Category: हिन्दी-उर्दू कविता

  • दुश्मनों की दोस्ती है अब अहले वतन के साथ

    दुश्मनों की दोस्ती है अब अहले वतन के साथ
    है अब खिजाँ चमन मे नये पैराहन के साथ

    सर पर हवाए जुल्म चले सौ जतन के साथ
    अपनी कुलाह कज है उसी बांकपन के साथ

    किसने कहा कि टूट गया खंज़रे फिरंग
    सीने पे जख्मे नौ भी है दागे कुहन के साथ

    झोंके जो लग रहे हैं नसीमे बहार के
    जुम्बिश में है कफस भी असीरे चमन के साथ

    मजरूह काफले कि मेरे दास्ताँ ये है
    रहबर ने मिल के लूट लिया राहजन के साथ

  • गाये जा गीत मिलन के

    गाये जा गीत मिलन के
    तू अपनी लगन के
    सजन घर जाना हैं
    काहे छलके नैनों की गगरी, काहे बरसे जल
    तुझ बिन सूनी साजन की नगरी, परदेसिया घर चल
    प्यासे हैं दीप गगन के
    तेरे दर्शन के
    सजन घर जाना हैं
    लूट ना जाये जीवन का डेरा, मुझको हैं यह ग़म
    हम अकेले, ये जग लुटेरा, बिछुड़े ना मिल के हम
    बिगड़े नसीब ना बन के
    ये दिन जीवन के
    सजन घर जाना हैं
    डोले नयन प्रीतम के  द्वारे, मिलने की हैं धून
    बालम तेरा तुझको पुकारे, याद आने वाले सुन !
    साथी मिलेंगे बचपन के
    खिलेंगे फूल मन के
    सजन घर जाना हैं
  • उठाये जा उन के सितम और जिये जा

    उठाये जा उन के सितम और जिये जा
    युंही मुस्कुराये जा, आँसू पिये जा

    यही है मुहब्बत का दस्तूर, ऐ दिल
    वो ग़म दें तुझे, तू दुआएं दिये जा

    कभी वो नज़र जो समायी थी दिल में
    उसी एक नज़र का सहारा लिये जा

    सताये जमाना सितम ढाये दुनिया
    मगर तू किसी की तमन्ना किये जा
    उठाये जा उन के सितम और जिये जा

  • aajmaish

    !!!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!

    Ek baar kya aajmaya apno ko

    ki sabse door hota chala gaya

    Bahut be-wafai ki tune mujse e zindagi

    ki mai maut ke kareeb hota chala gaya

    @@ SAGAR @@
    01/11/15 :: 7:40 PM…. (624) … ©

  • kitaaab

    !!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!

    Likhi thi usne mere hi
    zakhm-o-dard par kittaaab apni

    idhar mera dard aur barta gaya

    udhar uss ki shohrat bharti gayi

    @@ SAGAR @@
    29/10/15 :: 2:00 PM … (621) … ©

  • यूं तेरी रहगुज़र से दीवानावार गुज़रे

    यूं तेरी रह गुज़र से दीवाना-वार गुजरे
    कांधे पे अपने रख के अपना मज़ार गुजरे

    बैठे रहे रस्ते में , दिल का खंडहर सजा कर
    शायद इसी तरफ से एक दिन बहार गुजरे

    बहती हुई ये नदिया , घुलते हुए किनारे
    कोई तो पार उतरे , कोई तो पार गुजरे

    तूने भी हमको देखा , हमने भी तुझको देखा
    तू दिल ही हार गुज़रा हम जान हार गुजरे

    ————————————————————-

    yuun teri rahguzar se diwana waar guzre
    kandhe pe apne rakh k apna mazaar guzre

    baithe rahe hain rasta main dil ka khandar saja kar
    shayad isi taraf se ek din bahar guzre

    bahti hui ye nadiya ghulte hue kinare
    koi to paar utre koi to paar guzre

    tuu ne bhi ham ko dekha hamne bhi tujhko dekha
    tuu dil hi har guzra ham jaan har guzre

  • हमने जफ़ा न सीखी

    हमने जफ़ा न सीखी उनको वफ़ा न आई
    पत्थर से दिल लगाया और दिल पे है चोट खाई

    अपने ही दिल के हाथों बरबाद हो गए हम
    किसके करें शिकायत अब किसकी दें दुहाई

    दुनिया बनाने वाले मैं तुझसे पूछता हूँ
    क्या प्यार का जहाँ में बदला है बेवफाई

    हमने जफ़ा न सीखी उनको वफ़ा न आई
    पत्थर से दिल लगाया और दिल पे है चोट खाई…

  • tang dil

    !!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!

    tang ho gayi galiya tere shehar ki

    tang ho gaye sab raaste tere dil ke

    kaise reh paaunga main ab yahan

    mujhe tau aadat hai khuli fizzaaon
    main saans lene ki

    @@ SAGAR @@
    28/10/15 :: 2.34 PM…. (619) …. ©

  • चाँद के शौक मे

    चाँद के शौक मे तुम छत पे चले मत जाना
    शहर में ईद की तारीख बदल जाएगी

  • क्या मैं तुम्हें चूम लूँ

    “क्या मैं तुम्हें चूम लूँ?”
    डल झील. पूरे चाँद की रात.
    उसने डरते हुए पूछा।

    “हश्श्, नाव डूब जाएगी”, वो बोली

    “तो क्या करें?”

    वो मुस्कुराई और बोली “डूब जाने दो”
    और वो सहम गया

  • RANG

    !!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!

    har rang main uska rang nazar aata hai

    wo na ho tau har rang be-rang nazar aata hai

     

    humne tau keh diya chand se bhi

    ki mera mahboob na ho tau tubhi mujhe kala nazar aata

    @@ SAGAR @@

     

  • nakaam ishq

    !!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!

    kuch iss tarah khaffaa hue wo humse

    ki hum duniya se khaffa ho gaye

     

    jab wohi na ho sake hamare

    tau hum zindagi se hi juddaa ho gaye

    @@ SAGAR @@
    27/10/15 :: 7:40 PM…. (617)…. ©

  • साथी न कोई मंजिल

    साथी न कोई मंजिल
    दीया है न कोई महफ़िल
    चला मुझे ले के, ऐ दिल, अकेला कहाँ? …
    हरदम मिले कोई, ऐसे नसीब नहीं
    बेदर्द  है जमीं, दू-ऊ-ऊ-र आस्माँ
    चला मुझे ले के, ऐ दिल, अकेला कहाँ? …
    गालियाँ हैं अपने देश की, फिर भी हैं जैसे अजनबी
    किसको कहे कोई अपना यहाँ?…
    पत्थर  के आशना मिले, पत्थर के देवता मिले
    शीशे का दिल लिए, जाऊं कहाँ
    साथी न कोई मंज़िल
    दिया है न कोई महफ़िल
    चला मुझे ले के, ऐ दिल, अकेला कहाँ?…
  • PAYAR

    !!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!

    Dil par haath rakhta hun
    tau tumhari dharkan sunae deti hai

    aankho par haath rakhta hun
    tau tumhari surat dekhae deti hai

    Kaano par haath rakhta hun
    tau tumhari awaaz sunae deti hai

    kaise bhula paaunga tumhe main
    har shae main teri hi shakshiat dikhaee deti hai

    @@ sagar @@
    25/10/15 :: 8:00 pm (144)….©

  • Yaad kar lena

    !!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!

    Jab koi dard utthe dil main
    tau yaad kar lena

    jab koi aah nikle mann se
    tau yaad kar lena

    mehfil main tau sab honge
    tumhare paas apne

    jab tanhaaiyon main ghir jaao
    tau humme yaad kar lena

    @@ SAGAR @@
    23/10/15 :: 8:30 PM… (616) … ©

  • गमछे रखकर के अपने कन्धों पर….

    गमछे रखकर के अपने कन्धों पर….
    गमछे रखकर के अपने कन्धों पर
    बच्चे निकले हैं अपने धन्धों पर।

    हर जगह पैसे की खातिर है गिरें
    क्या तरस खाएं ऐसे अन्धों पर।

    सारा दिन नेतागिरी खूब करी
    और घर चलता रहा चन्दों पर।

    अपना ईमान तक उतार आये
    शर्म आती है ऐसे नंगों पर।

    जितने अच्छे थे वो बुरे निकले
    कैसे उंगली उठाएं गन्दों पर।

    जिन्दगी कटती रही, छिलती रही
    अपनी मजबूरियों के रन्दों पर।
    ……..सतीश कसेरा

  • कुछ लफ़्ज़ ठहरा रखे हैं कागज पर

    कुछ लफ़्ज़ ठहरा रखे हैं कागज पर

    कुछ लफ़्ज़ ठहरा रखे हैं कागज पर
    क्या पता कभी कोई कविता बन जायें
    कुछ दिनों को भी जोड रखा है
    शायद कहीं ये भी कभी जिंदगी बन जायें

  • मेरी लाडली री बनी

    मेरी लाडली री बनी है तारों की तू रानी
    नील गगन पर बादल डोले, डोले हर इक तारा
    चांद के अंदर बढ़िया डोले ठुमक-ठुमक दर-द्वारा
    कमला गाए बिमला गाए, गाए कुनबा सारा
    घूँघट काढ़ के गुड़िया गाए, झूले  गुड्डा प्यारा
    बटलर नाचे, बैरा नाचे, नाचे मोटी आया
    काले साहब का टोपा नाचे, गोरी  मेम का साया
    मेरी लाडली री बनी है तारों की तू रानी
  • एक मुलाकात की तमन्ना मे…

    एक मुलाकात की तमन्ना मे…

    आपकी यादो को अश्कों में मिला कर पीते रहे
    एक मुलाकात की तमन्ना मे हम जीते रहे

    आप हमारी हकीकत तो बन न सके
    ख्वाबों में ही सही हम मगर मिलते रहे

    आप से ही चैन ओ सुकून वाबस्ता दिल का
    बिन आपके जिंदगी क्या, बस जीते रहे

    सावन, सावन सा नहीं इस तनहाई के मौसम में
    हम आपको याद करते रहे और बादल बरसते रहे

    जब देखा पीछे मुडकर हमने आपकी आस में
    एक सूना रास्ता पाया, जिस पर तनहा हम चलते रहे

    sign

  • Fatta PAnna

    Fatta PAnna

    Fatte Panne k jaise
    haal ho gya h,
    zinda to h
    magar
    kisi kaam k nhii

     

  • beaprda hi rehte to acha tha

    beaprda hi rehte to acha tha

    parde me hi rehte to thk tha,
    beparda kya hue,
    mohalle bhar ki njar lg gyi..

  • Sukr tera

    Sukr tera

    Sukr tera kaise aada kru??
    teri ishq ki giraft se aajaad krne ki.

     

  • Giraftar krlo muje

    Giraftar krlo muje

    Giraftar krlo muje apne ishq me
    is kaidi ko rihayi nhi chaiye kbhi..
  • Paak mera pyaar tha,

    Paak mera pyaar tha,

    Paak mera pyaar tha,
    Napak tere irade..
    haal ab ye h
    Na-Pak ab tum ho,
    na mera jism

     

  • इक नज्म है जिंदगी

    इक नज्म है जिंदगी

    इक नज्म है जिंदगी
    जिसकी इबारतें हम लिखते है
    गाते है, गुनगुनाते है
    कई दफ़ा भूल भी जाते है
    याद करने, भूलने में
    लिखने औ मिटाने में
    ये कारवां ए जिंदगी चले


     

  • तस्वीर

    तस्वीर

    बहुत दिन हो गए उसके ख्यालो की आंधी में बसे हुए,,

    चलो आज उसकी एक तस्वीर बनाते हैं,,

     

    उसकी अल-कायदा सी आँखे हैं,, जो बस मार ही डालती हैं,,

    उसकी बुलडोज़र सी बाते हैं,, जो बस गिरा ही डालती हैं,,
    लगता हैं उसके बाप का किसी कसाब से तगड़ा रिश्ता हैं…
    वरना ताज की खूबसूरती को यूँ ही नहीं चकनाचूर कर डालती हैं…

  • Few words from Mushaira

    Few words from Mushaira

    Saavan 

    ये कारवां चले तो, हम भी चलें
    ये शम्मा जले तो, हम भी जलें
    खाक करके हर पुरानी ख्वाहिश को
    इक नया कदम, हम भी चलें……


     

    कभी ठहरी सी लगती है,
    कभी बहती चली जाती है
    जिंदगी है या पानी है
    न जाने क्यों जम जाती है


    कोई वक्त था, जब एक रब्त चला करता था हमारे दरम्या
    गुजर गया वो रब्त, अब साथ बस वक्त चले


    मुश्किल है राहें, सूनी है अकेली सी
    इस अकेलेपन में साथ तन्हाई चले


     

     

  • मोहब्बत

    मोहब्बत

    तुम अपने हाथों क़ी मेहंदी में
    मेरा नाम लिखती थी और
    मैं अपनी नज्मों में तुम्हे पुकारता था

     

    लेकिन मोहब्बत की बातें अक्सर किताबी होती हैं
    जिनके अक्षर
    वक़्त की आग में जल जाते हैं
    किस्मत के दरिया में बह जाते हैं

     

    तुम्हारे हाथों की मेहंदी से मेरा नाम मिट गया
    वह तुम्हारी मोहब्बत है
    लेकिन
    मैं अपनी नज्मों से तुम्हें जाने न दूंगा

     

    ये मेरी मोहब्बत है ।

  • क्यों वो शख्स …?

    क्यों वो शख्स …?

    हाथ से मेरे कुछ लकीरें फिसल गई,

    पलक झपकी ना थी कि…

    पानी की कुछ बुँदे निकल  गई,

    एक झपकी मे ही सबकुछ बदल गया,

    लाश तो एक गिरी थी …

    पर इंसान हर एक बदल गया,

    कुछ पलों मे ख्वाबो को छोड़ दिल जम गया,

    मन मे है बस एक ही सवाल –

    “क्यों वो शख्स बिछड़ गया “?

    क्यों वो शख्स बिछड़ गया “?

    -सचिन चौधरी (सनसनवाल)

  • आतंकबादी

    आतंकबादी

    मैं क्यों सोचु वो मेरे बारे में क्या सोचेगी,
    मुझे अच्छा लगता हैं उसे रोज सुबह सुबह गुड मोर्निंग विश करना,,
    जानता हूँ कोई रिप्लाई नहीं आएगा फिर भी उसके मैसेज का इन्तजार करना ,,,
    अरे अच्छा लगने से याद आया कि वो जब अपने दांतों के बीच में पेंसिल को दबा कर कुछ सोचती हैं,,
    हाए
    क़त्ल-ए-आम हो जाता हैं,
    कई बार तो मुझको लगता हैं की सरकार को उस बैन लगा देना चाहिए,,
    यार इतना बड़ा कातिल आजाद कैसे घूम सकता हैं,,
    यानी कातिल तो AK- 47 ले कर घूमते हैं सडको पर,,
    बड़े बड़े हथियार ले कर लोगो को कैद में रख कर परेशान करते हैं
    और वो ना ही किसी की ओर देखता हैं,,
    और ना ही किसी को भाव देता हैं,,
    मगर लोग बाग़ हैं कि पागल हुए पड़े हैं उसकी कैद में जाने खातिर,,
    पहली बार देखा हैं ऐसा आतंकबादी

  • तुम्हारा अक्स

    तुम्हारा अक्स

    तुम्हारे अक्स से दुनिया है रोशन ,

    सुना है चाँद की तू चांदनी है .

    सलीका प्रेम में अब क्या करेगा ,

    नज़र को अब के माफ़ी मिल चुकी है .

    ज़रा अब दर्द से नहला दो मुझको,

    वफ़ा की धूल काफी चढ़ चुकी है .

    समंदर अब के पानी मांगता है , 

    सुना है प्यास उसकी बढ़ चुकी है .

    कहीं पर मीर ने देखा है तुझको ,

    चमक चेहरे के उसकी बढ़ चुकी है.

    …atr

  • ठिठुरता बचपन (October 17: Anti Poverty Day)

    ठिठुरता बचपन (October 17: Anti Poverty Day)

    October 17: Anti Poverty Day

    सर्दी में नंगे पांव

    कूड़ा बटोरते बच्चे

    ठिठुरता बचपन उनका

    सिकुडी हुई नन्ही काया

    टाट के थैले की तरह

     

    उनके रूदन का

    क्या जिक्र करू मैं

    लफ़्जों के कुछ दायरे होते है

    नहीं फैल सकते वह

    उनके रूदन की तरह

  • सिमट गया चंद लफ़्जों में आज

    सिमट गया चंद लफ़्जों में आज

    सिमट गया चंद लफ़्जों में आज
    ढल गये अहसास कुछ अश्कों मे आज
    कहने को तमाम जिंदगी का तजूर्बा है मेरे पास
    सुनने वाला कोई भी नही है आज |

  • मेरे साकी

    मेरे साकी

    तुम्हारी चाह ही मंज़िल हमारी ए मेरे साकी,
    ज़रा अब तो पिला दे न , तमन्ना अब भी है बाक़ी.
    मेरे साकी तेरे आँखों की मदिरा क्या बताऊँ मैं,
    फ़क़त आँखों से चढ़ती है ,मगर दिल तक उतरती है ,
    उतरना फिर भी वाज़िब था मगर अब ये लगा है कि,
    उतरकर भी ये चढ़ती है , और चढ़ के फिर उतरती है .

     

    …atrGlasses-of-wine-002

  • पलकों पर आंसू रहते है

    पलकों पर आंसू रहते है

    पलकों पर आंसू रहते है
    दिल में जज्बात रहते है
    कलम है जो कुछ कुछ लिख देती है
    वरना होठ तो हमेशा खामोश रहते है

    आंखो मे आसमां रहते है
    पांव बादलों पर रहते है
    लेकिन चंद लम्हों के लिये भी उड नहीं पाते
    किसी की यादों मे हम कैद रहते है

  • क्या करें नादान है

    क्या करें नादान है

    ऐसा नहीं कि कोई नहीं जहान में हमारा यहां
    दोस्त है कई मगर, क्या करें नादान है

  • Alfaazo ki koi naav

    Alfaazo ki koi naav

    Kabhi kuch kahna chaahte the

    Kabhi rona bhi chaahte the

    Alfaazo ki koi naav milti hi nahi

    Jazbaato ke samandar me bahe jaate he

     

  • नुक्कड़ पर

    नुक्कड़ पर

    आज गलियां कुछ सूनी सी है ,

    पथिक कम जाते हैं.

    गलियों के नुक्कड़ पर

    बैठा मैं कुछ सोचता हूँ .

    पर क्या क्या जीवन भी पथिक है ,

    कभी रुकता कभी चलता है

    लेकिन आज उदासी क्यों है ,

    लोग डरे सहमे से हैं ,

    कारन जान नहीं पाता हूँ ,

    कुछ लोगो के नजदीक जाता हूँ,

    जो चर्चा कर रहें है किसी बारे  में ,

    पूछता हुँ चलकर क्या है  ,

    जाता हूँ तो चुप हो जाते है सब …

    …atr

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  • Ishq

    !!!! SAGAR KE DIL SE !!!!!
    ~~~~~~ INSTANT ~~~~~~~

    kar liya didaar jab tumhari aankhon main
    maine apne ishq ka

    tau phir izzhaar-e-mohbbat ki jaroorat kya

    @@ SAGAR @@
    9/10/15 :: 10:50 pm … (611) .. ©

  • आज की शाम

    आज की शाम

    आज की शाम शमा से बाते कर लूं
    उससे चेहरे को अपनी आखों में भर लूं

    फासले है क्यों उसके मेरे दरम्या
    चलकर कुछ कदम कम ये फासले कर लूं

    प्यार करना उनसे मेरी भूल थी अगर
    तो ये भूल एक बार फिर से कर लूं

    उसके संग चला था जिंदगी की राहों में
    बिना उसके जिंदगी कैसे बसर कर लूं

    परवाने को जलते देखा तो ख्याल आया
    आज की शाम शमा से बाते कर लूं

    sign

  • Ye Aankhen

    !!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!

    Aankho ki jubaan nahi hoti
    par bahut kuch keh jaati jaati hai

    Dil main chhupa lo payar jitna
    par phir bhi bayaan kar jaati hai

    Khushi main khushi ke saath
    Gam main har Gam ke saath
    har rishte ka ahsaas kara jaati hai

    Lakhon raste sahi dil main pahuchne ke
    par ye dil ka rasta aasaan bana jaati hai

    @@ SAGAR @@
    8/10/15 :: 7:27 PM…. (097) ….. ©

  • baatain

    !!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!

    kuch haseen raat thi
    kuch haseen teri yaadain

    kuch haseen chand tha
    kuch haseen teri baatain

    yaadon aur baaton ke khayal main
    kab chand aankho se auzal ho gaya

    suraz ki khubsoorat laali main
    na jaane kab din ka aagman ho gaya

    phir raat ka intzaar rahega
    phir tere khawabo ka intzaar rahega

    phir se dhoob jaunga teri yaadon main
    phir se teri bahon main aane ka intzaar rahega

    phir se wohi yaadon aur baaton ka saath rahega

    @@ SAGAR @@
    7/10/15 :: 7:37 PM … (610) … ©

  • एक अनकहे किस्से सा हूँ

    एक अनकहे किस्से सा हूँ

    एक सवाल सा अक्स’

    हौले से कुछ बदला है

    एक क़तरा अभी छलका है

    बड़ी मुद्दत से पलकों पर था

    वो आँसू जो ढलका है

    एक अनकहे किस्से सा हूँ

    अचानक उठी हिचकी सा हूँ

    आईना मेरे घर का हैरत में है

    मैं बदलते एक चेहरे सा हूँ

    कुछ कहो या छोड़ो रहने ही दो

    इस रात को ये दर्द सहने भी दो

    अब आए हो तो कुछ लफ्ज़ चुनो

    जो मन में है उसे ज़ाहिर होने भी दो

    बेफ़िक्र है एक सवाल भी है

    मेरा अक्स है थोड़ा बदहाल भी है

    ज़िंदगी तो ख़ैर कट ही रही है

    पर तेरे न होने का मलाल भी है

    मेरी रूह में रवानी तो है

    वक़्त गुज़रता नहीं फिर भी फ़ानी तो है

    पन्ना दर पन्ना बेमानी सही

    फिर भी मेरी एक कहानी तो है

    मचलता हूँ सिसकता हूँ

    अपने ही पहलु में ख़ुद रोता हूँ

    कुछ-एक रोज़ का फ़साना बाक़ी है वरना

    मैं हर लम्हा थोड़ा-थोड़ा मरता हूँ

     

    (source:unknown)

  • Ishq

    !!!!!!! INSTANT THOUGHT !!!!!!

    saari zindagi iss naa-muraad ishq se
    hum bachte rahe

    ab zindagi ke iss mor par jab hua ishq

    tau sochne par majboor ho gaye hum
    ki kyoun iss se bachte rahe

    @@ SAGAR @@

  • छुपा है चाँद बदली में…

    छुपा है चाँद बदली में…

    छुपा है चाँद बदली में ,अमावस आ गयी है क्या?
    नहीं देखा कभी जिसको वही शर्मा गयी है क्या?
    मिलन की रात में ये घुप्प अँधेरा क्यों सताता है ?
    वो मेरा और उसका छुप छुपाना याद आता है..
    अभी तो थी फ़िज़ा महकी , क़यामत आ गयी है क्या?

    कभी वो थी कभी मैं था, कभी चंचल चमकती रात,
     न वो कहती ,न मैं कहता मगर आँखे थी करती बात..
    जिन आँखों में हया भी थी,कज़ा अब आ गयी है क्या?

    वो नदियों के किनारो पर जहाँ जाता था मिलने को,
    वो नदियां है क्यों प्यासी सी, बुलाती है बुलाने को,
    उन्ही नदियों की रहो में रुकावट आ गयी है क्या?

    नहीं देखा कभी जिसको वही शर्मा गयी है क्या?
        …atr

  • ZINDA

    !!!!! SAGAR KE DIL SE !!!!!!

    kuch apne hi ahsaas kara dete hai mujhe
    ki zinda hun main abhi

    ye wohi apne thay jo ahsaas karte thay mujhe
    ki main zinda tha hi nahi kabhi

    @@ SAGAR @@
    5/10/15 :: 11:00 pm … (610) .. ©

  • जब सोचा इक दफ़ा जिन्द्गी के बारे मे

    जब सोचा इक दफ़ा जिन्द्गी के बारे मे

    जब सोचा इक दफ़ा जिन्द्गी के बारे मे

    किस कदर बसर हुई जिंदगी मेरी

    क्यों भटकता रहा जिंदगीभर मुसाफ़िर बनकर

    ज्वालामुखी सा जलता रहा

    कभी लावे सा पिघलता रहा

     आसमां को छुने की आरजू में

    पतगं सा हर बार कटता रहा

    हाथों की लकीरों से लडता था कभी में

    अब उन लकीरों मे ही ढ़लता रहा

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