अज्ञानता का जीवन विष समान, गुरु मिले देते हैं अमृत का खान। गुरु के चरणों को छूकर करो रसपान, ज्ञान के भण्डार का तुम करो सदैव सम्मान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
अज्ञानता का जीवन विष समान, गुरु मिले देते हैं अमृत का खान। गुरु के चरणों को छूकर करो रसपान, ज्ञान के भण्डार का तुम करो सदैव सम्मान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
गुरु से ही चलता यह संसार, गुरु ही देते अज्ञज्ञानी को ज्ञान। गुरु का करो सब मिलकर सम्मान, गुरु से ही है यह जग और विधान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कान्हा के बंशी के तान पर, सुध बुध खोए वृन्दावन के नर नारी। मधुबन के बागियां में गाय चराते कान्हा, बंशी बजाकर मन मोहित करते दुनिया सारी।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
सांवली सुरत वंशी वाले, हुए तुम्हारे हम दिवाने। राश रचैया मोहन प्यारे, याद आते सारे अफसाने।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कान्हा तेरे हम हुए दिवाने, वंशी की तान सुना दो प्यारे। मिटा कर मेरे विपदा प्यारे, हर लो मेरे दुःख दर्द सारे ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
गुरु सदैव है वन्दनीय, करो गुरु का सम्मान। ज्ञान की पोटली बांधकर, गुरु के लिए लुटा दो जान।। महेश गुप्ता जौनपुरी
ज्ञान की अभिलाषा रख लें मनवा, गुरु नहीं मिलते बारम्बार । जीवन के अंधियारे को मिटा ले, गुरु का छाया मिलें ना बार बार।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कृष्ण जीवन को अपनाएं, जीवन को खुशहाल बनाएं। छल कपट की रेखा को मिटा, जीवन को अपने सत्य बनाएं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
गुरु की महिमा जीवन का उद्धार, गुरु से मिलता जीवन में ज्ञान । अज्ञानता दुर कर लाते प्रकाश, गुरु से ही है यह मेरा संविधान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
विपत्ति में जो मित्र काम दें, वहीं सच्चा मित्र कहलाये। ज्ञान दर्पण को परख कर, साहस से निर्बल को अपनाये।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
पीठ पीछे जो तुम्हारे निन्दा करें, उसको गले से लगा लो तुम। कांटा जो बोए बीच रास्ते तुम्हारे, उसको गले लगाकर अपनाओ तुम।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
खुश रहो खुश रखना सिखों, निन्दे को निन्दा करने दो तुम। जीवन के कठीन परिस्थिति में, दुश्मन को भी प्यार दो तुम।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
काल चक्र देवी देवताओं का उपहार है, महापुरुषों का जीवन सदैव स्वीकार करो। कर्म को अपने करते रहों मन को शांत रखो, दुश्मन को प्रणाम करो दोस्त से ज्यादा प्यार करो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कांटे को जो बोता है वहीं उसे है कांटता, फूलों की महक को पाने में कांटे में लिपटा रहता। मानव जीवन को अपने करके व्यर्थ, सपनों का राह वह सदैव खोजता है ।। ✍महेश गुप्ता […]
सत्य राह पर चलते रहना तुम, कभी ना विचलित होना राहों से। ज्ञान विवेक साहस के दम पर, दुश्मन को अपना बनाना तुम।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मन को अपने खुश रखना सिखों, जीवन को अपने जीना सिखों । विकट परिस्थितियां सुलझ जायेगी, दर्द में भी तुम मुस्कुराना सिखों।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
जीवन एक परिभाषा है, सीखो और चलना सीखो। काल चक्र के सायें में पड़कर, जीवन अपना योग्य बनाना सीखो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
लेखनी पर जो करते है विश्वास, दिन दुखी रहते है सदैव । कर्म को जो समझते हैं प्रधान, वहीं रचते इतिहास है सदैव।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
स्वयं पर जोर लगाकर तुम, हर बाज़ी को पलट डालो तुम। ज्ञान विवेक का इस्तेमाल करके, जीवन को सफल बनाओ तुम।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
निन्दक को सौंप सम्राज अपना, दुश्मन से भी प्यार का चेष्ठा रखना। गले लगाकर निन्दक को प्यार लुटाओ, पानी पानी हो जायेगा छोड़ कर बदले की भावना।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
करना है कमाई करो ज्ञान का, धन दौलत खिंचे चले आयेंगे। इंसान का करके तुम बड़ाई, नज़रों में तुम देवतुल्य हो जाओगे।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
करते रहो सदैव तुम कर्म, कभी ना हटना करने से धर्म। विश्वास करके बढ़ते रहना, कभी ना करना तुम शर्म।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कर्म कसौटी ऐंसा है धर्म, बीज के आधार पर देता फल, बोया बबूल तो उगते कांटें, फल मिलें आज नहीं तो कल।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
नफ़रत इंसान को इंसान नहीं बनने देता, जीवन के राह में नेक इंसान नहीं बनने देता। कर्मों के आधार पर बंट जाता है इंसान, प्रेम की बोली भाषा से मिलता है पहचान, ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
निंदक के चाल में पनपता है चतुराई, निंदक के भाषा को तू समझ लें भाई। भोला इंसान बनकर कब तक देगा धोखा, अभी से सम्भल जा इसी में है भलाई।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
नफ़रत की फनस को आओ पैरों से रौंदे, खुशीयों की झलक को आओ मिलकर जी ले, मेरा देश मेरा वतन है प्यार सिखाता, नफ़रत को प्यार में बदल कर आओ जी ले।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
खुदकिस्मत हो निन्दक साथ दे गया, इतिहास गवाह है निन्दक बर्बाद कर गया। हौसलों को तोड़ना फितरत था उनका, निन्दक मेहरबान था आबाद कर गया।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
निन्दक को भविष्य की चिंता नहीं होता, खुद को अच्छा बनाना फितरत नहीं होता। उनके खून में निंदा हैं समाहित होता, जिसके बदौलत वह खुद को महान समझता।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
दया धर्म को ना छोड़िए जब तक चले सांस, पाप की गठरी पर ना करो कभी तुम आस। बुरा किसी का कभी ना करो जब तक रहें जान, धर्म पर चलने वालों का कुछ नहीं […]
धन दौलत को पाकर प्राणी, तन मन से जाता बौराय। धतुरा के सेवन से प्राणी, बल बुद्धि को देता खोय।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कनक लालसा अंधा करता, नर नारी को कुलक्षित करता। स्वर्ण को देखें आंखें चमके, लालच इंसा के बुध्दि को हरता।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
हार कर राह ना छोड़ो तुम, अपने राह को ना मोड़ों तुम। अस्त्र शस्त्र के बल पर मित्र, लड़ते लड़ते वीर सपूत कहलाओ।। महेश गुप्ता जौनपुरी
दया धर्म के बल पर प्राणी, जीत लेता है विश्व संसार। कर्म धर्म को करते रहना, कभी ना मानना तुम हार।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
जो दया धर्म के राह चलते, उसका कोई बिगाड़ नहीं सकता। दिन दुखी का जो सेवा करते, सदा उनका जयकारा होता।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कर्मभूमि पर न्योछावर करके, अपनों को जो गले लगाते है। निष्ठावान से जो धर्म सेवा करते, जग सदैव वीरों को गले लगाती है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
दया धर्म की पोटली बांधकर, जो राह पर अपने चलते हैं। कर्म भूमि को याद करके, जो राह पर अपने बढ़ते हैं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
विनाश के चक्कर में पड़कर, जीवन को क्यों बर्बाद करना। दया धर्म कर्म करके इंसान, मानवता का तुम उध्दार करना।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
सत्य राह पर चलो आहिस्ते आहिस्ते, झूठ फरेब को खदेड़ो दौड़ा दौड़ा कर। धर्म कर्म निती पर रखकर विश्वास, हे मानव दिखलाओ कुछ अलग कर।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
ए मेहज़बी , दिलनशी , मेहक़शी , ए गुलबदन । नजरे चार हो उससे पहले ले आए अपनी कफ़न ।।
उनका महकना भी एक अजीब अदा है। इसलिए तो हर शायर उन पर फ़िदा है।।
ए ग़ालिब जरा जरा देख तो सही, कहीं वो वही बे -वफा तो नहीं। जो कभी दिल के बदले दर्द दिया था, कहीं वो वही ज़हरीली नागन तो नहीं।।
माना अपनी जवानी पे जोड़ नहीं। फिर भी हम किसी से कम नहीं।।
Mahol gham gusar hai kese manaye eed… Dil sakht be qarar hai kese manaye eed. Har rah khar zar h kese manaye eed. Jn in ki ye pukar hai kese mnayen eed Pani bhi misl […]
नजरों से बातें होती है और जुबान खामोश है। अजीब सी दुनिया है ये मधुर प्रेम का आगोश है ।।
वृक्ष लगाओ वृक्ष बचाओ जीवन को खुशहाल बनाओ, धरा को सुसज्जित करके वायुमंडल को स्वच्छ बनाओ। वृक्ष लगाओ वृक्ष बचाओ तन मन को प्रफुल्लित कर जाओ, सुखी धरती पर वृक्ष लगाकर बादल से वर्षा करवाओ।। […]
झर-झर आँसू बहते उनके झरना बनकर आँखों से। मरणासन्न कर छोड़ा उनको दुष्ट काटकर पाँखों से।। परवाह नहीं थी निज दुख की वश राम नाम का जाप सदा। करते विनती रुको काल तुम राम लखन […]
पत्थर का पर्वत होकर भी आखिर पानी सबको देता है। बिना नाक और मूँह के बृक्ष सबको सुरभित वायु देता है।। बिन ईंधन के जलकर सूरज नित्यहि ताप जगत को देता है। ‘विनयचंद ‘परोपकारी बनकर […]
किसने कितना फ़र्ज निभाया, किसने कितने पत्थर फेंके… हमने इस कठिनाई के दौर में, लोगों के असली चेहरे देखे… डॉक्टर,पुलिस और सफ़ाईकर्मियों में जीवन्त मानवता के लक्षण देखे… इस बुरे वक्त के अविस्मरणीय पलों में […]
हिंदी ग़ज़ल २४/०५/२०२० रचनाओं के सुर-सागर में उतर गया हूं। सृजनशीलता मैं भी देखो कर गया हूं। कल्पनाओं की कोपलताएं फूट पड़ी हैं। शब्दों की बगिया में पलछिन ठहर गया हूं। डोर प्रीत की थाम […]
जिंदगी ये मेरी जिंदगी मुझे क्या से क्या बना दिया। इस लाकडाउन में जीना मरना सिखा दिया।। उम्र में पहली बार सुकून के पल दे दिया । परिवार के संग हंसने खेलने का वक्त दे […]
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