बर्फ पहाड़,और भूकंप डटे वीर हमारे शत्रु उर मचे हड़कंप, चलें वीर हमारे -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
बर्फ पहाड़,और भूकंप डटे वीर हमारे शत्रु उर मचे हड़कंप, चलें वीर हमारे -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
कुर्बानियां देकर बीर आए चले गए, अपनी विरासत हम सबको सौंप गए -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
बरस रही है बरखा, देने को मन सन्देश -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
वाह रे इंसान, इन्सां की पहचान नहीं कब तक भटकेगा, तुझे तेरी पहचान नहीं -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
पाप बढ़ गया बहुत धरा पर, कान्हा तुमको आना होगा आतंक ,अनीति ,अत्याचार से, धरा को मुक्त करना होगा कान्हा तुमको आना होगा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
समन्दर के कभी दो किनारे नहीं मिलते, हमसे तो आकर ही हमारे नहीं मिलते, बात ये है के विचारधारायें भिन्न हैं, तभी तो ढूढे से किसी को सहारे नहीं मिलते।। राही (अंजाना)
सेहम जाती है आँखे अधुरे ख्वाहिशों के बारिश में भीग कर, एहसासों के बदलते भंवर में अक्सर डुब जाती हुं मैं ….
सेहम जाती है आँखे अधुरे ख्वाहिशों के बारिश में भीग कर, एहसासों के बदलते भंवर में अक्सर डुब जाती हुं मैं ….
ab ke sawan bhege sab agan ak mera hi ghar sukha rah gaya nazar main tere sabhi aa gaye ak main hi bezud sa khada rah gaya –inspired not fully by me
तुझको इतना याद किया, मैं खुद को ही भूल गया, तेरे ख्वाबो में सोया था, के मैं उठना ही भूल गया।। राही (अंजाना)
tera phone aya hi nahin mera intezar khatam hua hi nahin aj bhi jata hun jaha milna tha kabhi par mukkdar ne teri rubaru laya hi nahin
बहुत कुछ भूलने लगा हूँ मैं, एक तुझमें ही घूमने लगा हूँ मैं।। राही (अंजाना)
अगर मै कुड़ा-कागज होता , तो मेरा कोई ना सुबह होता ना शाम होता, ना घर होता ना परिवार होता, शिर्फ मेरे साथ रास्ते का धुल होता,,,,, अगर मै कुड़ा–कागज होता, कभी पढ़ने का काम […]
ग़मों को दिल में छुपाना आसान नहीं है। शमा यादों की बुझाना आसान नहीं है। जब भी छूट जाता है हमसफ़र राहों में- अकेले लौट कर आना आसान नहीं है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
मानव तेरा हजार रूप देखे,, कभी रावण बनते कभी कंश बनते देखे, कभी राम बनते देखे कभी Krishna बनते देखे,, लेकिन जब -जब देखे सच्चाई पर मरते देखे, मानव तेरा हजार रूप देखे।। जे पी […]
दिल मे कुछ अरमान सजाये बैठे है, आँखो मे कुछ ख्वाब रखे बैठे है,, तेरी डोली को देखने की इंतजार मे मेरे दिल और आँख वर्षो से किसी मोड़ पर बैठे है।। जे पी सिह
जे पी सिह
दिल मे तुझे बैठा रखा था, ख्वाबो मे तुझे सजा कर बैठा था,, दिन मे भी चाँद तारे चमकेगें इसी तरह गलत-फहमी मे तुमसे प्यार कर बैठा था।। जे पी सिह
हाथ जोड़कर जब मैने सारी गलती माँग ली जमाने के समाने, फिर क्यो जलिल करते हो सारे के सामने,, हाथ जोड़कर सारी सारी गलती माँग ली मैने
इस तरह का दिम्मक पाल रखा था,, मेरे दिल ने,! खोखला कर डाला पर दवा डाल नही पाया मेरे दिल ने। इस तरह का दिम्मक पाल रखा मेरे दिल ने।।
दिल टुटने के बाद ;;चैन भी रूठ गयी, रात भर करवट बदला-बदला पुरे शरीर मे दर्द -गर्ग कर गयी , चैन रूठी गयी जब दिल टुट गयी।। JP Singh
,—सारे की इशारे को भुल गये, लेकिन तेरी नशीली आँखो को देखकर झुम गये! JP Singh
janey es desh ke mukaddar main kya hain ak taraf ekhlakh,junaid ke kabr hain dusri taraf desh ke thekedar beasabr hain khun ki aj koi kimat na rahi yeh ubalta nahin bas bahta hain ensah […]
एक शहर मे तीन मित्र रहते थे,तीनो मे बहुत गहरा मित्रता थी, एक का नाम गौरव जो शांत-सोभाव के थे उनको गीत गाना गुनगुना कविता लिखने का इश्क चहरा हुआ था,, दुसरा मित्र सौऱभ जो […]
नींदों के साथ ख्वाब भी ले गई, वो मेरे हाथ में अपनी तस्वीर दे गई।। राही (अंजाना)
टूट कर जुड़ता नहीं एक टुकड़ा भी जहाँ, मैंने खुद बैठकर जोड़े हैं दिल के टुकड़े अपने।। राही (अंजाना)
बचपन के सारे खिलौने बेच दूँ, तेरे एक इशारे पे मैं खुद को बेच दूँ।। राही (अंजाना)
रंगहीन ज़िन्दगी को रंगीन बना दिया, जिस पल तूने मुझे अपना चेहरा दिखा दिया। राही (अंजाना)
ye ishq hi to hai, kha kisi ki. bala wajah fir kuan intejar krna.. khush guman hoti hai, hasinawon ki. ye wo mushe dekhta hai, khayal krna. hamari fitrat nhi,fitur hai kisi ki. ha wo […]
आसमान में कटते ही लूट ली जाती थी, अब उड़ती हुई कहीं वो पतंग नहीं दिखती।। राही (अंजाना)
रिश्तों के मन्ज़र चुप चाप देखने पड़े, कई बार मुझे अपने ही ख्वाब तोड़ने पड़े।। राही (अंजाना)
बांध कर हाथ में घड़ी दो घड़ी न पकड़ सका, हर पल रेत सा सरकता रहा पल पल वक्त मेरा।। राही (अंजाना)
किसी के कहने से सुधर जाऊं मैं, अभी इतना भी बिगड़ा नहीं हूँ मैं।। राही (अंजाना)
कदम छोटे छोटे रखकर रक़ीब आ गया, एक लम्हा मेरे इतने भी करीब आ गया।। राही (अंजाना)
माँ ममता की मूरत है, प्यार का संसार है माँ तपते हुए जीवन में, शीतल सी फुहार है माँ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
माता मुझको आने दो, बाबा मुझको आने दो है कसूर क्या मेरा, जो आने से रोक रहे में भी हूँ रक्त तेरा, क्यों इसको भूल रहे मुझे किलकारियां लेने दो, माता मुझको आने दो भूल […]
बिटिया मेरी फुलवारी खुशियों की है क्यारी महके मेरा घर आँगन मैं जाउ बारी बारी बिटिया मेरी फुलवारी -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
लक्ष्य बिन जीवन है ऐसा, बिन प्राण शरीर हो जैसा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
प्रिय तुझे मैं पथ मैं पाऊं, मैं जिस जिस पथ जाऊं उत तेरे ही दर्शन पाऊं सांझ सवेरे तुझको ध्याऊँ प्रिय तुझे मैं पथ मैं पाऊं -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
हे सुर सरिता माँ गंगे, देव लोक से उतरी धारा पर करने जन जन का उद्धार है माँ बड़ा उपकार हे सुर सरिते माँ गंगे -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
माँ गंगा तुम्हे नमन, चूमू तेरे चरण तेरी लहरों से शीतलता आये, लगे यु माँ का आँचल चारो दिशा धारा बहती करती हैं कल कल कल -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मैं फूल हूँ ,कांटे मेरी राह में चन्दन हूँ , विष धार मेरी छाओं में -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
काटो मत वृक्षों को, नित नव वृक्ष लगाओ हरियाली रहने दो धरा पर, बंजर न इसको बनाओ वृक्ष लगाओ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
tere jikr se aakheen nam hain meri mere hijr ki kya kahu kaisi hain ruswayi likhtey likhtey main shayar ban gaya ho saka na nayak tere pyar main khalnayak ban gaya
आँखों की दहलीज लांग आया हूँ, आज मैं सबसे रूबरू हो आया हूँ, झूठ ये है के एक बून्द पानी हूँ मैं, सच ये के मै आँसू कहलाया आया हूँ, राही (अंजाना)
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