दिल की दवात से स्याही लहू का बहता रहा, कभी वक्त ने मुझको लिखा, कभी तारीख अपनी मैं लिखता रहा ।   कभी लिखा बेमुकद्दर दस्ताने-जीस्त अपनी, कभी अस्क बहाती आरज़ूओं को कहता रहा । […]

वो मिला ले नज़र तो इनायत, वो फेर ले नज़र तो शिकायत । वो पत्थर की सही पर, करता मैं उसकी इबादत ।   चखता वो मेरे दिल को देकर अपनी उल्फ़त, बढ़ता है नशा […]