हर चीज की सही कीमत चुकाने का औकाद है मुझमे, लेकिन उसकी सही कीमत कोई लगाये तो। ज्योति मो–9123155481
हर चीज की सही कीमत चुकाने का औकाद है मुझमे, लेकिन उसकी सही कीमत कोई लगाये तो। ज्योति मो–9123155481
मै जिस शहर मे यहाँ किराये पर मकान मिलती, पैसे से पानी मिलती,दुध मिलती? लेकिन जिस की खोज मे हुँ वो शायद नही किराये पर मिलती नही पैसे पर मिलती! ज्योति मो–9123155481
तेरे जाने से इस तरह मेरे जिन्दगी मे विऱान आ गई, जिस तरह गघा को पैर छानकर कोई परती जमीन मे छोड़ दी जाती।
ये आँखे हर पल तेरा इंतजार करती, मेरे जेहनो दिमाग मे हर पल तेरे इनकार का जबाब गुँजती रहती
घड़ी की मरम्मत तो करा लूं मगर, अपने समय को ठीक कराऊँ कैसे।। राही (अंजाना)
अभी तेरी आरज़ू का ग़ुबार है दिल में। अभी तेरी यादों का संसार है दिल में। ख़ौफ भी रुसवाई का मौजूद है लेकिन- अभी तेरे ख़्यालों का बाज़ार है दिल में। मुक्तककार – #मिथिलेश_राय
छोटी छोटी बातों से ही बन्धन से बन्ध जाते हैं, हम अपनों से भी जादा अक्सर दूजों से जुड़ जाते हैं, कुछ कहना हो तो खुलकर हम अपने मन की कह जाते हैं, कुछ रिश्तों […]
यादों की पोटली तेरी खोल के न देखूंगा, आँखों की कोठरी मैं खोल के न देखूंगा, तू जब समझी नहीं मेरी ज़ुबानी ये कहानी, तो अब खामोशी के एहसासों की कोई टोकरी न देखूंगा।। राही […]
मेरे जेहनो दिमाग पर ,, हर पल कुछ तेरे याद पहरा सा है। देख ले आकर जालिम,, मेरे गाँव मे आशुफ्ताम व्यस्थित इंतजार आँसु तुम्हारे नाम का है।। ज्योति मो–9123155481
khamosh bheed main kyun khada hain tu, begano main apna sa kyun lagey hain tu, es raat ki kyun koi subah nahin, gam hain ki khatam honey ka naam nahin apney ap se yeh kaisi […]
जात-पात के बन्धन में एक पुतला बनकर इतराता है, क्यों छोटी छोटी बातों पर ही तू अपनों को ठुकराता है, एक माँ की सन्तान है पर क्यों अलग-थलग मंडराता है, अपने ही घर में तू […]
छोड़कर घर अपना , सीने पर झेली गोली बहा अपने लहू को , ली बचा मांगों की रोली -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-
माँ न होती, तो यह श्रष्टि न होती पृथ्वी है माँ, प्राण है माँ उचित अनुचित की , द्रष्टि है माँ -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-
घर न जो बना सके, वो क्या बनायंगे देश को कर्त्तव्य मर्यादा न जाने, क्या चालयंगे देश को -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-
मानव जीवन का ,सार है गीता हम हैं अर्जुन ,कृष्ण है गीता कर्म का सार है यह गीता हम हों भ्रमित, तो सारथी गीता -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-
कर्म भूमी है हमारी मर्म भूमी है हमारी बार बार प्रभु आते जहाँ पे देव भूमी है ये हमारी मातृ भूमी है हमारी भारत माँ ये है हमारी -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-
हुनर तुम्हारे तुम पर ही आजमाए गए, तुम जुल्मी बस हमारे ही कहाये गए।। Rahi
राजनीति मत कर, राजनीति मत कर। राजनीति मत सब जान बुझ कर तु, बनी, बनाई, बात बिगाड़ मत तु,, रोता है मेरा दिल ये जानकर की गलत-फहमी मे अच्छे खासे रिश्ते बिगाड़ा है कल,, जब […]
तुम नहीं, तो…… ! : अनुपम त्रिपाठी तुम नहीं; तो ग़म नहीं । ये भी क्या कुछ कम नहीं ।। तुम जो थे, तो ये भी था और वो भी था हर तरफ पसरी पड़ी […]
इक समंदर यूं शीशे में ढलता गया । ज़िस्म ज़िंदा दफ़न रोज़ करता गया ॥ ख़्वाब पलकों पे ठहरा है सहमा हुआ । ‘हुस्न’ दिन-ब-दिन ख़ुद ही सँवरता गया ॥ ‘इश्क़’ है आरज़ू या कि; […]
सपने पूरे करने की चाहत होनी चाहिए, खुद हिम्मत करो तो हर रात तैयार है। अरे कोशिश करके तो देखो, कदम बढ़ा कर तो देखो, सफलता की सीढ़ियां तो कब से तैयार हैं।।
चाहा था उनको दिल से, हर याद अपनी लिख डाली थी। प्यार के इज़हार का तो मौका ही न मिला, बची-खुची दोस्ती भी उन्होंने तोड़ डाली थी।
कई बार थोडा सा मज़ाक कर लेता हूं, कई बार लोगों को थोड़ा सा परेशान कर देता हूं। इस मस्ती के पीछे का प्यार वह समझ नहीं पाते हैं पता नहीं क्यों फिर भी लोग […]
दर्द तो दुनिया ने बहुत दिए, पर दुनिया वाले भी अपने थे, इसीलिए खुशी-खुशी सह लिए। अपने यारों से उम्मीदें बहुत थी, पर वह भी मुझे समझ न पाए। दुखी तो बहुत था दिल पर […]
प्यार वह जताते नहीं पर हर इच्छा हमारी पूरी वो करते हैं, खुद भले ही दुखी हों पर हमें खुश रखने की पूरी कोशिश करते हैं। भगवान तो केवल प्रार्थनाएं सुनते हैं, लेकिन पूरी उसे […]
जन्म दिया मां तूने ही इस काबिल मुझे बनाया है, हर फर्ज अपना मेरे प्रति निभाया है। दिल से दिल का यह अनमोल रिश्ता, वाह खुदा क्या बनाया है।।
स्वछन्द प्रकृति का इन्सान हूं लेकिन नहीं चाहता मेरे कारण कोई रोये मुझे अपने ढंग से जीना पसंद है, बंधनों में बंधने की मेरी आदत नहीं थोडा मुंहफट हूँ, सोच समझ कर जवाब कम, प्रतिक्रिया […]
रसना है ,हरी रस के लिए मत ,रसना ,मधु ,पान करो रंग जा रसिया हरी रंग में अंतर रस ,रस पान करो -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-
।।संगित।। संगीत चलरहा है, हवा ओ मे गजल गुंन गुना रही है फिजा घटाओ संगीत चलरहा है हवा ओ मे जी से सुनाई दे, वो सुनके मेहसूस करे खुशी । जो नही सुनपाए वो खुशियो […]
।।संगित।। संगीत चलरहा है, हवा ओ मे गजल गुंन गुना रही है फिजा घटाओ संगीत चलरहा है हवा ओ मे जी से सुनाई दे, वो सुनके मेहसूस करे खुशी । जो नही सुनपाए वो खुशियो […]
चल वहां जहाँ नहीं गम तुम हो वहां और बस हम सागर सी गहरी जीवन गाथा अम्बर तक है ,प्रीत हमारी साथ चलेंगे हर पल हर दम ऐसे चलेंगे संग तुम्हारे अम्बर संग जैसे हो […]
चल वहां जहाँ नहीं गम तुम हो वहां और बस हम सागर सी गहरी जीवन गाथा अम्बर तक है ,प्रीत हमारी साथ चलेंगे हर पल हर दम ऐसे चलेंगे संग तुम्हारे अम्बर संग जैसे हो […]
इस जहां में ,कहाँ खो गया हूँ खुद में ,खुद को ढूंढ रहा हूँ पी रहा हूँ , पी रहा हूँ में बस गम को पी रहा हूँ -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-
वक़्त ,है ये कभी जमीं , तो कभी आसमा गम की रफ़्तार है ऐ , कुछ लम्हा , कारबां बड़ा सख्त है ऐ वक़्त है ऐ -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-
प्यार कभी एक तरफा नही होता ना होगा दो रूहों के मिलान की जुड़वा पैदाइश है ये बहता दरियां है बस बहता रहता है प्यार सिर्फ एक जिस्म से पैदा नही होता मैं और तुम […]
यूँ तो नज़रन्दाज़ नहीं करते लोग खामियाँ मेरी, तो मैं भी क्यूँ दिखाऊं खुलकर उनको खूबियां मेरी, अभी सीख रहा हूँ तैरना तो हंसी बनाने दो मेरी, जब डूब कर समन्दर से निकल आऊंगा तो […]
पुरानी किताबो के पन्ने पलटकर देखो इश्क़ की गहराइयो मैं खुद उतरकर देखो इश्क़ से गहरा समंदर भी नही बस एक बार आज़माकर देखो चंद लम्हो मैं तय होगा चाँद का फासला एक बार फासला […]
बड़े दिनों मैं कुछ फुर्सत सी मिली हैं, कलम फिर हाथ में लेने की, चाहत सी हुई है। कोई मंज़र घटा या फिर कोई बात हुई? या फिर दुनियां ए दस्तूर लिखने की चाहत हुई, […]
जिन्दगी की किश्ती सभाँलते– सभाँलते , अब मै हार गया हूँ। क्या करू जिस दरिया मे चलती थी ,अपनी किश्ती वो दरिया मे ही गजब तुफान आ गयी। और मेरी किश्ती कहीं गुम हो गयी,, […]
कुछ सोच रहा हूं मैं, कुछ खोज रहा हूं मैं। जिंदगी के इन घने जंगलों में, खुशी की कुछं टहनियां ढूंढ रहा हूं मैं। वह हसीन वादियां कहीं खो सी गई हैं, नदियों के किनारों […]
अटल, अडिग, विशाल बूढ़े पेड़ को देख कर लगता है जैसे कोई ज्ञानी ध्यानी बाबा, आसन जमाकर बैठा है पेड़ की कुछ झूलती जटायें जो जमीन से जुड़ गयी हैं ऐसा लगता है जैसे कोई […]
बिन पंखों के उड़ान भर सकती है गर साथ हो तुम्हारा तो दुनिया भी जीत सकती है।।
अपने नन्हें कदमों से दिन भर छन छन करती फिरती है कभी इधर तो कभी उधर वो उछलती कूदती रहती है बंधन मुक्त वो पंछी की भाँति सीमाओं को न जानती है अपने घर से […]
रेतों के घरौंदे को , किसने है बचा पाया हम रेत के घर सारे, एक दिन ढह जाना है -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-
सावन की रिमझिम में, झुमे गगन औ धरा आवन पै सावन के, कण कण , रंग है भरा -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-
मैं पतझड़ प्रिय तू मधुमास, छण प्रति-छण तेरा आभास -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-
जीवन की आपाधापी में, चैन का एहसास कीजिये बेवजह की चिंता छोड़कर, बुढापे का मज़ा लीजिये शरीर पर झुर्री, बालों में चांदी, है तो होने दीजिये चलने को हाथ में छड़ी आ गयी, तो आने […]
मै एक बेरोजगार हूँ, हाथ पैर रहते हुए भी लचार हुँ। बड़े बुजर्गों के समाने मै बेकार हुँ, क्योकि मै बेरोजगार हूँ।। अब अंतिम आसरा शिर्फ केवल बेरोजगारी भत्ता है, जिसकी निर्णयकार्ता 56 इंच सीने […]
ए बादल इतना बरस कि सारी नफरतें धुल जांयें इंसानियत तरस गई है, मोहब्बत के सैलाब को
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