बन्द आँखों में भी नज़र आने लगा है, एक चेहरा मुझे इस तरह सताने लगा है।। राही (अंजाना)
बन्द आँखों में भी नज़र आने लगा है, एक चेहरा मुझे इस तरह सताने लगा है।। राही (अंजाना)
गम और तन्हाई का साथ नहीं मजबूरी हैं साहिब ये और कुछ नहीं इश्क में मिली मजदूरी हैं साहिब….!! -देव कुमार
हर्षित मन फुलवारी में सुंदर फूल अनोखा देखा, मैने जंगल में हिरण एक अद्भुत रंग सलोना देखा, जब भी सोया स्वप्नों में मैंने ख़्वाब सुनहरा देखा, सावन के व्यक्तित्व को मैने सबके मनको मोहता देखा।। […]
वक्त कैसा भी हो हाथ से छूट ही जाता है, रिश्तों के समन्दर में यहाँ हर कोई डूब ही जाता है, चोंच में दाने खिलाता है जो पंछी, एक दिन तनहा छोड़ ही जाता है।। […]
जमाने में लोगों की जब से भीड़ जमने लगी, लोगों के बीच अपनेपन की कमी खलने लगी, बन तो गए हर दो कदम पर मकाँ चार दीवारों के, मगर जहाँ देखूं मुझे घरों की कमी […]
वो देखते ही नहीं आईना पलटकर यारों, गर आईने में चित्र की जगह चरित्र उनके दिखाई देते, और होता ही नहीं जो सामना शमशीर ऐ नज़र से उनकी, तो जिंदगी के सफ़र में ‘राही’ हम […]
वो देखते ही नहीं आईना पलटकर यारों, गर आईने में चित्र की जगह चरित्र उनके दिखाई देते, और होता ही नहीं जो सामना शमशीर ऐ नज़र से उनकी, तो जिंदगी के सफ़र में ‘राही’ हम […]
वो देखते ही नहीं आईना पलटकर यारों, गर आईने में चित्र की जगह चरित्र उनके दिखाई देते, और होता ही नहीं जो सामना शमशीर ऐ नज़र से उनकी, तो जिंदगी के सफ़र में ‘राही’ हम […]
कुछ इस कदर के दुआएं बेअसर हो गई, के सारे मर्ज़ों की दवाएं मेरे ही सर हो गई, इलाज मिला मगर कहीं कुछ कसर हो गई, जिंदगी इससे पहले ही मोहब्बत की नज़र हो गई।। […]
आइना देखने से ज्यादा दिखाने में लगा है, यहाँ हर कोई अपना चेहरा छिपाने में लगा है, खुद गुनाहों के समन्दर में डूबा हो मगर, हर कोई एक दूसरे पे ऊँगली उठाने में लगा है, […]
हवाओं के रुख से आहट पहचान ले कोई, ऊँगली जो उठे तो मुट्ठी बाँध ले कोई, कोई करे अनदेखी और बिन कहे सब जान ले कोई, साफ़ नज़र आता है क्यों न इसे मोहब्बत मान […]
Jab Kisi Ke Sapne Kisi Ke Armaan Ban Jaye .. Jab Kisi Ki Hassi Kisi Ki Muskaan Ban Jaye .. ~ Pyar Kehte Hai ~ Usse .. Jab Kisi Ki Saanse Kisi Ki Jaan Ban […]
प्यार मे ना कोई “”मजहब”‘ होता; ना ही कोई “”समाधी” की बात होता। .. प्यार वो दिम्मक है ;की आँख से होता और दिल मे उत्तर जाता ।।
who’ll make my day who’ll huge me Now you was there in my life it was similar to heaven for Me….! who’ll make smile on my face who’ll give me a hope you was there […]
हमारी तारीफ क्या पुछते हो, बस इतना सुन लो साहिब…! ज़िसका कोई जवाब नही, ऐसा एक सवाल हैं हम…!! -देव कुमार
ठिकाना भी मिल जाएगा, और दर्द-एे-गम की दवा भी….! माना दुनिया मतलबी हैं मगर, कुछ लोग दिलजले भी हैं साहिब….! -@ देव कुमार
कुछ पहेलियां ज़िन्दगी की मैं सुलझा ना सका, उसमें से एक तेरी ज़ालिम मोहोब्बत हैं….!! -देव कुमार
पकड़ कर ऊँगली जो समन्दर पार कराता है, बहके गर जो कश्ती तो साहिल यार दिलाता है, भुलाकर शरारत जो मुझे अपने सर पर उठाता है, मैं जो रूठूँ तो मुझे वो हर बार मनाता […]
बेगुनाह को किस गुनाह की सज़ा सुनाई गई, सारी कायनात में क्यों ये खबर फैलाई गई, जुर्म किया ही नहीं जिस मालिक ने उसको, क्यों भरी अदालत में गीता की कसम खिलाई गई।। राही (अंजाना)
छोड़कर मेरे घर को जब जाने लगा बादल, मुझसे मुँह मोड़ कर जब जाने लगा बादल, रोका पर बारिश के संग वयस्त लगा बादल, शायद धरती से मेरे गांव की रुष्ट लगा बादल, जब देखकर […]
किस पर विश्वास करू —- जो आज तक रास्ते दिखा रहे थे;; वही गुमराह करने लगे । अपनो का नाटक करके वो मेरी मासुमी(चुप्पी) फायदा ले निकले। . किस पर विश्वास करू अब तो अपने […]
शैलेन्द्र जीवन से एक दिन शिला खण्ड जब टकराया, पिता की छाया हटी तो जैसे संकट मुझपर गहराया, संस्कारों का दम्ब था मुझमें सब धीरे-धीरे ठहराया, मेरे कन्धों पर परिवार का जिम्मा जैसे बढ़ आया, […]
वो कागज़ की कश्ती वो लहरों की हस्ती, वो छोटी सी बस्ती में हम बच्चों की मस्ती, वो कहाँ खो गई है मैं ये सोंचता हूँ, वो कहाँ सो गई है मैं ये सोंचता हूँ, […]
जवानी हाय इठलाने लगी है जुबां पे आह सी आने लगी है हमारी चाह भडका के अदाये तुफानी प्रीत भडकाने लगी है उठी है प्रीति अंग-अंग मे नशीली खिला के राग चहकाने लगी है हया […]
कुछ इस कदर के दुआएं बेअसर हो गई, के सारे मर्ज़ों की दवाएं मेरे ही सर हो गई, इलाज मिला मगर कहीं कुछ कसर हो गई, जिंदगी इससे पहले ही मोहब्बत की नज़र हो गई।। […]
इतने गर्म शहर में भी चुभ सी रही हैं, ये सर्द हवा, ये शीतल सा पानी, ये सुकूँ भरी छाओं ऐ दोस्त कितना भटक स गया है न ये मन की मैं सुकून में भी […]
ना कभी उफ़ किया, ना कभी किया कोई शिकवा आपसे आज आखरी पडाव हैं ज़िन्दगी का, देखो आने मे देर ना करना….!! -@देव कुमार@-
Jee Bhar Ke Dekhoon Tjhe Agar Tjhko Gawara Ho, Betab Meri Nazrein Or Pyar Tumhara Ho, Jaan Ki Fikar Ho Na Zamaney Ki Parwa, Ek Tera pyar Ho Jo Sirf Humara Ho….
Ab bhi taaza hai zakhm seene mein, Bin tere kya rakha hai jeene mein, Hum to zinda hain tera sath paane ko, Warna deir kitni lagti hai zaher peene mein
कहीं तेरी बेवफाई से मैं बदल न जाऊँ? कहीं इंतजार की ज्वाला से मैं जल न जाऊँ? मुझे दर्द सताता है हर वक्त तन्हाई में, कहीं सब्र के चट्टानों से मैं फिसल न जाऊँ? मुक्तककार- […]
बहुत ही हल्की हो गई हैं पलकें मेरी, अरसों बाद कोई उतरा है मेरी पलकों से आज।। राही (अंजाना)
I will hurt you, this sentence hurt me a lot……!! -Dev Kumar
Don’t go with love, it’s not easy for you….! Since it spoiled your life, coz love is a Sweet poison….!! -Dev Kumar
इस शहर का बहुत बुरा हाल देखा हमने हर इंसान को गम से बेहाल देखा हमने दूर दूर तक गम, तन्हाई, और ज़िल्लत देखी हर गली, हर कूचा इश्क-ऐ-ऐतराम देखा हमने….!! -देव कुमार
माँ मुझे भी इस दुनिया में ले आओ न इस जग की लीला मुझे भी दिखलाओ न खुले आसमान के नीचे मुझको घुमाओ न अपनी ममतामई गोद में खिलाओ न पढ़ा लिखा कर मुझे भी […]
चलो रहने भी दो अब बहानेबाजी कैसी, तुम आ तो गये हो, मगर अब वो पहले वाली बात नहीं….!! -देव कुमार
Once again I saw you in the arm of someone’s else and I caught you with Gossip too….! Today I will take time to think and today I will take my final decision too….!! -Dev […]
बड़े ही नाराज दिखते हो आज आप मोहोब्बत से….! कही इसने आज आपको भी तो नहीं लूटा….!! -देव कुमार
वक्त कैसा भी हो हाथ से छूट ही जाता है, रिश्तों के समन्दर में यहाँ हर कोई डूब ही जाता है, चोंच में दाने खिलाता है जो पंछी, एक दिन तनहा छोड़ ही जाता है।। […]
उस बेगुनाह ने बस सरल रस्ते बनाये थे, एक दूजे से जोड़ने को कुछ रिश्ते बनाये थे, सरदार खुद बन बैठे गुनाह ऐ अज़ीम करके, जिस इंसान के उस मालिक ने साँचे बनाये थे।। राही […]
मिट्टी के ढेर हैं हम सब यहाँ वक़्त का खेल है न जाने कब बिखर जाये।।
मिट्टी के ढेर हैं हम सब यहाँ वक़्त का खेल है न जाने कब बिखर जाये।।
कुछ बनना है तो फूलों की तरह बनों अपनी महक से दुनिया महका दो कुछ बनना है तो तितली की तरह बनों अपने रंग दूसरों में बिखरा दो कुछ बनना है तो जुगनू की तरह […]
दौलत रूपी आग ने .. अपनो से कर दिया दुर। मैने भाई बनाना चाहा राम और लक्ष्मण जैसा; लेकिन दौलत रूपी आग ने बना दी भाई जैसे पवित्र “रिस्ता”– रावण और विभीषण जैसा।। jyoti
कल भी तेरी “चाहत “थी; आज भी तेरी चाहत है– . तु तो शिर्फ प्यार रूपी नाटक की। प्यारा मे मजबूरियाँ किसको ना होता ये मजबुरी रूपी खंजर चला दी मेरे शीने मे।। कल”” तरपता”” […]
होठो को अपने होठ से चुमनन दे दे । सुना है प्यार का रंग गहरा चढ़ता।।
कोई और बात हो तो हमको बतलाओ साहिब, के दगा देना और दिल तोडना आपकी पुरानी आदत हैं….!! -देव कुमार
ये तो अपनी अपनी किस्मत हैं साहिब, वरना इश्क का क्या हैं किसी को मिलता हैं और किसी को नहीं भी….!! -देव कुमार
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