राहे-वक्त में तुम बदलते जा रहे हो! तन्हा रास्तों पर तुम चलते जा रहे हो! दूर-दूर क्यों रहते हो जिन्दगी से तुम? बेखुदी की शक्ल में ढलते जा रहे हो! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

उसी का शहर था उसी की अदालत। वो ही था मुंसिफ उसी की वक़ालत।। , फिर होना था वो ही होता है अक्सर। हमी को सजाएं हमी से ख़िलाफ़त।। , ये कैसा सहर है क्यू […]

तेरी याद आज भी मुझको रुलाती है! तेरी याद आज भी मुझको सताती है! भूलना मुमकिन नहीं है तेरे प्यार को, तेरी याद आज भी मुझको बुलाती है! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

हर शक्स जमाने में गुमनाम जैसा है! दर्द और तन्हाई की शाम जैसा है! जलता हुआ सफर है राहे-मंजिलों का, जिन्दगी को ढूँढता पैगाम जैसा है! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

तेरी याद न आए तो फिर रात क्या हुई? तेरा दर्द न आए तो फिर बात क्या हुई? पलकों में अभी अश्क भी आए नहीं अगर, तेरे ख्यालों से फिर मुलाकात क्या हुई? मुक्तककार – […]

टूटते ख्वाबों के फसाने हैं बहुत! जिन्दगी में गम के बहाने हैं बहुत! बस तू ही खफा नहीं है अंजाम से, शमा-ए-चाहत के परवाने हैं बहुत! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

फसाना जिंदगी का अजीब सा होता है! हर ख्वाब आदमी का रकीब सा होता है! बदली हुई निगाह से डर जाते हैं कदम, मंजिलों का मिलना तरकीब सा होता है! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

तेरे सिवा कुछ भी नजर आता नहीं है! ख्वाबों का सफर भी मुस्कुराता नहीं है! राह खींच लेती है यादों की इसतरह, तेरा ख्याल मुझसे दूर जाता नहीं है! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

दर्द के दामन में चाहत के कमल खिलते हैं! अश्क की लकीर पर यादों के कदम चलते हैं! रेंगते ख्यालों में नजर आती हैं मंजिलें, जब भी निगाहों में ख्वाबों के दिये जलते हैं! मुक्तककार […]

तेरी याद से खुद को आजाद करूँ कैसे? तेरी चाहत में खुद को बरबाद करूँ कैसे? लब्ज भी खामोश हैं बेबसी की राहों में, तेरी मैं तकदीर से फरियाद करूँ कैसे? #महादेव_की_कविताऐं’

इश्क़ करना बहुत आसान निभाना है बहुत मुश्किल। किसी ने पा लिया सब कुछ किसी को है नही मंजिल।। सफ़र में हम रहे तन्हा मिली तन्हाइयां हमको। नहीं अफ़सोस इसका है हुए जो हम नहीं […]

मेरी जिन्दगी गमें-ख्याल बन गयी है! तन्हा बेखुदी की मिसाल बन गयी है! मेरे दर्द की कभी होती नहीं सहर, रात जुदाई में बेहाल बन गयी है! मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

जिसकों कहतें थे हम हमसफ़र अपना। वो तो था ही नही कभी रहगुज़र अपना।। , तुमको मुबारक हो भीड़ इस दुनिया की। हम काट लेंगे तन्हा ही ये सफर अपना।। , भूल गए हो यक़ीनन […]

चारो दिशाओं में छाया इतना कुहा सा क्यों है यहाँ जर्रे जर्रे में बिखरा इतना धुआँ सा क्यों है शहर के चप्पे चप्पे पर तैनात है पुलिसिया फिर भी मचा इतना कोहराम सा क्यों है. […]

हर रास्ता हमसे तंग हुआ, हम फिर रास्ते की तलाश मे निकले , शजरो शजर की चाहत मे रास्ते महज इत्तेफाक निकले । ठहरे जहाँ पल भर को ब आजादी ब आबोताब , हमारी आबादी […]

तुम मेरी यादों में आते किसलिए हो? तुम मेरे दर्द को बुलाते किसलिए हो? वक्त की दीवारों में दफ्न हूँ कबसे, तुम मेरी रूह को रुलाते किसलिए हो? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

जख्म मिट गया है मगर मौजूद तेरी निशानी है! गुजरे हुए हालात की मौजूद तेरी कहानी है! राह देखता रहता हूँ अब भी शामों-सहर तेरी, मेरी धड़कनों में हरपल दर्ज तेरी रवानी है! मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

दर्द तेरा कायम है याद भी आ जाती है! #शाम_ए_तन्हाई में बेइन्तहाँ सताती है! हंसने की जब भी तमन्ना होती है दिल में, ख्वाबों की चुभन से मेरी आँख भर आती है! मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

जब भी ख्यालों में यादों की लहर आती है! #दर्द की बेचैनी में रात गुजर जाती है! अश्कों में घुल जाता है ख्वाबों का आशियाँ, मेरी जिन्दगी को तन्हाई तड़पाती है! मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

मेरा ख्याल तेरी यादों से डर जाता है! मेरे दर्द को दिल में गहरा कर जाता है! जब भी करीब आती हैं बारिशों की बूँदें, मौसम चाहतों का अश्कों से भर जाता है! मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

तुम मेरी चाहतों में हरवक्त बेशुमार हो! तुम मेरी धड़कनों में आ जाते हर बार हो! अब मुश्किल बहुत है रोकना तेरे सुरूर को, तुम मेरी निगाहों में ठहरा हुआ खुमार हो! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

ग़ज़ल-ये तुम क्यों भूल गए मैंने तुम से प्यार किया था…..ये तुम क्यों भूल गए तुमको सब कुछ मान लिया था ये तुम क्यों भूल गए सुबह थी तुम शाम थी तुम मेरे दिल की […]

ये सही है कि तवायफों का जिस्म बिकता है , मगर ईमान भी बिकता हो – जरुरी तो नहीं . ये सही है कि उनसे गलतियाँ हजारो हुई है रिश्ता निभाने में, मगर हर मर्तबा […]

कबतक तेरी याद में तड़पता मैं रहूँ? कबतक तेरी चाह में तरसता मैं रहूँ? डूबा हूँ मैं कबसे पैमानों में मगर, कबतक तेरे दर्द से गुजरता मैं रहूँ? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

चलो मिलकर प्रेम के कुछ रंग- ो-रस चख लो हर धर्म की परिभाषा का ये नाम रख लो गर चाहते हो हिंदुस्तान को खुशहाल देखना तो, तुम्हारे अल्लाह मुझको दे दो , तुम मेरे राम […]

मेरी नजर के सामने साकी रहने दो! हाथों में अभी जाम को बाकी रहने दो! धधक रही हैं तस्वीरें यादों की दिल में, अश्कों में अभी दर्द की झांकी रहने दो! महादेव की कविताऐं’ (मात्रा […]

आंखों की यह पलकें झपका के तो दिखा सच बताऊ यह भी ना कर पाएगा। उस परमात्मा के कारण ही तेरा वजूद है उसके बिना, मिट्टी में मिल जाएगा। यह पैसा, यह शरीर सब नाशवान […]

कविता   उम्र की पतंगें : अनुपम त्रिपाठी   वे, बच्चे ! बड़े उल्हास से चहकते—मचलते; पतंग उड़ाते …………. अचानक थम गए !!   उदास मन लिए लौट चले घर को ———— पतंग छूट जाने […]

हर शाम चाहतों की आहट सी होती है! हर शाम जिगर में घबराहट सी होती है! जब रंग तड़पाता है तेरी अदाओं का, मेरी साँसों में गर्माहट सी होती है! मुक्तककार- #महादेव’

आइना आज फिरसे सामने आया,  बीत चुके समय की उन मुश्किलों और गलतियों को मुझसे रूबरू कराया, थोड़ा हंसाया और थोड़ा रुलाया, जब बीते हुए पलों का चेहरा सामने आया तब गुम हो चुकी यादों […]

हर शख्स निगाहों में प्यार लिए रहता है! हर वक्त जेहन में खुमार लिए रहता है! जब कभी रुक जाती है राह मंजिलों की, दर्द का जिगर में बाजार लिए रहता है! मुक्तककार- #महादेव'(23)

जब भी यादों की तस्वीर नजर आती है! तेरे ख्यालों की जागीर नजर आती है! मैं जब भी ढूँढता हूँ जिन्दगी की राहें, तेरी बाँहों में तकदीर नजर आती है! महादेव की कविताऐं’

अक्सर खुशी का रिश्ता ग़म से होता है इसीलिए हँसी में भी आँख नम होता है   मेरे हाल पर हँसने वालों ज़रा गौर करो वक़्त ही तो है हरदम बदल रहा होता है सुना […]

अपने ही सूरज की रोशनी में मोती–सा चमकता औस का कतरा है आज़ वो जो कल तक था अंधेरे में जी रहा।   कितनो की आँखों का तारा है आज़ वो जो कल तक था […]

क्या सिर्फ चेहरे पर बनी कुछ लकीरें तय करती हैं ख़ुशी ? या फिर किसीके पूछने पर ये कह देना “मैँ खु़श हूँ” इससे ख़ुशी का पता लग सकता है ?   — KUMAR BUNTY

कुछ ख्वाब जिन्दगी में हमेशा अधूरे रह जाते हैं। अरे दूसरों को क्या समझाऊ मैं, अपने ही समझ नहीं पाते हैं। अरे हमसे भी तो पूछ कर देखो, हम क्या चाहते हैं। “सुखबीर” जो अपने […]

तू तो नही पर तेरी कहानी याद आयी सबको भूले पर तेरी जफ़ा याद आयी तेरे लिक्खे सब ख़तों को जला दिए पर तुझपे लिखी वो ग़ज़ल याद आयी “विपुल कुमार मिश्र” #VIP~

गुमशुम,मदहोश,खामोश कहाँ रहते हो वो क्या कहते है,हाँ मोहब्बत में रहते हो वो सुर्ख होंठ,क़ातिल नज़र बला की अदा एक दीद में क़त्ल का सामान रखते हो “विपुल कुमार मिश्र” #VIP~

तेरे लिए मैं तन्हा होता जा रहा हूँ! तेरे लिए मैं खुद को खोता जा रहा हूँ! अश्कों में मिल गयी हैं यादों की लहरें, तेरे लिए मैं तन्हा रोता जा रहा हूँ! मुक्तककार- #महादेव’

वो लोग भी एक खास ही जगह रखते है जो वक़्त पर मेरे सामने आईना रखते है   कोई क्या लगाएगा मेरे वफ़ा का अंदाज़ा हम तो दिल भी किसी के पास रखते है   […]

दिन–रात लिखूँ हर बात लिखूँ दिल के राज़ लिखूँ मन के साज़ लिखूँ।   अपने वो दिन बेनाम लिखूँ लेकिन नहीं हुआ बदनाम लिखूँ कितना बनकर रहा गुमनाम लिखूँ इतना कुछ पाने पर भी बनकर […]

कुछ खो गया है मेरा या फिर मैं खुद ही लुटा रहा हूँ जिंदगी कहीं चल तू ही बता दे जिंदगी आज़ नहीं तो कल किसी और मोड़ पे सही मुझे कोई जल्दी नहीं लेकिन […]