चंद सिक्के मिले हैं मुझे दिनभर की मज़दूरी के, आँखों में आँसू आते हैं मेरी मजबूर मजबूरी के। कौन उठाए आवाज़ आज नाइंसाफ़ी के खिलाफ़, बहुत मालदार होते हैं शख़्स यहाँ जी-हुज़ूरी1 के। क्यों लिखें […]

अब कहाँ वो ज़माना रहा जाँ लुटाने का, रिवाज़¹ नहीं अब रूठे को मनाने का। किसके हवाले करें आज दिल हम अपना, गुज़र गया वह वक़्त दिल लगाने का। हदीस²-ए-गम-ए-यार सुनेगा अब कौन, नया रिवाज़ है […]

आपकी यादों को अश्कों में मिला पीते रहे, एक मुलाक़ात की तमन्ना में हम जीते रहे। आप हमारी हक़ीक़त तो कभी बन न सके, ख़्वाबों में ही सही, हम मगर मिलते रहे। आप से ही […]

आज की शाम, शमा से मैं बातें कर लूँ, उनके चेहरे को अपनी आँखों में भर लूँ। फ़ासले बचे हैं क्यों उनके मेरे दरमियान1, चल कुछ कदम, कम ये फ़ासले कर लूँ। प्यार करना उनसे […]

जब ज़माने ने उसको सताया होगा, मेरा नाम कैसे होंठों में दबाया होगा। सवालों की जब झड़ी लगी होगी, जवाब में कैसे मुझको छुपाया होगा। कहीं कोई तलाश न ले कमरा उनका, मेरी नज़्मों को […]

आज कुरेद गया वो अरसे से जमे जज़्बातों को, कुछ बूँदें फिर से भिगो गईं सूखे रुख़सारों 1 को। दर्द आज फिर से झाँकने लगा तह-ए-दिल से, शायद कोई भरने आया है दिल की दरारों […]

तेरी आवाज़ में अक्सर हम डूब जाते हैं, तुझसे हम हमेशा कुछ कह नहीं पाते हैं। हाल-ए-दिल कैसे करें हम बयाँ अपना, दिल की धड़कन में तुझे ही सजाते हैं। ग़ालिब बना दिया हमें तेरी […]

घुल गया उनका अक्स कुछ इस तरह अक्स में मेरे, आईना अब ज़रा सा भी न काबिल-ए-ऐतबार रहा। हमारी मोहब्बत का असर, हुआ उन पर इस क़दर, निखरी ताबिश-ए-हिना1, न वह रंग-ए-रुख़्सार2 रहा। दिखाए मौसम […]

हम अपना हाल-ए-दिल आपसे कहते रहे, बेगाना आप हमको जाने क्यों समझते रहे। आज तक कोई सबक पढ़ा न ज़िंदगी में, आपकी आँखों में जाने क्या हम पढ़ते रहे। इक अरसा हो गया, हम मिल […]

तुझसे रू-ब-रू1 हो लूँ, दिल की आरज़ू2 है, कह दूँ तुझसे एक बार, तू मेरी जुस्तुजू3 है। भँवरा बनकर भटकता रहा तेरे तसव्वुर 4में, चमन में चारों तरफ़ फैली जो तेरी ख़ुशबू है। जल ही […]

उनके चेहरे से नज़र है कि हटती नहीं, वो जो मिल जाए अगर, चहकती कहीं। वो जो हँसी जब, नज़रें मेरी बहकने लगीं, मन की मोम जाने आज क्यों पिघलती गई। भूली-बिसरी निगाहें जो उनसे […]

बर्बाद-ओ-बेकस1 दिल का कोई सहारा भी हो, उनके मकाँ-ए-दिल में एक कोना हमारा भी हो। जो बात ज़ेहन 2 में थी, वो ज़ुबाँ पर आ न सकी, कहा नहीं हमने जो, शायद उन्होंने सुना भी […]

इक मुखौटा है, जिसे लगा कर रखता हूँ, जमाने से ख़ुद को मैं छुपा कर रखता हूँ। दुनिया को सच सुनने की आदत नहीं, सच्चाई को दिल में दबा कर रखता हूँ। जमाने की सूरत […]

कोरोना बीमारी के लगातार बढने के बावजूद किसी भी तरह की कोई सावधानी लेने से लोग परहेज कर रहे हैंं यह ऐसा समय है जब सबको अपने और अपने परिवार का ख्याल रखना चाहिये और […]

हर कविता को ‘नाइस’, ‘गुड’ कहकर झूठी तारीफ़ कहने की वजाए हम सही मूल्यांकन करे तो बेहतर होगा. तभी हम सब अपनी कविता में कुछ बेहतर कर सकेंगे. आप लोगों के क्या कहना है?

बन रंगरेज इस तरह रंग डाले, रंग ए रूह और भी निखर जाए। मिले गले इस तरह दोस्त बनकर, दुश्मनी हो अगर, टूटकर बिखर जाए।।

देखा है दुनिया को अपनी दिशा बदलते अपने लोगो को अपनो से आंखे फ़ेरते कतरा कतरा जिंदगी का रेत फिसलता जाता है देखा है जिंदगी को मौत में बदलते

नहीं मालूम कहां गुम है वक्त सब ढूढ़ना चाहते है मगर ढ़ूढ़ने को आखिर वक्त कहां है सब कहते फिरते है, वक्त निकालूंगा वक्त निकालने को आखिर वक्त कहां है

इक मुखौटा है जिसे लगा कर रखता हूं जमाने से खुद को छुपा कर रखता हूं दुनिया को सच सुनने की आदत नहीं सच्चाई को दिल में दबा कर रखता हूै बस रोना आता है […]

इन परों में वो आसमान, मैं कहॉ से लाऊं इस कफ़स में वो उडान, मैं कहॉ से लाऊं   (कफ़स  = cage) हो गये पेड सूने इस पतझड के शागिर्द में अब इन पर नये […]