ए वतन

ए वतन ए वतन
तेरी सरफ़रोशी मे
खो जाए मेरा तन बदन

ए वतन ए वतन
तेरी परस्तिश मे
जी जाऊ मै सारा जीवन

वैसे तोह वासुदेव कुटुम्बकम का देश है
पर सोच जो दुश्मन के हो तोडना जो चाहै वह
हमारी एकता को देख दंग रह जायेगा वह

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
एक फूल के पखुरिया है भाई
विविधता मे एकता ऐसा प्यार
किस देश का है भाई

जितने भी जन्म लू
इस मिट्टी मे परस्थ हु
बात काम का हो या जान का
न्योछवर करने को हम तत्पर हो

ए वतन ए वतन
तेरी सरफ़रोशी मे
खो जाए मेरा तन बदन

Comments

3 responses to “ए वतन”

  1. वाह जी वाह

  2. Geeta kumari

    सुंदर भाव

Leave a Reply

New Report

Close