कुछ इस तरह से इक शाम गुजारी है अपने हिस्से के गम से की वफादारी है कुछ टुकड़ो में बाँट के रख दिया ग़मों को अपने साथ हमने की इस तरह फौजदारी है राजेश’अरमान’
कुछ इस तरह से इक शाम गुजारी है अपने हिस्से के गम से की वफादारी है कुछ टुकड़ो में बाँट के रख दिया ग़मों को अपने साथ हमने की इस तरह फौजदारी है राजेश’अरमान’
पुनर्जन्म क्या मिथ्या है ??? या यथार्थ समझ से परे ? हर नई सुबह भी तो होती है पुरानी सुबह का पुनर्जन्म अपने ही अंदर होता है एक नया जन्म आकार वहीँ स्वरुप वहीँ पर […]
हर जाती सांस ने कहा देख शजर से कोई पत्ता टूटा राजेश ‘अरमान’
इल्म कुछ तो इधर भी होता है ख्वाब बंद आँखों में जगा होता है राजेश ‘अरमान’
कल छोड़ के आया था जिसे अँधेरे में वो तन्हाई आज , फिर मुझे रोशन कर रहीं है राजेश’अरमान’
रुके कदम कुछ कह जाते है देख मुड़ के अपने क़दमों के निशाँ राजेश’अरमान’
वक़्त कटता भी और काटता भी है फितरत इसकी भी है अपनों की तरह राजेश’अरमान’
साये भी अपने कभी छोटे कभी बड़े हो जाते है साये भी रखते है मेरे ग़मों से वास्ता जैसे राजेश’अरमान’
लुप्त होते रहे गर अच्छे इन्सां इसी तरह , इक दिन ये कहीं डाइनासोर न हो जाए राजेश’अरमान’
कितने मुश्किल सफर तय किये है मुड़ के तो देख अब रूक क्यों गया है फिर चल के तो देख राजेश’अरमान’
मुट्ठी में अपने आकाश, भरने का इरादा रखता हूँ तारों को हथेलिओं में ,सजाने का इरादा रखता हूँ किसी गिरी हुई इमारत की बस इक ईट सही , बुलंद इमारत फिर भी ,बनाने का इरादा […]
किसी सेहरा की रेत पे लिखा कोई गीत नहीं हूँ समुन्दर की लहरों पे सजा कोई संगीत नहीं हूँ हर खेल मैंने खेले , अपने ही उसूलों -कायदों से , किसी शतरंज की बाज़ी की […]
होली, रुत पर छा गयी। मस्तों की टोली आ गयी।। लाज़ शरम तुम छोड़ो। आज मुख मत मोड़ो।। दिल को दिल से जोड़ो। झूम कर अब बोलो॥ होली, रुत पर छा गयी है। मस्तों की […]
कुछ ख्वाब के पत्थर सिर पे लगे है, खून रिसता नहीं बस जम सा गया है हर लम्हा जैसे बस थम सा गया है राजेश ‘अरमान ‘
इन रास्तों पे कोई कितना यकीं करें इन रास्तों के भी कितने मोड़ होते है राजेश’अरमान’
डूबती कश्तियों को किनारा मिल भी जाएँ , नाखुदा की नीयत भी कुछ मायने रखती है राजेश’अरमान ‘
कभी ख़ामोशी बंद संदूक की देखना सामान सब भरा पर फिर भी गुमसुम राजेश’अरमान’
ग़ुम हुए इंसा की तलाश क्या ग़ुम ही रहेगा जहाँ रहेगा राजेश’अरमान’
गिरगिट की सभा नया गुरु चुनने के लिए कई बुजुर्ग गिरगिट , दावेदार बने पर किसी पर न , बन सकी सहमति युवा गिरगिटों की मांग सूची में पहली और आखरी मांग आजकल रंग बदलने […]
काफिलों के साथ साथ चलते रहे दुनिया के रंग में बस ढलते रहे राजेश’अरमान’
पतंग आसमाँ में उड़ती भी है और आसमाँ में कटती भी है राजेश’अरमान’
खामख्वाह वो अपने अंदाज़ सितम के बदलते है पुराने अंदाज़ भी सितम के कम लाज़वाब न थे राजेश’अरमान’
वो पढ़ना भी चाहते है मुझे पूरा , और आँखों में मेरी किताब भी नहीं राजेश’अरमान’
इन पत्थरों में तुम न जाने क्या ढूँढ़ते हो दुनिया में रहकर कौन सी दुनिया ढूँढ़ते हो बिक गया हर शख्स अपने ही बाजार में अब बाजार में कौन सी परछाईया ढूँढ़ते हो परिंदे आसमाँ […]
अपने ही लोग फिर शहर में दहशत क्यूँ अपनी ही आँखों में जहर सी वहशत क्यूँ कहीं तो सुनी जाएगी आख़िर फ़रियाद किसी सजदे को ,किसी दुआ की हसरत क्यूँ राजेश’अरमान’
रास्तों का कष्ट उस मुसाफिर को क्या जिस मुसाफिर ने इसे जीवन पथ समझा जिनकी मंज़िल ही उलझी बैठी हो उसने कब जीवन का मतलब समझा रास्ते चाहे सुलझे हो या उलझे कब रास्तों ने […]
कुछ अकेले से एहसास फिरते है दरम्या मेरे कुछ कशिश है उदास फासलों के घने अँधेरे दबे कदम चलती साँसें सहमे कदम आते सबेरे हलकी बारिश का मौसम आँखों में धुँआ के फेरे सोती रात […]
खुद को बदलने से जरूरी है खुद का किरदार बदलना आदमी दुनिया में पहचाना जाता है किरदारों से राजेश’अरमान”
मेरे खत चाहो जब जला दो पर उसकी राख मुझे दे दो / इस रूह से लिखा था जिसे , रूह को राख की अमानत दे दो / राजेश’अरमान’
देखा जब भी लहरों को मचलते समुन्दर की गोद में लगता कोई बच्चा मचल रहा है अपनी माँ की गोद में देखा जब भी बादलों को मचलते आसमां की गोद में लगता कोई युवा मचल […]
प्रेम सिर्फ अनुभूति है नहीं, प्रेम अनुभूति से अलग कोई एहसास है जिसे देखा जा सकता है किसी की आँखों में किसी की साँसों में किसी की ख़ामोशी में किसी की सरगमों में किसी की […]
जहाँ में दिल टूटने का यूँ न हादसा होता वफ़ा की तालीम का गर कोई मदरसा होता राजेश’अरमान’
काँपते ख़्वाबों को हक़ीक़त की जुम्बिश न मिली रूठे अल्फ़ाज़ों को किसी प्यार की बंदिश न मिली तिश्नगी लबों तक आकर खामोश हो जाती है कशिश को भी और कोई, फिर कशिश न मिली फ़लसफ़े […]
चुनिंदा लम्हें घूम गए आँखों में जो लिपटे न थे दर्द की चाश्नी में कुछ तेरे साथ के वो पल जो शिकवा से न लिपटे थे कुछ तेरे साथ के वो पल जो लिपटे थे […]
झूठ के पैर बहुत लम्बे होते है और सच के हाथ राजेश’अरमान’
ना खुद को बदल सका ना तेरी निगाहों को सिलसिला बस चलता रहा खत्म होने के लिए राजेश’अरमान’
टुकड़े से पड़े है तेरे दिल के आसपास देखना कहीं मेरा दिल तो नहीं राजेश ‘अरमान’
चुपके से कोई शाम ढल जाती है और छोड़ जाती है जागती रातें रातें करवटें बदलती है तारे जागते पहरा देते है ख्वाब आँखों में जगमगाते है होती फिर तैयार एक सुबह आतुर है मन […]
मासूमियत उसके चेहरे की यूँ ग़ुम हुई जैसे कोई गाँव ,शहर में तब्दील हो गया हो राजेश’अरमान’
काबिज जामे-लवो पर जलवा-ए शबाब हो गए घटा-ए जुल्फ मैखाना वलवला-ए रंगे चश्म शराब हो गए!? -रमेश
जब किसी को चाहना खता हो जाती है! खुशी ज़िन्दगी से लापता हो जाती है! बेनूर नज़र आती हैं महफिलें सभी, साँस-ए-जिस्म दर्दों की पता हो जाती है! Composed By #महादेव
. . ღღ__ख़ुदा से माँगते क्यूँकर, भला हम, दुआएँ उनके रोने की; . वो इश्क करने लगें किसी से, सज़ा को इतना ही काफी है!!…..#अक्स .
न जाने किस तरक्की की बात करते हो जब देखो नफरतों की बरसात करते हो हम बैठे है सरेराह जवाबों के तस्सवुर में जनाब तुम हो की हमसे सवालात करते हो जब भी मिलते हो […]
सामने खड़ी थी वो चंचल हसीना , दीवाना था जिसका मैं पागल कमीना, सब कह रहे थे तुझे देखती है , मुझे भी लगा वो मुझे देखती है , मैं इस ओर था वो उस […]
धर्मों में बिखरा इंसान सही मायने में नास्तिक है राजेश’अरमान’
उनके जुमलों से आती है बूँ जलन की हमने देखी है कुछ ताप उस अगन की फाकामस्ती भी कोई जागीर से कम नहीं लुत्फ़ उगते नहीं बदनसीबी है चमन की राजेश’अरमान’
मखौल ज़माने का उड़ाने वाले गुनहगार तुम भी हो नफरतों के पेड़ उगाने वाले तलबगार तुम भी हो गुस्ताखी औरों की तो दिखती है नंगी आँखों से खुद के गिरेबां पे होती हाहाकार तुम भी […]
Shabdon ka khel aasan hai , par unke sath khelna nahi Zindagi ek natak hai, par usme nakhre dikhana nahi Uchaiyon par pohchna aasan hai par waha tikk pana nahi Nazre jhookana aasan hai par […]
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