मैं तुमको अपना मित्र बना लूँ क्या? मैं तुमको अपने दिल की हर बात बता दूँ क्या? कोई तो इशारा कर दो एक बार, मैं तुम्हें अपने दिल में बसा लूँ क्या? राही (अंजाना)

जो कभी किया ही नहीं वो वादा याद आया, मुझको तेरी गली से निकला तो वो इरादा याद आया, न मन्दिर न मस्ज़िद थी राह में मेरे कोई, फिर सर झुका तो तेरा चेहरा याद […]

चाँद से चांदनी और तारों से उनके घर का पता पूछते हैं, चलो एक बार फिर से उनके इंकार की वजह पूछते हैं, दिल लगाया ही था तो मुकर क्यों गए, आओ उनसे मिलकर उनके […]

कदम दूसरों के लड़खड़ाकर खुद की अकड़ कायम रखती है, ये वो शराब की बोतल है जो अपना रुतबा कायम रखती है, भुला देती है खून के रिश्ते जितने हों गहरे सारे, पर ये बोतल […]

तुम जहां भी रहोगी निहारा करूँगा, तुम्हे ख्वाबों में अपने पुकारा करूँगा, दिखेंगी नहीं जब मुझे आँखे तुम्हारी, तुम्हें आईने में अपने उतारा करूँगा।। राही (अंजाना)

तेरी यादों के आँगन में मेरा मन खिल जाये, जैसे खुली हवा में कोई पंछी मण्डराये, तेरी समृति की छवियों का जब लगे मेला, मेरा शांत उम्मीदों का फिर मन भर जाए।। राही (अंजाना)

जब जी चाहे बुला लेता हूँ, मैं तेरी यादों को अपना बना लेता हूँ, पहुंचता नहीं जब कोई पैगाम मेरा तुझतक, मैं हवाओं को फिर अपना गुलाम बना लेता हूँ।। राही (अंजाना)

गमों के आसमान का तू परिंदा क्यों है, झूठी उम्मीदों की ज़मी पर तू ज़िंदा क्यों है, सिकोडे हैं हौंसलों के तू क्यों पर अपनें, उम्मीदों पर न टिके तू वो वाशिंदा क्यों है।। राही […]

आओ किताबों के पन्नों से बाहर निकल चलते हैं, काले अक्षरों से निकल रौशनी की ओर चलते हैं, बहुत पढ़ लिए विषय इन किताबों के, आओ हकीकत के दो पन्ने पलट कर देखते हैं।। राही […]

खेल खेलने बैठा तो खिलाड़ी न मिला, एक बन्दर को उसका मदारी न मिला, ज़िन्दगी की बिसात में हम कुछ फंसे ऐसे, कि हमारी चालो को कोई जबाबी न मिला।। राही (अंजाना)