राजनीति मत कर, राजनीति मत कर। राजनीति मत सब जान बुझ कर तु, बनी, बनाई, बात बिगाड़ मत तु,, रोता है मेरा दिल ये जानकर की गलत-फहमी मे अच्छे खासे रिश्ते बिगाड़ा है कल,, जब […]

तुम नहीं, तो…… ! : अनुपम त्रिपाठी तुम नहीं; तो ग़म नहीं । ये भी क्या कुछ कम नहीं ।। तुम जो थे, तो ये भी था और वो भी था हर तरफ पसरी पड़ी […]

इक समंदर यूं शीशे में ढलता गया । ज़िस्म ज़िंदा दफ़न रोज़ करता गया ॥ ख़्वाब पलकों पे ठहरा है सहमा हुआ । ‘हुस्न’ दिन-ब-दिन ख़ुद ही सँवरता गया ॥ ‘इश्क़’ है आरज़ू या कि; […]

सपने पूरे करने की चाहत होनी चाहिए, खुद हिम्मत करो तो हर रात तैयार है। अरे कोशिश करके तो देखो, कदम बढ़ा कर तो देखो, सफलता की सीढ़ियां तो कब से तैयार हैं।।

कई बार थोडा सा मज़ाक कर लेता हूं, कई बार लोगों को थोड़ा सा परेशान कर देता हूं। इस मस्ती के पीछे का प्यार वह समझ नहीं पाते हैं पता नहीं क्यों फिर भी लोग […]

दर्द तो दुनिया ने बहुत दिए, पर दुनिया वाले भी अपने थे, इसीलिए खुशी-खुशी सह लिए। अपने यारों से उम्मीदें बहुत थी, पर वह भी मुझे‌ समझ न पाए। दुखी तो बहुत था दिल पर […]

प्यार वह जताते नहीं पर हर इच्छा हमारी पूरी वो करते हैं, खुद भले ही दुखी हों पर हमें खुश रखने की पूरी कोशिश करते हैं। भगवान तो केवल प्रार्थनाएं सुनते हैं,‌ लेकिन पूरी उसे […]

जन्म दिया मां तूने ही इस काबिल मुझे बनाया है, हर फर्ज अपना‌ मेरे प्रति निभाया है। दिल से दिल का यह अनमोल रिश्ता, वाह खुदा क्या बनाया है।।

स्वछन्द प्रकृति का इन्सान हूं लेकिन नहीं चाहता मेरे कारण कोई रोये मुझे अपने ढंग से जीना पसंद है, बंधनों में बंधने की मेरी आदत नहीं थोडा मुंहफट हूँ, सोच समझ कर जवाब कम, प्रतिक्रिया […]

।।संगित।। संगीत चलरहा है, हवा ओ मे गजल गुंन गुना रही है फिजा घटाओ संगीत चलरहा है हवा ओ मे जी से सुनाई दे, वो सुनके मेहसूस करे खुशी । जो नही सुनपाए वो खुशियो […]

।।संगित।। संगीत चलरहा है, हवा ओ मे गजल गुंन गुना रही है फिजा घटाओ संगीत चलरहा है हवा ओ मे जी से सुनाई दे, वो सुनके मेहसूस करे खुशी । जो नही सुनपाए वो खुशियो […]

चल वहां जहाँ नहीं गम तुम हो वहां और बस हम सागर सी गहरी जीवन गाथा अम्बर तक है ,प्रीत हमारी साथ चलेंगे हर पल हर दम ऐसे चलेंगे संग तुम्हारे अम्बर संग जैसे हो […]

चल वहां जहाँ नहीं गम तुम हो वहां और बस हम सागर सी गहरी जीवन गाथा अम्बर तक है ,प्रीत हमारी साथ चलेंगे हर पल हर दम ऐसे चलेंगे संग तुम्हारे अम्बर संग जैसे हो […]

प्यार कभी एक तरफा नही होता ना होगा दो रूहों के मिलान की जुड़वा पैदाइश है ये बहता दरियां है बस बहता रहता है प्यार सिर्फ एक जिस्म से पैदा नही होता मैं और तुम […]

यूँ तो नज़रन्दाज़ नहीं करते लोग खामियाँ मेरी, तो मैं भी क्यूँ दिखाऊं खुलकर उनको खूबियां मेरी, अभी सीख रहा हूँ तैरना तो हंसी बनाने दो मेरी, जब डूब कर समन्दर से निकल आऊंगा तो […]

पुरानी किताबो के पन्ने पलटकर देखो इश्क़ की गहराइयो मैं खुद उतरकर देखो इश्क़ से गहरा समंदर भी नही बस एक बार आज़माकर देखो चंद लम्हो मैं तय होगा चाँद का फासला एक बार फासला […]

बड़े दिनों मैं कुछ फुर्सत सी मिली हैं, कलम फिर हाथ में लेने की, चाहत सी हुई है। कोई मंज़र घटा या फिर कोई बात हुई? या फिर दुनियां ए दस्तूर लिखने की चाहत हुई, […]

जिन्दगी की किश्ती सभाँलते– सभाँलते , अब मै हार गया हूँ। क्या करू जिस दरिया मे चलती थी ,अपनी किश्ती वो दरिया मे ही गजब तुफान आ गयी। और मेरी किश्ती कहीं गुम हो गयी,, […]

कुछ सोच रहा हूं मैं, कुछ खोज रहा हूं मैं। जिंदगी के इन घने जंगलों में, खुशी की कुछं टहनियां ढूंढ रहा हूं मैं। वह हसीन वादियां कहीं खो सी गई हैं, नदियों के किनारों […]

अटल, अडिग, विशाल बूढ़े पेड़ को देख कर लगता है जैसे कोई ज्ञानी ध्यानी बाबा, आसन जमाकर बैठा है पेड़ की कुछ झूलती जटायें जो जमीन से जुड़ गयी हैं ऐसा लगता है जैसे कोई […]

अपने नन्हें कदमों से दिन भर छन छन करती फिरती है कभी इधर तो कभी उधर वो उछलती कूदती रहती है बंधन मुक्त वो पंछी की भाँति सीमाओं को न जानती है अपने घर से […]

जीवन की आपाधापी में, चैन का एहसास कीजिये बेवजह की चिंता छोड़कर, बुढापे का मज़ा लीजिये शरीर पर झुर्री, बालों में चांदी, है तो होने दीजिये चलने को हाथ में छड़ी आ गयी, तो आने […]

मै एक बेरोजगार हूँ, हाथ पैर रहते हुए भी लचार हुँ। बड़े बुजर्गों के समाने मै बेकार हुँ, क्योकि मै बेरोजगार हूँ।। अब अंतिम आसरा शिर्फ केवल बेरोजगारी भत्ता है, जिसकी निर्णयकार्ता 56 इंच सीने […]

बैठा हुआ था मैं निरुत्तर सा होकर, कि किसी की आवाज़ आई पूछा, तो कही, मैं हूँ “तन्हाई” आपका साथ निभाने को आई शून्यता सी होठों पे मुस्कुराहट ने धाक जमाई हँसी आई, कहा मैंने […]

अच्छे दिन…! अच्छे लोग तो खुश हो ही रहे हैं अच्छे दिनों से ..!. आशा बहुत अच्छा जो हो रहा है और भी होगा…! बुरे लोगों के बुरे दिन आये हैं बरबादी के …! ना […]

क्यूँ मनुज अबोध , बोध तुझमे ही सब क्यों करता है खोज , शोध तुझमे ही सब अविराम गति तू , विश्राम तुझमे ही सब –विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)–

देख मनुज संसार में , कोई नहीं किसी का मतलब की दुनिया ये सारी कौतुक ब्रह्म विधि का मत सोच मनुज कि तू निर्बल है तुझमे परम प्रभु का बल है नश्वर्य जग में पग […]

सृजन के साथ विनाश जुड़ा है विनाश के साथ सृजन सुख दुःख का संगम है मानव का यह जीवन मरण के साथ जनम है जनम के साथ मरण वैसा भाग्य बनेगा जैसे जिसके कर्म –विनीता […]

–शहीद– भवर मैं खड़े होकर , तूफानों से टकराते हो अँधेरे में रह कर , चिराग देश का जलाते हो सुख सम्पति निज सपनो की , हस कर बलि चढ़ाते हो कली मैं सब कपूत […]

अपनी अनुजा का अंगरक्षक होता है ईश्वर का दिया अनमोल उपहार होता है अपनी जीत को भी न्योछावर करता है हर इच्छा को वो पूरी करता है सर आँखों पर अपनी बैठाकर रखता है अगर […]