आइना देखने से ज्यादा दिखाने में लगा है, यहाँ हर कोई अपना चेहरा छिपाने में लगा है, खुद गुनाहों के समन्दर में डूबा हो मगर, हर कोई एक दूसरे पे ऊँगली उठाने में लगा है, […]
आइना देखने से ज्यादा दिखाने में लगा है, यहाँ हर कोई अपना चेहरा छिपाने में लगा है, खुद गुनाहों के समन्दर में डूबा हो मगर, हर कोई एक दूसरे पे ऊँगली उठाने में लगा है, […]
हवाओं के रुख से आहट पहचान ले कोई, ऊँगली जो उठे तो मुट्ठी बाँध ले कोई, कोई करे अनदेखी और बिन कहे सब जान ले कोई, साफ़ नज़र आता है क्यों न इसे मोहब्बत मान […]
Jab Kisi Ke Sapne Kisi Ke Armaan Ban Jaye .. Jab Kisi Ki Hassi Kisi Ki Muskaan Ban Jaye .. ~ Pyar Kehte Hai ~ Usse .. Jab Kisi Ki Saanse Kisi Ki Jaan Ban […]
प्यार मे ना कोई “”मजहब”‘ होता; ना ही कोई “”समाधी” की बात होता। .. प्यार वो दिम्मक है ;की आँख से होता और दिल मे उत्तर जाता ।।
हमारी तारीफ क्या पुछते हो, बस इतना सुन लो साहिब…! ज़िसका कोई जवाब नही, ऐसा एक सवाल हैं हम…!! -देव कुमार
ठिकाना भी मिल जाएगा, और दर्द-एे-गम की दवा भी….! माना दुनिया मतलबी हैं मगर, कुछ लोग दिलजले भी हैं साहिब….! -@ देव कुमार
कुछ पहेलियां ज़िन्दगी की मैं सुलझा ना सका, उसमें से एक तेरी ज़ालिम मोहोब्बत हैं….!! -देव कुमार
पकड़ कर ऊँगली जो समन्दर पार कराता है, बहके गर जो कश्ती तो साहिल यार दिलाता है, भुलाकर शरारत जो मुझे अपने सर पर उठाता है, मैं जो रूठूँ तो मुझे वो हर बार मनाता […]
बेगुनाह को किस गुनाह की सज़ा सुनाई गई, सारी कायनात में क्यों ये खबर फैलाई गई, जुर्म किया ही नहीं जिस मालिक ने उसको, क्यों भरी अदालत में गीता की कसम खिलाई गई।। राही (अंजाना)
छोड़कर मेरे घर को जब जाने लगा बादल, मुझसे मुँह मोड़ कर जब जाने लगा बादल, रोका पर बारिश के संग वयस्त लगा बादल, शायद धरती से मेरे गांव की रुष्ट लगा बादल, जब देखकर […]
किस पर विश्वास करू —- जो आज तक रास्ते दिखा रहे थे;; वही गुमराह करने लगे । अपनो का नाटक करके वो मेरी मासुमी(चुप्पी) फायदा ले निकले। . किस पर विश्वास करू अब तो अपने […]
शैलेन्द्र जीवन से एक दिन शिला खण्ड जब टकराया, पिता की छाया हटी तो जैसे संकट मुझपर गहराया, संस्कारों का दम्ब था मुझमें सब धीरे-धीरे ठहराया, मेरे कन्धों पर परिवार का जिम्मा जैसे बढ़ आया, […]
वो कागज़ की कश्ती वो लहरों की हस्ती, वो छोटी सी बस्ती में हम बच्चों की मस्ती, वो कहाँ खो गई है मैं ये सोंचता हूँ, वो कहाँ सो गई है मैं ये सोंचता हूँ, […]
जवानी हाय इठलाने लगी है जुबां पे आह सी आने लगी है हमारी चाह भडका के अदाये तुफानी प्रीत भडकाने लगी है उठी है प्रीति अंग-अंग मे नशीली खिला के राग चहकाने लगी है हया […]
कुछ इस कदर के दुआएं बेअसर हो गई, के सारे मर्ज़ों की दवाएं मेरे ही सर हो गई, इलाज मिला मगर कहीं कुछ कसर हो गई, जिंदगी इससे पहले ही मोहब्बत की नज़र हो गई।। […]
इतने गर्म शहर में भी चुभ सी रही हैं, ये सर्द हवा, ये शीतल सा पानी, ये सुकूँ भरी छाओं ऐ दोस्त कितना भटक स गया है न ये मन की मैं सुकून में भी […]
ना कभी उफ़ किया, ना कभी किया कोई शिकवा आपसे आज आखरी पडाव हैं ज़िन्दगी का, देखो आने मे देर ना करना….!! -@देव कुमार@-
Jee Bhar Ke Dekhoon Tjhe Agar Tjhko Gawara Ho, Betab Meri Nazrein Or Pyar Tumhara Ho, Jaan Ki Fikar Ho Na Zamaney Ki Parwa, Ek Tera pyar Ho Jo Sirf Humara Ho….
Ab bhi taaza hai zakhm seene mein, Bin tere kya rakha hai jeene mein, Hum to zinda hain tera sath paane ko, Warna deir kitni lagti hai zaher peene mein
कहीं तेरी बेवफाई से मैं बदल न जाऊँ? कहीं इंतजार की ज्वाला से मैं जल न जाऊँ? मुझे दर्द सताता है हर वक्त तन्हाई में, कहीं सब्र के चट्टानों से मैं फिसल न जाऊँ? मुक्तककार- […]
बहुत ही हल्की हो गई हैं पलकें मेरी, अरसों बाद कोई उतरा है मेरी पलकों से आज।। राही (अंजाना)
इस शहर का बहुत बुरा हाल देखा हमने हर इंसान को गम से बेहाल देखा हमने दूर दूर तक गम, तन्हाई, और ज़िल्लत देखी हर गली, हर कूचा इश्क-ऐ-ऐतराम देखा हमने….!! -देव कुमार
माँ मुझे भी इस दुनिया में ले आओ न इस जग की लीला मुझे भी दिखलाओ न खुले आसमान के नीचे मुझको घुमाओ न अपनी ममतामई गोद में खिलाओ न पढ़ा लिखा कर मुझे भी […]
चलो रहने भी दो अब बहानेबाजी कैसी, तुम आ तो गये हो, मगर अब वो पहले वाली बात नहीं….!! -देव कुमार
बड़े ही नाराज दिखते हो आज आप मोहोब्बत से….! कही इसने आज आपको भी तो नहीं लूटा….!! -देव कुमार
वक्त कैसा भी हो हाथ से छूट ही जाता है, रिश्तों के समन्दर में यहाँ हर कोई डूब ही जाता है, चोंच में दाने खिलाता है जो पंछी, एक दिन तनहा छोड़ ही जाता है।। […]
उस बेगुनाह ने बस सरल रस्ते बनाये थे, एक दूजे से जोड़ने को कुछ रिश्ते बनाये थे, सरदार खुद बन बैठे गुनाह ऐ अज़ीम करके, जिस इंसान के उस मालिक ने साँचे बनाये थे।। राही […]
मिट्टी के ढेर हैं हम सब यहाँ वक़्त का खेल है न जाने कब बिखर जाये।।
मिट्टी के ढेर हैं हम सब यहाँ वक़्त का खेल है न जाने कब बिखर जाये।।
कुछ बनना है तो फूलों की तरह बनों अपनी महक से दुनिया महका दो कुछ बनना है तो तितली की तरह बनों अपने रंग दूसरों में बिखरा दो कुछ बनना है तो जुगनू की तरह […]
दौलत रूपी आग ने .. अपनो से कर दिया दुर। मैने भाई बनाना चाहा राम और लक्ष्मण जैसा; लेकिन दौलत रूपी आग ने बना दी भाई जैसे पवित्र “रिस्ता”– रावण और विभीषण जैसा।। jyoti
कल भी तेरी “चाहत “थी; आज भी तेरी चाहत है– . तु तो शिर्फ प्यार रूपी नाटक की। प्यारा मे मजबूरियाँ किसको ना होता ये मजबुरी रूपी खंजर चला दी मेरे शीने मे।। कल”” तरपता”” […]
होठो को अपने होठ से चुमनन दे दे । सुना है प्यार का रंग गहरा चढ़ता।।
कोई और बात हो तो हमको बतलाओ साहिब, के दगा देना और दिल तोडना आपकी पुरानी आदत हैं….!! -देव कुमार
ये तो अपनी अपनी किस्मत हैं साहिब, वरना इश्क का क्या हैं किसी को मिलता हैं और किसी को नहीं भी….!! -देव कुमार
चलो तमाशा बनाते हैं आज अपनी मोहोब्बत का, हम गिङगिङाएगे आप के सामने, और आप मुंह फैर लेना….!! -देव कुमार
गम, तन्हाई, रूसवाई, और तड़प ना जाने कितने गम पाल रखे है मेरे इस दिल ने….!! -देव कुमार
हार क्या होती है य़े तब हमने जाना, जब हम खुद हारे मोहोब्बत से लड़ते लड़ते…!! -देव कुमार
उदास क्यूँ रहते हो अपने गम को लेकर के दुनिया मैं किस के पास गम नही हैं साहीब…..!! -देव कुमार
पूछा जो उसने य़े गुलाब कितने का हैं, हमने हाथ का छाला उसको दिखा दिया रो कर उसने जो हमारा हाथ चूमा, सारे दर्द को मिटा दिया….!! -देव कुमार
आँखों मैं आंसू, और दिल मैं सदा रखते हैं कुछ लोग ऐसे भी अपनी मोहोब्बत को बया करते हैं….!! -देव कुमार
एे खुदा चल आज तू ही फैसला कर दे, मिला दे मुझको उससे य़ा सांसो को मुझसे जुदा कर दे….!! -देव कुमार
इतनी इज्ज़त न हमें बक्शो साहिब…. के मोहोब्बत की दुनिया में अपनी कोई इज्ज़त नहीं हैं….!! -देव कुमार
आँखों में मैं खुवाब लिए फिरता हू, इसलिये भी मोहोब्बत से मैं डरता हू….!! -देव कुमार
ज़रा सोच लेना, फिर फैसला सुनाना साहिब….! के सवाल ज़िन्दगी का नहीं, दिल, ज़जबात, और मोहोब्बत का भी हैं….!! -देव कुमार
सब कुछ पाया ज़िन्दगी में, सिवाय एक चीज के…! दोस्ती, रिश्ता, अपनापन, सिवाय एक इश्क के…!! -देव कुमार
दिया गम, तन्हाई, रूसवाई और आँसू….! कुछ इस तरह मोहोब्बत का कर्जा चुकाया उसने….!! -देव कुमार
ना मुस्कुराने का रास्ता दिखा, ना कोई दिखी बस्ती खुशहाली की….! बस फस कर रह गया मैँ, तेरी यादों के जंगल मे….!! -देव कुमार
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