कहीं तेरी बेवफाई से मैं बदल न जाऊँ? कहीं इंतजार की ज्वाला से मैं जल न जाऊँ? मुझे दर्द सताता है हर वक्त तन्हाई में, कहीं सब्र के चट्टानों से मैं फिसल न जाऊँ? मुक्तककार- […]

इस शहर का बहुत बुरा हाल देखा हमने हर इंसान को गम से बेहाल देखा हमने दूर दूर तक गम, तन्हाई, और ज़िल्लत देखी हर गली, हर कूचा इश्क-ऐ-ऐतराम देखा हमने….!! -देव कुमार

माँ मुझे भी इस दुनिया में ले आओ न इस जग की लीला मुझे भी दिखलाओ न खुले आसमान के नीचे मुझको घुमाओ न अपनी ममतामई गोद में खिलाओ न पढ़ा लिखा कर मुझे भी […]

वक्त कैसा भी हो हाथ से छूट ही जाता है, रिश्तों के समन्दर में यहाँ हर कोई डूब ही जाता है, चोंच में दाने खिलाता है जो पंछी, एक दिन तनहा छोड़ ही जाता है।। […]

उस बेगुनाह ने बस सरल रस्ते बनाये थे, एक दूजे से जोड़ने को कुछ रिश्ते बनाये थे, सरदार खुद बन बैठे गुनाह ऐ अज़ीम करके, जिस इंसान के उस मालिक ने साँचे बनाये थे।। राही […]

कुछ बनना है तो फूलों की तरह बनों अपनी महक से दुनिया महका दो कुछ बनना है तो तितली की तरह बनों अपने रंग दूसरों में बिखरा दो कुछ बनना है तो जुगनू की तरह […]

दौलत रूपी आग ने .. अपनो से कर दिया दुर। मैने भाई बनाना चाहा राम और लक्ष्मण जैसा; लेकिन दौलत रूपी आग ने बना दी भाई जैसे पवित्र “रिस्ता”– रावण और विभीषण जैसा।। jyoti

कल भी तेरी “चाहत “थी; आज भी तेरी चाहत है– . तु तो शिर्फ प्यार रूपी नाटक की। प्यारा मे मजबूरियाँ किसको ना होता ये मजबुरी रूपी खंजर चला दी मेरे शीने मे।। कल”” तरपता”” […]

तेरी दिल में ख्वाहिश आयी है अभी अभी! चाहत की फरमाइश आयी है अभी अभी! गूंज उठी है शहनाई यादों की लेकिन, फिर गम की पैदाइश आयी है अभी अभी! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

अगर देती जन्म “‘” माँ”” चलना; सभलना सिखाते है पापा। . …………. जितना भी बच्चे फरमाइस करते; पुरा करते है पापा। अपना सारा अरमान कुचलकर; बच्चे के अरमान को पूरा करते पापा।। अपने बदन पर […]

तुम केवल नारे मे गाओ की कश्मीर हमारा है’” सच तो यह है कि कश्मीर को पाकिस्तान ही प्यारा है। …………. नेहरू के भुलो को छोड़ अब पटेल बन जाना होगा। कश्मीर के हर चौराहे […]

गर देती है जन्म माँ तो जिंदगी संवारते हैं पापा जितना भी हो सकता है सब कुछ कर गुजरते हैं पापा जेब गर खाली भी हो तो कर्ज ले आते हैं पापा अपने बच्चों के […]

जब भी तेरा चेहरा याद आता हिचकियाँ उठ जाता; अभी उसकी वेवाफाई से उभरे नही यारो। अब ना जाने हिचकियाँ कौन सा पैगाम दे जाता। . जब भी उसका चेहरा नजर आता; हिचकियाँ उठ जाता […]

जब भी तेरा चेहरा याद आता हिचकियाँ उठ जाता; अभी उसकी वेवाफाई से उभरे नही यारो। अब ना जाने हिचकियाँ कौन सा पैगाम दे जाता। . जब भी उसका चेहरा नजर आता; हिचकियाँ उठ जाता […]

ना जाने उनकी किस अदा पर हम मर जाते है; हर वक्त जुबाँए पर उन्ही का नाम लिये जाते है । . बीताएँ कुछ लम्हा उनके” संग” …………………….. याद आ जाते है। हो जाता हुँ […]

फसाना जिंदगी का अजीब जैसा है! हर ख्वाब आदमी का रकीब जैसा है! बदली हुई निगाहों का खौफ है दिल में, मंजिलों का मिलना तरकीब जैसा है! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

बहुत से ख़्वाब है आँखों में मेरे सारे नहीं तो कुछ तो हकीक़त में आएँ माना के करनी है बहुत मेहनत हमको भी ज़रा आप भी तो उसमे अपना हाथ मेरे सर पर लाएँ।।

मंजिलों के रास्ते कुछ बोल रहे हैं! रंग दिल में चाहत का घोल रहे हैं! तिश्नगी ल़बों पर है पैमानों की, क़दम जुस्तजू के कुछ डोल रहे हैं! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

नज़रो में हो कंकड़ तो, रानाई चुभती है.. भरी बज़्म में चस्पा तन्हाई चुभती है.. जिस रिन्द को मयस्सर हो बस कफ़स की फर्श.. उसकी आँखों मे आसमान की ऊंचाई चुभती है.. जो जिस्म सतह […]

तुमसे अपने प्यार को कहना मुश्किल है! तेरे बगैर लेकिन रहना मुश्किल है! तुमको कभी गैर की बाँहों में देखकर, तेरी बेवफाई को सहना मुश्किल है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय