मैं तुमको अपना मित्र बना लूँ क्या? मैं तुमको अपने दिल की हर बात बता दूँ क्या? कोई तो इशारा कर दो एक बार, मैं तुम्हें अपने दिल में बसा लूँ क्या? राही (अंजाना)
मैं तुमको अपना मित्र बना लूँ क्या? मैं तुमको अपने दिल की हर बात बता दूँ क्या? कोई तो इशारा कर दो एक बार, मैं तुम्हें अपने दिल में बसा लूँ क्या? राही (अंजाना)
न दिल मेरा रहा न धकड़न मेरी रही, तुमसे मिलने के बाद बस ये तड़पन मेरी रही।। राही (अंजाना)
एक ही मुल्क है जिसमे सारे ईमान बस्ते हैं, हिन्दू के संग ही देखिये कैसे मुसलमान बस्ते हैं।। राही (अंजाना)
रिहा हो गई बाइज्जत वो किसी कत्ल के इल्जाम से शौख निगाहों को अदालतों ने हथियार नहीं माना
जो कभी किया ही नहीं वो वादा याद आया, मुझको तेरी गली से निकला तो वो इरादा याद आया, न मन्दिर न मस्ज़िद थी राह में मेरे कोई, फिर सर झुका तो तेरा चेहरा याद […]
चाँद से चांदनी और तारों से उनके घर का पता पूछते हैं, चलो एक बार फिर से उनके इंकार की वजह पूछते हैं, दिल लगाया ही था तो मुकर क्यों गए, आओ उनसे मिलकर उनके […]
कदम दूसरों के लड़खड़ाकर खुद की अकड़ कायम रखती है, ये वो शराब की बोतल है जो अपना रुतबा कायम रखती है, भुला देती है खून के रिश्ते जितने हों गहरे सारे, पर ये बोतल […]
एक तेरा ही तो चेहरा है जिसको देख लूँ तो तो मेरा पूरा दिन बन जाता है।।
इश्क करके उससे मुझे मलाल ही हुआ, जब हाथ मलता रह गया मैं उसके ठुकराने के बाद।। राही (अंजाना)
खटखटाते रहिये दरवाजा एक दूसरे का मुलाकातें ना सही, आहटें आती रहनी चाहिये
धीमे धीमे ही सही पर होती जा रही है, बारिश आज सबको मेरा दर्द बता रही है।। राही (अंजाना)
तुम जहां भी रहोगी निहारा करूँगा, तुम्हे ख्वाबों में अपने पुकारा करूँगा, दिखेंगी नहीं जब मुझे आँखे तुम्हारी, तुम्हें आईने में अपने उतारा करूँगा।। राही (अंजाना)
आजाद भारत के आजाद परिंदे न रहे, हम अपने ही देश के बाशिंदे न रहे।। राही (अंजाना)
हर रोज़ मेरी इज़्ज़त को तार-तार किया जाता है, ये गुनाह मेरे साथ क्यों बार-बार किया जाता है।। राही (अंजाना)
मुझे मरे गुनाहों की कोई सफाई नहीं देनी, मुझे तुम्हारी मोहब्बत में उम्र कैद मंजूर है।। राही (अंजाना)
बहुत तरक्की कर ली मेरे गांव ने मगर, मेरी गरीबी का बादल छटा ही नहीं।। राही (अंजाना)
कोई माहौल कोई मौसम नहीं देखता, जब प्यार सच्चा हो तो कोई पर्दा नहीं देखता।। राही (अंजाना)
तेरी यादों के आँगन में मेरा मन खिल जाये, जैसे खुली हवा में कोई पंछी मण्डराये, तेरी समृति की छवियों का जब लगे मेला, मेरा शांत उम्मीदों का फिर मन भर जाए।। राही (अंजाना)
तसल्ली है के तुम मुझे याद नहीं करती, मेरी तस्वीर को रखकर उससे प्यार नहीं करती।। राही (अंजाना)
जब जी चाहे बुला लेता हूँ, मैं तेरी यादों को अपना बना लेता हूँ, पहुंचता नहीं जब कोई पैगाम मेरा तुझतक, मैं हवाओं को फिर अपना गुलाम बना लेता हूँ।। राही (अंजाना)
जब रात स्वप्न में मैं सोया था, एक गहरे समन्दर में खोया था, दूर दूर तक सच कुछ नहीं था, मैं एक झूठी दुनियाँ में रोया था, राही (अंजाना)
उसका मुख देखना जारी रहा, मेरा प्यार उस पर भारी रहा। राही (अंजाना)
गमों के आसमान का तू परिंदा क्यों है, झूठी उम्मीदों की ज़मी पर तू ज़िंदा क्यों है, सिकोडे हैं हौंसलों के तू क्यों पर अपनें, उम्मीदों पर न टिके तू वो वाशिंदा क्यों है।। राही […]
अपने ग़म और खुशियों के बीच दूरी रखता हूँ, मैं राही अंजाना मगर सबकी ख़बर रखता हूँ।। राही (अंजाना)
तैरने निकला था समन्दर ने मुझको सहसा डरा दिया, फिर लहरों ने ही कश्ती को मेरी साहिल दिला दिया।। राही (अंजाना)
आओ किताबों के पन्नों से बाहर निकल चलते हैं, काले अक्षरों से निकल रौशनी की ओर चलते हैं, बहुत पढ़ लिए विषय इन किताबों के, आओ हकीकत के दो पन्ने पलट कर देखते हैं।। राही […]
मेरी खुशियों और गमों का भी हिसाब रखते हैं, न जाने क्यों लोग मुझसे इतना प्यार करते हैं।। राही (अंजाना)
हक मेरे भगवान पर सारे बाशिंदों का है, किसी एक के घर का वो पहरेदार नहीं।। राही (अंजाना)
अब घर में बिजली का मेरे बिल नहीं आता, तेरे प्यार की रौशनी में हर कोना घूम लेता हूँ।। राही (अंजाना)
सारे आईने अपने घर से बाहर निकाल फैंके, तुम्हारी आँखों में ही जब चेहरा अपना देख लिया।। राही (अनजाना)
जब से तेरे प्यार के मौसम की चपेट में आया है, राही पर किसी मौसम का कोई असर नहीं होता।। राही (अंजाना)
अच्छा बनने के लिए अच्छे लिबास पहन लूँ, ये कौन सा पैमाना है मेरी पहचान का। राही (अंजाना)
लौट कर आते ही नहीं जाने वाले इस डर से, लोगों को रुखसत करना ही छोड़ दिया मैने।। राही (अंजाना)
ऐसा तपा के सुन्न किया है तेरी तड़प ने कि अब नहीं लगती मुझे गर्मी-सर्दी
ऊपर से टपक रही है छत नीचे सीलन आ गई दीवारों में दाम किसी काम के मिलते नहीं चाहे हम खुद भी बिक जाएँ बाज़ारों में।
वो मेरे घर में मेरे साथ नहीं रहती, वो मेरी होकर भी मेरे पास नहीं रहती, वो है मगर दूर मुझसे रहती है, वो दिल है तो धड़कन मेरी साथ नहीं रहती।। राही (अंजाना)
जख्म हो तो मरहम लगाना ही पड़ता है, दिल में कुछ तो छुपाना ही पड़ता है, बोल दो हर बात ज़ुबा से जरुरी तो नहीं, कभी खामोश भी तो हमें ही हो जाना पड़ता है।। […]
दिल लेकर भी जब मेरा चैन नहीं आया उन्हें, उन्होंने मेरे ख्वाबों को भी अपने नाम कर लिया।। राही (अंजाना)
मोहब्बत ऐ इम्तेहान की इंतहा तो तब हुई, जब दिन में भी उसके ख्वाबों से बाहर न आ सके हम।। राही (अंजाना)
मुझे कुछ भी कहने की ज़हमत नहीं होती, वो खुद ब खुद मेरी आँखों से छलक जाती है।। राही (अंजाना)
कितने सोलह सोमवार किए…. इस ‘सावन’ में तो “पिया” मिले !
खेल खेलने बैठा तो खिलाड़ी न मिला, एक बन्दर को उसका मदारी न मिला, ज़िन्दगी की बिसात में हम कुछ फंसे ऐसे, कि हमारी चालो को कोई जबाबी न मिला।। राही (अंजाना)
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