Panna, Author at Saavan - Page 2 of 3's Posts

इज़हार ए तसव्वुर

  इस वीराने में अचानक बहार कहां से आ गयी गौर से देखा तो ये महज़ इज़हार ए तसव्वुर था »

लफ़्ज ढूढ रहे है बसेरा तबाही में कहीं

है हर तरफ़ शोर तबाही का गुमराह है रूह, दबी हुई सी कहीं डूब गया है सूरज उम्मीद का लफ़्ज ढूढ रहे है बसेरा तबाही में कहीं »

पछताओगे तुम, रुसवाईयां करोगे

पछताओगे तुम, रुसवाईयां करोगे गर छोड दिया हमने तेरी गलियों मे आना कभी   तुझसे मुश्ते-मोहब्बत मांगी थी, कोई कोहिनूर नहीं बस तेरे दीदार की दरकार थी चश्मेतर को कभी   भर गये पांव आबलो से पुखरारों पर चलकर सारे घाव भर जाते ग़र मलहम लगा देते कभी   यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर चले गये जो इकबार, फिर ना आयेंगे कभी   घुल जाये तेरी रोशनी में रंगे-रूह मेरी ग़र जल जाये मेरी महफिल में शम्मा... »

इक नज़्म है जिसे हरपल गुनगुनाता हूँ

इक नज़्म है जिसे हरपल गुनगुनाता हूँ

इक नज़्म है जिसे हरपल गुनगुनाता हूँ कोरे कागज पै स्याही सा बिखर जाता हूँ हर्फ़ हालातों में ढलकत कुछ कह देते है कोई सुनता है तो मैं संवर जाता हूँ कोई साखी है तेरे मैखाने में जो पिलाती है तो बहक जाता हूँ मकरूज है जिंदगी तेरी मोहब्बत की चंद सिक्कों में ही मैं लुट जाता हूँ छिड़ी है जंग जज्बातों में आंखो से निकलने को बनकर अक्स रूखसारों पै जम जाता हूँ रंग ओ रोशनी की चाहत है किसको अंधेरों में आहिस्ते अक्सर ... »

हो गये थे हैरान नैरंगे-नज़र देखकर

हो गये थे हैरान नैरंगे-नज़र देखकर मिल जाता सुकुन ग़र जो इनसे पी लेते कभी   »

वह भिखारी

वह भिखारी मलिन मटमैला फटा पट पहने था वह पथवासी नमित निगाहे नित पथ पर नयनों से नीर निकलता विदीर्ण करता ह्रदय अपने भाग्य पर कांपते हाथों में कटोरा स्कंध पर उसके परिवार का बोझ दो दिवस से भूखे बाल का सहारा भिखारी जिसके सम्मुख अब पथ की ठोकरे भी हारी बेबस कंठ ने साथ छोड दिया पग भी पथ पर रुकते है बच्चों की सूरत याद आने पर दयनीय द्रग द्रवित हो उठते है तरणी है बीच मझधार में कब कूल तक पहुंचेगी इस इंतजार में... »

Ishtehaar si ho gayi he zindagi meri

»

चाहे कितनी नफ़रत कर लो हमसे

चाहे कितनी नफ़रत कर लो हमसे तेरे दिल को अपना बनाकर रहेगें बहुत रो चुकी है आंखे हमारी तेरी आंखों से आंसू हम गिराकर रहेंगे चाहे कितनी भी अंधेरी हो जिंदगी की रातें शम्मां महोब्बत की हम जला कर रहेगें फासले बना लो चाहे कितना भी हमसे ये फ़ासले, हम मिटा कर रहेगें »

वो याद आये..

कुछ अश्कों की महफिल जमी और वो याद आये रुखसार कुछ नम से हुए और वो याद आये एक जमाने की मोहब्बत वो चंद लम्हो में भुला बैठे हम भूलकर भी उन्हे भूला ना पाये और वो याद आये चांद और उनका क्या रिश्ता है, हमें नहीं मालूम फ़लक पे चांद उतरा और वो याद आये तरन्नुम ए इश्क गाते रहे तमाम उम्र हम कोई नगमा कहीं गुंजा और वो याद आये »

समझने को दुनिया ने क्या क्या हमें समझा

समझने को दुनिया ने क्या क्या हमें समझा जो न समझना था, लोगो ने वही समझा देख के दुनिया की समझदारी, हम यही समझे जो न कुछ समझा यहां, वही सब कुछ समझा| »

बस दर्द के शार्गिद में अब नज्में-ए-गम लिखा करते है

वो पूछते है हमसे कि आजकल हम क्या करते है क्या बताएं कि उनके इंतजार में किस कदर मरते है अपने अहसास, अपनी आरजू दिल में दबाए रखे है वो कहते है कि आजकल हम कुछ चुप से रहा करते है कहते है वो आज से हम बाते नहीं करेंगे आपसे उनके लफ्जों के सहारे ही लम्हे गुजरा करते है जाते जाते वो आज जो हमसे खफ़ा हो गये बस दर्द के शार्गिद में अब नज्में-ए-गम लिखा करते है »

बहुत खारे है जज़्बात हमारे..

  बहुत खारे है जज़्बात हमारे इस मीठी मोहब्बत के तुम्हारी नज़रों में क्या मोल है हमारे अश्कों के समंदर का   »

समझ नहीं आया..

अनकही बातों तो समझते आये थे अबतक उन्होने आज जो कहा समझ नहीं आया »

उसके चेहरे से नजर हे कि हटती नहीं..

उसके चेहरे से नजर हे कि हटती नहीं वो जो मिल जाये अगर चहकती कहीं   जिन्दगी मायूस थी आज वो महका गयी जेसे गुलशन में कोई कली खिलती कहीं   वो जो हंसी जब नजरे मेरी बहकने लगी मन की मोम आज क्यों पिगलती गयी   महकने लगा समां चांदनी खिलने लगी छुपने लगा चाँद क्यों आज अम्बर में कहीं   भूल निगाओं की जो आज उनसे टकरा गयी वो बारिस बनकर मुझ पे बरसती गयी   कुछ बोलना ना चाहते थे मगर ये दिल बो... »

घुल गया उनका अक्स कुछ इस तरह अक्स में मेरे..

  घुल गया उनका अक्स कुछ इस तरह अक्स में मेरे आईने पर भी अब मुझे न एतबार रहा   हमारी मोहब्बत का असर हुआ उन पर इस कदर निखर गयी ताबिश1-ए-हिना, न वो रंग ए रुख़्सार रहा   हमारी मोहब्बत पर दिखाए मौसम ने ऐसे तेवर न वो बहार-ए-बारिश रही, न वो गुल-ए-गुलजार रहा   भरी बज्म2 में हमने अपना दिल नीलाम कर दिया किस्मत थी हमारी कि वहां न कोई खरीददार रहा   तनहाईयों में अब जीने को जी नहीं करता ... »

मौत हुयी हमारी हजार बार

  कौन कहता है आदमी मरता है बस एक बार वस्लो हिज़्र के खेल में मौत हुयी हमारी हजार बार »

बिछडने के ख्याल से हम आपसे मिलने से डरते है

बिछडने के ख्याल से हम आपसे मिलने से डरते है मगर कैसे बताएं हम किस कदर तनहा मरते है   देख न ले वो हमें, कहीं पुकार न ले उनकी गलियों से यूं गुज़रने से डरते है   ताउम्र उन्हे चाहने के सिवा क्या किया है हमने अब मगर यूं बेहिसाब चाहने से डरते है   कभी बारिश का इंतजार रहता था हमें सालभर मगर अब भीग जाने के ख्याल से ही डरते है   दर्द को लिखना चाहते है मगर लफ़्ज साथ ही नही देते दिल ए दरिया... »

अश्क बेपरवाह बहे जाते है

अश्क बेपरवाह बहे जाते है एक कहानी है ये जो कहे जाते है कोई सुनता ही नहीं कोई ठहरता ही नहीं आते है लोग, चले जाते है अश्क बेपरवाह बहे जाते है   आंखो से बहकर आसूं आ जाते है रूखसारो पर छोड कर खारी लकीरे, अपने अनकहे अहसासों की न जाने कहां गुम जो जाते है अश्क बेपरवाह बहे जाते है »

बढे जो मेरे हाथ, खुदा की तरफ़

बढे जो मेरे हाथ, खुदा की तरफ़ दुनिया ने मुझे काफ़िर करार दे दिया नहीं समझी दुनिया, न वो खुदा मेरे सजदे को| »

इक अधूरापन है जो झांकता रहता है

इक अधूरापन है जो झांकता रहता है दिल की दरारों से| मचलता रहता है, मुकम्मल होने की ख्वाहिश में|   कुछ यादें थी, अधूरी सी भीगना बारिश में कभी कभी| करवा ली है मरम्मत छत की ठीक कर ली है रोशनदान भी फिर भी कभी कभी वो आंखों से बहता रहता है, इक अधूरापन है जो झांकता रहता है| कुछ बातें थी, जो कभी हुई नहीं कुछ सोचा था मैंनें, जो उसने सुना नहीं, चंद लफ़्जों का आसरा चाहता था साथ में किसी का हाथ चाहता था जो ... »

वाह! क्या नज़्म है|

थोडी सी उदासी जमा कर ली है मुठ्टी भर दर्द को कैद कर रखा है दिल के इक कौने में   कभी कभी इसी दर्द को घोलकर स्याही में बिखेर देता हूं उदास कागज़ पर कुछ अल्फ़ाज़ से खिंच जाते है लोग कहते है वाह! क्या नज़्म है| »

कभी कभी सोचता हूं

कभी कभी सोचता हूं कि हमने पत्थर को भगवान बनाया है या भगवान को भी पत्थर बना दिया »

सोचा नहीं था

चले जाओगे तुम ये सोच नहीं था हो जाएगें तनहा हम ये सोचा नहीं था हंसते हंसते बितायी थी जिंदगी हमने गम में ढ़ल जाएगी जिंदगी ये सोचा नहीं था तेरी आंखो के नशे मे डूबे रहे हम जिंदगी भर मय बन जाएगा मुकद्दर ये सोचा नहीं था जिंदगी क्या थी हमारी बस तुम्हारा अहसास था अहसास भी साथ न रहेगा ये सोचा नहीं था दिल ए आईने में उतार ली थी तस्वीर तुम्हारी वो आईना टूट जाएगा ये सोचा नहीं था हर शाम साथ साथ हुई थी बसर हमारी... »

इक नज़्म कभी कभी जाग उठती है

पुरानी जिंदगी कभी कभी जाग उठती है यादें आ जाती है याद बेवजह खारी लकीरें छोडकर रुखसारों पर न जाने कहां खो जाते है जज्बात मेरे लफ़्ज जो कभी जुबां पर आ ना पाये जो छुपते रहे ज़हन के किसी कोने में उमड उठते है कभी कभी कागज के किसी कोने में इक नज़्म कभी कभी जाग उठती है| »

एक मुलाकात की तमन्ना मे…

एक मुलाकात की तमन्ना मे…

आपकी यादो को अश्कों में मिला कर पीते रहे, एक मुलाकात की तमन्ना मे हम जीते रहे »

mushaira

Few words from Mushaira

Saavan  ये कारवां चले तो, हम भी चलेंये शम्मा जले तो, हम भी जलेंखाक करके हर पुरानी ख्वाहिश कोइक नया कदम, हम भी चलें……   कभी ठहरी सी लगती है,कभी बहती चली जाती हैजिंदगी है या पानी हैन जाने क्यों जम जाती है कोई वक्त था, जब एक रब्त चला करता था हमारे दरम्यागुजर गया वो रब्त, अब साथ बस वक्त चले मुश्किल है राहें, सूनी है अकेली सीइस अकेलेपन में साथ तन्हाई चले     »

बचपन

ठिठुरता बचपन (October 17: Anti Poverty Day)

October 17: Anti Poverty Day सर्दी में नंगे पांव कूड़ा बटोरते बच्चे ठिठुरता बचपन उनका सिकुडी हुई नन्ही काया टाट के थैले की तरह   उनके रूदन का क्या जिक्र करू मैं लफ़्जों के कुछ दायरे होते है नहीं फैल सकते वह उनके रूदन की तरह »

क्या करें नादान है

क्या करें नादान है

ऐसा नहीं कि कोई नहीं जहान में हमारा यहां दोस्त है कई मगर, क्या करें नादान है »

आज की शाम

आज की शाम

आज की शाम शमा से बाते कर लूंउससे चेहरे को अपनी आखों में भर लूं फासले है क्यों उसके मेरे दरम्याचलकर कुछ कदम कम ये फासले कर लूं प्यार करना उनसे मेरी भूल थी अगरतो ये भूल एक बार फिर से कर लूं उसके संग चला था जिंदगी की राहों मेंबिना उसके जिंदगी कैसे बसर कर लूं परवाने को जलते देखा तो ख्याल आयाआज की शाम शमा से बाते कर लूं »

तेरी आवाज में हम डूब जाते है

तेरी आवाज में हम डूब जाते है

तेरी आवाज में हम डूब जाते हैतुझसे हम कुछ कह नहीं पाते है हाल ए दिल कैसे करें बयां अपनादिल की हर धडकन में तुझे सजाते है गालिब बना दिया हमें तेरी मोहब्बत नेतनहाइयों में भी बस तुझे गाते है यकीन है एक दिन मिलेगीं नजरें तुझसेहर लम्हा यही सोचकर बिताते है शम्मा से बस एक मुलाकात की खातिरपरवाने पागल शम्मा मे जल जाते है »

समंदर में इक कश्ती है छोटी सी

समंदर में इक कश्ती है छोटी सी

समंदर में इक कश्ती है छोटी सी कभी रोती थी रेत के दरिया में अब दरिया ए अश्क में तैरती है.. »

कुछ कमाल की बात है

कुछ कमाल की बात है

कुछ कमाल की बात है उनकी आवाज में कभी कोयल सी मधुर लगती है कभी बिजली की कडक सी कर्कश तो कभी बूंद बनकर बरसती है मेरे सूखे पडे ह्रदय में कभी बहा कर ले जाती है डुबा देती है समंदर के आगाज़ में कुछ कमाल की बात है उनकी आवाज में »

झुकी जो नजर

झुकी जो नजर

थोडा सा शरमाकर, हल्के से मुस्कुराकर झुकी जो नजरनज़रे-नूर-ओ-रोशनी में मेरी रंगे-रूह हल्के से घुलती गयी »

हाल -ए- दिल

हाल -ए- दिल

हम अपना हाल -ए- दिल आपसे कहते रहेकभी बच्चा तो कभी मासूम आप हमें कहते रहे आज तक कोई सबक पढा न जिंदगी में हमनेताउम्र हम आपकी आखों जाने क्या पढते रहे इक अरसा बीत गया हम मिले नहीं आपसेतुझसे मुलाकात के इंतजार में हम तनहा मरते रहे न हुई सुबह न कभी रात इस दिल ए शहर मेंकितने ही सूरज उगे कितने ही ढलते रहे अनजान राहों में चलते रहे मंजिल की तलाश मेंचलना ही मुसाफिर का नसीब है सो हम चलते रहे »

कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे

कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे

कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे उमडने को आतुर है ज़ज्बात मिरे वो तो अल्फ़ाज़ हैं कि कहीं खोये हुए है नहीं तो इक नज़्म लिख देते अश्क मिरे »

डर

डर

सिमट रहा हूं धीरे धीरे इन सर्द रातों में छिपा रहा हूं खुद को खुद में इस बेनूर अंधेरे में कभी कोई चीख सुनाई देती है खामोश सी, कभी सर्द हवाओं को चीरती पत्तों की सरसराहट, तो कभी कहीं दूर भागती गाडी की आवाज कभी कभी गिर पडते हैं ठण्डे – ठण्डे रूखसारों पर गर्म आंसू, कभी चल उठती है यादों की लपटें सर्द हवाओं के बीच, कभी डर उठता हूं पास आती अनजान आहटों से देखता हूं बार बार बाहर बंद खिडकी से झांककर कह... »

काश तुम चले आते!

काश तुम चले आते!

चली आतीं है अक्सर यादें तुम्हारी मगर तुम नहीं आते की कोशिश कई दफ़ा भूल जाने की तुम्हे मगर भूल नहीं पाते   आयीं राते पूनम की कई बार मगर न हुआ चांद का दीदार कर दिया है हमने अंधेरा अपने आशियाने में हम उजाला अब सह नहीं पाते काश तुम चले आते | »

एक अरसे से

एक अरसे से उनसे नजर नहीं मिली जमाना गुजर गया किसी को देखे हुए   »

रश्मि

रश्मि

धुंधले–धुंधले कोहरे में छिपती रवि से दूर भागती एक‘रश्मि’ अचानक टकरा गयी मुझसे आलोक फैल गया भव में ऐसे उग गये हो सैकडो रवि नभ मे जैसे सतरंगी रश्मियों से नभ सतरंगा सा हो गया सैकडो इन्द्रधनुष फैल गये नभ में पलभर में कोहरा कहीं विलीन हो गया विलीन हो गयी वो ‘रश्मि’ भी रवि के फैले आलोक में  ढूंढ रहा हूं तब से में उस‘रश्मि’को जो खो गयी दिन के उजाले में न जाने कहां गुम हो गयी मेरी वो‘रश्मि’ »

घुल गया उनका अक्स

घुल गया उनका अक्स

घुल गया उनका अक्स कुछ इस तरह अक्स में मेरेआईने पर भी अब मुझे न एतबार रहा हमारी मोहब्बत का असर हुआ उन पर इस कदरनिखर गयी ताबिश1-ए-हिना, न वो रंग ए रुख़्सार रहा हमारी मोहब्बत पर दिखाए मौसम ने ऐसे तेवरन वो बहार-ए-बारिश रही, न वो गुल-ए-गुलजार रहा भरी बज्म2 में हमने अपना दिल नीलाम कर दियाकिस्मत थी हमारी कि वहां न कोई खरीददार रहा तनहाईयों में अब जीने को जी नहीं करतादिल को खामोश धडकनों के रूकने का इंतजार र... »

जो आँख देख ले उसे

जो आँख देख ले उसे वो वहीं ठहर जाती हैदेखते देखते उसे शाम ओ सहर बीत जाती है फ़लक से चाँद भी उसे देखता रहता है रातभरउसकी रूह चाँदनी ए नूर में खिलखिलाती है महकते फूल भी उससे आजकल जलते हैतसव्वुर से उसके फिजा सारी महक जाती है मदहोश हो जाता है मोसम लहराए जो आचॅल उसकाजुल्फें जो खोल दे वो तो घटाऍ बरस जाती है तनहाइयों में जब सोचता हूं उनकोशब्द ओ शायरी खुद ब खुद सज जाती है »

शागिर्द ए शाम

जब शागिर्द ए शाम तुम हो तो खल्क का ख्याल क्या करेंजुस्तजु ही नहीं किसी जबाब की तो सवाल क्या करें »

You know that I stare at you often

You know that I stare at you oftenLook at your lively smile with frozen eyesI sit behind you just few aisles awayDream about our friendship in fairy skies When I see you my sensations become silentHeart hosts an incessant whine in silenceCrazy feelings move over my mindTakes me in dreamy domain, your slight glance Your innocent beauty, your happy faceArouse flowers in my deserted homeAmidst the gl... »

उसके चेहरे से …

उसके चेहरे से …

उसके चेहरे से नजर हे कि हटती नहींवो जो मिल जाये अगर चहकती कहीं जिन्दगी मायूस थी आज वो महका गयीजेसे गुलशन में कोई कली खिलती कहीं वो जो हंसी जब नजरे मेरी बहकने लगीमन की मोम आज क्यों पिगलती गयी महकने लगा समां चांदनी खिलने लगीछुपने लगा चाँद क्यों आज अम्बर में कहीं भूल निगाओं की जो आज उनसे टकरा गयीवो बारिस बनकर मुझ पे बरसती गयी कुछ बोलना ना चाहते थे मगर ये दिल बोल उठाधीरे- धीरे मधुमयी महफिल जमती गयी आँ... »

ये कैसा तसव्वुर

ये कैसा तसव्वुर, कैसा रब्त, कैसा वक्त हैजो कभी होता भी नहीं, कभी गुजरता भी नहीं रब्तः संबंध »

एक मुलाकात की तमन्ना मे

आपकी यादो को अश्कों में मिला कर पीते रहेएक मुलाकात की तमन्ना मे हम जीते रहे आप हमारी हकीकत तो बन न सकेख्वाबों में ही सही हम मगर मिलते रहे आप से ही चैन ओ सुकून वाबस्ता दिल काबिन आपके जिंदगी क्या, बस जीते रहे सावन, सावन सा नहीं इस तनहाई के मौसम मेंहम आपको याद करते रहे और बादल बरसते रहे जब देखा पीछे मुडकर हमने आपकी आस मेंएक सूना रास्ता पाया, जिस पर तनहा हम चलते रहे »

यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर

यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर

यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर चले गये जो इकबार, फिर ना आयेंगे कभी »

Wait for it

by Lady of Fire »

कौन कहता है

कौन कहता है मुहब्बत की ज़ुबाँ होती है ये हक़ीक़त तो निगाहों से बयाँ होती है वो न आये तो सताती है ख़लिश सी दिल को वो जो आये तो ख़लिश और जवाँ होती है (ख़लिश = चुभन, वेदना) रूह को शाद करे, दिल को जो पुरनूर करे हर नज़ारे में ये तनवीर कहाँ होती है (शाद = प्रसन्न), (पुरनूर = प्रकाशमान, ज्योतिर्मय), (तनवीर = रौशनी, प्रकाश) ज़ब्त-ए-सैलाब-ए-मुहब्बत को कहाँ तक रोकें दिल में जो बात हो आँखों से अयाँ होती है (ज़ब्त-ए-... »

जिंदगी मेरी जिंदगी से परेशान है

जिंदगी मेरी जिंदगी से परेशान है

जिंदगी मेरी जिंदगी से परेशान है बात इतनी है कि लिबास मेरे रूह से अनजान है­­ तारीकी है मगर, दिया भी नहीं जला सकते है क्या करे घर में सब लाक के सामान है ऐसा नहीं कि कोई नहीं जहान में हमारा यहां दोस्त है कई मगर, क्या करें नादान है कोई कुछ जानता नहीं, समझता नहीं कोई यहां जो लोग करीब है मेरे, दूरियों से अनजान है घर छोड बैठ गये हैं मैखाने में आकर कुछ नहीं तो मय के मिलने का इमकान है ढूढ रहा हूं खुद को, क... »

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