Category: शेर-ओ-शायरी

  • याद

    सूरज की किरणे भी सुबह-सुबह कयामत ढ़ा रही है,

    पूछ रही है,कैसे है वो?जिनकी तुम्हे याद आ रही है।

  • अफसोस

    मुझमे ही रह गई
    खामियां
    या शायद मेरे
    प्यार में
    जो तेरी दहलीजें
    ना पार कर पाये
    किस बात पर
    रोयें करे
    अफसोस
    अब कैसा
    हम
    कल भी
    कल भी
    अकेले
    थे
    हम अब भी
    अकेले हैं

  • दिल के करीब

    समझते थे जिन्हें हम अपने दिल के करीब।
    मेरे खिलाफ शाजिसो में वो निकले शरीक।
    हमें कोई शिकवा न होता, गर वो गैर होता,
    पर वो तो थे, हमारे सबसे अज़ीज़ रफ़ीक।

    देवेश साखरे ‘देव’

    रफ़ीक-साथी

  • कोरा था कागज

    _”कोरा कागज़ था और कुछ बिखरे हुए लफ़्ज़,_

    _ज़िक्र तेरा आया तो सारा कागज़ गुलाबी हो गया !!”_

  • दास्ता

    दांस्ता सुनाऊं और मज़ाक बन जाऊं,

    बेहतर है मुस्कुराऊं और खामोश रह जाऊं….!!

  • आने दो यारो

    छिपे हुये दर्द को आज ताज़ा किया है उसने,
    दिल को बहुत बेकरार फिर से किया है उसने।

    याद उसकी आती है हर पल तो आने दो यारो…
    कसम देकर अपनी मजबूर भी तो किया है उसने।।

  • मंजर

    जरूरत पड़ने पर आज मुकर गये हो तुम,
    जमाने की तरह कितना बदल गये हो तुम।

    दोस्त!ये मंजर भी गुजर जायेंगे किसी तरह से,
    पर आज चुप रहकर बहुत दर्द दे गये हो तुम।।

  • अक्स मेरा

    दोस्तो!वो आईना देखकर अपनी नजरे चुराता होगा।

    अक्स मेरा जब उन्हे आँखों मे नजर आता होगा।।

  • औकात

    रहम ओ करम तो खुदा के हाथ है,
    अब तुही बता मेरी क्या औकात है।।
    राही अंजाना

  • अध्याय

    अभी तो बस अभ्यास चल रहा है,
    तेरी मोहब्बत का अध्याय चल रहा है।।

    राही अंजाना

  • सुल्झालूं

    तुझसे बिगड़ी हर बात सुलझा लूँ,
    आ मिल तेरे बालों में हाथ उलझा लूँ।।
    राही अंजाना

  • दिल का हाल

    वों पढ़ लेते हैं
    आंखों ही आंखों में
    मेरे दिल का हाल
    ना बता चाहूं उनको
    मुझ पर क्या बीता इस साल
    क्यों ना उनसे कुछ दूरी बढ़ा ली जाए
    ना पढ़ सके वों मेरे मन को
    क्यों ना उन से आंखें चुरा ली जाए.

  • कहाँ हैं वो

    कहां हैं वो किधर
    ढूँढू नही मालूम
    मुझको
    चले आओ उन्हें
    आवाज़ देती जा रही
    हूं मैं ।
    ए खुदा! राह में
    उन्हें दो पल
    के लिए रोक ले
    बनकर हवा
    पहलू में
    उनके
    आ रही हूँ मैं ।

  • दो इन्सान

    दो इन्सान एक हो
    जाते हैं ।
    हर रिश्ते से
    खास हो
    जाते हैं ।
    नज़रों से दूर
    होते हैं पर
    दिल के करीब
    हो जाते हैं ।
    प्रज्ञा शुक्ला

  • अपनो से नाराज़

    सुबह के सपनें
    सच होते हैं
    क्या
    यूं छोटी छोटी बातों पर
    नाराज़ नहीं
    होते
    अपने से खफ़ा होते हैं क्या?
    प्रज्ञा शुक्ला

  • तुम ना होतो

    तुम ना होतो जीने
    की आस किसे है
    तुम होतो
    धूप की चादर
    भी ओढ़ लेंगे
    हम।मलमल के
    बिस्तर की
    आस किसे है।

  • चाहत

    उनकी चाहत में
    जीती जा रही हूँ
    मैं
    यादों को उनकी दिल में
    सींती जा रही हूँ
    मैं
    प्रज्ञा शुक्ला

  • आसरा

    आस होगी न आसरा होगा,
    तेरे बिना मेरा क्या होगा।।
    राही अंजाना

  • निराली

    तेरी बातें बखूबी बड़ी निराली रहीं,
    सुनकर उनको रातें मेरी खाली रहीं।।
    राही अंजाना

  • गुज़र रही है

    गुज़र रही है
    गुज़र जायेगी
    ये रात भी
    तेरी यादों
    में सिमट जायेगी।

  • एक दोस्त

    ज़िन्दगी बेरंग है
    कुछ रंग होने चाहिये
    है सफ़र लम्बा बहुत
    एक दोस्त होना चाहिए ।

  • सब रूठे

    सब रूठे बैठे हैं हमसे
    जाने क्यूँ ,
    हमने जबसे तुम्हें
    अपना कह दिया।

  • जीत गये

    हम पीछे रह गये
    तुम आगे ही सही
    तुमसे हार कर
    भी हम जीत गए
    हैं देखो।

  • तुम हो

    तुम्हारी तस्वीर को सीने से
    लगा रखा है।
    यूं महसूस होता है
    की तुम हो।

  • कुछ खुशियाँ होती

    कितना अच्छा होता
    तुम होते और हम होते।
    कुछ खुशियाँ होतीं
    कुछ गम होते।

  • जी लो तुम

    हमने किया था एक
    वादा तुमसे
    याद है या भूल
    गये?
    कहा था एक दिन
    छोड़ जायेगें तुम्हें लो
    छोड़ दिया जी लो तुम।

  • लो खत्म हो गया

    लो खत्म हो
    गया मुलाकातों
    का सिलसिला,
    जो घर आता था
    घर भूल गया।

  • हार भी स्वीकार

    हम जो
    चाहें वो कर सकते हैं ।
    बस हौंसला बनाकर रखना
    चाहिए ।
    जरूरी नही
    जीत ही हांसिल हो,
    हार भी स्वीकार
    करनी चाहिए ।

  • सुनते रहते हो

    छुप कर मेरी बातें
    सुनते रहते हो।
    मेरे सपनो की
    रातें चुनते
    रहते हो ।
    मिलने की
    फुर्सत जब तुमको
    होती है।
    तो मेरी ही
    राहें चुनते चुनते
    रहते हो।

  • ज़िन्दगी

    आगे बढ़ने का
    नाम है ज़िन्दगी
    सफलता ठोकर खाकर
    ही मिलती है।
    हँसते रहने का
    नाम है
    ज़िन्दगी ।

  • हुनर से

    बात करने से बात
    बनती है ।
    मुलाकात
    करने से
    बात बनती है।
    कुछ भी तो नही
    है हमारे पास
    हमारे हुनर से ही
    हर बात बनती है।

  • कुछ बातें हैं

    कुछ सपनॉ की
    बातें है।
    कुछ अपनों
    की बातें हैं।
    अधूरी कुछ
    बातें थीं ।
    अधूरी कुछ
    बातें हैं ।

  • कुछ बातें हैं

    कुछ सपनॉ की
    बातें है।
    कुछ अपनों
    की बातें हैं।
    अधूरी कुछ
    बातें थीं ।
    अधूरी कुछ
    बातें हैं

  • काफ़िला

    धीरे-धीरे बढ़ रहा
    है काफ़िला।
    धीरे-धीरे कम
    हो रहे हैं फासले
    मंज़िल है बस
    कुछ ही दूर।
    तू अपनी हिम्म्मत
    भांप रे।

  • काफ़िला

    धीरे-धीरे बढ़ रहा
    है काफ़िला।
    धीरे-धीरे कम
    हो रहे हैं फासले
    मंज़िल है बस
    कुछ ही दूर।
    तू अपनी हिम्म्मत
    भांप रे।

  • है नही आसान

    मंज़िल है नही
    आसान
    बहुत
    मशरूफ हैं
    राहें ।
    जीत जायेगें
    हम दुनिया
    दो कदम
    रोज़ चलकर के।

  • सपनें

    सुबह के मीठे सपनों
    जैसा है तुम्हारा
    एहसास ।
    रहते हो यूं
    दिल में
    जैसे हो साँस ।

  • अच्छा है

    ना मिलने का
    रोज़ बहाना
    अच्छा है।
    यादों से हमको
    तड़पाना
    अच्छा है ।
    सोते-सोते आ जाते
    हो ख्वाबों में
    हमसे मिलकर
    आँख चुराना
    अच्छा है।

  • अच्छा है

    ना मिलने का
    रोज़ बहाना
    अच्छा है।
    यादों से हमको
    तड़पाना
    अच्छा है ।
    सोते-सोते आ जाते
    हो ख्वाबों में
    हमसे मिलकर
    आँख चुराना
    अच्छा है।

  • अच्छा है

    ना मिलने का
    रोज़ बहाना
    अच्छा है ।
    सोते सोते आ जाते
    हो ख्वाबों में ।
    हमसे मिलकर
    आँख चुराना
    अच्छा है।

  • अच्छा है

    ना मिलने का
    रोज़ बहाना
    अच्छा है ।
    सोते सोते आ जाते
    हो ख्वाबों में ।
    हमसे मिलकर
    आँख चुराना
    अच्छा है।

  • चुन लो

    चुन लो तुमको
    जो चुनना है।
    मुझे हर फ़ैसला
    मंज़ूर है।
    तुम्हारी दोस्ती भी
    तुम्हारी बेवफाई भी।

  • चुन लो

    चुन लो तुमको
    जो चुनना है।
    मुझे हर फ़ैसला
    मंज़ूर है।
    तुम्हारी दोस्ती भी
    तुम्हारी बेवफाई भी।

  • चुन लो

    चुन लो तुमको जो
    चुनना है।
    मुझे हर फैसला मंज़ूर है।
    तुम्हारी दोस्ती भी
    तुम्हारी बेफफ़ाई भी।

  • खामोशी

    तुम्हारी खामोशी भी
    क्या चीज़ है
    ना जाने क्या कह
    जाती है।
    जो कहना
    चाहतें हो
    नही कहती
    हजारों फसाने सुनाती है।

  • खामोशी

    तुम्हारी खामोशी भी
    क्या चीज़ है
    ना जाने क्या कह
    जाती है।
    जो कहना
    चाहतें हो
    नही कहती
    हजारों फसाने सुनाती है।

  • अच्छा है

    मंज़िल अब दूर नहीं है
    सफ़र भी अच्छा है ।
    तुम हो तो सब
    कुछ अच्छा है।

  • अच्छा है

    मंज़िल अब दूर नहीं है
    सफ़र भी अच्छा है ।
    तुम हो तो सब
    कुछ अच्छा है।

  • अच्छा है

    मंज़िल अब दूर नहीं है
    सफ़र भी अच्छा है ।
    तुम हो तो सब
    कुछ अच्छा है

  • मज़ा है

    पाने का अपना मज़ा
    है।
    खोने का अपना
    मज़ा है।
    हँसते तो सब हैं
    पर रोने का
    अपना मज़ा है।

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