”मेरा भोला प्रियतम” जिनकी नज़रों से ललित कलाएं निकलती हैं, अधरों पर राग अंगड़ाइयां लेते हैं। केशों से बसंत दुग्ध पान करती है, और रात अठखेलियां करती है जिनसे। जिनकी एक चितवन मात्र से, बिजलियां […]

आज दादी की बहुत याद आई! वो बेचैन आत्मा ना जाने कहाँ घूमती होगी…. ब्रह्मांड के किन कोनों से गुजरती होगी… कोई नहीं जानता… जब मैं भूखी होती थी तो दादी मां अपने हाथों से […]

संयम वाणी है साधु का पहचान, गलत कार्य में बांधा डाल देते ज्ञान। साधु संगत जीवन में रस को घोले, वाणी के विष का कर ना सकत विज्ञान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

धर्म अध्यात्म का साथ देकर, करें अपने संस्कृति का सम्मान। विज्ञान के अनुठे खोज पर, करें सदैव वैज्ञानिक पर अभिमान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

तन मन की मोह माया विष के है सामान, गुरु के कटू बात लागे है अमृत समान। गुरु सदैव है वन्दनीय यही मिला है ज्ञान, गुरु के लिए न्योछावर है यह मेरा जान।। ✍महेश गुप्ता […]

अज्ञानता का जीवन विष समान, गुरु मिले देते हैं अमृत का खान। गुरु के चरणों को छूकर करो रसपान, ज्ञान के भण्डार का तुम करो सदैव सम्मान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

कान्हा के बंशी के तान पर, सुध बुध खोए वृन्दावन के नर नारी। मधुबन के बागियां में गाय चराते कान्हा, बंशी बजाकर मन मोहित करते दुनिया सारी।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

काल चक्र देवी देवताओं का उपहार है, महापुरुषों का जीवन सदैव स्वीकार करो। कर्म को अपने करते रहों मन को शांत रखो, दुश्मन को प्रणाम करो दोस्त से ज्यादा प्यार करो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

कांटे को जो बोता है वहीं उसे है कांटता, फूलों की महक को पाने में कांटे में लिपटा रहता। मानव जीवन को अपने करके व्यर्थ, सपनों का राह वह सदैव खोजता है ।। ✍महेश गुप्ता […]

मन को अपने खुश रखना सिखों, जीवन को अपने जीना सिखों । विकट परिस्थितियां सुलझ जायेगी, दर्द में भी तुम मुस्कुराना सिखों।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

निन्दक को सौंप सम्राज अपना, दुश्मन से भी प्यार का चेष्ठा रखना। गले लगाकर निन्दक को प्यार लुटाओ, पानी पानी हो जायेगा छोड़ कर बदले की भावना।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

नफ़रत इंसान को इंसान नहीं बनने देता, जीवन के राह में नेक इंसान नहीं बनने देता। कर्मों के आधार पर बंट जाता है इंसान, प्रेम की बोली भाषा से मिलता है पहचान, ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

निंदक के चाल में पनपता है चतुराई, निंदक के भाषा को तू समझ लें भाई। भोला इंसान बनकर कब तक देगा धोखा, अभी से सम्भल जा इसी में है भलाई।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

नफ़रत की फनस को आओ पैरों से रौंदे, खुशीयों की झलक को आओ मिलकर जी ले, मेरा देश मेरा वतन है प्यार सिखाता, नफ़रत को प्यार में बदल कर आओ जी ले।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी