ये किसकी सादायें दिल मे गूंज रही है किसकी दस्तक है ये दिल के विराने मे क्या कोई याद कर रहा है अपना य़ा ये हिचकी आ रही है अंजाने मे -देव कुमार

बिखरी जुल्फों की लटा, आँखें लाल दिखाई देती है हमें तुम्हारी ज़िन्दगी बेहाल दिखाई देती है कल रात का फसाना आपका सुना था हमने भी इसलिये भी आज आप बदहाल दिखाई देती है….!! देव कुमार

उनकी खैर– खबर नही मिलती; . हमको ही खासकर नही मिलती । मै लचार हो जाऊँगा; . . अगर तु नही मिलती ।। लोग कहते है; बजार मे रूह मे दिल; जिस्म मे दुनिया पैसे […]

मुझे तेरी आरजू में जुदाई मिल गयी है! मुझे तेरी चाहत में तन्हाई मिल गयी है! गमगीन हो गयी है मेरी हाल-ए-जिंदगी, मुझे राहे-वफा में रुसवाई मिल गयी है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

ये दिल के विराने मे आज ये शौंर कैसा आभास किसका इस मय के पेमाने मे ये कैसे बदली आज मौसम की नजरें क्या बरसा है आज वो अंजाने में देव कुमार

मैं कुछ बोल नहीं सकता ; …. …………….तुम्हारा दिया हुआ जख्म; किसी के समाने खोल नही सकता। जब बहती पुरबा हवा बहुत दर्द होती; पर मै रो नही सकता । क्योंकि आँसु को बनाए है […]

तेरी जुस्तजू का आना कबतक रहेगा? तेरा यूँ दिल में ठिकाना कबतक रहेगा? जाम के नशे में खुद को भूला हूँ लेकिन, सामने हरदम पैमाना कबतक रहेगा? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

कैसे होते हैं……! ——————————— कोई पहचान वाले अनजान कैसे होते हैं जानबूझ कर कोई नादान कैसे होते हैं बदलता है मौसम वक़्त और’लम्हें सुना हेै– वक़्त पर बदल जाए–इंसान कैसे होते हैं..! छोड़ दे साथ […]

किनारे पर बैठे बैठे हम कैसे दरिया में डूब रहे हैं, न जाने इतना गहरा दरिया हम कैसे देख रहे हैं, आरक्षण का पानी पीकर देखो कैसे फूल रहे हैं, कैसे एकतरफा सिस्टम से हम […]

तुझे पाने के लिए खुद को जलाएगा कौन, है प्यार तुझसे ही लेकिन नखरे का भार तेरा उठायेगा कौन, तुझे पाने के लिए खुद को जलाएगा कौन, मन मे तो आता है रूठे तुम्हारी तरह […]

कभी आइस– क्रीम की तरह पिघलती रही जिन्दगी, हवा की रूख की तरफ बदलती रही जिन्दगी, लाख समझया उसे पाने की जिद ना करो– पर इक वच्चे की तरह जिद ठानी रही जिन्दगी। मंजिल पर […]

कभी आइस– क्रीम की तरह पिघलती रही जिन्दगी, हवा की रूख की तरफ बदलती रही जिन्दगी, लाख समझया उसे पाने की जिद ना करो– पर इक वच्चे की तरह जिद ठानी रही जिन्दगी। मंजिल पर […]

कभी आइस– क्रीम की तरह पिघलती रही जिन्दगी, हवा की रूख की तरफ बदलती रही जिन्दगी, लाख समझया उसे पाने की जिद ना करो– पर इक वच्चे की तरह जिद ठानी रही जिन्दगी। मंजिल पर […]

बड़े दिनों के बाद बेचारी आँखों ने, स्वप्नों भरी एक रात गुजारी आँखों ने, बेचैनी भरपूर दिखाई आँखों ने, जिस पल उनसे नज़र मिलाई आँखे ने, कल्पनाओं की कलम चलाई आँखों ने, हर दिन नई […]

मत लगाओ नफरत की आग दिवानों की दिल मे,जिसके दिल मे वर्षो से तुम्हारे नाम के महोब्बत की चिराग जलती हो । वरना वो बेधर हो जाएगा अपने दिलो वाले धर से।।

तुम मेरी जिंदगी में बेहद बेशुमार हो! तुम मेरे तसव्वुर में आते बार–बार हो! मुश्किल बहुत है रोकना तेरे सूरूर को, तुम मेरी नज़र में ठहरा हुआ खुमार हो! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तुम मेरी जिंदगी में बेहद बेशुमार हो! तुम मेरे तसव्वुर में आते बार–बार हो! मुश्किल बहुत है रोकना तेरे सूरूर को, तुम मेरी नज़र में ठहरा हुआ खुमार हो! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

खामोश तस्वीरों की जैसे कोई आवाज बन गया हूँ, अनजाने में ही जैसे उनके अल्फ़ाज़ बन गया हूँ, जो कह नहीं पाती वो अपनी आँखों से खुलकर, मैं उनके कबीले का कोई सरदार बन गया […]

सब कुछ चाहिए जुबाएँ ना साथ देती, जब आती है रिश्ते शादी की जुबाएँ पर मिठास होती, देख अच्छे से ऐसी — वैसी बात होती– चाहिए सब कुछ जुबाएँ ना साथ होती। बात बन जाती […]

ए वक्त अब उससे दुर ना कर , ए वक्त इतना मुझे मजबुर मत कर। वरना टुट जाऊँगी, उसके बिना मुझे उससे इतन दुर ना कर, क्योकि उसके साथ जीना फुलवारी लगता, उसके साथ चले […]

वक्ते-सितम से रिश्ते टूट जाते हैं! राहे-वफा में रहबर छूट जाते हैं! दूरियाँ हो जाती हैं जिनसे दिलों की, बेरहम बनकर हमसे रूठ जाते हैं! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तु कहती तो तेरे कदमो मे गिर जाता, मै इतना मजबुर था चाहता था, तुझे क्योकि मेरे दिल को तु मंजुर था। प्यार के ब़दले तु करती प्यार ये शिर्फ तुम्हारा कहने का नाटक था। […]

रेत हाथों से यूँ ही न सरक पाएगा, गर उँगलियों में दूरी रखोगे नहीं, रंग चेहरे का फीका न हो पायेगा, गर रिश्तों में किस्से रखोगे नहीं, अब कुछ नहीं इन आँखों से हो पायेगा, […]

माँ के दिल और पिता के दिमाग से परखा जाएगा, ये बचपन का पौधा बड़े हिसाब से ख़र्चा जाएगा, मेहनत लगी है गहन किसकी परवरिश में कितनी, दो एक रोज़ में सरेआम इसका चर्चा हो […]

पत्थरों को भी खड़े होने का सलीका सिखाने में, कितना काबिल दिखता है वो पिरामिड बनाने में, सन्तुलन कोई रखता नहीं दो रिश्ते निभाने में, बेहद तस्सली सुझाता है वो शिलाओं को सिखाने में, सहज […]

सिखाता कोई नहीं बस सीखना पड़ता है, अपने रिश्तों को खुद ही सूझना पड़ता है, दिल की जितनी ही पहरेदारी की जाती है, उसको उतनी ही बिमारी से जूझना पड़ता है।। राही (अंजाना)

शीर्षक – अस्थिर जो सोचती हूँ अपने बारे में शायद किसी को समझा पाऊँ, मैं वो पानी की बूंद हूँ जो आँखों से आँसू बनकर छलक जाऊँ तस्वीर बनाना आसान हैं किसी की कोशिश करती […]

शीर्षक – मृत्योपरांत स्मरण (एक बेटी के भाव अपने पिता की मृत्यु पर ) जिसने हाथ पकड़कर चलना सिखाया आज साथ छोड़ कर जा रहा है वो… गिरकर सम्भलना सिखाया जिसने आज फिर उठने से […]

जब दिल नहीं कोई आत्मा दुखाने लगे, आँखों में ठहरा वो पानी छलकाने लगे, स्वप्नो की बनाई दुनियाँ को भुलाने लगे, अपने ही रिश्ते का दीपक बुझाने लगे, चेहरे से झलकते भावों से नज़र चुराने […]

मेरे जिस्म से हर रोज़ मेरे वस्त्र उतारे जाते हैं, दरख्त काटकर पंछियों के घर उजाड़े जाते हैं, साँसे हैं मेरी ही बदौलत यहाँ जिनके जीवन की, उन्हीं हाथों से अक्सर मेरे वजूद उखाड़े जाते […]

जाने अनजाने रिश्तों के मध्य खड़ा नज़र मैं आता हूँ, मैं मतलब हूँ बेमतलब लोगों के साथ कभी जुड़ जाता हूँ, कभी मैं आता काम बड़े कभी किसी मोल न भाता हूँ, थाली के बैगन […]

स्वप्नों के तराजू पर वजन मेरी जिम्मेदारी का ज्यादा निकला, मेहनत के कागज़ों पर नोटों का रंग थोड़ा ज्यादा निकला, बहुत बहाया पसीना दो रोटी कमाने की खातिर मैंने, मगर मेरे वजूद से मेरी कमर […]

जब मैंने पूछा – आज तुम्हारा बदन इतना मैला क्यों है क्यों हो तुम इतने गुस्से में, क्या कोई संताप है? उसने घूर कर देखा मुझे, और कहा आज कल तबीयत थोड़ा खराब है. ये […]

तुम खुद को किसी की याद में क्यों खोते हो? तुम जिंदगी को अश्कों से क्यों भिगोते हो? आती हुई बहारों को न रोको दर्द से, तुम हर घड़ी तन्हाई में क्यों रोते हो? मुक्तककार- […]