय एक चीज के…! दोस्ती, रिश्ता, अपनापन, सिवाय एक इश्क के…!! -देव कुमार
दिया गम, तन्हाई, रूसवाई और आँसू….! कुछ इस तरह मोहोब्बत का कर्जा चुकाया उसने….!! -देव कुमार
ना मुस्कुराने का रास्ता दिखा, ना कोई दिखी बस्ती खुशहाली की….! बस फस कर रह गया मैँ, तेरी यादों के जंगल मे….!! -देव कुमार
हार क्या होती है य़े तब हमने जाना, जब हम खुद हारे मोहोब्बत से लड़ते लड़ते…! -देव कुमार
तेरी दिल में ख्वाहिश आयी है अभी अभी! चाहत की फरमाइश आयी है अभी अभी! गूंज उठी है शहनाई यादों की लेकिन, फिर गम की पैदाइश आयी है अभी अभी! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
अगर देती जन्म “‘” माँ”” चलना; सभलना सिखाते है पापा। . …………. जितना भी बच्चे फरमाइस करते; पुरा करते है पापा। अपना सारा अरमान कुचलकर; बच्चे के अरमान को पूरा करते पापा।। अपने बदन पर […]
तुम केवल नारे मे गाओ की कश्मीर हमारा है’” सच तो यह है कि कश्मीर को पाकिस्तान ही प्यारा है। …………. नेहरू के भुलो को छोड़ अब पटेल बन जाना होगा। कश्मीर के हर चौराहे […]
गर देती है जन्म माँ तो जिंदगी संवारते हैं पापा जितना भी हो सकता है सब कुछ कर गुजरते हैं पापा जेब गर खाली भी हो तो कर्ज ले आते हैं पापा अपने बच्चों के […]
जब भी तेरा चेहरा याद आता हिचकियाँ उठ जाता; अभी उसकी वेवाफाई से उभरे नही यारो। अब ना जाने हिचकियाँ कौन सा पैगाम दे जाता। . जब भी उसका चेहरा नजर आता; हिचकियाँ उठ जाता […]
जब भी तेरा चेहरा याद आता हिचकियाँ उठ जाता; अभी उसकी वेवाफाई से उभरे नही यारो। अब ना जाने हिचकियाँ कौन सा पैगाम दे जाता। . जब भी उसका चेहरा नजर आता; हिचकियाँ उठ जाता […]
ना जाने उनकी किस अदा पर हम मर जाते है; हर वक्त जुबाँए पर उन्ही का नाम लिये जाते है । . बीताएँ कुछ लम्हा उनके” संग” …………………….. याद आ जाते है। हो जाता हुँ […]
फसाना जिंदगी का अजीब जैसा है! हर ख्वाब आदमी का रकीब जैसा है! बदली हुई निगाहों का खौफ है दिल में, मंजिलों का मिलना तरकीब जैसा है! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय
मुझे माँफ कर देना” “”उतर ना सकी तेरी महोब्बत रूपी सीढ़ी पर। हाँ ? मुझे ले बैठा;लज्
मुझे माँफ कर देना” “”उतर ना सकी तेरी महोब्बत रूपी सीढ़ी पर। हाँ ? मुझे ले बैठा;लज्
परवाह करे कोई, किसी को हमारा भी ख्याल हो किसी की जुबां पे कभी हमारा भी सवाल हो
बहुत से ख़्वाब है आँखों में मेरे सारे नहीं तो कुछ तो हकीक़त में आएँ माना के करनी है बहुत मेहनत हमको भी ज़रा आप भी तो उसमे अपना हाथ मेरे सर पर लाएँ।।
हार क्या होती है य़े तब हमने जाना, जब हम खुद हारे मोहोब्बत से लड़ते लड़ते…! -देव कुमार
पूछा जो उसने य़े गुलाब कितने का हैं, हमने हाथ का छाला उसको दिखा दिया रो कर उसने जो हमारा हाथ चूमा, सारे दर्द को मिटा दिया….! -देव कुमार
मंजिलों के रास्ते कुछ बोल रहे हैं! रंग दिल में चाहत का घोल रहे हैं! तिश्नगी ल़बों पर है पैमानों की, क़दम जुस्तजू के कुछ डोल रहे हैं! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
नज़रो में हो कंकड़ तो, रानाई चुभती है.. भरी बज़्म में चस्पा तन्हाई चुभती है.. जिस रिन्द को मयस्सर हो बस कफ़स की फर्श.. उसकी आँखों मे आसमान की ऊंचाई चुभती है.. जो जिस्म सतह […]
हार क्या होती है य़े तब हमने जाना, जब हम खुद हारे मोहोब्बत से लड़ते लड़ते….! -देव कुमार
खत तो लिख लू, मगर लिखने का बहाना नहीं हैं, ना जाने कहा पहुचे ये खत, के उसका कोई ठिकाना नहीं है….! -देव कुमार
तुमसे अपने प्यार को कहना मुश्किल है! तेरे बगैर लेकिन रहना मुश्किल है! तुमको कभी गैर की बाँहों में देखकर, तेरी बेवफाई को सहना मुश्किल है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
“find your happiness time in a day…. & spend sad feelings of your life there”…. -Dev Kumar
जब भी मैं गया वहां पर, जी कर गया और लोग कहते है, की मैं शराब पी कर गया……! -देव कुमार
पुछते तो हाल हमसे क्या, तोड़ कर दिल हमारा हमने तोबा कर ली, आप भी कर लो किनारा….! किसी और के साथ बस ऐसा ना करना के हो जाएगा वो भी हमारी तरह बेसहारा….!! -देव […]
कुछ ऐसे वक़्त बीता, मोहोब्बत की परख करते हुए गर्मी, सर्दी, और बरसात कब बीते, पता ना चला….! -देव कुमार
खेल खेलना सीख लो तो हर खेल अच्छा लगेगा, ज़िन्दगी की इस बिसात पर हर मोहरा सच्चा लगेगा, मोहब्बत तो रंग है चढ़ा के देख लो एक बार, इसके बाद कोई और रंग तुम्हें पक्का […]
बिन निज भाषा के ज्ञान के बजे ना कोई बीन, अंग्रेजी जो भी पढ़े होवे हिय से हीन, संस्कारों की खेती अब न कर पाये कोई दीन, हिन्दी को अपनी कोई ले न हमसे छीन।। […]
शब्दों का क्या है इनकी तो कोठरी बहुत बड़ी है, तेरी खामोशी भी पर्याप्त है इनके कद के आगे।। राही (अंजाना)
एक छोटी सी शीशी में गिरतार हो गई, भला कैसे ये जिंदगी शर्मोसार हो गई, यूँ तड़पी बेहद फिर तार-तार हो गई, बेरुखी दुनियाँ भी तो बार-बार हो गई, क्यों छिपती-छिपाती मेरी लाज एक दिन, […]
सृष्टि के नियनों को बदला नहीं करते, रात हो तो उसे दिन कहा नहीं करते, फूलों की चाहत में वृक्ष बोया नहीं करते, जिंदगी के सच से हम मुकरा नहीं करते।। राही (अंजाना)
अंकुर विस्तार पाकर व्रक्ष रूप धर लेता है, जिंदगी का ये पौधा कभी विश्राम नहीं लेता है, सिकुड़ जाते हैं रिश्ते तो सिकुड़ जाने दो इन्हें, जिंदगी जिंदगी है मान लो इसे कोई थाम नहीं […]
पकड़ न सही पर साथ चल सकते हैं, हम वक्त के पहिये के आस पास चल सकते हैं।। राही (अंजाना)
ज़िन्दगी एक रेस है जिसमे दौड़ना ही होगा, वक्त रहते वक्त का मुँह मोड़ना ही होगा, कालचक्र का काम है चलना, चलेगा दोस्तों, हमें अपने मन को एक बार फिर टटोलना ही होगा, ऋतुएँ परिवर्तित […]
सिफ़त माँ के मेरे बड़े साफ़ नज़र आते हैं, तामील दिलाने को मुझे जब वो खुद को भूल जाती है, पहनाती है तन पर मेरे जिस पल कपड़े मुझे, वो सर से खिसकता हुआ अपना […]
हर कदम पर साथ निभाते हो, तुम मुझको बहुत सताते हो, पर जैसे भी हो सच कहती हूँ, तुम बस मेरे मन को भाते हो, छोटी छोटी बातों पर तुम, मुझको टोका करते हो, सही […]
तोड़ कर हर ज़ंज़ीर तूने हौंसला दिखाया है, जो बुत बन चुके थे उन्हें भी तूने बोलना सिखाया है, जुदा रही तू जैसे चाँद की चांदनी से सदियों, फिर बखूबी तूने सबको अपना रूतबा दिखाया […]
शर्तिया ऐसा कोई बन्धन नहीं था जो मुझे बाँध पाता, मगर तेरी जुल्फों से मैं अपनी ये शर्त हार गया।। राही (अंजाना)
शब्दों की दुनियाँ का कोई साहिर मिले तो बताना, किसी राह में मिल जाए गर वो ताहिर तो बताना।। राही (अंजाना)
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