Category: हिन्दी-उर्दू कविता

  • तेरी आवाज में हम डूब जाते है

    तेरी आवाज में हम डूब जाते है

    तेरी आवाज में हम डूब जाते है
    तुझसे हम कुछ कह नहीं पाते है

    हाल ए दिल कैसे करें बयां अपना
    दिल की हर धडकन में तुझे सजाते है

    गालिब बना दिया हमें तेरी मोहब्बत ने
    तनहाइयों में भी बस तुझे गाते है

    यकीन है एक दिन मिलेगीं नजरें तुझसे
    हर लम्हा यही सोचकर बिताते है

    शम्मा से बस एक मुलाकात की खातिर
    परवाने पागल शम्मा मे जल जाते है

    sign

  • skoon

    !!!!! SAGAR KE DIL SE !!!!!!

    Tum tau sau gaye skoon ki neend
    ……………….sapurde khakh ho kar

    hamara tau skoon bhi gaya neend bhi
    ……………………sapurde jahaan ho kar

    @@ SAGAR @@
    02/10/15 :: 11:00 PM… (104) … ©

  • कुछ  अनकहे एहसास   : )

    कुछ अनकहे एहसास : )

    aaj Shaam yun hi Tanha Baith kar  

    Tere Baare mein Socha to hai  

     
     

    bheegti barishon ko aanshu-wo se bheega-kar 

    un bheege paloon ko pukara to hai 

     
     

    Bahti hawaon, Sagar ki Lahron pe 

    Tere Naam Ek Paigam ,bheja to hai 

     
     

    Yun hi Besakhta Teri baaton pe 

    chehre ne ek Muskaan Bikhera to hai 

     
     

    Kya hai tu, kaun hai tu Kaisi hai tu? 

    Hazar Sawalon k beech  

    Tere Andekhe Wajood se ek dhaga babdha to hai !!

    Pass ka na sahi dur ka Sahi 

    Par ek Rishta bana to hai !!

    Zindagi ki saikdo na puri hone wali tamannaon k beech 

    Ek Tamanna ki Tamanna bani to hai 

     
     

    aaj sham bheegte hue phir se tujhe jiya to hai…. 🙂

  • समंदर में इक कश्ती है छोटी सी

    समंदर में इक कश्ती है छोटी सी

    समंदर में इक कश्ती है छोटी सी

    कभी रोती थी रेत के दरिया में

    अब दरिया अश्क में तैरती है..

  • rishta-e-zindagi

    !!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!

    Ik dastoor tha zindagi
    hum nibhate chale gaye

    jo paraye thay unko bhi
    apna banate chale gaye

    bari shiddat ke saath nibhaya
    hummne har rishte ko

    phir na jaane kyoun sab apne
    humme yuhi rulaate chale gaye

    @@ SAGAR @@
    4/9/15 :: 10:55 PM .. (596) … ©

  • मेरे चेहरे की दो निशानियाँ ……  :)  :(

    मेरे चेहरे की दो निशानियाँ …… 🙂 🙁

    थोड़े हम अमीर थे

    एक दिल के

    थोड़े हम गरीब थे

    एक दिल के

    थोड़ा मुस्कुराते थे

    टुकड़ों में

    थोड़ा गुनगुना लेते थे

    मुखड़ों में

    कभी सौदागर थे

    हंसी के

    कभी रो लेते थे

    पीछे मुड़ के

    कुछ बदनाम हैं

    दर्द मेरे

    और कुछ पाक हैं

    अत्फ़ मेरे

    …बस यही है ……

    मेरे चेहरे की दो निशानियाँ

  • Raakh

    !!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!

    jalte hue diye ko dekh kar socha
    ki isse tau sab ne dekha jalte hue !

    aur main bina kisi ke ahsaas kiye
    khaak aur raakh hota chala gaya !!

    @@ SAGAR @@
    1/10/15 ::3:15 PM…. (608) … ©

  • रंगीन दुनिया में अब बस लहू नजर आता है

    रंगीन दुनिया में अब बस लहू नजर आता है

    न चिराग नजर आता है, ना आफ़ताब नजर आता है

    भीड है चारों तरफ़ मगर, ना कोई इंसान नजर आता है

    रंगो की ख्वाहिश थी इस दिल को दुनिया मे बिखेरने क़ि

    क्या करे रंगीन दुनिया में अब बस लहू नजर आता है

  • zindagi ke mor

    !!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!

    zindagi ke har mor par
    khayal rakhna

    har waqt apno par
    nazar rakhna

    kis mor par koi chor jaaye
    saath tumhara

    bas apno main paraayo ki
    pehchan rakhna

    @@ SAGAR @@
    30/9/15 :: 8:00 PM…. (607) … ©

  • कुछ कमाल की बात है

    कुछ कमाल की बात है

    कुछ कमाल की बात है

    उनकी आवाज में

    कभी कोयल सी मधुर लगती है

    कभी बिजली की कडक सी कर्कश

    तो कभी बूंद बनकर बरसती है

    मेरे सूखे पडे ह्रदय में

    कभी बहा कर ले जाती है

    डुबा देती है

    समंदर के आगाज़ में

    कुछ कमाल की बात है

    उनकी आवाज में

  • दर्द- इश्क और ज़िन्दगी

    लड़कपन की बात ही कुछ और थी, तब तो मेरी भी आँखों में सपने सुहाने थे !

    हाथों में हाथ डाल कर, सीखेगी दुनिया हमसे प्यार करना, कुछ ऐसे वादे हमारे थे!

    चलता तो रहा मैं सिर्फ उसको देख कर, उस पर विश्वास कर, अनजानी सी राहो पर,

    पर छोड़ अकेला मुझे वो चला ही गया, बिना कुछ बताये खुद की बनाई हुई नयी राहो पर!!

     

    ना जाने ऐसा क्या था उसी में, जो टूट कर मैं इतना बदल गया,

    शराब के नाम से नफरत करने वाला, आज उसी में सिमटता रहा,

    देरसबेर तक यूँ  ही मैं नशे में अकसर चूर रहने लगा,

    एक दिन ना जाने कब मेरी आँख लगी और मैं सो गया,

    जब देखा ख्वाब तो, वो मेरे सामने खडी थी,

    उसकी आँखों से बह रही आंसुओ की लड़ी थी!!

    बोली, तुम्हे छोड़ कर मैं बहुत पछता रही हूँ,

    पर फ़िक्र मत करो, तुम्हे भी अपने पास बुला रही हूँ!!!

    जब टुटा ख्वाब का ख्वाब, तब मैं सुन्न पड़ा था,

    मेरा पार्थिव जिस्म धरती पर बेसुध सा पड़ा था!!

    आस पास में मेरे, लोगों का मेला सा लगा था,

    उसी बीच में मेरी माँ का तो रो रो बहुत बुरा हाल था,

    किसी कोने में खड़ा छोटा भाई भी मुझे धिक्कार रहा था!!

    बाबा तो मानो बेजान से हो गये थे,,

    बाकी बचे लोग मुझे नहला रहे थे,

    देखते ही देखते चार लोगों ने मुझे अपने कंधो पर रख लिया,

    थोड़ी देर में ही सफ़ेद कपडे में लपेट कर लकड़ी से ढक दिया,

    कुछ लोग मेरी अच्छाइयों के बारे में एक दूसरे को बतला रहे थे,

    इसी बीच घरवाले मेरे शरीर को अग्नि के हवाले करवा रहे थे,

     

    ज्यों ही लगी मेरे तन में आग, फट से मेरी आँख खुल गयी,

    सपना था ये सोच कर, मेरे रोमरोम की हर एक कली खिल गयी,

    तब मुझे ये समझ आई कि, ये जिंदगी तो बस गिरवी हैं,

    इस पर माँबाप, भाईबहन, दोस्त सब का हक हैं,

    यह सिर्फ एक माशूका के इर्दगिर्द नहीं सिमटी हैं,

    ज़िन्दगी की क्या कीमत हैं, एक सपने ने मुझको सिखा दिया,

    दर्द तो अभी भी बहुत होता हैं पर,

     

    दर्द को ज़लील कर फिर से मुसकराना जीना सिखा दिया,

  • ahsaas

    !!!!! SAGAR KE DIL SE !!!!!

    Jab itne kareeb ho koi
    tau ahsaas kyoun ho door hone ka

    aur jab door ho jaaye koi
    tau ahsaas kyoun karna kareen ka

    jo apna hai wo door ho ke bhi door nahi
    jo apna nahi wo paas ho ke bhi paas nahi

    bas ik payar hai.. bas ik ahsaas hai
    aur kuch nahi …..aur kuch bhi nahi

    @@ SAGAR @@
    30/8/15:: 10:30 PM…. ( 590) … ©

  • ek muskurahat

    !!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!

    hum tau udaasiyon main bhi
    jala dete hai khushion ke chiraage

    na jaane kyoun logo ko
    muskurane ki wajah nahi milti

    @@ SAGAR @@
    31/8/15 :: 2:36 PM… (591) …. ©

  • बरस चला सारे साल का सावन

    बरस चला सारे साल का सावन

    सिमट कर आ गये सारे अहसास आज आंखों में

    बरस चला सारे साल का सावन, आज रुखसारों पर 

  • मृत्यु : परम  सत्य

    मृत्यु : परम सत्य

    here is some para frm my long work describing the truth “death”.. hope u all ll like ..

    वेदो  की  वाणी  भूल  गयी ,ममता  माया  सब  छूट  गयी ..
    तैयार  लगा  होने  अब  तो  प्रियतम  के  घर  को  जाने  को
    लो  आज  चली  आई  मृत्यु  हमको  निज  गोद  उठाने  को …
    संघर्ष किया  था  जीवन  भर  किस  किस  से  लड़ा  किस  किस  को  छला
    अब  तो  निज  की  सुध  भी  भूली  कर  सकते  है  क्या  और  भला ‘
    जीवन  भर  पथ  में  कांटे  थे  जो  हमने  सबको  बाटे  थे
    सब  छल  था  प्रभु  की   माया  थी , है  परम  सत्य  ये  पाने  को
    लो  आज …
    मैं शांत  पड़ा  निश्छलता  से  पोषित  क्यों  आज  ह्रदय  होता
    सुख  देख  कभी  मुस्कान   भरी  ,दुःख  देख  कभी  था  मैं  रोता
    अब  हँसना  रोना  भूल  गया  बस अंतिम  याद  है  आने  को
    लो  आज ….
    जिसको  जीवन  भर  माना  था  जिसको  हमने  पहचाना  था
    जिसको  था  कहा  ये  मेरा  है  ,जिस  जिस  को  कहा  बेगाना  था
    सब  आज  पराये  ही  लगते  जो  अपना  है  वो  आने  को
    लो  आज …
    न  द्रोण  युधिष्ठिर  की  भाषा   न  भीष्म  पितामह  का  मंचन ‘
    न  अर्जुन  का  वह  शोक  रहा  न  द्वेषित  है  अब  कौरव  गण
    सब  शांत  पड़े  निःशांत पड़े ,उस  चाह  में  जो  है  होने  को ‘
    लो  आज …
    ये  वही  मृत्यु  है  प्राणप्रिये  जिसने  रावण  को  अपनाया
    सम्मान  कर्ण  का   किया  प्रिये  जो  वो  न  जीवन  भर  पाया
    उस  कंस  दुस्शाशन  के  घर  पे  जो  आई  थी  आलिंगन  को ‘
    लो  आज  …
    कवि  अपनी  कविता  भूल  गया ,योगी   उच्छ्वास  न  ले  पाया
    छूटा  धनु  तीर  धनुर्धर  से ,न  भीम  गदा  लहरा  पाया
    प्रेमी  ही  प्रियतम  भूल  गया  ,जब  साँस  रहेगी  जाने  को ‘
    लो  आज …
    ये  जीवन  सुन  के  शर्म   करो  क्या  तेरा  मेरा  नाता  था
    था  साथ  बहुत  तेरा  मेरा  दस  बीस  सैकड़ो  सालों  का
    अपना  पाया  न  फिर  भी  तू  ,अब  साथ  तुम्हारा  छूट रहा ,
    एक  पल  में  अपना  लेगी  वो  अपने  घर  को  ले  जाने  को
    लो  आज …
    न  होली  की  है  चाह  मुझे  न  दीपो  की  अभिलाषा  है
    या  क्या  होगा  अब  आगे  डर  इसका  भी  मुझे  न  सताता  है
    चिंता  भूली  भय  भूल  गया  तैयार  हुई  अपनाने  को
    लो  आज …
    है  अजेय  ये  कभी  न  हारी  जीत  चुकी  है  दुनिया  सारी
    रवि  भी  इसके  आगे  निर्बल  ,धरा  से  भी  बाजी  मारी
    संगीत  नृत्य  सब  कला  ग्रन्थ  है  क्रोध  में  ही  जल  जाने  को
    लो  आज …

    ..continued

    …atr

  • gunaah

    !!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!

    Apne har gunaahgaar ko
    maaf kiye jaa raha hun

    khudh ko khudh se hi
    aazaad kiye jaa raha hun

    @@ SAGAR @@
    27/9/15 :: 8:48 PM … (604) …. ©

  • hussn-o-ishq

    !!!!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!!!

    teri mohabbat be-parwaah hi sahi
    par humne tau parwah kar kar ke
    apni ummar guzzar di

    tere hussn ki duniya kaayal hi sahi
    par humne tau teri saadgi dekh kar
    apni ummar loota di

    @@ SAGAR @@
    5/9/15 :: 3:03 PM … (597) …. ©

  • तो कहना !!!

    कभी गौर से देखना खुद को आईने में, खुद ही खुद में ना खो जाओ तो कहना,,

    कभी पासजाकर देखना गुलाब के, खुशबुसे खुद ही ना बिखर जाए तो कहना,,

    बहुत नाज़ कर रही हैं लहरे आज कल खुद के इठलाव, बलखाव, झुमाव पर,

    आपकीजुल्फों के लहराव तले,लहरे खुद ही खुद में ना डूब जाए तो कहना !!!

     

    चाँदबड़ा पागल हैं, कहीं और से रोशनी पाकर बहुत ही ज्यादा इतराता हैं,

    देख ले तुम्हे ज़रा सा एक बार,पसीने में लथपथ ना हो जाए तो कहना !!!

     

    बहुत गुरुर करती हैं किताबे अपने, अनगिनत, स्थायी, माधुर्य शब्दों पर प्रतिदिन,

     

    वर्षो तक आप पर लिखते रहने पर भी उसकेशब्दकमनापड़ जाए तो कहना !!

  • उस अफ़साने की बात करते हो

    उस अफ़साने की बात करते हो

    सिमट गया जो चंद अल्फ़ाजों में, उस अफ़साने की बात करते हो

    खुद को हमारी जिंदगी बनाकर, छोड जाने की बात करते हो |

     

    नहीं है कोई अंजाम इस अफ़साने का, मालूम था हमें

    जला रखा था इक उम्मीद का चिराग़, उसे बुझाने की बात करते हो |

     

    पहले से दफ़न है कई अहसास मेरे दिल की दरख्तों में

    कत्ल करके इक और अहसास का, दफ़नाने की बात करते हो |

     

    गये है तेरे दर पर हम, अपना सबकुछ छोडकर

    अब खुद को छोडकर, लोट जाने क़ी बात करते हो

  • कल्पना

    कल्पना

    expecting ur reviews and kind attention with ur graceful words ..

    जब धरा उठ कर बने आकाश तो अच्छा लगे ,
    जब मही की तृप्ति को बादल करे बरसात तो अच्छा लगे.

    है अँधेरा, धुंध सा है,राह पथरीली बहुत ,
    इस घुटन को चीर कर लूँ साँस तो अच्छा लगे.

    मन शांत हो, जिज्ञाशु बुद्धि , और दया संचार हो,
    भीड़ से उठकर कोई बोले “शाबास “तो अच्छा लगे .

    खोज हो जब सत्य की , और धर्म  का संधान हो ,
    शक्ति और क्षमता करें सहवास तो अच्छा लगे .

    हो यहाँ प्रज्ञा अकल्पित , प्रेम का संगीत हो ,
    धैर्य और साहस पर , हो अटल विश्वास तो अच्छा लगे .

    हर कदम पर ,हर शहर में , हर ग़ज़ल हर गीत में ,
    हो जहाँ भी मीर तेरी बात तो अच्छा लगे ..
    …atr

    #feel_it

  • ख़ामोशी

    ख़ामोशी

    चुप रहता हूँ आजकल ,

    कम बोलने लगा .

    देख लिया दुनिया को मैंने ,

     जान लिया सच्चाई को .

    अब दिल बरबस रो पड़ता है,

    इस झूठी तन्हाई पर .

    इस ख़ामोशी को तुम क्या जानो ,

    पाया कितनी मुद्दत बाद .

    अब तो सन्नाटे की भी आवाज़ सुनाई देती है ,

    कितना सुन्दर आँखों को दुनिया दिखलाई देती है .

    चुप हो जाओ , चुप रहने दो , 

    कुछ न कहूँगा आज के बाद .

    ख़ामोशी कितनी प्यारी है , चादर लेके चुपके चुपके 

    मीठी सी गहराई में , सोने की इच्छा है बस 

    जी  भर के मुझको सो लेने दो , जाने दो ख़ामोशी से

      …atr

  • झुकी जो नजर

    झुकी जो नजर

    थोडा सा शरमाकर, हल्के से मुस्कुराकर झुकी जो नजर
    नज़रे-नूर-ओ-रोशनी में मेरी रंगे-रूह हल्के से घुलती गयी

    sign

  • Ishq

    !!! SAGAR KI KALAM SE !!!!

    Ishq hua jab humme unse
    tau umre-e-ishq na thi

    hussn aaya jab chehre par unke
    tau umre-e-hussn na thi

    kahin tau tha hamare ishq ka asar
    jo ban kar aaya noor unke chehre par

    par be-dard duniya ko ye
    hussn-e-ishq ki takreer pasand na thi

    @@ SAGAR @@
    9/09/15 :: 8:55 PM … (601) … ©

  • मेरी याद आएगी

    मेरी याद आएगी

    क़भी जब गिर के सम्भ्लोंगे  तो मेरी याद आएगी ,

    कभी जब फिर से बहकोगे  तो मेरी याद आएगी।

    वो गलियां , वो बगीचे ,वो शहर ,वो घर ,

    कभी गुजरोगे जब उनसे तो मेरी याद आयेगी।

    वो कन्धा मीर का तकिया तुम्हारा वस्ल में जो था,

    कभी जब नींद में होगे तो मेरी याद  आएगी।

    मुझे है याद वो पत्थर कि जिनसे घर बनाया था ,

    आँखों ही आँखों से जहाँ सपना सजाया था ,

    मुझे है याद वो आँखे, वो बातें और वो सपना,

    कभी उस घर से गुजरोगे तो मेरी याद आएगी।

    क़भी जब गिर के सम्भ्लोंगे तो मेरी याद आएगी।

    कभी जब फिर से बहकोगे तो मेरी याद आएगी।

    …atr

  • Khayaal

    Khayaal

    !!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!

    ik khayaal hai jo zehan se jaata nahi

    dil aaj bhi tumko kisi aur ka manta nahi

    waqt ki be-mani thi ya waqt ki thi maar

    verna aaj mere siva tera aur koi hota nahi

    @@ SAGAR @@
    11/9/15 ::9:15 PM .. (602) … ©

  • DARD

    DARD

    !!!!  SAGAR KI KALAM SE !!!!

    Choti choti baat par bhi
    bahana dundhte rehte hai

    ye aanssoo har watq beh
    jaane ke talash main rehte hai

    @@  SAGAR  @@

     

  • इतना आसान

    इतना आसान हूँ मैं कि हर किसी को समझ में आ जाता हूँ,,
    शायद तुमने ही मुझे पन्ने छोड़-छोड़ कर पढ़ा था!!
    इसलिए हक हैं तुझे,, तू भी तो मुझसे दूर सकता हैं,,
    मेरा भी मन तो तेरी खातिर दुनिया को भुला बैठा था!!
    मगर इतना गुमान जरूर हैं मुझे अपने वजूद पर कि,,
    तू मुझसे दूर ही जा सकता हैं, मगर भुला नहीं सकता!!!
    न तो मैं अनपढ़ रहा, और ना ही काबिल रह पाया,,
    ऐ इश्क,, खाम-खाँ तेरे स्कूल में मेरा हुआ दाखिला था!!!!

    मगर एक छोटा सा वादा,, मेरी इस उम्र से ज्यादा,,
    तुझसे करता हूँ मैं सनम,,
    जब तक टूट कर बिखर ना जाए तू भी किसी के इश्क से,
    तब तक मैं भी टुकडो में जिंदा रहूँगा तेरे खुद के रश्क में,,
    फिर निःसंकोच तुम मेरे पास आना,, और फिर चाहे
    तू रुक जाना मुझमें,, या मैं ठहर जाऊंगा तुझमें,,,
    शायद तभी हम एक – दूसरे को,,
    खुद से भी बेहतर समझ पायेंगे

  • धड़क

    धड़क

    ऐ दिल,,,, सिर्फ धड़क

  • आती नही हैं नींद

    आती नही हैं नींद

    आती नहीं है नींद क्यों रातों में आजकल।

    तस्वीर बन रही है एक आँखों में आजकल।

    फूलों से दोस्तीदोस्ती है या उल्फत का असर है।

    शोखी घुली है उसकी बातों में आजकल।

    कुछ दिल से हो रही है क्यों महकी हुई फ़िज़ा।

    मेहंदी रचा रही है वो हाथो पे आजकल।

    #कुलदीप अनजाना

  • मुक्तक  32

    मुक्तक 32

    हवाओं  की नज़र से देखता हूँ मीर मैं तुझको ,

    कि छूकर पास से निकलूं और तुझको खबर न हो .

    ये दिल पत्तों सा हिलता है तेरी यादों के आने से,,

    कभी तो झूम के बरसेगा सावन उम्मीद बाक़ी है .

    …atr

  • मेरे अहसास

    कभी लगता था कि मेरे अहसास सिर्फ़ मेरे है

    अब शायद वो भी पराये हो गये

  • उस नजर से नहीं

    वक़्त बदलेगा किसी वक़्त पर सोचा इस कदर से नहीं,
    पिलाकर नजरो से हाला, फिर बोला कम जहर से नहीं,,
    इज्जत बहुत हैं तेरी दिल में, तुझसा दोस्त ना पाऊँगी,
    मैं प्यार तुझी से करती हूँ,, मगर उस नजर से नहीं,,

    उसने तो हर एक बात को ऐसे मुंह उठाकर बोल दिया,,
    मेरे हर एक ख्वाब को बस,, तराजू जुटाकर तोल दिया,
    कहाँ खोजूं उस नजर को यारो, हर नजर ने राह को मोड़ दिया,,
    Amazon, snapdeal फेल हो गये, गूगल ने भी हाथ जोड़ दिया,,
    खेलने कूदने की उम्र हैं उसकी,, मेरे ख्यालो संग भी खेल गई,,
    खुद तो गेंद से बन गई फूटबाल, पर मेरे जज्बातों को पेल गई,,
    उसको मैं कैसे समझाऊ,, जब आँखों को उसकी चुल्ल हो जाएगी,,
    उसका हाल तो वो ही जाने,, मेरी तो जिन्दगी लुल्ल हो जाएगी !!
    उसके दिल की इज्जत को रखकर मैं कौन सा आचार डालूँगा,,,
    यादो में ही रखना अब मुझको,, तेरा राहगीर नहीं बन पाऊंगा,,
    भुला दूंगा दिल से तुझको, पर मुमकिन धड़कन से नहीं,
    मैं प्यार तुझी से करती हूँ,, मगर उस नजर से नहीं,,

  • हाल -ए- दिल

    हाल -ए- दिल

    हम अपना हाल -ए- दिल आपसे कहते रहे
    कभी बच्चा तो कभी मासूम आप हमें कहते रहे

    आज तक कोई सबक पढा न जिंदगी में हमने
    ताउम्र हम आपकी आखों जाने क्या पढते रहे

    इक अरसा बीत गया हम मिले नहीं आपसे
    तुझसे मुलाकात के इंतजार में हम तनहा मरते रहे

    न हुई सुबह न कभी रात इस दिल ए शहर में
    कितने ही सूरज उगे कितने ही ढलते रहे

    अनजान राहों में चलते रहे मंजिल की तलाश में
    चलना ही मुसाफिर का नसीब है सो हम चलते रहे

    sign

  • मुक्तक 31

    दिल  के आइने में मीर तेरा अक्श देखूंगा ,

    कभी सोचा नहीं था तुमपे इतना प्यार आएगा .

    …atr

  • मुक्तक 30

    तेरे  जाने  से सब  ये सोचते  है मैं अकेला  हूँ  ,

    उन्हें  शायद खबर न हो कि तेरी याद  बाक़ी है .

    मैं तनहा कैसे समझूँ मीर इन ख़ाली मकानों को ,

    तेरे और मेरे प्रेम का वो सहज संवाद बाक़ी है. .

    …atr

  • कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे

    कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे

    कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे

    उमडने को आतुर है ज़ज्बात मिरे

    वो तो अल्फ़ाज़ हैं कि कहीं खोये हुए है

    नहीं तो इक नज़्म लिख देते अश्क मिरे

  • बारी हैं!!!

    बहुत सो लिए हम,, अब हमारे जागने की बारी हैं!!!
    बहुत लूटा परिंदों ने, अब तड़पने की उनकी बारी हैं!!!
    मन हमारे अकेले थे, सो वार कर गये वो हम पर,,
    अब एकजुट होकर कुछ कर गुजरने की बारी हैं!!
    28 राज्य और 3 देशों में बिखर कर रह गया इंडिया,,
    अब इंडिया को अखंड साम्राज्य भारत बनाने की बारी हैं!!!

  • डर

    डर

    सिमट रहा हूं धीरे धीरे

    इन सर्द रातों में

    छिपा रहा हूं खुद को खुद में

    इस बेनूर अंधेरे में

    कभी कोई चीख सुनाई देती है

    खामोश सी,

    कभी सर्द हवाओं को चीरती पत्तों की सरसराहट,

    तो कभी कहीं दूर भागती गाडी की आवाज

    कभी कभी गिर पडते हैं

    ठण्डेठण्डे रूखसारों पर गर्म आंसू,

    कभी चल उठती है

    यादों की लपटें सर्द हवाओं के बीच,

    कभी डर उठता हूं पास आती अनजान आहटों से

    देखता हूं बार बार बाहर बंद खिडकी से झांककर

    कहीं कोई बाहर तो नहीं?

    नहीं, कोई नहीं बस डर है

    शायद अजीब सा

    समझ नहीं आता कैसा

    किसी के साथ होने का डर या,

    किसी साथ जाने का ?

  • बगरस निगाहें तेरी

    बगरस निगाहें तेरी ,

    आँखों की सुराही तेरी,

    करती हैं क्या बातें,साहेबान ,

     

    मन की दुया इन मेरी,

    रूबरू न आएं तेरी,

    करती हैं क्या बातें, साहेबान,

     

    जुस्तजाजु  मेरी  वह  ही  हैं ,

    रूबरू  कैसे  हो   सकु ,

    उसको  बता  दे , साहेबान ,

     

    बगरस निगाहें तेरी ,

    आँखों की सुराही तेरी,

    करती हैं क्या बातें, साहेबान 

  • अंदर-अंदर क्यों घुटीयाते हो!!

    मन में जो इतने ख्वाब बने, वो आखिर किसे समझाते हो,
    लिखते इतना अच्छा हो पर जताकर किसको पास बुलाते हो,,
    तुम्हारे मन में भी फिर-फिर कर यह सवाल आता होगा,,
    बहुत हरे-भरे रहते हो, पर अंदर-अंदर क्यों घुटीयाते हो!!

    बचपन में कुछ ऐसा हुआ, लगने लगा मन हुआ बड़ा,,
    ह्रदय संजोये प्रेम-भाव फिर, पलटने जग हुआ खड़ा!!
    देखकर उसको मैं अकसर, बस उसमे ही रम जाता था,,
    पास उसको पाकर तो दुनियादारी से मन उठ जाता था!!
    आज पास नहीं हैं वो मेरे,, बस नयन बसाये रखता हूँ,,
    निकल न पाए वो यहाँ से, सो अश्रु-बूंद तक नहीं बहाता हूँ!!
    दूर हैं अब तलक मुझसे, बस मुहब्बत-ए-लड़कपन ने लाचार किया,,
    अगर बनता जिद्द वो मेरी तो, खुद शाम तक बांहों में होता पिया!!
    मेरे नादान-आवारापन पर, हाये उसका पावन भोलापन,,
    ख्याली बंजारेपन में भी सावन बनने का सयानापन,,
    अब क्यों खामखां मन के भावों को यूँ ही रचियाते हो,,
    बहुत हरे-भरे रहते हो, पर अंदर-अंदर क्यों घुटीयाते हो!!

  • ये गीत मेरे

    नैनो के सूखे मेघो से मैं आज अगर बरसात करूँ ,
    हल करुँ ज़मीन ए दिल में मैं नीर कहाँ से मगर भरूँ?
    है सूख चुका अब नेत्र कूप न मन का उहापोह बचा ,
    न मेघ रहा न सावन है ,मिट गया जो कुछ था पास बचा .
    एक बार हौसला करके मैंने बीज प्रेम के बोये थे ,
    न मौसम ने रखवाली की ,सावन ने पात न धोये थे .
    अब न मन है , न मौसम है ,न उर्वर क्षमता धरती की ,
    न नैनो में अब पानी है ,न दिल में इच्छा खेती की .
    रोते है मेघ और कूप सभी ,करता विलाप अब ये मन है ,
    फिर भी न आंसू गिरते है ,न नैनो में इतना दम है .
    अब बस अंधियारी रातो का यह निपट घना सन्नाटा है ,
    दिल रोता है , मैं लिखता हूँ ,जीवन से पल का नाता है .
    मैं जाऊँ पर ये गीत मेरे ,फिर किसी जमीन ए बंज़र में ,
    मेघ बने ,बरसात करे ,फिर किसी अकालिक मंज़र में …

    …atr

  • मुक्तक 28

    जवां दिल था , जवां धड़कन , जवां सांसे , जवां मन था ,

    मगर बस मीर इतना था, जहाँ वो थी वहां मन था ..

    …atr

  • बस्ती प्यार की

    कहीं आसूं  की बारिश थी ,कहीं यादों का झोंका था,

    जिसे देखा था बस्ती में वही दिन रात रोता था .

    नगर था प्यार का , उजड़ा था गुलशन , शाम ख़ाली थी,

    रहूँ कैसे वहां मैं मीर , जहाँ बस ख्वाब सोता था ..

    …atr

  • मन हमारे आजकल अपनेपन की परिभाषाये

    मन हमारे आजकल अपनेपन की परिभाषाये बदल रहे हैं,,
    सारे प्यारे दोस्त हमारे,, अब भीड़ सामान ही लग रहे हैं,,
    पराई नगरी में भी अकसर लोगों में घुल जाया करता था,,
    अब खुद की बस्ती में भी यूँ हीं,, तनहा- मारे रम रहे है,,

    ये कैसा अजीब सा मोड़, मेरी ज़िन्दगी में आ रहा हैं..
    अब दिल कुछ ज्यादा ही हावी, दिमाग पर हो रहा हैं..
    जो सुकून मिला अकसर, माँ की गोद में सर रखकर,,
    आज उसे ही पराये मन के करीब पाना चाह रहा हैं,,

    कहीं पर तो होगी वो भी जिससे मैं अपने जज्बात बयां कर पाऊंगा,,,
    बस पास जिसके होने पर,, धरती पर ही जन्नत महसूस कर जाऊँगा..
    जब भी थक कर मैं अक्सर अपनी हर-एक शाम को पाऊंगा,,
    गोद में रख कर सर उसकी बस आँखों में खो जाऊँगा,,
    फिर धीरे-धीरे मेरे बालो को वो कुछ इस तरह से सहलाएगी,,
    तितली चखती पुष्प-रस फिर ख्वाबों में शहद पिरो जायेगी,,
    सिंगल बाबु कैसे समझाऊँ, क्या-क्या साज दिल में बजा करेंगे,,
    सुनकर स्वीटू, एंक, अंकु, सारे ख्वाब हकीकत बन जाया करेंगे,,
    अकसर सुन कर अल्हड़ बाते,, यूं ही मुझसे रूठ जाया करेगी,,
    चुपके से मैं उसको मनाऊंगा और वो मन ही मन मुसकाया करेगी,,
    पर दिल कुछ ज्यादा ही हावी, अब दिमाग पर हो रहा हैं..
    जो सुकून मिला अकसर, माँ की गोद में सर रखकर,,
    उसे ही आज पराये मन के करीब पाना चाह रहा हैं,,

  • जहाँ तो सबका हैं,,

    ये जहाँ तो सबका हैं,, जिसे हम सबने मिलकर संवारा हैं,,
    बस किसी गर्दिश की बंदिश में फंसा मेरा सितारा हैं,,
    कहती,, मंजूर नहीं उसको सामने खुदा के भी हाथ फैलाना,,
    अतः मेरे हाथ वाले कटोरे में गोलगप्पे खाने का हुकुम हमारा हैं,,

    अब तू ही बता दे,, क्या बताऊँ इन सबको तेरे बारे में,,
    मेरी निगाहों में ढूंढ़ता तुझको पागल ये जहाँ सारा हैं!!!

    जब फिज़ाओ में महके मेरी नज्म के चर्चे, तब हुई चुगलियाँ,,
    उसकी बज्म से बह रहा एक-एक लफ्ज़ वाला दर्द हमारा हैं!!!

    दूर सही मजबूर सही,, लेकिन कुछ तो अपनी सी बात हैं इनमें,
    आखिर जमीं को उसी की तपन से पनपी कुछ बूंदों का सहारा हैं!!

    आसान नहीं यहाँ, “अंकित” हर किसी का भीष्म बन जाना,,
    कवच चीरते हर-एक तीर को आशीष देता हाथ तुम्हारा हैं!!

  • तेरी हरयाली इन आँखों में है वरना

    तेरी हरयाली इन आँखों में है वरना

    तेरी हरयाली इन आँखों में है वरना,
    दिल तो कल भी रेगिस्तान था और आज भी है

  • मेरी मोहब्त को सलाम कर तू

    मेरी मोहब्त को सलाम कर तू

    मेरी मोहब्त को सलाम कर तू
    मेरी मोहब्त को सलाम कर तू बेवफ़ा
    तूने ज़हर देकर बेवफ़ाई निभाई 
    और हमने जान देकर आशिक़ी

    तू चाहती थी छोड़कर जाना
    तू चाहती थी छोड़कर जाना
    और हम दुनिया छोड़ कर चले आये
    कहती हो खुश हु आज
    मेरा दिल ठुकराकर
    और हम
    और हम आज फिर से आंशू बहा आये

    हिम्मत तो बहुत थीं 
    दुनिया से लड़ने की
    और जीत लेते हम भी इस जहाँ को
    लेकिन तेरे सामने हम खुद को हार आये

    पोस्ट मार्तम कर ले यमराज
    तू भी पोस्ट मार्तम कर ले यमराज
    लेकिन दिल
    लेकिन दिल तो हम अपना वही छोड़ आये

     

  • खुद से परेशान

    सबका जन्मदिन आता हैं, आज तेरा भी हैं, इसमें खास कौन सी बात हैं
    जो हाथ जोड़े, गिड़गिड़ाये, उसकी ही सुनते हो तुम,, ये कौन सी बात हैं,,
    कितनी भी परिक्षाये ले लो तुम इस सुदामा की,,
    मगर कृन्दन पुकार इस सीने से नहीं निकलेगी,,
    और तू भी इतना जरुर याद रख्नना कान्हा कि,,
    जब जब मेरा दर्द उबलेगा,,
    भाप बनकर तुझ तक जरुर पहुंचेगा,
    और जब ये ख़ामोशी से तेरे पास पहुंचेगा,,
    तेरे सिंहासन में हालन जरुर ले आएगा,,
    फिर जब तेरी कुदृष्टि वाली सुमति से मेरा जीवन परिचय होगा,,
    इतना दर्द होगा उस वक़्त तेरे दामन में कि,,
    सीने का लहू भी बनकर जल बह जाएगा!!
    मैं अभी तलक खामोश हूँ और चुपचाप अकेला चल रहा हूँ,,
    इसका अर्थ कदाचित ये नहीं कि,,
    मैं कमजोर हूँ,, या हालातो से हार मान बैठा हूँ,,
    यत्र – तत्र – सर्वत्र बसते हो तुम,, सब जानते हो,,
    मगर फिर भी इतना जान लो तुम कि,,
    सिर्फ कुछ पल हौसले खातिर लोग तुम्हे,
    मंदिरों, घरों, दिलों, नजरो में “अंकित” रखते हैं,
    क्योंकि अर्जुन को भी कुरुक्षेत्र जीतने खातिर,,
    सारथी कृष्ण की जरुरत पड़ती हैं!!
    अगर तुम मेरा साथ दे भी देते हो फिर भी,,
    मुझे तुम्हारा साथ पाकर मोक्ष नहीं चाहिए,,
    क्योंकि मेरे माता- पिता गुरुओं ने,,
    मुझे कर्म प्रधान रहना ही सिखाया हैं!!
    मान लेता हूँ मैं भी कि मैं एक इंसान हूँ ,
    सो एक ही जगह पर खुद से बेहतर कुछ भी अच्छा नहीं लगता,,
    मगर तू तो फिर भी तू ही हैं कान्हा,,
    इस केवट कि जीवन नैया पर श्री राम बनकर,,
    विराजमान हो जाओ,, बेशक फिर,, मेरी एक गलती पर,,
    मेरे ही टूटे रथ के पहिये से मेरा संहार कर देना,,

    ……अंकित तिवारी ……

  • काश तुम चले आते!

    काश तुम चले आते!

    चली आतीं है अक्सर यादें तुम्हारी

    मगर तुम नहीं आते

    की कोशिश कई दफ़ा भूल जाने की तुम्हे

    मगर भूल नहीं पाते

     

    आयीं राते पूनम की कई बार

    मगर हुआ चांद का दीदार

    कर दिया है हमने अंधेरा अपने आशियाने में

    हम उजाला अब सह नहीं पाते

    काश तुम चले आते |

  • क्लास में अकेले

    ख्वाबो में भी अकेले होने पर जब बस शब्दों का सहारा होता हैं,,
    खुद की आधी-अधूरी सुनने पर भी जब मन छठपटा रहा होता हैं,,
    हालातों से बाहर आते ही जब ख्यालात नजर आ जाते हैं,,
    ह्रदय हारकर तन बिसराकर खुद वहाँ पहुँच तो जाते हैं,,
    फिर आसमान को समेटने की चाहत जब हाथ फैलाये रखती हैं,,
    खुद को महसूस करने खातिर जब स्वतः आँख बंद हो जाती हैं ,,
    तब हौले से एक कोयलिया स्वर ह्रदय-चीर मन बस जाती हैं,,
    आँखे खोली, कुछ नहीं पाया, पर दिल की कली-कली खिल जाती हैं,,
    तब मंद- मुसकाता सा एक चेहरा आँखों में बस जाता हैं,,,
    पास में ना होकर भी वो बस सामने नजर आ जाता हैं,,,
    कब होगा वो साथ में मेरे, दिमाग खुद सवालिया रहता हैं,
    दिल उसको समझाता हैं, झांक के देख वो मुझमे रहता हैं,,
    उसकी कल्पनाओ से परे तुझे अपने भविष्य की नीव रखनी हैं,,
    हासिल हो उसे भी मुक्कमल जहाँ,, ऐसी फरियाद तुझको करनी हैं,,

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