सब रूठ सकते हैं लेकिन माँ नहीं रूठती है। सब थक जाते हैं लेकिन माँ थक कर भी नहीं थकती है। सब सो जाते हैं, लेकिन माँ नहीं सोती है। वो हमारे लिए रात-रात भर […]

तू बहुत ही खूबसूरत है कहूँ तब भी परेशानी तुझे, नहीं है खूबसूरत तू कहूँ तब भी परेशानी तुझे, कुछ न बोलूं चुप रहूं तब भी परेशानी तुझे, अब अधिक नादान मत बन चैन लेने […]

तुम्हारी बात पर इतना कहेंगे आज हम, काबिल हो तुम काबिल काबिल रहो इससे नहीं नाराज हम। लेकिन न समझो दूसरे को भूल कर भी खुद से कम, क्या पता कमजोर भी सहसा दिखा दे […]

जिंदगी है बुलबुला पानी मे उठता बुलबुला फूट जाता है अचानक सत्य को मन मत भुला। सोचता है आदमी मैं सौ बरस जीवित रहूँगा, और कैसे भी रहें, पर मैं सदा ऐसा रहूँगा। इस तरह […]

कुछ अलग ही दिख रहा हूँ पानी मे उठता बुलबुला फूट जाता है अचानक सत्य को मन मत भुला। सोचता है आदमी मैं सौ बरस जीवित रहूँगा, और कैसे भी रहें, पर मैं सदा ऐसा […]

कविता कहाँ मैं आजकल बस उलझनें ही लिख रहा हूँ, सामने हूँ आईने के कुछ अलग ही दिख रहा हूँ। भूल कर पहचान खुद की मुग्ध हूँ अपने ही मन में, उड़ रहा आकाश में […]

वो घड़ी है कौन सी जिस घड़ी खुश रहते हो तुम, अब घड़ी की जगह मोबाइल ने ले ली हर घड़ी उसी में गुम रहते हो तुम।

सच है कि सच हमेशा कड़वा बताया जाता है सच्ची में सच्चा आदमी अक्सर सताया जाता है। लेकिन जो सच है सच है सच ही हमेशा सच है, हर झूठ को हमेशा सच से हराया […]

मेरे भारत की युवाशक्ति मत हो शिकार नशे की तू यह नशा तुझे निगल जायेगा मत हो शिकार नशे की तू । आगे बढ़ने की सोच निरन्तर मत घबरा संघर्ष से तू, अपना लक्ष्य ऊंचा […]

जाग जा नई रोशनी का आभास कर, प्रातः हो गई है, पौधों में चमकती ओस की बूंदें, बता रही हैं, किस तरह नींद में रोया होगा रात भर तू। जमाना तेरे आंसू पोछे न पोछे […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- याद कर लो सभी आज उनको जिनके यत्नों से आजादी पाई, यह जन्मभूमि भारत हमारी उस गुलामी से मुक्ति ले पाई। हर तरफ था अंधेरा घना कोई आशा न थी […]

न खोजो मेरा इतिहास तुम, तुम्हारे लिए तो आज हूँ मैं। न खंगालो मेरे बीते हुए पल बस तुम्हारा, तुम्हारे प्यार का मोहताज हूँ मैं। बीती हुई खोजोगे तो कमियां मिलेंगी, आज पर ही जियो […]

मैं बीता कल हूँ भले ही तुम्हारे लिए , पर किस के लिए तो आज हूँ मैं। तुम्हारी नजर में बेवफा हूँ। पर किसी वफ़ा का नाज हूँ मैं। स्वयं ठुकरा के मेरी बाहों को, […]

जन मन ने उत्साह सजाकर भारतमाता के चरणों में आज पुष्प अर्पित करके गुंजायमान नारों से कर राष्ट्रप्रेम की लहर जगाई, जन-मन मे उमंग भर आई। राष्ट्रपर्व पर सारा भारत दिखा एकजुट रहा एकजुट जिसे […]

नींद में सपने में हम जाने कहाँ खो जाते हैं जो कभी देखा नहीं हो उस जगह हो आते हैं। घमंड में गुरुर में हम इस कदर गिर जाते हैं गरीब भी इंसान है इस […]

राष्ट्र पर्व पर सभी शत-शत नमन करें, देश के शहीदों को शत-शत नमन करें। तोड़ने जंजीर दासता की चल पड़े, सर कटा दिया झुके नहीं, नमन करें। राष्ट्र पर्व पर…. बिखरे हुए, टूटे हुए भारत […]

समझा रही हूँ बात तुम अब भी नहीं समझे, यौवन में है बरसात तुम अब भी नहीं समझे। चाहत भरी आंखों को तुम अब भी नहीं समझे, नहीं सो पाई पूरी रात तुम अब भी […]

आज देखा फिर से उनको अजनबी से लग रहे थे, बात तो कुछ की नहीं लेकिन मजे में लग रहे थे। वे तो हमसे दूरियां रख दूसरों के हो लिए हैं, हम निरी तन्हाइयों खूब […]

मातृभूमि के चरणों में जिन वीरों ने है लहू चढ़ाया उन वीरों को नमन हेतु यह पंद्रह अगस्त का शुभ दिन आया। करें तैयारी राष्ट्र पर्व की अति उत्साह सजाकर मन में, चलो कलम से […]

राष्ट्रीय पर्व आने वाला है भारत मां की जय बोलो पंद्रह अगस्त आने वाला है भारत माँ की जय बोलो। यह हम सबकी जन्मभूमि है मातृभूमि पावन भारत वीरप्रसूता जननी है यह भारत माँ की […]

सामने देखकर हमें बढ़ जाती हैं धड़कनें जिनकी जीवन को सही दिशा में ले जाने को हमें जरुरत है उनकी। सामने देखकर हमें बढ़ जाती हैं धड़कनें जिनकी उन्हें हम प्यार करते हैं हमें जरूरत […]

हम तुम्हारे तुम हमारे खुशियां हमारी गम हमारे जिंदगी जी लेंगे तुम-हम एक – दूजे के सहारे। यात्रा इस जिंदगी की है कठिन, मुश्किल भरी है, लेकिन फतह कर लेंगे मंजिल एक-दूजे के सहारे।

रात हो गई है बात हो गई है वर्षों से जिन में काफी दूरी बनी हुयी थी बिछुड़े दिलों में उनके मुलाक़ात हो गई है। दिन भर रही थी गर्मी उमस भरी हुई थी फिर […]

मानव जाति पर प्रहार करते नित नए रोगों को देखो किस तरह बर्बाद करने पर तुले हैं जिंदगी को। झकझोर करके रख दिये हैं सैकड़ों परिवार देखो ला खड़ा करके सड़क पर रख दिया है […]

रिम झिम बर्षा बरसे जा भीतर का सारा जल उड़ेल दे , ऐसे उड़ेल दे कि ऊपर की परत छिन्न-भिन्न न होने पाये तेरा प्रवाह मेरी नाजुक परत को छिल कर दूर बह न जाए, […]

रोज बारिश हो रही है प्यार की तब भी क्यों नफरत उगी है सब तरफ, चाहते हैं एक होना आप हम तब भी क्यों दूरी बनी है हर तरफ। दिल की निर्मल सी सड़क के […]

आपकी नींद में हम स्वप्न बन के आ न जाएँ इसलिए दिल किवाड़ों को हमेशा बंद रखना। गर कभी हम राह में मिल जाएँ तुमसे यूँ अचानक तब समझना अजनबी हैं याद को ही बंद […]

जन्मदिन कन्हैया का है आज सबको बधाई बधाई अष्टमी भाद्रपद की सुहानी व्रत लेकर कन्हैया का आई। कंस की कैद में जन्म लेकर रात ही रात गोकुल पधारे, माँ यशोदा की गोदी में खेले नन्द […]

आज वे भी चले गए उस यात्रा में जहाँ से फिर कोई लौट कर नहीं आता है। अक्सर बीमार ही रहते थे जब से सेवानिवृत होकर घर लौटे थे, तब से बीमार ही तो देखे […]

मेरे भारत की युवा शक्ति तू जाग नया, उत्साह जगा ले, मन में मत रख हीन भावना प्रगति पथ पर कदम बढ़ा ले। अपनी पुरातन संस्कृति का नवयुग से तालमेल करा ले, सच्ची में तू […]

याद आते हैं वो पल जो बिताये साथ तेरे अब नहीं रौनक रही तेरे बिना कुछ पास मेरे। खोजता हूँ पल वही बीते दिनों को ढूंढता हूँ , अवसर गंवाकर खो दिया तू शून्य है […]

आज जितना भी बरसता है बरस जाने दो, फिर तो सावन भी चला जायेगा, सींच कर कोना-कोना धरती का फिर तो सावन भी चला जायेगा। आज जितना भी चाहो भीगो तुम प्यार ही प्यार भरा […]

एक तो तुम बड़ी मुश्किल से मुस्कुराती हो, दूसरा मन ही मन में सारे गम छुपाती हो। जब कभी चाँद को बादल चुरा सा लेता है, तब हमें रोशनी बन रास्ता दिखाती हो।

यह संसार बदलाव का है और पल पल बदलता रहा है कोई मिलता है कोई बिछुड़ता, चक्र ऐसा ही चलता रहा है। वश किसी का रहा है न इसमें वश किसी न इसमें रहेगा, जिंदगी […]

जो सोचते हैं कि उन्होंने सच को भागने पर मजबूर कर दिया अब झूठ के सहारे फिर बुलंदियों पर चढ़ जायेंगे वो भूल जाते हैं कि सच सच है सच की ही सत्ता है, एक […]

भीड़ में जब कभी तुम खुद को तन्हा पाओगे, तब हमें याद करना, दिल में हमें पाओगे। प्यार हो , इस तरह से छोड़ कर न जाओ तुम प्यार हम से अधिक दूजे से नहीं […]

दूर चले गये राही आ अब लौट आ, कब तक रहेगा रूठा-रूठा तेरे बिना मैं भी तो रहता हूँ टूटा-टूटा। अपने दो बोल सुना जा अब तो आ जा। जिद न कर, लौट आ घर। […]

कुछ ऐसा लिखो कि लोग तुम्हें पढ़ें पढ़कर मन के भीतर नयी चेतना के बीज उगें। कुछ ऐसा लिखो कि सार्थक हो, शुद्ध हो तभी कविता कहेगी कि तुम प्रबुद्ध हो। पहले साहित्य पढ़ो तब […]

यदि हम कवि हैं या स्वयं को कवि मानते हैं तो हमें उस भाषा की गरिमा रखनी ही होगी, जिस भाषा का हम स्वयं को कवि मानते हैं , यदि हम इंसान हैं या स्वयं […]

ब्रज की एक सखी के घर माखन चोरी करते गिरधर, पकड़ लिए हैं रंगे हाथ फिर भी करते हैं मधुर बात। बोली ग्वालिन यूँ कान खींच मन ही मन में रस प्रेम सींच, बोलो क्यों […]

प्रियतमे तेरे स्वरूप का कैसे वर्णन करूँ अब मैं, सब उपमान सुंदरता के आ गए पूर्व की कविता में। काले बादल से सुन्दर बाल, कमल की पंखुड़ियों से गाल, झील सी आंख, शुक की सी […]

महान तपस्वियों का देश रहा है हमारा भारत वर्ष, आओ फिर से तपस्या करें। कैसी तपस्या, कुछ दूसरे तरह की, तपस्या। अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की तपस्या। भ्रष्टाचार के समूल नाश की तपस्या। जरुरतमंद […]