पुछते तो हाल हमसे क्या, तोड़ कर दिल हमारा हमने तोबा कर ली, आप भी कर लो किनारा….! किसी और के साथ बस ऐसा ना करना के हो जाएगा वो भी हमारी तरह बेसहारा….!! -देव […]

खेल खेलना सीख लो तो हर खेल अच्छा लगेगा, ज़िन्दगी की इस बिसात पर हर मोहरा सच्चा लगेगा, मोहब्बत तो रंग है चढ़ा के देख लो एक बार, इसके बाद कोई और रंग तुम्हें पक्का […]

बिन निज भाषा के ज्ञान के बजे ना कोई बीन, अंग्रेजी जो भी पढ़े होवे हिय से हीन, संस्कारों की खेती अब न कर पाये कोई दीन, हिन्दी को अपनी कोई ले न हमसे छीन।। […]

एक छोटी सी शीशी में गिरतार हो गई, भला कैसे ये जिंदगी शर्मोसार हो गई, यूँ तड़पी बेहद फिर तार-तार हो गई, बेरुखी दुनियाँ भी तो बार-बार हो गई, क्यों छिपती-छिपाती मेरी लाज एक दिन, […]

सृष्टि के नियनों को बदला नहीं करते, रात हो तो उसे दिन कहा नहीं करते, फूलों की चाहत में वृक्ष बोया नहीं करते, जिंदगी के सच से हम मुकरा नहीं करते।। राही (अंजाना)

अंकुर विस्तार पाकर व्रक्ष रूप धर लेता है, जिंदगी का ये पौधा कभी विश्राम नहीं लेता है, सिकुड़ जाते हैं रिश्ते तो सिकुड़ जाने दो इन्हें, जिंदगी जिंदगी है मान लो इसे कोई थाम नहीं […]

ज़िन्दगी एक रेस है जिसमे दौड़ना ही होगा, वक्त रहते वक्त का मुँह मोड़ना ही होगा, कालचक्र का काम है चलना, चलेगा दोस्तों, हमें अपने मन को एक बार फिर टटोलना ही होगा, ऋतुएँ परिवर्तित […]

हर कदम पर साथ निभाते हो, तुम मुझको बहुत सताते हो, पर जैसे भी हो सच कहती हूँ, तुम बस मेरे मन को भाते हो, छोटी छोटी बातों पर तुम, मुझको टोका करते हो, सही […]

तोड़ कर हर ज़ंज़ीर तूने हौंसला दिखाया है, जो बुत बन चुके थे उन्हें भी तूने बोलना सिखाया है, जुदा रही तू जैसे चाँद की चांदनी से सदियों, फिर बखूबी तूने सबको अपना रूतबा दिखाया […]

आज तो हद हो गई—- उसकी आँख मेरी आँख से मिली—– उसके आँख से आँसु निकल पड़ी । आज विश्वास हुआ — उसकी फितरत मे वेवाफाई नही थी।। शिर्फ मजबुरी थी— ज्योति

दुनिया की इस भीड़ में कोई अपना ना मिला ज़हा भी दामन फैलाया, मायूस लोंटे….! कमा ना सके किसी की दोस्ती, किसी की मोहोब्बत गम, तन्हाई, और उदासी समैटे अपने घर लौटे….!! -देव कुमार

तेरी नजर हाल-ए-दिल बयान कर देती है! तेरी नजर चाहत का ऐलान कर देती है! ख़्वाहिशें बंध जाती हैं साँसों की डोर से, तेरी याद रातों को वीरान कर देती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तन्हा अगर हो, तो दिल के अरमान देख लेना लोगो की परवाह ना करना, अपनी पहचान देख लेना….! मोहोब्बत हो य़ा नफरत, सबका अंजाम एक ही है ना हो यकीन तो, जा कर कब्रिस्तान देख […]

दिन गुजर जाएगा मगर रात जब होगी! तेरे ख्यालों से मुलाकात तब होगी! कबतलक सुनता रहूँ गमों की सिसकियाँ? तुमसे रूबरू दिल की बात कब होगी? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

ये किसकी सादायें दिल मे गूंज रही है किसकी दस्तक है ये दिल के विराने मे क्या कोई याद कर रहा है अपना य़ा ये हिचकी आ रही है अंजाने मे -देव कुमार

बिखरी जुल्फों की लटा, आँखें लाल दिखाई देती है हमें तुम्हारी ज़िन्दगी बेहाल दिखाई देती है कल रात का फसाना आपका सुना था हमने भी इसलिये भी आज आप बदहाल दिखाई देती है….!! देव कुमार

उनकी खैर– खबर नही मिलती; . हमको ही खासकर नही मिलती । मै लचार हो जाऊँगा; . . अगर तु नही मिलती ।। लोग कहते है; बजार मे रूह मे दिल; जिस्म मे दुनिया पैसे […]

मुझे तेरी आरजू में जुदाई मिल गयी है! मुझे तेरी चाहत में तन्हाई मिल गयी है! गमगीन हो गयी है मेरी हाल-ए-जिंदगी, मुझे राहे-वफा में रुसवाई मिल गयी है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

ये दिल के विराने मे आज ये शौंर कैसा आभास किसका इस मय के पेमाने मे ये कैसे बदली आज मौसम की नजरें क्या बरसा है आज वो अंजाने में देव कुमार

मैं कुछ बोल नहीं सकता ; …. …………….तुम्हारा दिया हुआ जख्म; किसी के समाने खोल नही सकता। जब बहती पुरबा हवा बहुत दर्द होती; पर मै रो नही सकता । क्योंकि आँसु को बनाए है […]

तेरी जुस्तजू का आना कबतक रहेगा? तेरा यूँ दिल में ठिकाना कबतक रहेगा? जाम के नशे में खुद को भूला हूँ लेकिन, सामने हरदम पैमाना कबतक रहेगा? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

कैसे होते हैं……! ——————————— कोई पहचान वाले अनजान कैसे होते हैं जानबूझ कर कोई नादान कैसे होते हैं बदलता है मौसम वक़्त और’लम्हें सुना हेै– वक़्त पर बदल जाए–इंसान कैसे होते हैं..! छोड़ दे साथ […]

किनारे पर बैठे बैठे हम कैसे दरिया में डूब रहे हैं, न जाने इतना गहरा दरिया हम कैसे देख रहे हैं, आरक्षण का पानी पीकर देखो कैसे फूल रहे हैं, कैसे एकतरफा सिस्टम से हम […]

तुझे पाने के लिए खुद को जलाएगा कौन, है प्यार तुझसे ही लेकिन नखरे का भार तेरा उठायेगा कौन, तुझे पाने के लिए खुद को जलाएगा कौन, मन मे तो आता है रूठे तुम्हारी तरह […]

कभी आइस– क्रीम की तरह पिघलती रही जिन्दगी, हवा की रूख की तरफ बदलती रही जिन्दगी, लाख समझया उसे पाने की जिद ना करो– पर इक वच्चे की तरह जिद ठानी रही जिन्दगी। मंजिल पर […]

कभी आइस– क्रीम की तरह पिघलती रही जिन्दगी, हवा की रूख की तरफ बदलती रही जिन्दगी, लाख समझया उसे पाने की जिद ना करो– पर इक वच्चे की तरह जिद ठानी रही जिन्दगी। मंजिल पर […]

कभी आइस– क्रीम की तरह पिघलती रही जिन्दगी, हवा की रूख की तरफ बदलती रही जिन्दगी, लाख समझया उसे पाने की जिद ना करो– पर इक वच्चे की तरह जिद ठानी रही जिन्दगी। मंजिल पर […]