हर एक मोड़ पर नया सवाल खड़ा है, इस छोटी सी ज़िन्दगी में बबाल बड़ा है।। राही अंजाना
हर एक मोड़ पर नया सवाल खड़ा है, इस छोटी सी ज़िन्दगी में बबाल बड़ा है।। राही अंजाना
हर रोज़ मन की गहराइयों में सिमट जाता है कोई, आकर अपनी ही परछाइयों से लिपट जाता है कोई।। राही अंजाना
हमें तो पता ही न था, ये नशा क्या शय है। हिज्र-ए-महबूब के बाद, बस मय ही मय है। दुनिया हमारी शराफ़त की मिसाल देती थी, शरीफ़ों मे ही नहीं, रिंदों के बीच भी गये […]
मेरी मासूम मोहब्बत को प्यार का तोहफा दे गए बदले मे बेचेनियाँ बेकरारियाँ दी और जन भी साथ ले गए
याद तुम्हे मै अब नहीं ऑंखें इंतजार की करती है भूल अब तो अश्कों पर भी मेरा बस नहीं आँसू गिरकर बन गए सूखी मिटटी मे धूल.
तेरी कातिल निगाहें देखकर, मैं गज़ल पढ़ दूँ। तेरी खुबसूरती पर क़सीदे, मैं हर पल गढ़ दूँ। तेरी खुबसूरती अल्फ़ाज़ों की मोहताज़ नहीं, गर तू कहे तो, तारीफों के चार चाँद जड़ दूँ। देवेश साखरे […]
वक्त से मैं बेवक्त उलझता रहा। वक्त से बड़ा कद समझता रहा। वक्त ने इस कदर उलझाया मुझे, वक्त ना वक्त पर सुलझता रहा। देवेश साखरे ‘देव’
के तेरे दर पे मैं खुल कर के सब अर्ज़ करता हूँ, के तुझको पाने की खातिर मैं खुद को यूँही खर्च करता हूँ।। राही अंजाना
पृथ्वी के कण कण में हमको जिसकी रचना दिखती है, उसको पाने में क्यों हमको फिर हरदम अड़चन दिखती है।। राही अंजाना
Teri aankhe jaise koi samndar lagta hai Mai rah jau yesa ghar lagta hai
खोया हूँ मगर ज़रूरी नहीं के तलाशा जाऊँ मैं, हुनर के पैमाने पर बारीकी से तराशा जाऊँ मैं।। राही अंजाना
है कौन जो तुम्हारी यहां फिकर कर रहा है, हर लम्हा जो एक तुम्हारा जिकर कर रहा है, हर एक कश के साथ जो जला रही है जिगर, वो सिगरट तुम्हारे सफर को बेअसर कर […]
मिल जाए जो गर कहीं तो सही रास्ता ढूंढिए, इस दुनियां में किसी से तो कोई वास्ता ढूंढिए।। राही अंजाना
वो मुझसे छीन कर मेरा परिंदा ले गई, मैं मर गया जब वो मुझे ज़िंदा ले गई, Rahi Anjana
कमरा तो कोई दिखता नहीं इस दिल में मगर, हम फिर भी मेहमाँ कई इसमें बिठाये फिरते हैं, क्यों देखने पर भी कुछ नज़र नहीं आता हमको, आढ़ धर्म की लेकर हम खुदको छिपाये फिरते […]
दिन और रात के मायने बदल देता है, इश्क में इंसा सारे आईने बदल देता है।। राही अंजाना
एक दीप जवानों के नाम, जो सरहद पर खड़े हैं। एक दीप शहीदों के नाम, जो हमारे लिए लड़े हैं। इनके हिस्से कोई पर्व, खुशियाँ या परिवार कहाँ, देश की सुरक्षा इनके लिए सब खुशियों […]
फिर से आ जाओ मेरे पास मेरी हर धड़कन तेरी राह तकती है सुन्न पड़ गया है दिमाग़ बस इसमें सोच तेरी ही बसती है कानो मे जाने के बाद तेरे हंसी तेरी ही गूंजती […]
बुझती, बंद होती यादों की मोमबत्तियां, दे जाती है याद आज भी मधुरिमा। कुछ शब्द कोंधते हैं आवाज़ बनके कहकहे हवाओंमें गूंजते हैं साज बनके। निमिषा सिंघल
दीपों की माला को देखो कैसे सज्जित होती हैं। चारों तरफ उजाला कारके बस यही प्रज्वलित होती हैं । खोकर राग द्वेष को ये चारों तरफ सुगंधित होती हैं। दीपो की माला को देखो कैसे […]
जख्म हरा रहता हरदम नहीं। वक़्त से बड़ा कोई मरहम नहीं। जिस्मानी घाव तो भर जाते हैं, मिटता दिल पर लगा जख्म नहीं। देवेश साखरे ‘देव’
दोस्ती ऐसा, जैसे खुदा की परस्तिश। दोस्ती में है, बेइंतिहा प्यार की कशिश। दोस्तों की दोस्ती पे है कुर्बान ये जान, हमें अज़ीज़ हैं, अपने सभी मोनिस। देवेश साखरे ‘देव’ परस्तिश- पूजा, मोनिस- दोस्त
हर पल आँखों में रहती तेरी तस्वीर है। माने या ना माने, तू ही मेरी तकदीर है। गर बन जाओ तुम, मेरी सदा के लिये, ये सुहाने पल हो सकती मेरी जागीर है। देवेश साखरे […]
गिर गया तो क्या हुआ पाना मुकाम अभी बाकी है जान भर ली है पैरों मे मैंने आसमां तक ऊँची छलांग अभी बाकी है.
Baithe hai khali tera naam lete hai Baithe hai khali tera naam lete hai Yahi to pyar hai mera Yahi to pyar hai mera Tara intzaar karte hai Tara intzaar karte hai
रौशनी में अक्स दिखा, लगा तुम आए। हर एक आहट पर ऐसा लगा तुम आए। इंतज़ारे-बेक़रारी बढ़ती गई, साँसे घटती गई, हर एक सदा पर ऐसा लगा तुम आए। देवेश साखरे ‘देव’
गुलाब सी हो जिंदगी तुम्हारी, जो काँटों के बीच भी हँसीन हो। हर कदम हो तुम्हारा फ़तह का, हर पल जिंदगी बेहतरीन हो। देवेश साखरे ‘देव’
उसका मेरे दिल में आना आसां लगता है, उसका मेरे दिल से जाना झांसा लगता है, ………… राही अंजाना
बेक़रारी का आलम है, दीवाने की मानिंद। ना सहरे-सकूँ मिलता, ना आती शबे-नींद। तेरी आँखों से पिया करते थे जामे-शराब, तेरी जुदाई में अब कहीं, हो ना जाऊँ रिंद। देवेश साखरे ‘देव’ रिंद- शराबी
मेंहमाँ हैं तेरे दर पे इस कदर सारी अर्ज़ियाँ मेरी इक तेरी इज़ाज़त पे कबूल होती हैं मर्ज़ियाँ मेरी।। राही अंजाना
मेरे कातिल गर वापस आए तो आंखों में शिकायतें पढ़ लेना होठों का फड़कना देख लेना धड़कनों की आवाजाही सुन लेना मेरी रूह की तड़पन महसूस तो करना यदि तुम्हें इश्क है मुझसे निमिषा सिंघल
लोग बन कर फिरते है बेहरुपीये ताकि तुमको छल सकें कुछ रास्ते बिन काँटों के भी छोड़ दो जिनपर अनजान राही चल सकें
मतभेदों की महफ़िल में मनभेदों का खुलासा हो गया, अच्छाखासा मुस्कुराता हुआ मेरा दिल रुहासा हो गया।। राही अंजाना
चाहा सिर्फ तुझको मैंने साथ मेरे अब तेरी परछाई भी नहीं जी लिया प्यार का हर लम्हा चले जाने से तेरे अब कोई रुसवाई नहीं वो जा चुकी है जिंदगी से भूलूंगा ये सचाई नहीं […]
दौर चल रहा है धकेल कर जितने का कुचलने वाली इस भीड़ मे शामिल मत होना आगे बढ़ने के लिए दौड़ जरूर लगाना पर किसिकी होड़ मे शामिल मत होना …… राम …….
ठोकर खाकर जमानो मे बुलंद हुए आसमानों मे जो फिरते आग लिए अपने सीनो मे वो रोशनी ढूंढ़ते नहीं बुझे हुए चिरागो मे
बैठे-बैठे मुस्कुरा रहे हो हमसे तुम कुछ छुपा रहे हैं आंखें हैं आईना धड़कनों का उनमें हाल-ए-दिल पढ़ा रहे हो। निमिषा सिंघल
मुझको यूँ कुचलने पर तुम्हें वो समन्दर नहीं मिलेगा, तुम्हारी आँखों को जो चाहोगे वो मंज़र नहीं मिलेगा, बड़ी बेरहमी से मुझे रास्तों पर छोड़कर जाने वालों, तुम्हें ढूंढने से भी इस जहां में कोई […]
बाहत देर कर दी मैने आने में जरा भी वक्त न लगाया तुमने जाने में खुशनसीबी है कि वो आये तो सही प्यार जताया तो सही अनजाने में
सागर किनारे रेत पर फेरी उँगलियाँ, देखा जो गौर से बन गई तस्वीर तेरी। ख्वाब से हकीकत में ले आई मुझे, एक लहर बहा ले गई तक़दीर मेरी।
प्रेयसी — तुम्हे मै प्यार करू या ना करू, ये है मेरी मर्ज़ी | तुम्हे मुझसे प्यार है तो, सिर्फ लगा सकते हो अर्जी | प्रेमी — सच्चा प्यार करता हूँ तुमसे, नहीं आशिक हूँ […]
तुम्हे हमसे प्यार नहीं, झूठ बोलकर ये दग़ा ना दो | गलतियां सबसे होती है, अलग होने की ये सज़ा ना दो |
दूर कर दोगे हमको खुद से, हमसे दूर खुद हो जाओगे | खुद का चेहरा देखोगे आईने मे, तो हमारा ही अक्स पाओगे |
कांटो से लगे ज़ख्म तो सब भरते चले गए थे ‘ऐ-नीरज’ हैरत तो तब हुई जब इक फूल का स्पर्श नासूर बन गया !!
Kaanto Se Lage Jakhm Toh sab Bharte Chale Gaye The ‘ai-neeraj’ Hairat Toh Tab Huyi Jab Ik Phool Ka Sparsh Nasoor Ban Gaya !!
खुद की सुनेगा तो पहचान मिलेगी असली दुसरो की सुनेगा तो इंसान बनेगा तू नकली
कवि तो होते है बदनाम आश्कि की रहो मे भटकते फिरते है| दोष लगता है उनपर कलम से छेड छाड़ का वो तो बस अपना हाल -ए -दिल बयां करते है |
धन का सागर मैंने पाया तब मै अंधकार मे खो गया | जब खुद को खो दिया तब मै ईश्वरमय हो गया |
धन का सागर मैंने पाया तब मै अंधकार मे खो गया | जब खुद को खो दिया तब मै ईश्वरमय हो गया |
खोया समय फिर कब आता है | अन्याय पर ज्ञानी का मौन विनाश लाता है |
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