शरारतें की है बहुत जिंदगी में हमने
अब जिंदगी है जो शरारत करती है
Tag: kavita
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शरारतें की है बहुत जिंदगी में हमने
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JAANE KYU … ??
Jaane kyu———–??
logg yahaa pe
hote betab,saath paane ko
ye zindagi to hai
kewal aane–jaane ko
sunaa hai Maine buzurgo se
padhaa hai Maine grantho mei
aana–jaana akelaa hotaa hai
phir,kis baat ka mela hotaa hai??
kahte hai logg mayaa hai ye
pr ye kaisi maaya——-??
aur’ kaisi maayaa ka sansaar
ki– hrr pal– hrr koi–
sangg paane ko beqaraar
jaane kyu——–???
jankarr bhi sachchaai
ho jaate mnn ke,bhaav haavi
trishnaa ke chhaav ki khoj
bhoolkrr shaashwt,sanaatan bhaavi
chhut sa jaataa hai ” sach”
jaane kyu——-???
kisliye judte hai bandhan
phir,tutate bandhan
kisliye hotaa hai dard
jaankarr ki—–
chhoot jaate hai sabhi yahaa prr
rah jaate hai,saare zami prr
dil dhundhtaa–phirr bhi–hamdard
jaane kyu—-jaane kyu—-?? -
“ख्वाहिशें”
ღღ_अजब ही चीज़ हैं, ये ख्वाहिशें “साहब”,
मैं टूट भी जाऊँ, तो बिखरने नहीं देती;
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एक तुम हो, कि मुझसे दूर ही रहते हो,
और एक ये हैं, कि मरने भी नहीं देतीं !!……#अक्स.

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तुम्हारे लब पर नाम मेरा जब आएगा
तुम्हारे लब पर नाम मेरा जब आएगा!
गुजरा हुआ मंजर तुमको नज़र आएगा!
#बिखरे हुए अफसाने घेरेंगे इसतरह,
दर्द का समन्दर पलकों में उतर आएगा!
Written By #महादेव
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ღღ__ज़िन्दगी भी कुछ ऐसे ख्याल में गुजरी
ღღ__ज़िन्दगी भी कुछ ऐसे ख्याल में गुजरी;
जैसे शब्-ए-फुरकत किसी मलाल में गुजरी !!
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जिसमें इश्क़, हो जाता है बे-वजह;
वो उम्र तो बस, अभी हाल में गुजरी !!
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क्यूँकर हसीन सपने, देख लेती है आँखें;
हकीक़त तो अक्सर, किसी सवाल में गुजरी !!
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तन्हाईयों की उम्र भी कितनी अजीब है;
रोज़-ओ-शब् बस एक ही हाल में गुजरी !!…… #अक्स
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कितनी बातें अनकही रह जाती है
कितनी बातें अनकही रह जाती है
कितने लम्हे बिना जीए ही बीत जाते है
सोचते सोचते दिन महीने साल
धीरे धीरे सब गुजर जाते है -
सितम पे सितम तुम ढाते रहे
सितम पे सितम तुम ढाते रहे
अफ़साने मगर महोब्बत के बनते रहे
लफ़्जों में कहां बयां होती है कहानी मेरी
कर सको गर महसूस तो जानो
किस कदर हम दरिया ए आग में जलते रहे…कोई कभी कितना भी दूर क्यों न हो
हो जाते है करीब महोब्बत गर रहे
आंखों में जो हो जाये बयां
उस अहसास में हम ढलते रहे… -
समझने को दुनिया ने क्या क्या हमें समझा
समझने को दुनिया ने क्या क्या हमें समझा
जो न समझना था, लोगो ने वही समझा
देख के दुनिया की समझदारी, हम यही समझे
जो न कुछ समझा यहां, वही सब कुछ समझा| -
बस दर्द के शार्गिद में अब नज्में-ए-गम लिखा करते है
वो पूछते है हमसे कि आजकल हम क्या करते है
क्या बताएं कि उनके इंतजार में किस कदर मरते हैअपने अहसास, अपनी आरजू दिल में दबाए रखे है
वो कहते है कि आजकल हम कुछ चुप से रहा करते हैकहते है वो आज से हम बाते नहीं करेंगे आपसे
उनके लफ्जों के सहारे ही लम्हे गुजरा करते हैजाते जाते वो आज जो हमसे खफ़ा हो गये
बस दर्द के शार्गिद में अब नज्में-ए-गम लिखा करते है -
“वक़्त तो लगता है !!”
मोहब्बत से नफरत तक आने में, वक़्त तो लगता है;
जागती आँखों को सुलाने में वक़्त तो लगता है!!
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इतनी जल्दी कहाँ से सीखा, तुमने रक़ीबों-सा हुनर;
अपने महबूब को रुलाने में, वक़्त तो लगता है !!
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अब ऐसी भी क्या जल्दी थी, हमसे दूर जाने की;
और जा ही चुके हो, तो भुलाने में वक़्त तो लगता है!!
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हम भी वक़्त दे रहे हैं सबको, आस्तीनों से निकलने का;
अभी तो ख़ुद से रूठे हैं, मनाने में वक़्त तोलगता है!!………#अक्स -
“मैं आदमी-सा था”
सूरत तो उसकी देखी, पर सीरत नहीं देखी;
ღღ_है मेरी खता ये, कि मैं आदमी-सा था !
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ღღ_वक़्त के साथ उनके, बदला किये ख्याल;
इन हालात में बिछडना, तो लाज़मी-सा था!!……#अक्स -
“ღ महबूब ღ”
मेरे महबूब के जलवों की तो, पूरी दुनिया ही दीवानी है,
ये जहाँ जो इक गुलिस्ताँ है, इसकी वो रात-रानी है;
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चाल है गज़ालों सी, रुख में मौजों सी रवानी है,
होंठों पे शबनम का बसेरा है, आँखें मैखानों की निशानी हैं;
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रंगत में धूप सी चमक है, जुल्फें हैं स्याह रातों सी,
जहाँ भर के हसीनों में, उसके चर्चे ज़ुबानी हैं;
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माना ये ख्वाब दिलकश है ‘अक्स’, ज़द में रह के देखो तो अच्छा है,
अमूमन तो ये ख्वाब पूरे नहीं होते, हो जाएँ तो ख़ुदा की मेहरबानी है!…….#अक्स
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अब तो भूलने की कोशिशों की भी यादें बन गयी है
कई दफ़ा की कोशिश भूल जाने की उन्हे
अब तो भूलने की कोशिशों की भी
यादें बन गयी है| -
दिल की आवाज किसी कोने में दफ़न हो गयी
मेरी कहानी अनकही ही रह गयी
सितारों के उजालों में अंधेरे सी दब गयी
दुनिया ने मेरी सिर्फ़ सूरत ही देखी
दिल की आवाज किसी कोने में दफ़न हो गयी -
वाह! क्या बात है
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उतार दी है जिंदगी सारी कि सारी
चंद लफ़्जों में
काश कोई समझ ले कभी
इसी इंतजार में है इक मुद्दत से
कि कभी कोई मेरे लफ़्जों को गढ़ ले कभी|
सीधे सपाट शब्दों में कह देता हूं
अपनी आपबीती, दास्ता अपनी
थोडी सी भीगी भीगी,थोडी सी सूखी
लोग कहते है “वाह! क्या बात है”– Anirudh
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धीरे धीरे चलने से राहे बन जाती है
धीरे धीरे चलने से राहे बन जाती है
छोटी छोटी बातों से यादें बन जाती है
जरा कोशिश तो कर के देख
चंद लफ़्जो ओ अहसासों से नज्म बन जाती है| -
अश्क बेपरवाह बहे जाते है
अश्क बेपरवाह बहे जाते है
एक कहानी है
ये जो कहे जाते है
कोई सुनता ही नहीं
कोई ठहरता ही नहीं
आते है लोग, चले जाते है
अश्क बेपरवाह बहे जाते है
आंखो से बहकर आसूं
आ जाते है रूखसारो पर
छोड कर खारी लकीरे,
अपने अनकहे अहसासों की
न जाने कहां गुम जो जाते है
अश्क बेपरवाह बहे जाते है
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हर कोई हमारे करीब आना चाहता है
हर कोई हमारे करीब आना चाहता है
मगर रिश्ता कोई नहीं निभाना चाहता है
चाहत तो हमारी बस सच्चे दिल की ही है
मगर झूठी दुनिया में सच कहां नजर आता है -
बढे जो मेरे हाथ, खुदा की तरफ़
बढे जो मेरे हाथ, खुदा की तरफ़
दुनिया ने मुझे काफ़िर करार दे दिया
नहीं समझी दुनिया, न वो खुदा
मेरे सजदे को| -
वाह! क्या नज़्म है|
थोडी सी उदासी जमा कर ली है
मुठ्टी भर दर्द को कैद कर रखा है
दिल के इक कौने में
कभी कभी इसी दर्द को घोलकर स्याही में
बिखेर देता हूं उदास कागज़ पर
कुछ अल्फ़ाज़ से खिंच जाते है
लोग कहते है
वाह! क्या नज़्म है|
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कोई खिडकी न खुले और गुजर जाऊं मैं
हादसा ऐसा भी उस कूचे में कर जाऊं मैं
कोई खिडकी न खुले और गुजर जाऊं मैंसुबह होते ही नया एक जजीरा लिख दूं
आज की रात अगर तह में उतर जाऊं मैंमुन्तजिर कब से हूं इक दश्ते करामाती का
वह अगर शाख हिला दे तो बिखर जाऊं मैंजी में आता है कि उस दश्ते सदा से गुजरूं
कोई आवाज ना आये तो किधर जाऊं मैंसारे दरवाजों पे आईने लटकते देखूं
हाथ में संग लिये कौन से घर जाऊं मैं -
यह कैसी जिंदगी है
यह कैसी जिंदगी है
जो अपनी होकर भी परायी है
भीड तो है चारो तरफ़
फिर भी हर तरफ़ फैली तन्हाई है -
तूम चले जाओगे तुम्हारी यादें रह जायेंगी
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दिल के बागों मे खुशबुयें ही खुशबुयें रह जायेंगी
तूम चले जाओगे तुम्हारी यादें रह जायेंगीरहेगा सदा इन्तजार तेरा इन आंखो को
दरवाजे ए दिल पर तुम्हारी दस्तकें रह जायेंगीआना था तुमको खुशी खुशी हमारी यादों में
क्या पता था रूखसारों पर खारी लकीरें रह जायेंगीजो कह ना पाये वो लिख देते है आज
नहीं तो तुम्हारी यादें तडपती रह जायेंगी#############################
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सोचा नहीं था
चले जाओगे तुम ये सोच नहीं था
हो जाएगें तनहा हम ये सोचा नहीं थाहंसते हंसते बितायी थी जिंदगी हमने
गम में ढ़ल जाएगी जिंदगी ये सोचा नहीं थातेरी आंखो के नशे मे डूबे रहे हम जिंदगी भर
मय बन जाएगा मुकद्दर ये सोचा नहीं थाजिंदगी क्या थी हमारी बस तुम्हारा अहसास था
अहसास भी साथ न रहेगा ये सोचा नहीं थादिल ए आईने में उतार ली थी तस्वीर तुम्हारी
वो आईना टूट जाएगा ये सोचा नहीं थाहर शाम साथ साथ हुई थी बसर हमारी
तमाम शब जगेंगे तनहा ये सोचा नहीं थामिले थे जब उनसे मिट गयी थी दूरियां
दूरियां हो जाएगीं दरम्यां ये सोचा नहीं थाजिने जानते थे हम अपनी जिंदगी से ज्यादा
वो हो जाएंगे अजनबी ये सोचा नहीं था
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गायब हर मंजर मेरा
गायब हर मंजर मेरा
ढूढ़े परिंदा घर मेराजंगल में गुम फ़स्ल मेरी
नदी में गुम पत्थर मेरादुआ मेरी गुम सर सर में
भंवर में गुम महवर मेरानाफ़ में गुम सब ख्वाब मेरे
रेत में गुम बिस्तर मेरासब बेनूर क्यास मेरे
गुम सार दफ़्तर मेराकभी कभी सब कुछ गायब
नाम कि गुम अक्सर मेरामैं अपने अंदर की बहार
बानी क्या बाहर मेरा -
उसको हमने कल तडपते हुए देखा था
***
उसको हमने कल तडपते हुए देखा था
शायद उसकी यादें कल लोट आयी थी***
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इक नज़्म कभी कभी जाग उठती है
पुरानी जिंदगी कभी कभी जाग उठती है
यादें आ जाती है याद बेवजह
खारी लकीरें छोडकर रुखसारों पर
न जाने कहां खो जाते है जज्बात मेरे
लफ़्ज जो कभी जुबां पर आ ना पाये
जो छुपते रहे ज़हन के किसी कोने में
उमड उठते है कभी कभी
कागज के किसी कोने में
इक नज़्म कभी कभी जाग उठती है| -
AAJ FIR SE JEENE KI KHUWAASIH HAI
KOI LOUTA DE MERE VO DIN
JAB ME HANSTI THI POORE MAN SE
KHELTI THI, LADTI – JAGADTI THI
KABHI KABHI NARAZ HO JAATI THI
KHUD SE HI
BANATI THI HAR ROJ NAYE DOST
KARTI THI BAATE KHIDKI PAR BAITHI CHIDIYA SE
HAWAO SE GUFTA-GOO KARTI THI
LAUTA DE KOI MERE VO DIN
AAJ FIR SE JEENE KI KHUWAASIH HAI !
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कुछ लफ़्ज़ ठहरा रखे हैं कागज पर
कुछ लफ़्ज़ ठहरा रखे हैं कागज पर
क्या पता कभी कोई कविता बन जायें
कुछ दिनों को भी जोड रखा है
शायद कहीं ये भी कभी जिंदगी बन जायें -

Few words from Mushaira
Saavan
ये कारवां चले तो, हम भी चलें
ये शम्मा जले तो, हम भी जलें
खाक करके हर पुरानी ख्वाहिश को
इक नया कदम, हम भी चलें……
कभी ठहरी सी लगती है,
कभी बहती चली जाती है
जिंदगी है या पानी है
न जाने क्यों जम जाती है
कोई वक्त था, जब एक रब्त चला करता था हमारे दरम्या
गुजर गया वो रब्त, अब साथ बस वक्त चले
मुश्किल है राहें, सूनी है अकेली सी
इस अकेलेपन में साथ तन्हाई चले
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ठिठुरता बचपन (October 17: Anti Poverty Day)
October 17: Anti Poverty Day
सर्दी में नंगे पांव
कूड़ा बटोरते बच्चे
ठिठुरता बचपन उनका
सिकुडी हुई नन्ही काया
टाट के थैले की तरह
उनके रूदन का
क्या जिक्र करू मैं
लफ़्जों के कुछ दायरे होते है
नहीं फैल सकते वह
उनके रूदन की तरह
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आज की शाम
आज की शाम शमा से बाते कर लूं
उससे चेहरे को अपनी आखों में भर लूंफासले है क्यों उसके मेरे दरम्या
चलकर कुछ कदम कम ये फासले कर लूंप्यार करना उनसे मेरी भूल थी अगर
तो ये भूल एक बार फिर से कर लूंउसके संग चला था जिंदगी की राहों में
बिना उसके जिंदगी कैसे बसर कर लूंपरवाने को जलते देखा तो ख्याल आया
आज की शाम शमा से बाते कर लूं -

जब सोचा इक दफ़ा जिन्द्गी के बारे मे
जब सोचा इक दफ़ा जिन्द्गी के बारे मे
किस कदर बसर हुई जिंदगी मेरी
क्यों भटकता रहा जिंदगीभर मुसाफ़िर बनकर
ज्वालामुखी सा जलता रहा
कभी लावे सा पिघलता रहा
आसमां को छुने की आरजू में
पतगं सा हर बार कटता रहा
हाथों की लकीरों से लडता था कभी में
अब उन लकीरों मे ही ढ़लता रहा
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समंदर में इक कश्ती है छोटी सी
समंदर में इक कश्ती है छोटी सी
कभी रोती थी रेत के दरिया में
अब दरिया ए अश्क में तैरती है..
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कुछ कमाल की बात है
कुछ कमाल की बात है
उनकी आवाज में
कभी कोयल सी मधुर लगती है
कभी बिजली की कडक सी कर्कश
तो कभी बूंद बनकर बरसती है
मेरे सूखे पडे ह्रदय में
कभी बहा कर ले जाती है
डुबा देती है
समंदर के आगाज़ में
कुछ कमाल की बात है
उनकी आवाज में
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झुकी जो नजर
थोडा सा शरमाकर, हल्के से मुस्कुराकर झुकी जो नजर
नज़रे-नूर-ओ-रोशनी में मेरी रंगे-रूह हल्के से घुलती गयी
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हाल -ए- दिल
हम अपना हाल -ए- दिल आपसे कहते रहे
कभी बच्चा तो कभी मासूम आप हमें कहते रहेआज तक कोई सबक पढा न जिंदगी में हमने
ताउम्र हम आपकी आखों जाने क्या पढते रहेइक अरसा बीत गया हम मिले नहीं आपसे
तुझसे मुलाकात के इंतजार में हम तनहा मरते रहेन हुई सुबह न कभी रात इस दिल ए शहर में
कितने ही सूरज उगे कितने ही ढलते रहेअनजान राहों में चलते रहे मंजिल की तलाश में
चलना ही मुसाफिर का नसीब है सो हम चलते रहे
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कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे
कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे
उमडने को आतुर है ज़ज्बात मिरे
वो तो अल्फ़ाज़ हैं कि कहीं खोये हुए है
नहीं तो इक नज़्म लिख देते अश्क मिरे
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तेरी हरयाली इन आँखों में है वरना
तेरी हरयाली इन आँखों में है वरना,
दिल तो कल भी रेगिस्तान था और आज भी है -

मेरी मोहब्त को सलाम कर तू
मेरी मोहब्त को सलाम कर तू
मेरी मोहब्त को सलाम कर तू ओ बेवफ़ा
तूने ज़हर देकर बेवफ़ाई निभाई
और हमने जान देकर आशिक़ीतू चाहती थी छोड़कर जाना
तू चाहती थी छोड़कर जाना
और हम दुनिया छोड़ कर चले आये
कहती हो खुश हु आज
मेरा दिल ठुकराकर
और हम
और हम आज फिर से आंशू बहा आयेहिम्मत तो बहुत थीं
दुनिया से लड़ने की
और जीत लेते हम भी इस जहाँ को
लेकिन तेरे सामने हम खुद को हार आयेपोस्ट मार्तम कर ले यमराज
तू भी पोस्ट मार्तम कर ले यमराज
लेकिन दिल
लेकिन दिल तो हम अपना वही छोड़ आये -
……….चाहत होती है!
पराये जज्बातों को अपना बनाने की चाहत होती है
किसी की आहों में डूब जाने की चाहत होती है
उम्र भर चलते रहे तनहाईयों के साथ हम
उनके साथ चंद कदम चलने की चाहत होती है
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जिंदगी मेरी जिंदगी से परेशान है
जिंदगी मेरी जिंदगी से परेशान है
बात इतनी है कि लिबास मेरे रूह से अनजान हैतारीकी है मगर, दिया भी नहीं जला सकते है
क्या करे घर में सब लाक के सामान हैऐसा नहीं कि कोई नहीं जहान में हमारा यहां
दोस्त है कई मगर, क्या करें नादान हैकोई कुछ जानता नहीं, समझता नहीं कोई यहां
जो लोग करीब है मेरे, दूरियों से अनजान हैघर छोड बैठ गये हैं मैखाने में आकर
कुछ नहीं तो मय के मिलने का इमकान हैढूढ रहा हूं खुद को, कहीं कभी मिलता नहीं
चेहरे की तो नहीं, मुझे उसके दिल की पहचान हैगुजर जायेगी जिंदगी अब जिंदगी से क्या डरना
जो अब बस पल दो पल की मेहमान है -
तेरी याद लिए आती हैं।
रात आती है तेरी याद लिए आती है
यादों की रंगीन बरात लिए आती है
यह मुश्किल है कि तेरी याद ना आये
कैसे भूलूं वो मुलाक़ात लिए आती है ।यादों के भंवर मे किनारा नही मिलता
आसमा मे दुसरा सितारा नही मिलता
तनहा दिल है मेरा तेरे इंतज़ार मे
जीने का और सहारा नही मिलता।कोशिश तुम्हारे पास आने की है
प्यार भरे दिल मे समाने की है
ये दूरियां कब ख़त्म होगी
एहसास जवा तुम्हे पाने की है।और इंतज़ार बेक़रार किये जाती है
नींद भी मुझसे इनकार किये जाती है
आँखों मे सिर्फ तेरे ख्वाब लिए आती है
रात आती है और तेरी याद लिए आती है।

