हमें तो पता ही न था, ये नशा क्या शय है। हिज्र-ए-महबूब के बाद, बस मय ही मय है। दुनिया हमारी शराफ़त की मिसाल देती थी, शरीफ़ों मे ही नहीं, रिंदों के बीच भी गये […]

याद तुम्हे मै अब नहीं ऑंखें इंतजार की करती है भूल अब तो अश्कों पर भी मेरा बस नहीं आँसू गिरकर बन गए सूखी मिटटी मे धूल.

तेरी कातिल निगाहें देखकर, मैं गज़ल पढ़ दूँ। तेरी खुबसूरती पर क़सीदे, मैं हर पल गढ़ दूँ। तेरी खुबसूरती अल्फ़ाज़ों की मोहताज़ नहीं, गर तू कहे तो, तारीफों के चार चाँद जड़ दूँ। देवेश साखरे […]

है कौन जो तुम्हारी यहां फिकर कर रहा है, हर लम्हा जो एक तुम्हारा जिकर कर रहा है, हर एक कश के साथ जो जला रही है जिगर, वो सिगरट तुम्हारे सफर को बेअसर कर […]

कमरा तो कोई दिखता नहीं इस दिल में मगर, हम फिर भी मेहमाँ कई इसमें बिठाये फिरते हैं, क्यों देखने पर भी कुछ नज़र नहीं आता हमको, आढ़ धर्म की लेकर हम खुदको छिपाये फिरते […]

एक दीप जवानों के नाम, जो सरहद पर खड़े हैं। एक दीप शहीदों के नाम, जो हमारे लिए लड़े हैं। इनके हिस्से कोई पर्व, खुशियाँ या परिवार कहाँ, देश की सुरक्षा इनके लिए सब खुशियों […]

फिर से आ जाओ मेरे पास मेरी हर धड़कन तेरी राह तकती है सुन्न पड़ गया है दिमाग़ बस इसमें सोच तेरी ही बसती है कानो मे जाने के बाद तेरे हंसी तेरी ही गूंजती […]

बुझती, बंद होती यादों की मोमबत्तियां, दे जाती है याद आज भी मधुरिमा। कुछ शब्द कोंधते हैं आवाज़ बनके कहकहे हवाओंमें गूंजते हैं साज बनके। निमिषा सिंघल

दीपों की माला को देखो कैसे सज्जित होती हैं। चारों तरफ उजाला कारके बस यही प्रज्वलित होती हैं । खोकर राग द्वेष को ये चारों तरफ सुगंधित होती हैं। दीपो की माला को देखो कैसे […]

दोस्ती ऐसा, जैसे खुदा की परस्तिश। दोस्ती में है, बेइंतिहा प्यार की कशिश। दोस्तों की दोस्ती पे है कुर्बान ये जान, हमें अज़ीज़ हैं, अपने सभी मोनिस। देवेश साखरे ‘देव’ परस्तिश- पूजा, मोनिस- दोस्त

हर पल आँखों में रहती तेरी तस्वीर है। माने या ना माने, तू ही मेरी तकदीर है। गर बन जाओ तुम, मेरी सदा के लिये, ये सुहाने पल हो सकती मेरी जागीर है। देवेश साखरे […]

रौशनी में अक्स दिखा, लगा तुम आए। हर एक आहट पर ऐसा लगा तुम आए। इंतज़ारे-बेक़रारी बढ़ती गई, साँसे घटती गई, हर एक सदा पर ऐसा लगा तुम आए। देवेश साखरे ‘देव’

बेक़रारी का आलम है, दीवाने की मानिंद। ना सहरे-सकूँ मिलता, ना आती शबे-नींद। तेरी आँखों से पिया करते थे जामे-शराब, तेरी जुदाई में अब कहीं, हो ना जाऊँ रिंद। देवेश साखरे ‘देव’ रिंद- शराबी

मेरे कातिल गर वापस आए तो आंखों में शिकायतें पढ़ लेना होठों का फड़कना देख लेना धड़कनों की आवाजाही सुन लेना मेरी रूह की तड़पन महसूस तो करना यदि तुम्हें इश्क है मुझसे निमिषा सिंघल

चाहा सिर्फ तुझको मैंने साथ मेरे अब तेरी परछाई भी नहीं जी लिया प्यार का हर लम्हा चले जाने से तेरे अब कोई रुसवाई नहीं वो जा चुकी है जिंदगी से भूलूंगा ये सचाई नहीं […]

मुझको यूँ कुचलने पर तुम्हें वो समन्दर नहीं मिलेगा, तुम्हारी आँखों को जो चाहोगे वो मंज़र नहीं मिलेगा, बड़ी बेरहमी से मुझे रास्तों पर छोड़कर जाने वालों, तुम्हें ढूंढने से भी इस जहां में कोई […]

प्रेयसी — तुम्हे मै प्यार करू या ना करू, ये है मेरी मर्ज़ी | तुम्हे मुझसे प्यार है तो, सिर्फ लगा सकते हो अर्जी | प्रेमी — सच्चा प्यार करता हूँ तुमसे, नहीं आशिक हूँ […]