Author: Panna
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आज की शाम
आज की शाम शमा से बाते कर लूं
उससे चेहरे को अपनी आखों में भर लूंफासले है क्यों उसके मेरे दरम्या
चलकर कुछ कदम कम ये फासले कर लूंप्यार करना उनसे मेरी भूल थी अगर
तो ये भूल एक बार फिर से कर लूंउसके संग चला था जिंदगी की राहों में
बिना उसके जिंदगी कैसे बसर कर लूंपरवाने को जलते देखा तो ख्याल आया
आज की शाम शमा से बाते कर लूं -

तेरी आवाज में हम डूब जाते है
तेरी आवाज में हम डूब जाते है
तुझसे हम कुछ कह नहीं पाते हैहाल ए दिल कैसे करें बयां अपना
दिल की हर धडकन में तुझे सजाते हैगालिब बना दिया हमें तेरी मोहब्बत ने
तनहाइयों में भी बस तुझे गाते हैयकीन है एक दिन मिलेगीं नजरें तुझसे
हर लम्हा यही सोचकर बिताते हैशम्मा से बस एक मुलाकात की खातिर
परवाने पागल शम्मा मे जल जाते है
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समंदर में इक कश्ती है छोटी सी
समंदर में इक कश्ती है छोटी सी
कभी रोती थी रेत के दरिया में
अब दरिया ए अश्क में तैरती है..
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कुछ कमाल की बात है
कुछ कमाल की बात है
उनकी आवाज में
कभी कोयल सी मधुर लगती है
कभी बिजली की कडक सी कर्कश
तो कभी बूंद बनकर बरसती है
मेरे सूखे पडे ह्रदय में
कभी बहा कर ले जाती है
डुबा देती है
समंदर के आगाज़ में
कुछ कमाल की बात है
उनकी आवाज में
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झुकी जो नजर
थोडा सा शरमाकर, हल्के से मुस्कुराकर झुकी जो नजर
नज़रे-नूर-ओ-रोशनी में मेरी रंगे-रूह हल्के से घुलती गयी
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हाल -ए- दिल
हम अपना हाल -ए- दिल आपसे कहते रहे
कभी बच्चा तो कभी मासूम आप हमें कहते रहेआज तक कोई सबक पढा न जिंदगी में हमने
ताउम्र हम आपकी आखों जाने क्या पढते रहेइक अरसा बीत गया हम मिले नहीं आपसे
तुझसे मुलाकात के इंतजार में हम तनहा मरते रहेन हुई सुबह न कभी रात इस दिल ए शहर में
कितने ही सूरज उगे कितने ही ढलते रहेअनजान राहों में चलते रहे मंजिल की तलाश में
चलना ही मुसाफिर का नसीब है सो हम चलते रहे
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कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे
कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे
उमडने को आतुर है ज़ज्बात मिरे
वो तो अल्फ़ाज़ हैं कि कहीं खोये हुए है
नहीं तो इक नज़्म लिख देते अश्क मिरे
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डर
सिमट रहा हूं धीरे धीरे
इन सर्द रातों में
छिपा रहा हूं खुद को खुद में
इस बेनूर अंधेरे में
कभी कोई चीख सुनाई देती है
खामोश सी,
कभी सर्द हवाओं को चीरती पत्तों की सरसराहट,
तो कभी कहीं दूर भागती गाडी की आवाज
कभी कभी गिर पडते हैं
ठण्डे – ठण्डे रूखसारों पर गर्म आंसू,
कभी चल उठती है
यादों की लपटें सर्द हवाओं के बीच,
कभी डर उठता हूं पास आती अनजान आहटों से
देखता हूं बार बार बाहर बंद खिडकी से झांककर
कहीं कोई बाहर तो नहीं?
नहीं, कोई नहीं बस डर है
शायद अजीब सा
समझ नहीं आता कैसा
किसी के साथ न होने का डर या,
किसी साथ आ जाने का ?
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काश तुम चले आते!
चली आतीं है अक्सर यादें तुम्हारी
मगर तुम नहीं आते
की कोशिश कई दफ़ा भूल जाने की तुम्हे
मगर भूल नहीं पाते
आयीं राते पूनम की कई बार
मगर न हुआ चांद का दीदार
कर दिया है हमने अंधेरा अपने आशियाने में
हम उजाला अब सह नहीं पाते
काश तुम चले आते |
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एक अरसे से
एक अरसे से उनसे नजर नहीं मिली
जमाना गुजर गया किसी को देखे हुए
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रश्मि
धुंधले–धुंधले कोहरे में छिपती
रवि से दूर भागती
एक‘रश्मि’
अचानक टकरा गयी मुझसे
आलोक फैल गया भव में ऐसे
उग गये हो सैकडो रवि नभ मे जैसे
सतरंगी रश्मियों से
नभ सतरंगा सा हो गया
सैकडो इन्द्रधनुष फैल गये नभ में
पलभर में कोहरा कहीं विलीन हो गया
विलीन हो गयी वो ‘रश्मि’ भी
रवि के फैले आलोक में
ढूंढ रहा हूं तब से में
उस‘रश्मि’को
जो खो गयी दिन के उजाले में
न जाने कहां गुम हो गयी
मेरी वो‘रश्मि’
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घुल गया उनका अक्स
घुल गया उनका अक्स कुछ इस तरह अक्स में मेरे
आईने पर भी अब मुझे न एतबार रहाहमारी मोहब्बत का असर हुआ उन पर इस कदर
निखर गयी ताबिश1-ए-हिना, न वो रंग ए रुख़्सार रहाहमारी मोहब्बत पर दिखाए मौसम ने ऐसे तेवर
न वो बहार-ए-बारिश रही, न वो गुल-ए-गुलजार रहाभरी बज्म2 में हमने अपना दिल नीलाम कर दिया
किस्मत थी हमारी कि वहां न कोई खरीददार रहातनहाईयों में अब जीने को जी नहीं करता
दिल को खामोश धडकनों के रूकने का इंतजार रहा
1. ताबिश : चमक
2. बज़्म= सभा -
जो आँख देख ले उसे
जो आँख देख ले उसे वो वहीं ठहर जाती है
देखते देखते उसे शाम ओ सहर बीत जाती हैफ़लक से चाँद भी उसे देखता रहता है रातभर
उसकी रूह चाँदनी ए नूर में खिलखिलाती हैमहकते फूल भी उससे आजकल जलते है
तसव्वुर से उसके फिजा सारी महक जाती हैमदहोश हो जाता है मोसम लहराए जो आचॅल उसका
जुल्फें जो खोल दे वो तो घटाऍ बरस जाती हैतनहाइयों में जब सोचता हूं उनको
शब्द ओ शायरी खुद ब खुद सज जाती है
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शागिर्द ए शाम
जब शागिर्द ए शाम तुम हो तो खल्क का ख्याल क्या करें
जुस्तजु ही नहीं किसी जबाब की तो सवाल क्या करें
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You know that I stare at you often
You know that I stare at you often
Look at your lively smile with frozen eyes
I sit behind you just few aisles away
Dream about our friendship in fairy skiesWhen I see you my sensations become silent
Heart hosts an incessant whine in silence
Crazy feelings move over my mind
Takes me in dreamy domain, your slight glanceYour innocent beauty, your happy face
Arouse flowers in my deserted home
Amidst the glum feelings your smile stays
Like seeds encased within a pomeI do not know how long this will go
No idea whether you will reply to me someday
But waiting for that silken evening
I will kiss your starry smile one day
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उसके चेहरे से …
उसके चेहरे से नजर हे कि हटती नहीं
वो जो मिल जाये अगर चहकती कहींजिन्दगी मायूस थी आज वो महका गयी
जेसे गुलशन में कोई कली खिलती कहींवो जो हंसी जब नजरे मेरी बहकने लगी
मन की मोम आज क्यों पिगलती गयीमहकने लगा समां चांदनी खिलने लगी
छुपने लगा चाँद क्यों आज अम्बर में कहींभूल निगाओं की जो आज उनसे टकरा गयी
वो बारिस बनकर मुझ पे बरसती गयीकुछ बोलना ना चाहते थे मगर ये दिल बोल उठा
धीरे- धीरे मधुमयी महफिल जमती गयीआँखों का नूर करता मजबूर मेरी निगाहों को
दिल के दर्पण पर उसकी तस्वीर बनती गयीसदियों से बंद किये बेठे थे इस दिल को
मगर चुपके से वो इस दिल में उतरती गयीतिल तिल जलता हे दिल मगर धुआं हे कि उठती नहीं
परवाना बनकर बेठे हे शमां हे की जलती नहींहो गयी क़यामत वो जो सामने आ गयी
दर्द ऐ दिल से गजल आज क्यों निकलती गयीथोडा सा शरमाकर, हल्के से मुस्कुराकर झुकी जो नजर
नज़रे-नूर-ओ-रोशनी में मेरी रंगे-रूह हल्के से घुलती गयी
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ये कैसा तसव्वुर
ये कैसा तसव्वुर, कैसा रब्त, कैसा वक्त है
जो कभी होता भी नहीं, कभी गुजरता भी नहींरब्तः संबंध

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एक मुलाकात की तमन्ना मे
आपकी यादो को अश्कों में मिला कर पीते रहे
एक मुलाकात की तमन्ना मे हम जीते रहेआप हमारी हकीकत तो बन न सके
ख्वाबों में ही सही हम मगर मिलते रहेआप से ही चैन ओ सुकून वाबस्ता दिल का
बिन आपके जिंदगी क्या, बस जीते रहेसावन, सावन सा नहीं इस तनहाई के मौसम में
हम आपको याद करते रहे और बादल बरसते रहेजब देखा पीछे मुडकर हमने आपकी आस में
एक सूना रास्ता पाया, जिस पर तनहा हम चलते रहे
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यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर
यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर
चले गये जो इकबार, फिर ना आयेंगे कभी
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Wait for it
by Lady of Fire
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कौन कहता है
कौन कहता है मुहब्बत की ज़ुबाँ होती है
ये हक़ीक़त तो निगाहों से बयाँ होती हैवो न आये तो सताती है ख़लिश सी दिल को
वो जो आये तो ख़लिश और जवाँ होती है(ख़लिश = चुभन, वेदना)
रूह को शाद करे, दिल को जो पुरनूर करे
हर नज़ारे में ये तनवीर कहाँ होती है(शाद = प्रसन्न), (पुरनूर = प्रकाशमान, ज्योतिर्मय), (तनवीर = रौशनी, प्रकाश)
ज़ब्त-ए-सैलाब-ए-मुहब्बत को कहाँ तक रोकें
दिल में जो बात हो आँखों से अयाँ होती है(ज़ब्त-ए-सैलाब-ए-मुहब्बत = मुहब्बत की बाढ़ की सहनशीलता), (अयाँ = साफ़ दिखाई पड़ने वाला, स्पष्ट, ज़ाहिर)
ज़िन्दग़ी एक सुलगती-सी चिता है ‘साहिर’
शोला बनती है न ये बुझ के धुआँ होती है-साहिर होशियारपुरी
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जिंदगी मेरी जिंदगी से परेशान है
जिंदगी मेरी जिंदगी से परेशान है
बात इतनी है कि लिबास मेरे रूह से अनजान हैतारीकी है मगर, दिया भी नहीं जला सकते है
क्या करे घर में सब लाक के सामान हैऐसा नहीं कि कोई नहीं जहान में हमारा यहां
दोस्त है कई मगर, क्या करें नादान हैकोई कुछ जानता नहीं, समझता नहीं कोई यहां
जो लोग करीब है मेरे, दूरियों से अनजान हैघर छोड बैठ गये हैं मैखाने में आकर
कुछ नहीं तो मय के मिलने का इमकान हैढूढ रहा हूं खुद को, कहीं कभी मिलता नहीं
चेहरे की तो नहीं, मुझे उसके दिल की पहचान हैगुजर जायेगी जिंदगी अब जिंदगी से क्या डरना
जो अब बस पल दो पल की मेहमान है -
एक मुलाकात की तमन्ना मे
आपकी यादो को अश्कों में मिला कर पीते रहे
एक मुलाकात की तमन्ना मे हम जीते रहेआप हमारी हकीकत तो बन न सके
ख्वाबों में ही सही हम मगर मिलते रहेआप से ही चैन ओ सुकून वाबस्ता दिल का
बिन आपके जिंदगी क्या, बस जीते रहेसावन, सावन सा नहीं इस तनहाई के मौसम में
हम आपको याद करते रहे और बादल बरसते रहेजब देखा पीछे मुडकर हमने आपकी आस में
एक सूना रास्ता पाया, जिस पर तनहा हम चलते रहे
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गंगा की व्यथा
जीवन का आधार हूं मैं
भागीरथ की पुकार हूं मैं
मोक्ष का द्वार हूं मैं
तेरे पूर्वजों का उपहार हूं मैं
तेरा आज, तेरा कल हूं मैं
तुझ पर ममता का आंचल हूं मैं
हर युग की कथा हूं मैं
विचलित व्यथित व्यथा हूं मैं
तेरी मां हूं मैं, गंगा हूं मैं|अनादि अनंत काल से
हिमगिरी से बह रही
तेरी हर पीढ़ी को
अपने पानी से सींच रही
मेरी धारों से गर्वित धरा
धन-धान से फूल रही
विडंबना है यह कैसी?
यह धरा ही मुझको भूल रही
क्ष्रद्धाएं रो रही है, विश्वास रो रहा है
प्रणय विकल रहा है, मेरा ह्रदय रो रहा है
तेरी क्ष्रध्दा का श्रोत हूं मैं
प्रणय का प्रकोष हूं मैं
मेरी मासूम बूंदो का रोष हूं मैं
तेरी मां हूं मैं, गंगा हूं मैं|असहाय हूं मैं,लाचार हूं
सदियों से शोषण का शिकार हूं
अब तो थोडी सी अपनी उदारता का प्रमाण दो
मेरी इस दशा को थोडा तो सुधार दो
तेरे संस्कारो का क्ष्रंगार हूं मैं
तेरी संस्क्रति की गरिमा हूं मैं
तेरी मां हूं मैं, गंगा हूं मैं…. गंगा | -

तुझसे रुबरु हो लूं मेरे दिल की आरजू है
तुझसे रुबरु हो लूं मेरे दिल की आरजू है
तुझसे एक बार मैं कह दू, तू मेरी जुस्तजु हैभॅवरा बनकर भटकता रहा महोब्बत ए मधुवन में
चमन में चारो तरफ फैली जो तेरी खुशबु हैजल जाता है परवाना होकर पागल
जानता है जिंदगी दो पल की गुफ्तगु हैदर्द–ए–दिल–ए–दास्ता कैसे कहे तुझसे
नहीं खबर मुझे कहां मैं और कहां तू हैशायर- ए- ग़म तो मैं नहीं हूं मगर
मेरे दिल से निकली हर गज़ल में बस तू है -

उनकी उलझी हुई जुल्फ़ें
उनकी उलझी हुई जुल्फ़ें जब मेरे शानों पे बिखरती है
सुलझ सी जाती है मेरी उलझी हुई जिंदगी -

न उस रात चांदनी होती
न उस रात चांदनी होती
न वो चांद सा चेहरा दिखता
न मासूम मोहब्बत होती
न नादान दिला ताउम्र तडपता -
इस कफ़स में वो उडान, मैं कहॉ से लाऊं
इन परों में वो आसमान, मैं कहॉ से लाऊं
इस कफ़स में वो उडान, मैं कहॉ से लाऊं (कफ़स = cage)हो गये पेड सूने इस पतझड के शागिर्द में
अब इन पर नये पत्ते, मैं कहॉ से लाऊंजले हुए गांव में अब बन गये है नये घर
अब इन घरों में रखने को नये लोग, मैं कहॉ से लाऊंबुझी-बुझी है जिंदगी, बुझे-बुझे से है जज्बात यहॉ
इस बुझी हुई राख में चिन्गारियॉ, मैं कहॉ से लाऊंपथरा गयी है मेरे ख्यालों की दुनिया
अब इस दुनिया में मुस्कान, मैं कहॉ से लाऊं -
When you hold my hand
When you hold my hand
When your hairs spread over my face
When your deep ecstatic eye see me
My heart remain no longer with meWhen your lips touch my hand
When you put your head on my shoulder
When you whisper in my ear
I feel I am where I should be
I want to spend all my life with youBut now you left me
A long distance is between us
When I realize this, I cry
My feelings get condensed
At this premonition of separationPerhaps in another world
In another life
We will meet
We will be together again
You will hold my hand again
I believe– follow my blog – http://poetrywithpanna.wordpress.com/
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…पुरानी नजरों से
उनको हर रोज नये चांद सा नया पाया हमने
मगर उन्होने हमें देखा वही पुरानी नजरों से
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शागिर्द ए शाम
जब शागिर्द ए शाम तुम हो तो खल्क का ख्याल क्या करें
जुस्तजु ही नहीं किसी जबाब की तो सवाल क्या करें
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अब न चांदनी रही न कोई चिराग रहा
अब न चांदनी रही न कोई चिराग रहा
राहों में रोशनी के लिए न कोई आफताब रहाउनकी महोब्बत के हम मकरूज़ हो गए
उनका दो पल का प्यार हम पर उधार रहावेवफाई से भरी दुनिया में हम वफा को तरस गए
अब तो खुद पर भी न हमें एतबार रहाशम्मा के दर पर बसर कर दी जिंदगी सारी
परवाने को शम्मा में जलने का इंतजार रहाउन्हे देख देख कभी गज़ल लिखा करते थे हम
अब न वो गजल रही और न वो हॅसी गुबार रहा
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कैसे करें शिकवे
कैसे करें शिकवे गिले हम उनसे
उनकी हर मासूम खता के हम खिदमतगार है
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वो आये कभी पतझङ कभी सावन की तरह
वो आये कभी पतझङ कभी सावन की तरह
जिंदगी हमें मिली हमेशा बस उनकी तरहफूलों के तसव्वुर में भी हुआ उनका अहसास
आये वो मेरी जिंदगी में खिलती कली की तरहजब से दी जगह खुदा की उनको दिल में हमने
याद करना उनको हो गया इबादत की तरहडूब गया दिल दर्द ए गम ए महोब्बत में
बहा ले गयी हमें साहिल ए इश्क में लहरो की तरहहुई जब रुह रुबरु उनसे जिंदगी ए महफिल में
समा गयी वो मेरी रुह में सांसो की तरह -
ये कैसा तसव्वुर, कैसा रब्त
ये कैसा तसव्वुर, कैसा रब्त, कैसा वक्त है
जो कभी होता भी नहीं, कभी गुजरता भी नहींरब्तः संबंध






















