पाप बढ़ गया बहुत धरा पर, कान्हा तुमको आना होगा आतंक ,अनीति ,अत्याचार से, धरा को मुक्त करना होगा कान्हा तुमको आना होगा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

समन्दर के कभी दो किनारे नहीं मिलते, हमसे तो आकर ही हमारे नहीं मिलते, बात ये है के विचारधारायें भिन्न हैं, तभी तो ढूढे से किसी को सहारे नहीं मिलते।। राही (अंजाना)

अगर मै कुड़ा-कागज होता , तो मेरा कोई ना सुबह होता ना शाम होता, ना घर होता ना परिवार होता, शिर्फ मेरे साथ रास्ते का धुल होता,,,,, अगर मै कुड़ा–कागज होता, कभी पढ़ने का काम […]

ग़मों को दिल में छुपाना आसान नहीं है। शमा यादों की बुझाना आसान नहीं है। जब भी छूट जाता है हमसफ़र राहों में- अकेले लौट कर आना आसान नहीं है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मानव तेरा हजार रूप देखे,, कभी रावण बनते कभी कंश बनते देखे, कभी राम बनते देखे कभी Krishna बनते देखे,, लेकिन जब -जब देखे सच्चाई पर मरते देखे, मानव तेरा हजार रूप देखे।। जे पी […]

दिल मे कुछ अरमान सजाये बैठे है, आँखो मे कुछ ख्वाब रखे बैठे है,, तेरी डोली को देखने की इंतजार मे मेरे दिल और आँख वर्षो से किसी मोड़ पर बैठे है।। जे पी सिह

दिल मे तुझे बैठा रखा था, ख्वाबो मे तुझे सजा कर बैठा था,, दिन मे भी चाँद तारे चमकेगें इसी तरह गलत-फहमी मे तुमसे प्यार कर बैठा था।। जे पी सिह

एक शहर मे तीन मित्र रहते थे,तीनो मे बहुत गहरा मित्रता थी, एक का नाम गौरव जो शांत-सोभाव के थे उनको गीत गाना गुनगुना कविता लिखने का इश्क चहरा हुआ था,, दुसरा मित्र सौऱभ जो […]

माता मुझको आने दो, बाबा मुझको आने दो है कसूर क्या मेरा, जो आने से रोक रहे में भी हूँ रक्त तेरा, क्यों इसको भूल रहे मुझे किलकारियां लेने दो, माता मुझको आने दो भूल […]

प्रिय तुझे मैं पथ मैं पाऊं, मैं जिस जिस पथ जाऊं उत तेरे ही दर्शन पाऊं सांझ सवेरे तुझको ध्याऊँ प्रिय तुझे मैं पथ मैं पाऊं -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

माँ गंगा तुम्हे नमन, चूमू तेरे चरण तेरी लहरों से शीतलता आये, लगे यु माँ का आँचल चारो दिशा धारा बहती करती हैं कल कल कल -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-