Skip to content
Saavan

Proudful Profile for a Poet

  • Read
  • Publish
  • Engage
    • Members
    • Discuss
    • Groups

Yogesh kumar Dhruw

Profile photo of Yogesh kumar Dhruw

Yogesh kumar Dhruw

@yogesh kumar • Joined Apr 2020 • Active 6 years ago

Remove Connection

Are you sure you want to remove from your connections?

Cancel Confirm
  • Profile
  • Timeline
  • Connections
  • Groups
  • Blog
  • Forums
Yogesh kumar

by Yogesh kumar Dhruw

गांव याद आये

May 19, 2020 in Other

“गाँव याद आये”
**************

हमें क्या पता आज,ये दिन देखना पड़ेगा |
न जाने कैसी मजाक,आज तूने किया है ||

हँसते हुए निकले घर से,भूख मिटाने सभी |
गाँव घर ये आँगन,छोड़ चार पैसा कमाने ||

दूर तलक परदेश,सभी हर कोने-कोने गए |
खेत खलिहान ले याद,बूढ़ी अम्मा की प्यार |

काम की धुन काम करता,कोई चलता गया |
मजबूरी मे हमें आज,मजदूरी दूर करना पड़ा ||

घोर अंधियारा छाए,ये काली रात आज कैसी |
पसंद न आए तुझे हम,मजदूरों की ये मजबूरी ||

बच्चे बिलखतेअम्मा,बोझा लिए नंगे पाँव चली |
बाबुल भूख से कुम्हलाए,जिम्मेदारी लिए हुए ||

पैरो में छाले पड़े है,डगर आज चलते चलते |
नीर को तरसे ये,रोटी बिखरे हुए पथ में पड़ी ||

प्राण गवांते हम पथ में,मंजिल तलाश करते |
रहम कर परवरदिगार,गाँव अब याद आया है ||

Tags: मजदूर दिवस पर हिंदी कविता, मजदूर पर हिंदी कविता, संपादक की पसंद 6 Comments »

Yogesh kumar

by Yogesh kumar Dhruw

ओ बीते दिन

May 10, 2020 in लघुकथा

ओ बीते दिन
ये उन दिनों की बात है,जब बेरोजगारी का आलम पूरे तन मन मे माधव के दीमक में घोर कर गया था,घर की परिस्थिति भी उतना अच्छा नही था कि वे निठल्ला घूम सके…….
…क्योंकि बाबू जी कृषि मजदूरी करके पूरे परिवार का भरण पोषण कर अपने फर्ज को निभा रहे थे ।
और इधर माधव गाँव मे ही रह कर पढ़ाई के साथ-साथ अपने माँ के साथ घर के हर कामो में हाथ बटाते.और इसी तरह उन्होंने हायर सेकेंडरी स्तर तक कि पढ़ाई पूरा कर लिए……….और कुछ दिनों बाद निजी विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्य करने लगा.लेकिन कब तक अल्प वेतन मे जिंदगी की गाड़ी कैसे चल सकता है | एक तो जवान बेटा है………..कई बार तो अपने माँ बाप के ताने सुनना पड़ता था,माधव के मन मे निराश के बादल छा जाते लेकिन अपने मन को डिगने नही दिया…………….अपने दोस्तों के साथ मन में उठने वाले पीड़ा को बाँट कर मन के दुख को हल्का कर लेते और आगे के बारे में सोंच कर उमंगता के साथ कार्य मे जुट जाते…………….. “मन के हारे हार है,मन के जीते जीत”
यही भाव लेकर हमेशा चलता.और रोज अखबारों में इस्तिहार को देखेते कहीं अपने लायक रोजगार तो न निकला हो एक दिन अखबार के माध्यम से शहर के एक स्कूल में चपरासी का पद निकला था. वेतन भी कुछ अच्छा था साथ ही साथ शहर की बात है.माधव सोचने लगा और मन मे कुछ नया करने का विचार लाया…………और चपरासी के लिए अपना आवेदन डाक के द्वारा भेज दिया,ओ तो ईश्वर के अच्छे कृपा माने या अपना शौभाग्य,कुछ दिनों बाद उनको नौकरी का आदेश मिल गया,परिवार में खुशी का माहौल छाने लगा क्योंकि होना भी चाहिए बेटा का जो नौकरी लगने वाला है,माधव खुशी-खुशी माँ बाप का आशिर्वाद लेकर शहर की ओर नौकरी करने चल पड़ा……..ओ पहला दिन जैसे-तैसे अपने पद के ज्वानिंग करने स्कूल के कार्यालय में गया…….
ज्वानिंग जैसे ही किया और वहाँ के प्राचार्य से मिलने गया……..तो प्रचार्य के हिड़कना उनके ऊपर मानो ऐसे बिजली गिरा हो जैसे माधव यहाँ आ कर कोई पाप कर गया हो,क्या पद ही ऐसा होता कि कोई छोटे कर्मचारिय का सम्मान न हो …………माधव आवक स रह गया और अपना कार्य ईमानदारी के साथ करने लगा……लेकिन चपरासी के पद उनको हर समय खलने लगा और वह कमर कस लिया कि मुझे इससे अच्छ पदों में कार्य करना है……………..और अपने योग्यता में विस्तार करते गया,कभी-कभी अन्य कर्मचारी के खीझ को सुनता,प्राचार्य का डाँट ऐसा लगता मानो कोई सीने मे भाला बेद रहा हो………………..
ये सारी बात को माधव एक चुनौती के रूप में स्वीकार कर अपने कार्य मे लगा रहा । और एक दिन उच्च पद में जाने का अवसर प्राप्त हुआ ……………लेकिन माधव को हर समय ओ बिता हुआ पल को याद कर यही सोचते क्या छोटे कर्मचारी,कर्मचारी नही होते क्या वे सम्मान के पात्र नही है इसी तरह उनके साथ व्यवहार किया जाता है ………………..यही सोच कर मन मे कई सारे प्रश्न उठने लगता और ओ बीते दिन याद कर बार-बार अपने आप से प्रश्न करता अरे ओ मेरे बीते दिन ………

योगेश ध्रुव भीम

Tags: मजदूर दिवस पर हिंदी कविता, मजदूर पर हिंदी कविता 2 Comments »

Yogesh kumar

by Yogesh kumar Dhruw

मोर मन के परेवना

May 10, 2020 in छत्तीसगढ़ी कविता

मोर मनके परेवना
★★★★★★★

कोयली कस कुहकत जीवरा के मैना न |
महकत अमरैय्या गोंदा तय फूले जोहि ||

मोर मन म बसे हिरदे के परेवना ओ |
संगी घलो हर झूमत नजरे नजर म न ||

लाली कस परसा दिखत रुपे ह तोरे ओ |
दिखत रिकबिक घलो टिकली सिंगारे ह ||

तोरेच आगोरा म जीवरा ह संगवारी न |
कलपत हिरदे हावे रतिहा आगोरा ओ ||

नइ मिले थोड़कुन आरो ह तोरेच जोहि |
मन मे पीरा घलो मन कुमलाये भारी न ||

तिहि मोर परेवना अस सुवा तय मोर घलो |
आसा मोर मनके घलो हिरदे के जीवरा ओ ||

दगा झन दे मोला बगिया के गोंदा ओ |
पीरा हिरदे म हावे घलो मन ह भारी न ||

तेहर तो जल्दी आजा मोर तय परेवना ओ |
तोरेच आगोरा म हिरदे हर जुड़ावत हावे ||
योगेश ध्रुव”भीम”

Tags: संपादक की पसंद 5 Comments »

Yogesh kumar

by Yogesh kumar Dhruw

मां तू मां है

May 10, 2020 in काव्य प्रतियोगिता

“माँ तू माँ है” योगेश ध्रुव”भीम”
************************
माँ तू जननी है,
तूने मुझे,
कोख में,
पाला,
नौ माह तक,
जन्म दी,
इस वसुंधरा का,
दर्शन कराई,
जननी हो न,
खुद दुख सहकर,
सुख का भोग कराई,
हाँ माँ,
नदियों के नीर की,
निर्मलता की धार हो,
शीतल चन्दन हो तुम,
तू ही तो हो,
मुझे चलना सिखाई
मेरे हर पगो का सहारा बनी,
मुझे बातें करना सिखाई,
हाँ माँ,
मुझे सिखाई बाते करना,
मैं आपके बाग का,
फुलवारी हुँ,
हाँ माँ,
आप खुद भूखी रहती,
खिलाती मुझे,
भर पेट भोजन,
न अघाउँ तब तक,
मेरे तुतली जुबा रोना,
संगीत है आपका,
खुद रहती बीमार,
पिलाती दवा मुझे,
आप तो ममता की,
अथाह समुद्र हो,
हाँ माँ,
मुझे सूखे में,
सुलाती,
खुद गीले में सोती,
रात-रात भर,
केवल और केवल खुद,
जगती,
मेरे लिए,
और सुलाती मुझे,
हाँ माँ !!
मेरे हर दर्द का अहसास,
खुद ब खुद करती,
हाँ माँ!!
ममता की करती बौछर,
और पूरी करती मेरी आस,
आप तो विशाल बरगद हो,
जिसमें ममता की,
छायाँ फलती फूलती है,
तेरे डाँट फटकार में,
छिपी होती है प्यार,
ममता की आँचल में,
आश्रय दी मुझे,
हाँ माँ !!
मेरे बचपन से,
यौवन तक का सफर,
हर उस कष्ट में,
हाँ,
मुझे सहारा दी,
मेरे हर बातों को,
पहुँचती बाबुल तक,
करती मेरे,
ख्वाइस को पूरा,
बचाती बाबुल के,
डाँट से,
ओ मेरी अच्छी माँ,
प्यारी माँ,
आप तो,
ममता की सिंधु हो,
मुझे काबिल,
इंसान बनाने में,
आपके हरेक,
पसीने के बून्द है,
ममतामयी,
ओ प्यारी माँ,
हाँ,
हाथ है आपका,
कहता है,
इसलिए भीम,
माँ तो माँ होती है,
ओ प्यारी माँ,
ओ मेरी भोली माँ,

Tags: संपादक की पसंद 11 Comments »

Yogesh kumar

by Yogesh kumar Dhruw

इम्तिहा

May 9, 2020 in काव्य प्रतियोगिता

“इम्तिहा” योगेश ध्रुव “भीम”

“जिंदगी की डोर खिंचते चल पड़े हम,
मंजिल की तलाश पैरो पर छाले पड़े”

“बिलखते हुए सवाल लिए पापी पेट का,
दर-दर भटकते लेकिन हल ढूढ़ते ढूढ़ते”

“चिराग जलाते हुए जीने की तमन्ना लिए,
दर्द बयाँ करू कैसे चिराग तु बुझाते चले”

“डगर भी कठिन इम्तिहा की मौन है हम,
मेरे परवर दिगार रहम नाचीज पे तू कर”

Tags: संपादक की पसंद 7 Comments »

Yogesh kumar

by Yogesh kumar Dhruw

पथ के राही न भटक

May 2, 2020 in गीत

=राही पथ से न भटक=योगेश ध्रुव”भीम”
×××××××××××××××

अडिग मन राह शांत हो,
निश्छल जीवन लेकर चल,
चाहे भटके मन: चंचल,
जीवन नाथ के तू चल,
पथ के राही न भटक
ऐसे पथ में तू चल ||

न डिगा अपना नियत,
ऐसे नियति बना कर चल,
मिला जीवन सौभाग्य पूर्ण यह,
दुर्भाग्य गर्त में न डाल के चल,
पथ के राही न भटक,
ऐसे पथ में तू चल ||

लक्ष्य ऐसा अडिग कल्पना ,
ऐसे मूरत बना के चल,
कल्पना की कामयाबी,
सकार जीवन लेकर चल,
पथ के राही न भटक,
ऐसे पथ में तू चल ||

अंतिम पड़ाव उस जीवन की,
ऐसा मूरत बना कर चल,
जन मानस की मन:पटल पर,
ऐसे चित्र उकेर कर चल,
पथ के राही न भटक ,
ऐसे पथ में तू चल ||

Tags: संपादक की पसंद 3 Comments »

Yogesh kumar

by Yogesh kumar Dhruw

नारी

May 1, 2020 in काव्य प्रतियोगिता

“नारी”
प्रकृति सा कोमल तुम,
मेरु समान दृढ़ता लिए,
नीर सा निर्मल हो तुम,
नारी तुम न हारी हो ||

अन्धकार की दीपक,
निश्च्छलता की मूरत,
सोये मन की आशा हो,
नारी तुम न हारी हो ||

वसुंधरा की शोभा हो,
वात्सल्य मयी ममता,
धिरजता की मूरत धर,
नारी तुम न हारी हो ||

अर्धनारेश्वर में तुम तो,
नर नारी के रूप लिए,
जननी तुम तो जननी,
तुम बीन अधूरी सृष्टि,
नारी तुम न हारी हो ||
योगेश ध्रुव”भीम”

Tags: संपादक की पसंद 5 Comments »

Yogesh kumar

by Yogesh kumar Dhruw

हमन प्रबुधिया नोएन गा

April 30, 2020 in छत्तीसगढ़ी कविता

“हमन परबुधिया नोएन गा”
**************************

जांगर पेरत पसीना चुचवावत,
भुइय्या के छाती म अन उगावत,
चटनी बासी के खवैय्या आवन न,
येहर धान के कटोरा हावे गा,
हमन परबुधिया नोएन रे,
सुघ्घर छत्तीसगढ़िया आवन गा ||

मोर छाती म बिजली पानी,
रुख राई अउ जंगल झाड़ी,
कोयला के खदान हावे गा,
हमन परबुधिया नोएन रे,
सुघ्घर छत्तीसगढ़िया आवन गा ||

चारो मुड़ा हे नदिया नरवा,
हीरा लोहा टिन के भंडार हावे,
इहाँ के लोहा जपान जाथे न,
बैलाडीला भिलाई महान हावे,
हमन परबुधिया नोएन रे,
सुघ्घर छत्तीसगढ़िया आवन गा ||

इहाँ के जंगल म तेंदू पत्ता,
साल सागौन के रवार हावे न,
हर्रा बेहड़ा चार महुवा तेंदू,
लाख कत्था अउ जड़ी बूटी,
हमन परबुधिया नोएन रे,
सुघ्घर छत्तीसगढ़िया आवन गा ||

इहाँ के भुइय्या म महानदी,
अरपा पैरी अउ इंद्रावती न,
तीरथगढ़ चित्रकूट झरना हावे,
खारुन शिवनाथ केलो रेंड नदियां,
मैनपाट घलो स्थान हावे न,
हमन परबुधिया नोएन रे,
सुघ्घर छत्तीसगढ़िया आवन गा ||

सबले ऊँचा गौरालाटा हावे न,
महामाया अउ बम्बलाई माता,
सम्बलाई माई दन्तेश्वरी दाई,
गंगरेल अउ हसदो बाँध हावे न,
हमन परबुधिया नोएन रे,
सुघ्घर छत्तीसगढ़िया आवन गा ||

हैहयबंसी राज करिस इहाँ,
पाण्डबंसी अउ सोमबंसी राजा,
सिरपुर अउ रतनपुर के घलो,
इतिहास ह भारी हावे न,
हमन परबुधिया नोएन रे,
सुघ्घर छत्तीसगढ़िया आवन गा ||

लक्ष्मण मंदिर भोरम देवा,
कैलाश गुफा अउ मंदकुद्वीपे,
इहाँ ये सबो स्थान हावे न,
हमन परबुधिया नोएन रे,
सुघ्घर छत्तीसगढ़िया आवन गा ||

वीरनरायन जइसे सपूत महान,
स्वामीआत्मानंदा गुरु घासीदास,
सुंदर लाल शर्मा इहाँ गाँधी घलो न,
एखरे सेती भीम बोलत हावे न,
हमन परबुधिया नोएन रे,
सुघ्घर छत्तीसगढ़िया आवन गा ||

रचनाकार
सहाशि योगेश ध्रुव”भीम”

Tags: अहिंसा पर कविता, गांधी जयंती पर पोयम, दो अक्टूबर पर कविता, बापू पर कविता, संपादक की पसंद 8 Comments »

Saavan

Proudful Profile for a Poet

COPYRIGHT © 2026 - Saavan // Designed By - ZeeTheme

Report

There was a problem reporting this post.

Harassment or bullying behavior
Contains mature or sensitive content
Contains misleading or false information
Contains abusive or derogatory content
Contains spam, fake content or potential malware

Block Member?

Please confirm you want to block this member.

You will no longer be able to:

  • See blocked member's posts
  • Mention this member in posts
  • Invite this member to groups
  • Message this member
  • Add this member as a connection

Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.

Report

You have already reported this .