दो इन्सान एक हो जाते हैं । हर रिश्ते से खास हो जाते हैं । नज़रों से दूर होते हैं पर दिल के करीब हो जाते हैं । प्रज्ञा शुक्ला
दो इन्सान एक हो जाते हैं । हर रिश्ते से खास हो जाते हैं । नज़रों से दूर होते हैं पर दिल के करीब हो जाते हैं । प्रज्ञा शुक्ला
सुबह के सपनें सच होते हैं क्या यूं छोटी छोटी बातों पर नाराज़ नहीं होते अपने से खफ़ा होते हैं क्या? प्रज्ञा शुक्ला
मेरी जुल्फ को नागिन मत कहना एक दिन तुमको डस जाएगी। तीर नजर को मत कहना तेरे अँखियों में धस जाएगी।। काली जुल्फे बदली है जो तुझ पर हीं बरसाएगी। नजरें मेरी नील कमल जो […]
तुम ना होतो जीने की आस किसे है तुम होतो धूप की चादर भी ओढ़ लेंगे हम।मलमल के बिस्तर की आस किसे है।
उनकी चाहत में जीती जा रही हूँ मैं यादों को उनकी दिल में सींती जा रही हूँ मैं प्रज्ञा शुक्ला
आस होगी न आसरा होगा, तेरे बिना मेरा क्या होगा।। राही अंजाना
तेरी बातें बखूबी बड़ी निराली रहीं, सुनकर उनको रातें मेरी खाली रहीं।। राही अंजाना
चुप मत रहो इतना के नाम गुम नाम हो जाये, तुम्हारे हिस्से की ज़मी किसी के नाम हो जाये, नाकामयाबी के सफर से बाहर निकल आओ, कहीं ऐसा न हो कामयाबी की शाम हो जाये।। […]
उतरते साहिल पर शाम का सूरज जवां है हाथ छूट गए लेकिन यादें रवां है इतनी फुरसत कहाँ की लौट कर आयें खैर मसाफ़त से इश्क़ का तजुर्बा बढ़ा है मेरे बहकते कदमों में शराब […]
गुज़र रही है गुज़र जायेगी ये रात भी तेरी यादों में सिमट जायेगी।
शीश जटा एक बेणी लटकत लटकत लट लटकन मुखचंद्र पे वारिद ऐसे लुकछिप खेल करत हो जैसे।।
काली कम्बली काँधे पर शोभित अरुण अधर अरुणाभ कपोल श्याम रंग मुखचंदा विनयचंद नित निरखत बाल मुकुंदा।।
ज़िन्दगी बेरंग है कुछ रंग होने चाहिये है सफ़र लम्बा बहुत एक दोस्त होना चाहिए ।
सब रूठे बैठे हैं हमसे जाने क्यूँ , हमने जबसे तुम्हें अपना कह दिया।
हम पीछे रह गये तुम आगे ही सही तुमसे हार कर भी हम जीत गए हैं देखो।
तुम्हारी तस्वीर को सीने से लगा रखा है। यूं महसूस होता है की तुम हो।
सोचा था किसने सिला यूं मिलेगा। मुहब्बत में मुझको गिला यूं मिलेगा।। कसमे वफा को जो तोड़ जाए तड़पते हुए दिल जो छोड़ जाए सह न सके जो हवा का एक झोंका कागज का मुझको […]
कितना अच्छा होता तुम होते और हम होते। कुछ खुशियाँ होतीं कुछ गम होते।
हमने किया था एक वादा तुमसे याद है या भूल गये? कहा था एक दिन छोड़ जायेगें तुम्हें लो छोड़ दिया जी लो तुम।
लो खत्म हो गया मुलाकातों का सिलसिला, जो घर आता था घर भूल गया।
हम जो चाहें वो कर सकते हैं । बस हौंसला बनाकर रखना चाहिए । जरूरी नही जीत ही हांसिल हो, हार भी स्वीकार करनी चाहिए ।
छुप कर मेरी बातें सुनते रहते हो। मेरे सपनो की रातें चुनते रहते हो । मिलने की फुर्सत जब तुमको होती है। तो मेरी ही राहें चुनते चुनते रहते हो।
आगे बढ़ने का नाम है ज़िन्दगी सफलता ठोकर खाकर ही मिलती है। हँसते रहने का नाम है ज़िन्दगी ।
बात करने से बात बनती है । मुलाकात करने से बात बनती है। कुछ भी तो नही है हमारे पास हमारे हुनर से ही हर बात बनती है।
कुछ सपनॉ की बातें है। कुछ अपनों की बातें हैं। अधूरी कुछ बातें थीं । अधूरी कुछ बातें हैं ।
कुछ सपनॉ की बातें है। कुछ अपनों की बातें हैं। अधूरी कुछ बातें थीं । अधूरी कुछ बातें हैं
धीरे-धीरे बढ़ रहा है काफ़िला। धीरे-धीरे कम हो रहे हैं फासले मंज़िल है बस कुछ ही दूर। तू अपनी हिम्म्मत भांप रे।
धीरे-धीरे बढ़ रहा है काफ़िला। धीरे-धीरे कम हो रहे हैं फासले मंज़िल है बस कुछ ही दूर। तू अपनी हिम्म्मत भांप रे।
मंज़िल है नही आसान बहुत मशरूफ हैं राहें । जीत जायेगें हम दुनिया दो कदम रोज़ चलकर के।
मंज़िल है नहीं आसान । बहुत मशरूफ हैं राहें । जीत जायेंगे हम दुनिया दो कदम रोज़ चलकर के।
सुबह के मीठे सपनों जैसा है तुम्हारा एहसास । रहते हो यूं दिल में जैसे हो साँस ।
ना मिलने का रोज़ बहाना अच्छा है। यादों से हमको तड़पाना अच्छा है । सोते-सोते आ जाते हो ख्वाबों में हमसे मिलकर आँख चुराना अच्छा है।
ना मिलने का रोज़ बहाना अच्छा है। यादों से हमको तड़पाना अच्छा है । सोते-सोते आ जाते हो ख्वाबों में हमसे मिलकर आँख चुराना अच्छा है।
ना मिलने का रोज़ बहाना अच्छा है । सोते सोते आ जाते हो ख्वाबों में । हमसे मिलकर आँख चुराना अच्छा है।
ना मिलने का रोज़ बहाना अच्छा है । सोते सोते आ जाते हो ख्वाबों में । हमसे मिलकर आँख चुराना अच्छा है।
चुन लो तुमको जो चुनना है। मुझे हर फ़ैसला मंज़ूर है। तुम्हारी दोस्ती भी तुम्हारी बेवफाई भी।
चुन लो तुमको जो चुनना है। मुझे हर फ़ैसला मंज़ूर है। तुम्हारी दोस्ती भी तुम्हारी बेवफाई भी।
चुन लो तुमको जो चुनना है। मुझे हर फैसला मंज़ूर है। तुम्हारी दोस्ती भी तुम्हारी बेफफ़ाई भी।
तुम्हारी खामोशी भी क्या चीज़ है ना जाने क्या कह जाती है। जो कहना चाहतें हो नही कहती हजारों फसाने सुनाती है।
तुम्हारी खामोशी भी क्या चीज़ है ना जाने क्या कह जाती है। जो कहना चाहतें हो नही कहती हजारों फसाने सुनाती है।
मंज़िल अब दूर नहीं है सफ़र भी अच्छा है । तुम हो तो सब कुछ अच्छा है।
मंज़िल अब दूर नहीं है सफ़र भी अच्छा है । तुम हो तो सब कुछ अच्छा है।
मंज़िल अब दूर नहीं है सफ़र भी अच्छा है । तुम हो तो सब कुछ अच्छा है
पाने का अपना मज़ा है। खोने का अपना मज़ा है। हँसते तो सब हैं पर रोने का अपना मज़ा है।
सुना है खुदा तुम पर मेहरबां हो गया है एक रोज़ मांगी थी दुआ तुमने हमसे दूर जाने की।
सुना है खुदा तुम पर मेहरबां हो गया है एक रोज़ मांगी थी दुआ तुमने हमसे दूर जाने की।
राग है ,अनुराग है , रागिनी भी कम नहीं है। चाँद का क्या गीत गाएँ चाँदनी भी कम नहीं है।।
सबसे सबकुछ छुपाना अच्छा लगता है, तुमसे सबकुछ बताना अच्छा लगता है,
मुझे तुमसे मिलने में कोई मसला नहीं है, पर सच ये है के मेरे जेब में असला नहीं है। राही अंजाना
जिसको जो चाहिए मिल जाए तो कैसा हो, रिश्तों से छोटा गर पैसा हो जाए तो कैसा हो। राही अंजाना
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