मन को छोटा न कर दुःख दर्द तो मेहमान हैं, आते हैं जाते हैं ये गम स्थाई नहीं हैं ये मेहमान हैं।। न घबरा दुःखों से ये तेरी परीक्षाएं हैं, ये तो तेरे कार्य की […]
मन को छोटा न कर दुःख दर्द तो मेहमान हैं, आते हैं जाते हैं ये गम स्थाई नहीं हैं ये मेहमान हैं।। न घबरा दुःखों से ये तेरी परीक्षाएं हैं, ये तो तेरे कार्य की […]
मैं कवि हूँ, मैं फौलाद नहीं, सच कहता हूं, सच बात यही। जो सच से डरते हैं केवल कुढ़ते हैं वे सच बात यही।
रात भर के अंधेरे को जिस तरह सूर्य ने आकर , भगाया एक ही क्षण में, उस तरह आस का सूरज उगाओ आप भी मन में। भगाओ दूर चिंता को नजर रख लक्ष्य पर अपनी […]
मेरा भारत कमजोर नहीं मेरा भारत कमजोर नहीं तू चाइना आँख दिखाना मत, औरों के कंधे पर रखकर हमको बन्दूक दिखाना मत। हम तेरी गीदड़ भभकी का उत्तर देने में सक्षम हैं, जल-थल- नभ में […]
ब्रह्मचर्य, हाँ ठीक है कहना, लेकिन क्या भारतमाता के सभी पुत्र ब्रह्मचारी बन सृजन से दूर चले जाएँ। नहीं – नहीं नयी पीढ़ी का सृजन युवा रक्त से हो, इसलिए विरक्ति की नहीं जरुरत सृजन […]
तू ठेस देने वालों से न घबरा तेरे में हुनर बहुत है, तेरी लेखनी की धार में खनक बहुत है। हवाएं तो आती रहेंगी जाती रहेंगी, आँख में रेत का कण डालकर रुलाती रहेंगी, लेकिन […]
नई उमंगें, नया सवेरा आज मान ले कहना मेरा कदम बढ़ा ले उन्नति पथ पर क्यों बीती चिन्ता ने घेरा। रात-रात भर सपने देखे इधर-उधर की भारी उलझन कहाँ भटकता रहा रात भर दिन होते […]
पढ़े-लिखे बेरोजगारों की फौज खड़ी है, चारों ओर , कैसे हल निकले अब इसका घटा छा रही है घनघोर । जाग देश के शीर्ष सिंहासन कुछ ऐसी अब नीति बना, युवा फूल खिलने लग जाएँ […]
ओ मेरे जीवन साथी! तुझमें कितना है स्नेह भरा, तू इतना बेचैन हो जाती है यदि हो मुझको दर्द ज़रा। मुझको ही क्या घर में कोई छींके भी तो तू व्यथित हुई झट से काढ़ा […]
मेरा स्वप्निल प्रियतम तो कवितायें लिखने वाला हो, अपनी सुन्दर रचनाओं में हर भाव सजाने वाला को। अगर किसी कारणवश मुझमें कभी निराशा घर कर जाए, मेरा स्वप्निल प्रियतम तत्क्षण आशा का संचार करे। उसकी […]
मन के गम दूर करें आओ दो बात करें, जो हैं दिल टूटे हुए, उनमें उत्साह भरें। किसी की चाह रखें, न कभी डाह रखें, कठिन हो वक्त भले न कभी आह भरें। मजे भरपूर […]
लट के श्याम उलझे केशों की वो चमक अब, नैनों की नीलिमा अब होंठों की लालिमा अब, पतली सी वो कमर अब बाली सी वो उमर अब तोते सी नासिका अब पाने की लालसा अब, […]
चिंता त्याग प्रसन्नचित रह कविता तेरे साथ खड़ी, पूरी साथ न भी दे पाए तो भी ताकत बनी खड़ी।
जीवन की आपाधापी में त्यौहार सांकेतिक हो गए, जबसे कोरोना आया है तब से ऑनलाइन हो गए। प्यार ऑनलाइन हो गया मुलाकात ऑनलाइन हो गई, राखी ऑनलाइन कलाई ऑनलाइन हो गई बस जज्बात ऑफ लाइन […]
दिल खोल कर त्यौहार मनाओ दिल खोल कर प्यार दे दो राखी में बहन आई होगी दिल खोलकर उपहार दे दो।1। रोज-रोज ठगता है आज तो कंजूसी छोड़ आज तो राखी है भाई आज तो […]
भाई -बहन का प्यार भरा यह पावन पर्व मुबारक हो, खुशियों से भरा, जज्बात भरा, यह पावन पर्व मुबारक हो। सदा सम्मान रहे रिश्तों में प्रेम भरा ही भाव रहे, कैसी भी कोई स्थिति हो […]
यह जो रोग फैला है यह मानवता के लिए भारी संकट है, जूझ रही है मानव जाति इस कठिनाई से, डॉक्टर, नर्स, फार्मेसिस्ट और लैब टैक्नीशियन जुटे हैं पूरी सिद्दत से पीड़ितों की सेवा में, […]
पूर्वसंध्या पर रक्षाबंदन की आप सभी को बहुत बधाई, बहनें सजाएंगी कल अपने भैया की मधुर कलाई। रेशमी धागे से बनी रंग बिरंगी राखी सजेगी, पूड़ी पकवान मिष्ठान बर्फी चॉकलेट और रसमलाई। पूर्वसंध्या पर रक्षाबंदन […]
पुकार रहा है जरूरतमंद तुम्हें आओ मदद करो मेरी, बेरोजगारी का समय है, कोविड के कारण छिन गया है रोजगार, शहर में कमाता था दो चार वो बंद हो गया गाँव लौट आया, यहाँ भी […]
यूँ ना उड़ाओ मेरी नींद मैं रिपोर्ट लिखा दूंगी, दिल की अदालत में। ज़माना कुछ भी कहे अपना बनाकर सजा दिला दूंगी, दिल की अदालत में।
चोर सा नींद मेरी चुरा ले गया आँख थक सी गयी दिल व्यथित हो गया, किस तरफ को गया कुछ पता ना चला जिंदगी की भरी भीड़ में खो गया।
उलझन भरी जिंदगी में नींद के लिए समय ही कहाँ है जब समय होता है नींद आती ही कहाँ है। नींद भी जरुरी है इंसान के लिए पर इंसान जरुरी कहाँ है नींद के लिए। […]
जिसके आ जाने पर कुछ भी पता नहीं चल पाता है क्या घटित हुआ संसार में कुछ पता नहीं चल पाता है, जिसके आ जाने पर तुम हम न डर न भयभीत रहते हैं उस […]
जिसके आ जाने पर कुछ भी पता नहीं चल पाता है क्या घटित हुआ संसार में कुछ पता नहीं चल पाता है, जिसके आ जाने पर तुम हम न डर न भयभीत रहते हैं उस […]
उठ मेरी छोटी सी गुड़िया सुबह हो गई उठ जा अब बाहर सूरज चमक रहा है सुबह हो गई उठ जा अब। अपनी सुन्दर बाल लीलाओं से महका गुड़िया रानी अभी बोलना सीख न पाई […]
तुमने तो बहन आज मुझे पहना दी सुन्दर सी राखी, प्यारी सी कोमल सी राखी यह प्रेम रंग रंगती राखी। यह राखी है अनमोल सूत्र जो जोड़ रहा विश्वास अटल कोई उपहार नहीं ऐसा जो […]
कल ही आ जाना बहना तू परसों तो रक्षाबंधन है, कुछ देर बैठकर बचपन की यादों को ताज़ा कर लेंगे। तू भी अपने में व्यस्त हो गई हमको भी फुर्सत न रही अब कल ही […]
दिशा तुम्हारे कदमों की कविता पहचाना करती है, तभी यदा-कदा लिखने को प्रेरित कवि को करती है।
मित्र दिल के सैनिकों की जब खड़ी होंगी कतारें उन कतारों में विभूषित आप सेनापति रहें।
जिन्दगी में मुश्किलें हैं, और भी तो अड़चनें हैं, आपसे हम दूर रहकर क्या हमेशा खुश रहे हैं।
तू दोस्ती करेगा पर एक शर्त मेरी, जब भी मैं हार बैठूँ तू साथ ही रहेगा। आ दोस्त आ गले मिल तेरे बिना मैं सूना, तेरा है दर्द मेरा चिंता न कर मैं हूँ ना।
दुत्कार में सत्कार देती बेटियाँ दूसरों के हित मे जीतीं बेटियाँ, बेटियाँ में ही रमा संसार है बेटियों से ही बना संसार है।
मेरा सब कुछ ले ले तू बस अपना स्नेह मुझे दे दे दो बात प्रेम के बोल मुझे मैं इसी बात का भूखा हूँ, तेरे सुन्दर बोलों पर मैं अपनी राह बदल लूंगा, सारी बातों […]
चल मेरे प्यारे साथी अब असली कविता करते हैं। दुःख-दर्द दूर हो मानव का ऐसी कवितायें करते हैं।
बरसात आ रही है फिर धूप आ रही है फिर बरसात फिर धूप, बारी – बारी से आ रही है, दोनों से ही तत्व हासिल कर धरती हरियाली उगा पा रही है।
खूब प्यार बरसाते बादल से सीखो तुम तुम भी मनुहार खाली-मूली बोल रहे हो करते कब हो मुझसे प्यार।
वाह, झमाझम बारिश देखो सुन्दर सावन बरस रहा, तन भीगा मन भीगा मेरा तेरा मन क्यों तरस रहा, आ जा पास प्रियतम मेरे, एक नई शुरूआत करें, आज मिटा लें अपनी दूरी एक नई शुरूआत […]
घमंड इंसान को गिरा देता है, अहंकार मौलिकता को चुरा लेता है, जो समझता है मैं ही इस जंगल का शेर हूँ उस शेर को सवा शेर हरा देता है। शेरों का सा संघर्ष इंसान […]
किसी को मत गिराया करो लंगड़ी देकर, किसी को मत रोका करो टंगड़ी दे कर। दुनिया में तो कैसे कैसे पहलवान हैं, कमजोर को मत डराया करो धमकी देकर।
मंजिल तक पहुँचने में कठिनाइयां न आएं तो मजा नहीं आता, कोई बेवजह दर्द दे तो सहा नहीं जाता।
करते रहो संघर्ष तुम संघर्ष से ही पा सकोगे, बस संघर्ष झगडे सा नहीं बल्कि मेहनत से आगे बढ़ने का हो, कुछ अच्छा करने का हो।
मेरे भारत की शान निराली, सुंदरता के क्या कहने देखो कश्मीर, हिमालय के ऊँचे – ऊँचे निर्मल पर्वत, सुंदरता से हैं भरे हुए भारत माँ के हैं गहने । कश्मीर स्वर्ग धरती का है, औ […]
ओ !! प्रियतम मेरे तू ही बता, मेरा मन इतना विचलित क्यों ? मैं सच के पथ से विचलित क्यों ? जो दर्द उठाता कल तक आवाज उठाता था कल तक वह दर्द उठाना छोड़ा […]
मत समझना कि नादान कवि हूँ बहकी बहकी सी कविता कहूंगा जिस तरफ बह रही हो हवा धूल सा उस दिशा को बहूँगा। राज दरबार का कवि नहीं हूँ आम जनता बातें कहूंगा सो न […]
बहन बुला लो घर में रक्षाबंधन आया है, पुआ बना लो घर में रक्षाबंधन आया है। रंग-बिरंगे रेशम धागे सजी कलाई भाई की मुंह मीठा करवालो रक्षाबंधन आया है।
कौन कहता है कि मेरे सगे भाई नहीं हैं इसलिए राखी पर रोऊँगी। वे लाखों वीर सिपाही मेरे ही तो भाई हैं जो भारत मां की रक्षा को निडर खड़े हैं सीमा पर, उनको मैं […]
मैंने राखी भेजी है राखी पर अपने भैया को भैया इस बार पहन लेना पिछली बार की तरह इसे साइड पर को मत रख देना थोड़ी सी देर पहन लेना।
ओ डाकिये!! मेरी राखी पहुंचा देना राखी तक उन तक जो देश की रक्षा करने को सीमा में डटे हुए हैं।
केवल धागे की रीत न हो असली का रक्षाबंधन हो जब बंधे कलाई पर राखी सच्ची रक्षा संकल्पित हो। पावन धागा जब बहन बांधती है भाई के हाथों में, रक्षा की जिम्मेदारी आ जाती है […]
आज पुष्प सुगंध फैला जा कल मंदिर में चढ़ना है अरे तुझे इस बाग़ में अपनी छाप छोड़कर जाना है, ताकि विदाई के मौके पर अन्तस् से निकले आंसू रोक न पाए खोटी कविता धरा […]
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