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UE Vijay Sharma

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UE Vijay Sharma

@UEVijay • Joined Jun 2015 • Active 5 years ago

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by UE Vijay Sharma

कभी ना जताया

April 10, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

मैं बस ख़ुद से आगे कभी सोच ना पाया

तूने मेरा सब सोच के भी कभी ना जताया

                                     …… यूई

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by UE Vijay Sharma

ज़िंदगी ने जब जब

April 10, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

ज़िंदगी ने जब जब तपती राहों से निकाला मुझको

हर बार तेरी खुदायी का मंज़र नजर आया मुझको

                                                        …. यूई

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by UE Vijay Sharma

थोड़ा सा बस संभला हूँ

April 10, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

जन्मो जन्म राहें अपनी भटकाई मैंने

इसी लिए तो तेरी राह ख़ुद गंवाई मैंने

अब जाके कुछ थोड़ा सा बस संभला हूँ

सब सोचे छोड़ जब तेरे रंग में रंगला हूँ

                                    …. यूई

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by UE Vijay Sharma

वोह सातों जन्मो का सच

April 10, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

वोह सातों जन्मो का सच दिखता है तुझमें

वोही जन्मो का प्यार जो रच दिया है मुझमें

खोया रहा उन राहो में बस सिमट कर ख़ुदमें

चैन मिला मेरी रूह को अब लिपट कर तुझमें

                                                         …. यूई

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by UE Vijay Sharma

ता-जन्म जिस्म छू कर भी

April 10, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

बस मुसकरा कर तेरी आँखें लूटा देती हैं प्यार इतना

ता-जन्म जिस्म छू कर भी ना लूटा पाये कोई इतना 

                                                             …. यूई

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by UE Vijay Sharma

तेरा हाल-ए-दिल बता देती है

April 10, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

तुझको कुछ कहने की जरूरत ही क्या है

मादक आँखें तेरा हाल-ए-दिल बता देती है

                                          …. यूई

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by UE Vijay Sharma

अपने इश्क की तक़दीर ढूँढता हूँ

April 10, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

तेरी आँखों में अपने इश्क की तक़दीर ढूँढता हूँ
हुई जो ना अबतक मुकम्मल वोह तसवीर ढूँढता हूँ

…. यूई

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by UE Vijay Sharma

तेरी मुसकराती आँखों में

April 10, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

तेरी मुसकराती आँखों में सब कुछ दिखता है

इन मुस्कराहटों के पीछे भी कुछ दिखता है

दर्द जो छुपा बरसों से इनमें वोह दिखता हैं

इंतज़ार है इनको आज भी जिसका वोह दिखता है

                                                     …. यूई

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by UE Vijay Sharma

आँखें तेरी वोह सच्चाई

April 10, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

लोग तो करते हैं बातें सच्ची चाहतों की
आँखें तेरी वोह सच्चाई बयान करती हैं
…. यूई

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by UE Vijay Sharma

सच्चाई है तेरी बातों में

April 10, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

सच्चाई है तेरी बातों में

सच्चाई है तेरी सोचों में

इसी सच्चाई में बसा लो मुझको

कुछ तो ख़ुद सा बना लो मुझको

 

                      …. यूई

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by UE Vijay Sharma

उम्मीद के दिये जलाने छोड़ दिया

April 9, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

टूट लिए सपने जितने थे टूटने

अब ना फिर कभी भी यह टूटेंगे

अरमानो को हमने गहरे दफन किया

उम्मीद के दिये जलाने छोड़ दिया

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

विश्वास है हिल जाता

April 9, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

है मुश्किल तो ख़ुद का साथ निभा

यह दुनिया तेरा साथ क्या निभाएगी

मुश्किलो में इसका विश्वास है हिल जाता

खुदा पे भरोसा इसका इक पल में टूट जाता

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

माफ कर देता

April 9, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

माफ कर देता तेरी तुम्हारी बेवफाईओ को

पर मुझे तुम्हारी कोई भी ख़ता याद नही

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

ए लहरॊं की रागिनी

April 9, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

ए लहरॊं की रागिनी

राग का यह राज तो बता

सुर तेरे से मचलती है लहरे

या उनकी मस्ती से महकते सुर तेरे

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

नजर इश्क प्यार इक़रार तकरार

April 9, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

लगता सबको है यह पहली बार

कि है यह बस मेरे वाला प्यार

नही जानते हो तुम हो नादान

है सदियों पुरानी यह रिवायते

नजर इश्क प्यार इक़रार तकरार

यही होता आया है यहां बार बार

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

रंग अपनी मेहँदी मेरे रकीबों के नाम

April 9, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

रंग अपनी मेहँदी मेरे रकीबों के नाम

कौनसी तूने यह नई कहानी लिख दी

निभायी जिसने भी यहां रस्म-ए-वफ़ा

उसने अपनी बर्बादी-ए-जिंदगी लिख ली

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

मैंने रात की दिन से ज़ुदाई लिख दी

April 9, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

हो ज़िन्दगी की बेवफाईयों से खफा

मैंने रात की दिन से ज़ुदाई लिख दी

बचाने को तेरी रुसवाईया जमाने में

ख़ुद की बदनाम कहानी लिख दी

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

पलकें मेरी बंद हुई उनकी पलकों तले

April 9, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

ज़िन्दगी को कर के ज़ुदा ज़िन्दगी से

ज़िन्दगी को मिला दिया ज़िन्दगी में

कोई ऐसी मौत का शिकवा क्यों करे

पलकें मेरी बंद हुई उनकी पलकों तले

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

खूब बेरहम इश्क है यह दर्द का

April 9, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

खूब बेरहम इश्क है यह दर्द का

खुदा दुश्मनों को भी इससे बचाए

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

कही दर्द को ना हो जाए इश्क आपसे

April 9, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

आपको हुआ है इश्क दर्द से तो कोई बात नही

बचना कही दर्द को ना हो जाए इश्क आपसे

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

रोज़ जीना चाहके भी

April 8, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

रोज़ मार के भी ख़ुद को मर सके

रोज़ जीना चाहके भी जी ना सके

मरते हुए मरने का करते रहे इंतज़ार

जीते हुए करते रहे जीने का इंतज़ार

…… यूई

 

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by UE Vijay Sharma

मौत ने किया है कुछ इस तरह

April 8, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

मौत ने किया है कुछ इस तरह मेरा इंतज़ार

जैसे ज़िन्दगी ख़ुद करे जिंदा रहने का इंतज़ार

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

ख़ुद की छोड़ लग गई सबकी सुध

April 8, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

कहने को तो हुए हम घर से बेघर

इश्क तेरे ने किया ख़ुद से बेखुद

ज़िन्दगी कुछ यूँ गुज़री फिर बेसुध

ख़ुद की छोड़ लग गई सबकी सुध

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

सुनाया फ़ैसला

April 8, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

मेरे ही गुनाहों ने हो परेशान मुझसे
सुनाया फ़ैसला खुद्की मौत का मुझसे
…… यूई

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by UE Vijay Sharma

तुम्हे इश्क कहूँ या अब कहूँ खुदा

April 8, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

तुम्हे इश्क कहूँ या अब कहूँ खुदा

अब तो फर्क कोई ना पड़ता है

उसके रंगों में रंगा हर काम तेरा

तेरे रंगों में रंगा अब हर रंग मेरा

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

जिसने ख़ुद में खुदी दिखला खुद की

April 8, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

रंग रूह को इश्क के पक्के रंगों को

तूने वोह रंग प्यार का दिखलाया है

जिसने ख़ुद में खुदी दिखला खुद की

इन सब झूठे रंगों से पीछा छुड़ाया है

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

इज़हांर-ए-इश्क

April 8, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

नज़र-ए-हुस्न ने किया इज़हांर-ए-इश्क जबसे

अरमानो को जैसे मेरे लग गए हो पंख तबसे

 

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

बना इश्क उतारा रूह में

April 8, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

जाम से मिलते ही मचलती शराब जैसे

मयकदे में झूमते हो बेखुद मयकश जैसे

कुछ यूँ ही बेखबर सा हो गया हूँ जगसे

बना इश्क उतारा रूह में तूने अपनी जबसे  

                                          …… यूई

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by UE Vijay Sharma

क्या हुआ जो तेरी नजर नही हमपे

April 8, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

लौटा दो सदाए लाखों बार हमारी
ज़िन्दगी का सौदा करके आए हैं
क्या हुआ जो तेरी नजर नही हमपे
तेरे इश्क में लूटाने हम जान आयें हैं
…… यूई

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by UE Vijay Sharma

बीत चुके हैं बरसों जिनको

April 8, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

बीत चुके हैं बरसों जिनको

क्यों पल वोह याद दिलाते हो

किए गहरे दफन जो जग जग रातों

क्यों उनकी अब कब्रे खुदवाते हो

                            …… यूई

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by UE Vijay Sharma

ज़िन्दगी ना कर पाई फ़ैसला

April 7, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

ज़िन्दगी ना कर पाई फ़ैसला

मैँ शराब का नशा छोड़ दूँ

या तेरी जुस्तजू की उम्मीद

एक ने मुझे जीने ना दिया

दूसरे ने मुझे पीने ना दिया  

                    …… यूई

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by UE Vijay Sharma

बेशकीमती है यह गहने

April 7, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

बैठा हूँ बीच बाज़ार, लेकर अपनी यादों को

बेशकीमती है यह गहने, इनका कोई मोल नही

आए वोह ले जाएँ मुझसे, बेमौल मेरी जागीरें को

वोह जो हो तपा वर्षो, मेरे जैसे दर्दो की अगन में

वोह जो हो ख़ुद में घुटा, ख़ुद के ही अंधेरों में

                                            …… यूई

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by UE Vijay Sharma

जाने कितने दर्द समेटे होंगे उसने

April 7, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

जाने कितने दर्द समेटे होंगे उसने

जो यादों को अपनी बाज़ार ले गया

                                  …… यूई

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by UE Vijay Sharma

कैसे कोई मुझको कवी बुलाता

April 7, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

कोई मुझे यहां कवी बुलाता  

कोई बोले शब्दों का खिलाड़ी

कोई समझे बुनता मैँ लड़ियाँ

कोई समझे चुनता मैँ कलियां

ना मैँ कवी ना कोई खिलाड़ी

मैँ तो बस एहसास का पुजारी

उतार अंतर उसके भाव को पूरा

लपेटता सही शब्दों में उसको

छंदों की लड़ियों में जड़ उसको

सच के गहनो से सजाता उसको

कोई कहता मेरी कविता सुंदर

मन कहता मैँ हूँ आभारी तुम्हारा

तुमने इस कविता के कहीं अन्दर

छुपे उस भाव को मुझसा समझा

गर कोई भाव को समझ ना पाता

कैसे कोई मुझको कवी बुलाता

                               …… यूई

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by UE Vijay Sharma

सूर्य मैं सूर्य

April 7, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

हूँ लाखो वर्षो सी यूँ ही जल रहा मैं

हूँ ख़ुद में आग लगा कर जल रहा मैं

जला ख़ुद को कर रहा रोशन तुमको मैं

किसी को लगता निकला अभी यहां मैं

किसी को लगता छुपा अभी वहां पे मैं

मेरा ख़ुद का ना कभी छुपना ना निकलना

मेरा वजूद है बस जलना तपना चलना

मैं अघोर तपस्वी ना कभी जिसे विश्राम

भखना ही मेरी तपस्या जलना मेरा मान

कबसे हूँ ना जाने मैं इस तपस्या में मगन

यूँही रहूँगा जलता जब तक ना होयूँ भस्म

कर्म है मेरा, ख़ुद जल करना रोशान जहां

सूर्य मैं सूर्य, हूँ मैं बिलकुल अकेला यहां

पूरे ब्रह्मांड में ना कोई और मेरे जैसा यहां

                                    …… यूई

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by UE Vijay Sharma

गौर से देखो तो

April 7, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

वक़त की कमी नही है यहां, यूँ ही गर देखो तो

गया वक़त ना लौट कर आए, गौर से देखो तो

                                    …… यूई

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by UE Vijay Sharma

है नहीं किसी को थमने की यहां पर थाह

April 7, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

सिर्फ दिखने को लगता है सबको आराम

है नहीं किसी को यहां कभी भी आराम

हर पल है हर शय उसकी गतिशील यहां

है नहीं किसी को थमने की यहां पर थाह

                                  …… यूई

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by UE Vijay Sharma

है यह बदनामी नाम से भी खूब

April 7, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

प्यार लुटाया दिल खोल खूब

तब जा कमाया यह नाम खूब

माना के हुए बदनाम हम खूब

है यह बदनामी नाम से भी खूब

पिघलाया इसने तेरे दिल को खूब

बाँहो में समेटा मुझको तुमने खूब

दिल तेरे पे राज़ कर पाए हम खूब

                            …… यूई

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by UE Vijay Sharma

कोशिश तो की होती पास आने की

April 7, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

कहते हो राज़ छुपे है हजारों मुझमें

देखा है अपना अक्स कभी मुझमें

कोशिश तो की होती पास आने की

ख़ुद खुल जाते राज़ तुम्हारे दिल के

                                    …… यूई

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by UE Vijay Sharma

कहते थे क़रीब मेरे दिल के रहना

April 7, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

कहते थे मेरी आँखों में ही रहना

कभी फ़ासले दूर कर जाएँ तो क्या

कहते थे क़रीब मेरे दिल के रहना

जिस्म ना मिल भी पाए तो क्या

कहते थे मुझे मन से ना भुलाना

आवाज़ ना भी लगा पाए तो क्या

कहते थे यादों में मुझे ज़िन्दा रखना

कभी ज़िन्दगी धोखा दे जाए तो क्या

साथ थे जब तक कुछ ना था भुलाना

तुम ही दे गए धोखा तो क्या भुलाना

                        …… यूई

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by UE Vijay Sharma

हमारी यादो को दफनाने

April 6, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

हमें दफनाने की आपकी कोशिश शायद हो पूरी
हमारी यादो को दफनाने की कोशिश ना होगी पूरी

……यूई

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by UE Vijay Sharma

वादा है मोहब्बत का

April 6, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

मार कर हमें तुम, अपने दिलो की तहों में जो दफ्नाओगे
वादा है मोहब्बत का, हम जिंदा उन तहों से लौट आएंगे

……यूई

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by UE Vijay Sharma

दिल को अपने बेवजह तुम तड़पाओगे

April 6, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

चाह कर तो ना हम तुम्हे स्तायेंगे

चाह कर तुम हमें भूला ना पाओगे

ज़ोर जितना हमें भुलाने पे लगाओगे

दिल को अपने बेवजह तुम तड़पाओगे

 

……यूई

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by UE Vijay Sharma

जो मर मर के जिया

April 6, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

जो मर मर के जिया, वोह ख़ुद का ना मीत
जो ना हुआ ख़ुद का मीत, वोह कैसा तेरा मीत

……यूई

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by UE Vijay Sharma

मृत्यु से अभय

April 6, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

हर पल मृत्यु से अभय, शौर्य की पहचान
हर पल मृत्यु सो जो डरा, वो जिंदा मरा
……यूई

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by UE Vijay Sharma

गहने है यह सब अनमोल

April 6, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

सिसकियां साँसें दिल चाहतें

इंतज़ार बेकरारीयाँ मुस्कराहटें

गहने है यह सब अनमोल

मिल जाए कभी भी कही भी

संभाल लीजियेगा, ख़ोयिएगा नही

हां इकठे कभी नही मिलेंगे

पर यह वादा है मेरा मिलेंगे ज़रूर

जब भी मिले, कैसे भी मिलें

संभाल लीजियेगा, ख़ोयिएगा नही

 

……यूई

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by UE Vijay Sharma

निशनियाँ है प्यार की

April 6, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

फूलों का खिलना
भँवरो का नाचना
तितलियों का मचलना
बरसात की रिमझिम
हवाओं की अठखेलियाँ
तारों का टिमटिमाना
नदियों का मचलना
निशनियाँ है प्यार की
……यूई

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by UE Vijay Sharma

क्या सच में ही चाहते हो

April 6, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

अरे क्या कह्ते हो

कि मेरे होश ठिकाने आए

क्या सच में ही चाहते हो

कि मेरे होश ठिकाने आए

सोचा है गर कभी

जो मेरे होश ठिकाने आए

आपके होश

ना फिर कभी ठिकाने आए

 

                            …… यूई

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by UE Vijay Sharma

कह्ते इसे पशु प्रवृति

April 6, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

ख़ुद का चरना,

कह्ते इसे पशु प्रवृति

जो ख़ुद का चरते,

वोही तो पशु कहलाते

कुछ ग़लत कहा क्या?

क्या सोचा ना था?

यूई अब भी सोचो?

क्या बिगड़ा अभी है?

कह्ते तो है ना सब,जब जागो तभी स्वेरा

                                  …… यूई

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by UE Vijay Sharma

है यह कैसी और किसकी तलाश

April 5, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

जिसने समझा आपको अपना

उसको ना समझा आपने अपना

जिसको समझा आपने अपना

उसने ना समझा आपको अपना

है यह कैसी और किसकी तलाश

होगी कैसे खत्म यह सबकी तलाश

                              …… यूई

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