हार क्या होती है य़े तब हमने जाना, जब हम खुद हारे मोहोब्बत से लड़ते लड़ते…! -देव कुमार
हार क्या होती है य़े तब हमने जाना, जब हम खुद हारे मोहोब्बत से लड़ते लड़ते…! -देव कुमार
तेरी दिल में ख्वाहिश आयी है अभी अभी! चाहत की फरमाइश आयी है अभी अभी! गूंज उठी है शहनाई यादों की लेकिन, फिर गम की पैदाइश आयी है अभी अभी! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
अगर देती जन्म “‘” माँ”” चलना; सभलना सिखाते है पापा। . …………. जितना भी बच्चे फरमाइस करते; पुरा करते है पापा। अपना सारा अरमान कुचलकर; बच्चे के अरमान को पूरा करते पापा।। अपने बदन पर […]
तुम केवल नारे मे गाओ की कश्मीर हमारा है’” सच तो यह है कि कश्मीर को पाकिस्तान ही प्यारा है। …………. नेहरू के भुलो को छोड़ अब पटेल बन जाना होगा। कश्मीर के हर चौराहे […]
गर देती है जन्म माँ तो जिंदगी संवारते हैं पापा जितना भी हो सकता है सब कुछ कर गुजरते हैं पापा जेब गर खाली भी हो तो कर्ज ले आते हैं पापा अपने बच्चों के […]
जब भी तेरा चेहरा याद आता हिचकियाँ उठ जाता; अभी उसकी वेवाफाई से उभरे नही यारो। अब ना जाने हिचकियाँ कौन सा पैगाम दे जाता। . जब भी उसका चेहरा नजर आता; हिचकियाँ उठ जाता […]
जब भी तेरा चेहरा याद आता हिचकियाँ उठ जाता; अभी उसकी वेवाफाई से उभरे नही यारो। अब ना जाने हिचकियाँ कौन सा पैगाम दे जाता। . जब भी उसका चेहरा नजर आता; हिचकियाँ उठ जाता […]
ना जाने उनकी किस अदा पर हम मर जाते है; हर वक्त जुबाँए पर उन्ही का नाम लिये जाते है । . बीताएँ कुछ लम्हा उनके” संग” …………………….. याद आ जाते है। हो जाता हुँ […]
फसाना जिंदगी का अजीब जैसा है! हर ख्वाब आदमी का रकीब जैसा है! बदली हुई निगाहों का खौफ है दिल में, मंजिलों का मिलना तरकीब जैसा है! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय
मुझे माँफ कर देना” “”उतर ना सकी तेरी महोब्बत रूपी सीढ़ी पर। हाँ ? मुझे ले बैठा;लज्
मुझे माँफ कर देना” “”उतर ना सकी तेरी महोब्बत रूपी सीढ़ी पर। हाँ ? मुझे ले बैठा;लज्
परवाह करे कोई, किसी को हमारा भी ख्याल हो किसी की जुबां पे कभी हमारा भी सवाल हो
बहुत से ख़्वाब है आँखों में मेरे सारे नहीं तो कुछ तो हकीक़त में आएँ माना के करनी है बहुत मेहनत हमको भी ज़रा आप भी तो उसमे अपना हाथ मेरे सर पर लाएँ।।
हार क्या होती है य़े तब हमने जाना, जब हम खुद हारे मोहोब्बत से लड़ते लड़ते…! -देव कुमार
पूछा जो उसने य़े गुलाब कितने का हैं, हमने हाथ का छाला उसको दिखा दिया रो कर उसने जो हमारा हाथ चूमा, सारे दर्द को मिटा दिया….! -देव कुमार
मंजिलों के रास्ते कुछ बोल रहे हैं! रंग दिल में चाहत का घोल रहे हैं! तिश्नगी ल़बों पर है पैमानों की, क़दम जुस्तजू के कुछ डोल रहे हैं! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
नज़रो में हो कंकड़ तो, रानाई चुभती है.. भरी बज़्म में चस्पा तन्हाई चुभती है.. जिस रिन्द को मयस्सर हो बस कफ़स की फर्श.. उसकी आँखों मे आसमान की ऊंचाई चुभती है.. जो जिस्म सतह […]
हार क्या होती है य़े तब हमने जाना, जब हम खुद हारे मोहोब्बत से लड़ते लड़ते….! -देव कुमार
खत तो लिख लू, मगर लिखने का बहाना नहीं हैं, ना जाने कहा पहुचे ये खत, के उसका कोई ठिकाना नहीं है….! -देव कुमार
तुमसे अपने प्यार को कहना मुश्किल है! तेरे बगैर लेकिन रहना मुश्किल है! तुमको कभी गैर की बाँहों में देखकर, तेरी बेवफाई को सहना मुश्किल है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
जब भी मैं गया वहां पर, जी कर गया और लोग कहते है, की मैं शराब पी कर गया……! -देव कुमार
पुछते तो हाल हमसे क्या, तोड़ कर दिल हमारा हमने तोबा कर ली, आप भी कर लो किनारा….! किसी और के साथ बस ऐसा ना करना के हो जाएगा वो भी हमारी तरह बेसहारा….!! -देव […]
कुछ ऐसे वक़्त बीता, मोहोब्बत की परख करते हुए गर्मी, सर्दी, और बरसात कब बीते, पता ना चला….! -देव कुमार
खेल खेलना सीख लो तो हर खेल अच्छा लगेगा, ज़िन्दगी की इस बिसात पर हर मोहरा सच्चा लगेगा, मोहब्बत तो रंग है चढ़ा के देख लो एक बार, इसके बाद कोई और रंग तुम्हें पक्का […]
बिन निज भाषा के ज्ञान के बजे ना कोई बीन, अंग्रेजी जो भी पढ़े होवे हिय से हीन, संस्कारों की खेती अब न कर पाये कोई दीन, हिन्दी को अपनी कोई ले न हमसे छीन।। […]
शब्दों का क्या है इनकी तो कोठरी बहुत बड़ी है, तेरी खामोशी भी पर्याप्त है इनके कद के आगे।। राही (अंजाना)
एक छोटी सी शीशी में गिरतार हो गई, भला कैसे ये जिंदगी शर्मोसार हो गई, यूँ तड़पी बेहद फिर तार-तार हो गई, बेरुखी दुनियाँ भी तो बार-बार हो गई, क्यों छिपती-छिपाती मेरी लाज एक दिन, […]
सृष्टि के नियनों को बदला नहीं करते, रात हो तो उसे दिन कहा नहीं करते, फूलों की चाहत में वृक्ष बोया नहीं करते, जिंदगी के सच से हम मुकरा नहीं करते।। राही (अंजाना)
अंकुर विस्तार पाकर व्रक्ष रूप धर लेता है, जिंदगी का ये पौधा कभी विश्राम नहीं लेता है, सिकुड़ जाते हैं रिश्ते तो सिकुड़ जाने दो इन्हें, जिंदगी जिंदगी है मान लो इसे कोई थाम नहीं […]
पकड़ न सही पर साथ चल सकते हैं, हम वक्त के पहिये के आस पास चल सकते हैं।। राही (अंजाना)
ज़िन्दगी एक रेस है जिसमे दौड़ना ही होगा, वक्त रहते वक्त का मुँह मोड़ना ही होगा, कालचक्र का काम है चलना, चलेगा दोस्तों, हमें अपने मन को एक बार फिर टटोलना ही होगा, ऋतुएँ परिवर्तित […]
सिफ़त माँ के मेरे बड़े साफ़ नज़र आते हैं, तामील दिलाने को मुझे जब वो खुद को भूल जाती है, पहनाती है तन पर मेरे जिस पल कपड़े मुझे, वो सर से खिसकता हुआ अपना […]
हर कदम पर साथ निभाते हो, तुम मुझको बहुत सताते हो, पर जैसे भी हो सच कहती हूँ, तुम बस मेरे मन को भाते हो, छोटी छोटी बातों पर तुम, मुझको टोका करते हो, सही […]
तोड़ कर हर ज़ंज़ीर तूने हौंसला दिखाया है, जो बुत बन चुके थे उन्हें भी तूने बोलना सिखाया है, जुदा रही तू जैसे चाँद की चांदनी से सदियों, फिर बखूबी तूने सबको अपना रूतबा दिखाया […]
शर्तिया ऐसा कोई बन्धन नहीं था जो मुझे बाँध पाता, मगर तेरी जुल्फों से मैं अपनी ये शर्त हार गया।। राही (अंजाना)
शब्दों की दुनियाँ का कोई साहिर मिले तो बताना, किसी राह में मिल जाए गर वो ताहिर तो बताना।। राही (अंजाना)
गर दिल नहीं होता तो ये दरार कहाँ होती, मेरे जिस्म और रूह के बीच दीवार कहाँ होती।।। राही (अंजाना)
बहुत कम वक्त लगा मुझे मकाँ मेरा बनाने में, मगर एक मुद्दत लगी मुझे उसे घर बनाने में।। राही (अंजाना)
आज तो हद हो गई—- उसकी आँख मेरी आँख से मिली—– उसके आँख से आँसु निकल पड़ी । आज विश्वास हुआ — उसकी फितरत मे वेवाफाई नही थी।। शिर्फ मजबुरी थी— ज्योति
कब तक इंतजार करू तेरे दर पर; तेरा—- ….. अब तो आके मिल वर्ना आँख भी आँसु से नाता तोड़ लेंगे ।
कब तक इंतजार करू तेरे दर पर; तेरा—- ….. अब तो आके मिल वर्ना आँख भी आँसु से नाता तोड़ लेंगे ।
चलो चल कर आज तुम्हारा दिल देख लेता हू, के एक अररसे से तुम मोहोब्बत के मरीज हो…..! -देव कुमार
चलो ये किस्सा भी आज खत्म करो साहिब, तुम हमारी मोहोब्बत दे दो, हमसे अपने गम ले लो……!! -देव कुमार
दुनिया की इस भीड़ में कोई अपना ना मिला ज़हा भी दामन फैलाया, मायूस लोंटे….! कमा ना सके किसी की दोस्ती, किसी की मोहोब्बत गम, तन्हाई, और उदासी समैटे अपने घर लौटे….!! -देव कुमार
तेरी नजर हाल-ए-दिल बयान कर देती है! तेरी नजर चाहत का ऐलान कर देती है! ख़्वाहिशें बंध जाती हैं साँसों की डोर से, तेरी याद रातों को वीरान कर देती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
किसी ना किसी का साथ तो मिलना ही था हमको….! गम मिला, तन्हाई मिली, तुम ना मिले तो ना सही…..! -देव कुमार
दुनिया मे ना जाने कितने गम है साहिब हमारा गम कोई, अनोखा तो नही…..!! -देव कुमार
तन्हा अगर हो, तो दिल के अरमान देख लेना लोगो की परवाह ना करना, अपनी पहचान देख लेना….! मोहोब्बत हो य़ा नफरत, सबका अंजाम एक ही है ना हो यकीन तो, जा कर कब्रिस्तान देख […]
कुछ बातें मोहोब्बत की भी कर लो साहिब, के शिकवों का सिलसिला तो चलता ही रहेगा……!! -देव कुमार
दिन गुजर जाएगा मगर रात जब होगी! तेरे ख्यालों से मुलाकात तब होगी! कबतलक सुनता रहूँ गमों की सिसकियाँ? तुमसे रूबरू दिल की बात कब होगी? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
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