Category: गीत

  • वेदना

    जीवन मेरा बहुत कठिन है,
    पर ना चाहूं मुड़कर देखना |
    रख ली है कुछ पुरानी यादे समेटकर,
    ना चाहूँ उनको फेंकना |
    झूठा मुखौटा लगाकर,
    क्यों चाहते हो, जज्बातों से यूँ खेलना |
    दिल दुख रहा, मन तड़प रहा,
    किससे कहूं मै मन की वेदना |
    तनो के तीर मारकर,
    छोड़ दो मेरे दिल को यूँ भेदना |

  • ज़िन्दगी

    ज़िन्दगी तेरा शुक्रिया,
    प्यारी सी सुबहे दी
    तारों भरे आसमां का
    आंचल दिया
    खुशनुमा, हवाओं से सरोबार्
    जो किया….
    सोने चांदी के चम्मच ना सही
    धूप की चुनौतियों भरे रास्तों पे..
    चलने का साहस ,जो दिया…
    जीवन की सांसों पर,
    कर्ज है तेरा…
    ज़िन्दगी तूने मुझे ,
    है सब कुछ दिया……

  • ज़िन्दगी

    ज़िन्दगी तेरा शुक्रिया,
    प्यारी सी सुबहे दी
    तारों भरे आसमां का
    आंचल दिया
    खुशनुमा, हवाओं से सरोबार्
    जो किया….
    सोने चांदी के चम्मच ना सही
    धूप की चुनौतियों भरे रास्तों पे..
    चलने का साहस ,जो दिया…
    जीवन की सांसों पर,
    कर्ज है तेरा…
    ज़िन्दगी तूने मुझे ,
    है सब कुछ दिया……

  • हम ना बदल पाएँ

    मुस्किल हुआ दिल को समझाना
    मुस्किल हुआ रूठोंं को मनाना
    कितना बदल गया ये ज़माना
    पर हम ना बदल पाएँ
    पर हम ना बदल पाएँ
    तुझसे बिछड़ के ज़िंदा हूँ ये मेरी फूटी किस्मत है
    मिले दो दिल तो जुदा कर देना ये दुनियाँ की फितरत है
    मुझसे जुदा होके सम्हल गए तुम
    पर हम ना सम्हल पाएँ
    कितना बदल गया ये ज़माना
    पर हम ना बदल पाएँ

  • बाल गीत

    तूफानों से लड़ना होगा ,
    कांटों पर भी चलना होगा
    फूलों सा महकना होगा,
    सूरज का चमकना होगा,
    दुनिया को बदलना होगा ,
    जग से आगे चलना होगा ।

    १.भ्रष्टाचार घोटालों ने हम सबको पीछे फेंक दिया,
    अगवा और डकैती ने दुख चैन सभी का लूट लिया।
    भ्रष्टाचार मिटाना होगा ,
    शांति मंत्र सिखाना होगा ,
    चोर,लुटेरे, डाकू सब का तांडव हमें मिटाना होगा।

    २. आन तिरंगा मान तिरंगा समझो तो है जान तिरंगा ,
    लहर -लहर लहराना होगा ,
    परचम फिर फहराना होगा ।
    “बीता काल बड़ा था मुश्किल ,
    ना धरती अंबर पर हक”
    भूल गए जो बलिदानों को ,
    उनको याद दिलाना होगा ,
    बलिदानों के अंगारों फिर से हमें सुलगाना होगा।

    ३. साक्षरता की बन मशाल,
    जग को फिर आज सिखाना होगा,
    स्वच्छ रहो आबाद रहो ,
    यह ज्ञान का दीप जलाना होगा ।
    देश प्रेम में जलना होगा,
    हमको कुंदन बनना होगा ,
    तूफानों से लड़ना होगा ,
    कांटो पे भी चलना होगा।
    फूलों सा महकना होगा, सूरज सा चमकना होगा ।
    दुनिया को बदलना होगा, जग से आगे चलना होगा ।

    निमिषा सिंघल

  • बाल गीत

    तूफानों से लड़ना होगा ,
    कांटों पर भी चलना होगा
    फूलों सा महकना होगा,
    सूरज का चमकना होगा,
    दुनिया को बदलना होगा ,
    जब से आगे चलना होगा ।

    १.भ्रष्टाचार घोटालों ने हम सबको पीछे फेंक दिया,
    अगवा और डकैती ने दुख चैन सभी का लूट लिया।
    भ्रष्टाचार मिटाना होगा ,
    शांति मंत्र सिखाना होगा ,
    चोर,लुटेरे, डाकू सब का तांडव हमें मिटाना होगा।

    २. आन तिरंगा मान तिरंगा समझो तो है जान तिरंगा ,
    लहर -लहर लहराना होगा ,
    परचम फिर फहराना होगा ।
    “बीता काल बड़ा था मुश्किल ,
    ना धरती अंबर पर हक”
    भूल गए जो बलिदानों को ,
    उनको याद दिलाना होगा ,
    बलिदानों की अंगारों को फिर से हमें सुलगाना होगा।

    ३. साक्षरता की बन मशाल,
    जग को फिर आज सिखाना होगा,
    स्वच्छ रहो आबाद रहो ,
    यह ज्ञान का दीप जलाना होगा ।
    देश प्रेम में जानना होगा हमको कुंदन बनना होगा ,
    तूफानों से लड़ना होगा ,
    कांटो पे भी चलना होगा।
    फूलों सा महकना होगा, सूरज सा चमकना होगा ।
    दुनिया को बदलना होगा, जब से आगे चलना होगा ।

    निमिषा सिंघल

  • बाल गीत

    तूफानों से लड़ना होगा ,
    कांटों पर भी चलना होगा
    फूलों सा महकना होगा,
    सूरज का चमकना होगा,
    दुनिया को बदलना होगा ,
    जब से आगे चलना होगा ।

    १.भ्रष्टाचार घोटालों ने हम सबको पीछे फेंक दिया,
    अगवा और डकैती ने दुख चैन सभी का लूट लिया।
    भ्रष्टाचार मिटाना होगा ,
    शांति मंत्र सिखाना होगा ,
    चोर,लुटेरे, डाकू सब का तांडव हमें मिटाना होगा।

    २. आन तिरंगा मान तिरंगा समझो तो है जान तिरंगा ,
    लहर -लहर लहराना होगा ,
    परचम फिर फहराना होगा ।
    “बीता काल बड़ा था मुश्किल ,
    ना धरती अंबर पर हक”
    भूल गए जो बलिदानों को ,
    उनको याद दिलाना होगा ,
    बलिदानों की अंगारों को फिर से हमें लगाना होगा।

    ३. साक्षरता की बन मशाल,
    जग को फिर आज सिखाना होगा,
    स्वच्छ रहो आबाद रहो ,
    यह ज्ञान का दीप जलाना होगा ।
    देश प्रेम में जानना होगा हमको कुंदन बनना होगा ,
    तूफानों से लड़ना होगा ,
    कांटो पे भी चलना होगा।
    फूलों सा महकना होगा, सूरज सा चमकना होगा ।
    दुनिया को बदलना होगा, जब से आगे चलना होगा ।

    निमिषा सिंघल

  • सूल होत नवनीत देखि मेरे, मोहन के मुख जोग

    जब कृष्णा को अक्रूर जी मथुरा ले जाते है, तो जशोदा मां कहती है,
    “सूल होत नवनीत देखि मेरे, मोहन के मुख जोग|”

    तब मां की सह्र्दयता अपने ममतामयी रूप में प्रस्तुत होती है| (सूरदास जी के शब्दों में माता यशोदा कह रहीं हैं- सखी!) यद्यपि लोग मेरे मन को समझाते हैं, तथापि मेरे मोहन के मुख योग्य मक्खन देखकर मुझे वेदना होती है। भला, कौन उसे सबेरे उठने पर बिना माँगे मक्खन और रोटी देगा और कौन मेरे उस कुँवर कन्हाई को क्षण-क्षण में गोद लेगा? पथिक! जाकर कहना कि तुम दोनों भाई बलराम और कृष्ण (अब) घर आ जाओ। हे श्यामसुन्दर! जिसके मेरे-जैसी माता है, वह क्यों दुःखी हो ?

    जद्यपि मन समुझावत लोग ।
    सूल होत नवनीत देखि मेरे, मोहन के मुख जोग ।।
    प्रात काल उठि माखन-रोटी, को बिन माँगें दैहै।
    को मेरे वा कान्ह कुँवर कौं, छिन-छिन अंकम लैहै।।
    कहियौ पथिक जाइ, घर आवहु, राम-कृष्न दोउ भैया ।
    सूर स्याम कित होत दुखारी, जिन कें मो-सौ मैया ।।

  • मेरी जिंदगी

    मेरी जिंदगी अब उलझ गई
    मेरी हर खुशी अब बिखर गई २
    अब क्यों मैं करू किसी से गिला
    जो था किस्मत में वही तो मिला
    जो…….था किस्मत में …….वही तो मिला
    .
    .
    .
    इस दुनियाँ से कुछ ना चाहूँ
    मेरे रब से बस इतना पूछना चाहूँ
    मेरा रब क्यों तु मुझसे रूठा लगे
    मेरा हर सपना अब टूटा लगे
    मैं गाऊँ अगर कोई गीत तो सब झूठा लगे
    मेरी जिंदगी अब उलझ गई
    मेरी हर खुशी अब बिखर गई
    मेरी हर खुशी अब ……..बिखर गई

  • मेरी जिंदगी

    मेरी जिंदगी अब उलझ गई
    मेरी हर खुशी अब बिखर गई २
    अब क्यों मैं करू किसी से गिला
    जो था किस्मत में वही तो मिला
    जो…….था किस्मत में …….वही तो मिला
    .
    .
    .
    इस दुनियाँ से कुछ ना चाहूँ
    मेरे रब से बस इतना पूछना चाहूँ
    मेरा रब क्यों तु मुझसे रूठा लगे
    मेरा हर सपना अब टूटा लगे
    मैं गाऊँ अगर कोई गीत तो सब झूठा लगे
    मेरी जिंदगी अब उलझ गई
    मेरी हर खुशी अब बिखर गई
    मेरी हर खुशी अब ……..बिखर गई

  • रिश्ता

    बढ़ती रात के साथ रजनीगन्धा महकता है
    बिन लिबास की खुशबू से सारा समा बहकता है।
    आज जो तू ने बिताए खिलखिलाते पल,
    वो आकर तुझे ज़रूर हँसाएँगे कल।
    दुनिया की परवाह में अपना वक्त जा़या न करना;
    लोग क्या कहेंगे इस ख़याल से आँखें न भरना।
    कौन कहता है बादलों में छुपा चाँद खूबसूरत नहीं?
    सच मान हर रिश्ते को नाम की ज़रूरत नहीं!

  • वो कौन है……

    ये प्यारी मुस्कान आपकी पहचान बन जाए
    खिलता चेहरा लोगो के लिए ये शराब बन जाए
    ये होठ ये पलकें और ये गाल मानो मुझसे यह कह रहे हैं
    की खोजा इन सब में और तू मेरा गुलाम बन जाए

    ये झरने ये परिंदे और हवा के झोंके,
    सब तेरे साथ चलने लगेंगे
    तुझसे मेरी दोस्ती देख ये जमाने वाले
    मुझसे जलने लगेंगे
    बस तू कभी खफ़ा होने की बात न
    करना मेरी दिल-ए-धड़कन
    वरना तेरे साथ बिताए वो हसीं पल,
    मेरे दिल को चीरने लगेंगे

    दिल देने की हद हो तो ये दिल खोल के रख दूं
    रूह रूह प्यासी है मेरी कहो तो जहां मे बयां कर दूं
    मेरी दोस्ती का प्यार कबूल कर ए हुस्न-ए-मलिका
    हस कर कह दो तो ये दुनिया तेरे नाम लिख दूं

    मेरे गीत की वो मेहक कौन है
    मुसकान से कत्ल की चहक कौन है
    मेरी कलम की न जाने वह मोहब्बत है
    फिर क्यूँ वह सवाल है ,कि वो कौन है ……..

  • नव वर्ष

    “नव वर्ष की शुभकामनाएं ”
    —————————
    नव वर्ष की शुभकामनाएं /
    बच्चों में उत्साह जगाएं |
    प्रांगन मंदिर संस्कृति अपनाएँ /
    देवी को सुमधुर गीत सुनाएँ ||

    भगवा ध्वज की पताकायें |
    तिलक चन्दन टीका लगाएं ?
    नव वर्ष धूम से मनाएं |
    देवी को सुमधुर गीत सुनाएँ ||

    शंख ध्वनि मृदंग बजाएं /
    पुरुषोत्तम राम को याद दिलायें |
    विक्रमादित्य का विक्रमी मनाएं /
    देवी को सुमधुर गीत सुनाएँ ||

    डा ० केशव राव जयंती जगाएं |
    झूले लाल को भी ना भुलाएँ /
    नव वर्ष की शुभकामनाएं |
    देवी को सुमधुर गीत सुनाएँ || –
    सुखमंगल सिंह

  • कुंभ

    कुंभ कुंभ ये है. कुंभ कुंभ कुंभ.
    कुंभ कुंभ कुंभ. कुंभ कुंभ कुंभ . कुंम्म्मभ।
    संगम तट पर प्रयागराज में,
    ये है कुंभ कुंभ कुंभ. कुंभ कुंभ कुंभ.
    कुंभ कुंभ कुंभ. कुंम्म्मभ।
    श्रिवेणी में शाही स्नान.
    देखता पूरा ब्रह्मांड,
    अदभूत नज़ारे.
    भस्म रमाये,
    भक्तों का ये भव्य रूप.
    देख भगवन अमृत बरसाए,
    हर हर महादेव ……
    ये है भक्तों का… कुंभ कुंभ कुंभ.
    कुंभ कुंभ कुंभ. कुंभ कुंभ कुंभ. कुंम्म्मभ।
    ध्वजा, पालकी,
    ढोल़, नगाड़े,
    अस्त्र- शस्त्र.
    और ज़यज़यकारे,
    भक्ति भाव की छटा बिख़ेर .
    त्रिवेणी के घाट पे,
    हर हर महादेव……..
    ये है साधु- संतों का… कुंभ कुंभ कुंभ.
    कुंभ कुंभ कुंभ. कुंभ कुंभ कुंभ. कुंम्म्मभ।
    गंगा,यमुना
    और सरस्वती में .
    आस्था की ढुबकी लगाने ,
    चले आए आदिकाल से.
    कल्पवास में.
    आध्यात्मिक पर्व मनाने,
    धरती पे ये भव्य नजाऱे.
    विभिन्नता में एकता के,
    हर हर महादेव…….
    ये है मानवता का… कुंभ कुंभ कुंभ.
    कुंभ कुंभ कुंभ. कुंभ कुंभ कुंभ. कुंम्म्मभ।
    भारत दर्शन.
    जीव़न दर्शन .
    ये है ब्रह्मांड दर्शन,
    कह़ी नहीं.
    ये है कुंभ दर्शन.
    ये कुंभ दर्शन है.
    भारत दर्शन,
    हर हर महादेव…….
    ये है भारत संस्कृति का… कुंभ कुंभ कुंभ.
    कुंभ कुंभ कुंभ. कुंभ कुंभ कुंभ. कुंम्म्मभ।

  • अच्छा किया तुमने याद दिला दिया……..

    अच्छा किया तुमने याद दिला दिया……..

    हक नही मुझे कोई फ़रमाइश करने का,
    हक नही मुझे कोई बेबुनियाद सी जिद्द करने का,
    सिर्फ तुम्हारी हर ख़्वाहिश पूरी करनी हैं मुझे….
    कोई हक नही मुझे अपनी बात मनवाने का,
    अच्छा किया तुमने याद दिला दिया…..!!!

    हक नही मुझे कोई आरज़ू रखने का,
    हक नही मुझे किसी की चाहत पाने का,
    तुम्हारे हर सपने को पूरा करना हैं मैंने….
    कोई हक नही मुझे ख़्वाब देखने का,
    अच्छा किया तुमने याद दिला दिया…!!!

    कोई हक नही मुझे खिलखिलाने का,
    कोई हक नही मुझे आँसू बहाने का,
    तुम्हारी हर ख़ुशी गम का ध्यान रखना हैं मुझे…..
    कोई हक नही मुझे मेरी ख़ुशियाँ पाने का,
    अच्छा किया तुमने याद दिला दिया….!!!

    कोई हक नही मुझे खुलकर बोलने का,
    कोई हक नही मुझे चुप रहने का,
    तुम्हारी हर बात को मानना हैं मुझे….
    कोई हक नही मुझे अपनी राय देने का,
    अच्छा किया तुमने याद दिला दिया….!!!

    कोई हक नही मुझे अपनों को याद करने का,
    कोई हक नही मुझे अपनों से मिल पाने का,
    सिर्फ तुम्हारे घर में रहना हैं मुझे…..
    कोई हक नही मुझे इसे अपना घर मानने का,
    अच्छा किया तुमने याद दिला दिया….!!!

    अच्छा किया तुमने याद दिला दिया….!!!

  • Tera peyar

    Teri bo najr jo ek ham par mehrban hui ham to lela ban gaye tere chaht mai ham fakir ho gaye

  • यादें

    बेवजह, बेसबब सी खुशी जाने क्यों थीं?
    चुपके से यादें मेरे दिल में समायीं थीं,
    अकेले नहीं, काफ़िला संग लाईं थीं,
    मेरे साथ दोस्ती निभाने जो आईं थीं।

    दबे पाँव गुपचुप, न आहट ही की कोई,
    कनखियों से देखा, फिर नज़रें मिलाईं थीं।
    मेरा काम रोका, हर उलझन को टोका,
    मेरे साथ वक्त बिताने जो आईं थीं।

    भूले हुए किस्से, कुछ टुकड़े, कुछ हिस्से
    यहाँ से, वहाँ से बटोर के ले आईं थीं।
    हल्की सी मुस्कान को हँसी में बदल गईं
    मेरे साथ ठहाके लगाने जो आईं थीं।

    वो बातों का कारवाँ चला तो थमा नहीं;
    गुज़रे कल को आज से मिलाने जो आईं थीं।
    बेटी से माँ तक के लम्बे सफ़र में
    छोटी छोटी दूरियाँ इन्होंनें मिटाईं थीं।

  • सरहद के पहरेदार

    मीठी सी है वो हँसी तेरी, आँसू तेरा भी खा़रा है,
    उन उम्र-दराज़ नज़रों का तू ही तो एक सहारा है।
    मेंहंदी से सजी हथेली भी करती तुझको ही इशारा है,
    कानों में गूँजी किलकारी ने पल-पल तुझे पुकारा है।

    ये सारे बँधन छोड़ के तू ने रिश्ता एक निभाया है,
    सरहद के पहरेदार तुझे पैगा़म सरहद से आया है।

    जब-जब धरती माँ जलती है, संग-संग तू भी तो तपता है;
    सर्द बर्फ़ के सन्नाटे में मीलों-मील भी चलता है।
    दूर ज़मीं से, नील गगन में बेखौ़फ़ उड़ानें भरता है,
    सागर की अल्हड़ लहरों से तू कितनी बातें करता है!

    हर मौसम की तल्ख़ी को तू ने तो गले से लगाया है,
    सरहद के पहरेदार तुझे पैग़ाम सरहद से आया है।

    गुम नींदें हैं, आराम कहाँ, चैन भी कोसों दूर रहे
    ग़ैरों की खातिर क्यों दूरी, तू अपनों से चुपचाप सहे?
    दुश़्मन की गोली का किस्सा, वादी में बहता खून कहे,
    पर तेरी कहानी हवाओं में क्यों गुमसुम हो खा़मोश बहे?

    ये मुल्क कयों भूले बैठा है कि तू इसका सरमाया है,
    सरहद के पहरेदार तुझे पैग़ाम सरहद से आया है।

    इस मुल्क को तेरी याद आए, कुछ महीनों की तारीखों पर,
    कुछ सोचा, कुछ लव्ज़ कहे, कुछ फूल रखे तस्वीरों पर।
    क्यों पीछे खड़ी है तेरी ज़रूरत मतलब की फ़हरिस्तों पर?
    जब तेरे लिए कुछ कर न सके, इल्ज़ाम लगा तकदीरों पर।

    ये वही वतन है जिसने तुझको अक़्सर मुजरिम ठहराया है,
    सरहद के पहरेदार तुझे पैग़ाम सरहद से आया है।

  • याद

    गहरा है ये मेरा प्यार,
    बहना करती है इंतज़ार
    जा बसे तुम विदेश भैया
    कैसे बांधूंगी अब राखी
    राखी के धागों में
    पिरोये प्यार के मोती
    तेरा सुखी रहे संसार
    मत भूलना मेरा प्यार
    आया राखी का त्यौहार
    बहना करती है इंतज़ार

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • कान्हा

    प्रेम की डोरी से,यशोदा की लोरी से
    बंध गए नन्द किशोर

    छल कीन्हे बड़े कान्हा,प्यारी मईया से,
    बहुत प्रेम है इनको, ग्वाल औ गैया से

    माखन चोरी से,ब्रज की होरी से
    बंध गए नन्द किशोर

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • देश प्रेम

    मेरा देश प्रेम,मन है बेचैन
    कब शांति सन्देश मिलेंगे

    माटी से प्रेम,
    इसकी सुगंध में रमे हैं

    होऊं निहाल,
    जब भारत दर्श किये हैं

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • साज

    तुम साज दो,में स्वर मिलाऊ
    आवाज़ दो ,संग संग आ जाऊँ

    लहर लहर आभास तेरा
    कश्ती दो तो पार हो जाऊँ

    तुम साज दो,में स्वर मिलाऊ

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • मेघ

    उमड़ घुमड़ कर छाये घटा
    देखो चहुँ ओर
    पंख फैलाय,नाचे वन में मोर
    ये मधुमास है प्यारा

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • सावन

    अम्बर बरसे धरती भींगे
    नाचे श्रष्टि सारी
    सावन की बरखा प्यारी

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • Aazadi

    “आधी रात की आज़ादी की सुबह अभी तक मिली नही थी,
    दीवारें कई बार हिली,
    बुनियादें अब तक हिली नहीं थीं ,
    गोरों की गुलामी से निकले तो,
    कुछ दीमक ऐसे लिपट गये,
    समझ सके ना अर्थ आज़ादी का,
    ये शब्दों तक ही सिमट गये थे,
    दोष नही था गैरो का,
    अपनों से भारत हार गया था,
    आज़ादी की खुशियों को ,
    बँटवारा ही मार गया था,
    मख़मल पर जो बैठे थे,
    वो कब फूलो के पार गये?
    जिस देशभक्त ने लहू बहाया,
    वो मरघट के संसार गये,
    तामस बढ़ता जाता था,
    नित दिन ही धकेल प्रभा को,
    सत्ता की कुर्सी ने रौंदा,
    जाने कितनी प्रतिभा को,
    ईमानदारों का जीना मुश्किल था,
    बेईमानों के बोलबाले थे,
    दोनों हाथों से घोटाले में,
    लिपटे जीजा साले थे,
    उस पेड़ की जड़ को काट रहे थे,
    जिसकी डाली पर बैठे थे,
    ईमान बहाकर नाली में,
    करतूतें काली कर बैठे थे,
    गंगा की पावन धरती पर,
    धर्मों का ढोंग रचाते थे,
    कुछ वोटो,नोटों की खातिर,
    दंगे फ़साद करवाते थे,
    भाई को भाई से आपस में लड़वाते थे,
    किस्मत की दुहाई देते थे,
    तक़दीर की चर्चा करते थे,
    उन्हें लाल कहें या दलाल कहें,
    जो भारत माँ को बेचा करते थे,
    वीर शहीदों की कुर्बानी,
    का नेता मोल लगाते थे,
    सेंक चिताओं पर रोटी,
    राजनैतिक भूख मिटाते थे,
    कैसी आज़ादी संतानें ,
    भूखे नंगे सोती थीं,
    देख विवशता भारत माता,
    सिसक-सिसक के रोती थीं,
    कुछ तलवारें सोयीं थी,
    तब भी बंद म्यानों में,
    उलझे थे हम जाति -धर्म,
    गीता और कुऱानो में,
    मोदी जी के गुजरात का मॉडल,
    हम सबको भाया,
    ना बंदूक उठायी हमने,
    ना तलवार चलाया,
    मतदाता की ताकत क्या है,
    गद्दारो को दिखलाया,
    नयी किरण के साथ,
    परिवर्तन की बारी आयी है,
    एक कड़क चाय की प्याली ने,
    सबकी नींद उड़ायी है,
    सीख लिया लड़ने का तरीका,
    अब असली आजादी पायेंगे,
    भारत के उजड़े चमन को,
    मिलकर साथ सजायेंगे,
    जिसने हमको बहकाया था,
    उसको सबक सीखा देंगे,
    निज राष्ट्र की रक्षा में हम,
    अपना सर्वस्व लूटा देंगे,
    धरती माँ के सीने पर,
    अब कोई वार नही होगा,
    हिंदुस्तान का मातम में,
    कोई त्योहार नही होगा,
    चोरी घूसखोरी का,
    अब बाज़ार नहीं होगा,
    वीरों की धरती भारत में ,
    भ्रस्टाचार नही होगा “

  • बरखा

    बरखा जरा प्यार बरसा दे
    कब से प्यासा अंतर है

    तू प्यास बुझा दे
    बरखा जरा प्यार बरसा दे

    बरस बरस बरखा मेरी
    कितने तुमको बरस गए

    सिंधु की एक बूँद को
    हम कबसे तरस रहे

    तू सिंधु से बिंदु मिला दे
    बरखा जरा प्यार बरसा दे

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • स्वर मैं स्वर मिलाओ

    मैं गा रहा हूं,
    तुम स्वर मैं स्वर मिलाओ

    मैं जा रहा हूँ ,
    तुम संग संग आजाओ

    जाऊंगा न छोड़ कर,
    गाऊंगा न बिन तेरे

    मैं भवर मैं,
    तुम पतवार बनके आओ

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • संसार

    संसार मैं रहना है,
    संसार मैं जीना है

    मिलती हैं कुछ खुशियां,
    कुछ गम भी पीना है

    कभी होंठों पर मुस्कान
    कभी आंसू पीना है

    संसार मैं रहना है
    संसान मैं जीना है

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • गीत

    मैं गीत क्या रचूंगी,
    तुम प्रेरणा न बनते

    मेरे निष्ठुर उर मैं,
    वन वेदना न उठते

    मैं गीत क्या रचूंगी
    तुम प्रेरणा न बनते

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • गीत — तुम नहीं तो ….. !

    तुम नहीं, तो…… !
    : अनुपम त्रिपाठी

    तुम नहीं; तो ग़म नहीं ।
    ये भी क्या कुछ कम नहीं ।।
    तुम जो थे, तो ये भी था और वो भी था
    हर तरफ पसरी पड़ी रहती ……… व्यथा
    दर्द–—की-—-नदियां कई–बहतीं–यहां
    फिर भी कोरे मन में कोई संगम नहीं
    तुम नहीं; तो ………

    कई उदास दिन ओढ़कर, काट ली हैं तनहा रातें
    साथ थे, तो चुप भली थी, गूंजती अब बिसरी यादें
    सूनी पलकों पे तने हैं—-स्वप्न के वितान सारे
    बुन रहीं–आंखें समन्दर, फिर भी कोरें नम नहीं
    तुम नहीं; तो ……..

    भूल कर भी भूलना, अब तलक सीखा नहीं
    याद : मीठा–सा ज़हर है, कड़वा या तीखा नहीं
    इस तरह से दिन जुदाई के, ये सारे कट रहे
    लग रहा है–सफ़र खत्म पर, तुम नहीं या हम नहीं
    तुम नहीं; तो ……..

    कई कहानी कै़द हैं , इन बिस्तरों की सलवटों में
    आह–सिसकी और समर्पण, चींखते अब करवटों में
    थ….र….थ….रा….ते लब खामोशी के नहीं कुछ बोलते
    आंख : पत्थर– स्वप्न : बंज़र, रूठे सुर : सरगम नहीं
    तुम नहीं; तो …………..

    हम मिलन की आस लेकर, दिन–पहाड़ों पर चढ़े
    रातें : तारे गिन के काटीं, विरह–ज्वाला में जले
    मन की वल्गा थाम कैसे, कामना के अश्व को
    किया वश में, हमने ‘अनुपम’,किए क्या-क्या जतन नहीं
    तुम नहीं; तो ……………
    *****#anupamtripathiG*****

  • चल वहां

    चल वहां जहाँ नहीं गम
    तुम हो वहां और बस हम

    सागर सी गहरी जीवन गाथा
    अम्बर तक है ,प्रीत हमारी

    साथ चलेंगे हर पल हर दम

    ऐसे चलेंगे संग तुम्हारे
    अम्बर संग जैसे हो तारे

    साथ रहेंगे हम जन्मो तक
    चल वहां जहाँ नहीं गम

    -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-

  • गीत

    चल वहां जहाँ नहीं गम
    तुम हो वहां और बस हम

    सागर सी गहरी जीवन गाथा
    अम्बर तक है ,प्रीत हमारी

    साथ चलेंगे हर पल हर दम

    ऐसे चलेंगे संग तुम्हारे
    अम्बर संग जैसे हो तारे

    -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-

  • A pray for india

    जब तक है जीवन तब तक इस की सेवा ही आधार रहे

    विष्णु का अतुल पुराण रहे नरसिंह के रक्षक वार रहे

    हे प्राणनाथ! हे त्रयंबकम! शिव शंभू के शिव सार रहे

    हम रहे कभी ना रहे मगर इसकी प्रभुता का पार रहे

    शेखर के वह उद्गार रहे अब्दुल हमीद सम ज्वार रहे

    हे पवनपुत्र! हे मारुति! भारत ही बारंबार रहे

    अब्दुल गफ्फार का शांति मार्ग बूढ़े जफर की तलवार रहे

    अब्दुल कलाम के प्राण बसे हिंदू मुस्लिम समभार रहे

    कण कण मिट्टी में वसुंधरा बिस्मिल अशफाक सा प्यार रहे

    हे जीवनदाता ! प्राणपति! जीवन का अनुपम सार रहे

    हे परमपिता !पालनकर्ता !भारत की जय जयकार रहे

    ना जाति-धर्म के दंगे हो तुष्टि का ना आधार रहे

    हर नारी हो माता बेटी बहना का अनुपम प्यार रहे

    लक्ष्मी दुर्गा अनुसुइया सम हर नारी का पदभार रहे

    सद्काम और सद्वृत्ति सहित मानव में मधुरिम भाव रहे

    मानव का मानव से मानव के जैसा ही व्यवहार रहे

    हे आदि शक्ति ! हे नंदलाल ! भारत की जय जयकार रहे

    भ्रष्टाचारी पापाचारी व्यभिचारी का दुर्भाव रहे

    व्यापम चारा 2G जैसा ना कोई काला काम रहे

    भारत हो संस्कार समता का व कायम ईमान रहे

    हर प्रीत प्रात कृष्णा जैसी रावण सा ज्ञान अपार रहे

    मर्यादापुरुषोत्तम करुणानिधान सा हर नर का व्यव्हार रहे

    हे ब्रहमचारिणी ! जगदम्बा ! भारत की जय जयकार रहे

    हम बनें सृष्टि के गुरुवर फिर हमसे शोभित संसार रहे

    भारत हो ताकत परमाणु अग्नि पृथ्वी आकाश रहे

    अब्दुल कलाम सा हर बालक परमाणु शक्ति विस्तार करे

    हम विजय रहे हम जफर बने अर्जुन जैसा धंनुधार रहे

    हे नीलकंठ !हे महाकाल ! भारत की जय जयकार रहे

    ——- विकास चौधरी ‘सजल’

  • क्या था क़सूर मेरा??????

    क्या था क़सूर मेरा?????
    (पीड़ित बेटी आसिफ़ा के सवाल)

    1.गहन गिरवन सघन वन में
    बहुत खुश अपने ही मन मे
    मूक पशु पक्षी के संग में
    था बसा परिवार मेरा…..
    पूछना में चाहती हु क्या था क़सूर मेरा ?????
    2.बेटी बन में घर तुम्हारे आ गयी थी
    खुशियां बन परिवार जन पर छा गयी थी
    दो समय का भोज था और कुछ थे अपने
    थी भली वह झोपड़ी न थे महल सपने
    था ये हंसता खेलता संसार मेरा ……
    पूछना में चाहती हु क्या था क़सूर मेरा ?????
    3.पापा की में शान थी और प्राण माँ का
    उनके अधरों की हंसी अभिमान माँ का
    कौन है अपने पराए न जानती में
    सबका पाया प्यार सबको मानती में
    फिर कौन थे जो कर गए ये हाल मेरा
    पूछना में चाहती हु क्या था क़सूर मेरा ?????
    4.ऐ मेरे ईश्वर बता तू तब कहाँ था
    तेरे घर तुझको पुकारा तू तब कहाँ था
    लेके तेरा नाम मैंने दम है तौड़ा
    द्रोपदी थी तेरी मुझसे मुँह क़्यों मोड़ा
    क्या कोई नाता न था प्रभु मुझसे तेरा
    पूछना में चाहती हु क्या था क़सूर मेरा ??????
    पंकज सेन
    8236925300

  • क्या था क़सूर मेरा??????

    क्या था क़सूर मेरा?????
    (पीड़ित बेटी आसिफ़ा के सवाल)

    1.गहन गिरवन सघन वन में
    बहुत खुश अपने ही मन मे
    मूक पशु पक्षी के संग में
    था बसा परिवार मेरा…..
    पूछना में चाहती हु क्या था क़सूर मेरा ?????
    2.बेटी बन में घर तुम्हारे आ गयी थी
    खुशियां बन परिवार जन पर छा गयी थी
    दो समय का भोज था और कुछ थे अपने
    थी भली वह झोपड़ी न थे महल सपने
    था ये हंसता खेलता संसार मेरा ……
    पूछना में चाहती हु क्या था क़सूर मेरा ?????
    3.पापा की में शान थी और प्राण माँ का
    उनके अधरों की हंसी अभिमान माँ का
    कौन है अपने पराए न जानती में
    सबका पाया प्यार सबको मानती में
    फिर कौन थे जो कर गए ये हाल मेरा
    पूछना में चाहती हु क्या था क़सूर मेरा ?????
    4.ऐ मेरे ईश्वर बता तू तब कहाँ था
    तेरे घर तुझको पुकारा तू तब कहाँ था
    लेके तेरा नाम मैंने दम है तौड़ा
    द्रोपदी थी तेरी मुझसे मुँह क़्यों मोड़ा
    क्या कोई नाता न था प्रभु मुझसे तेरा
    पूछना में चाहती हु क्या था क़सूर मेरा ??????
    पंकज सेन
    8236925300

  • अभय गान अपने वाणी का मै स्वर आज सुनाता हूँ

    अभय गान अपने वाणी का मै स्वर आज सुनाता हूँ
    ले समसीर लेखनी की मै रण नवगीत सुनाता हूँ
    माँ वीणा पाणी के चरणो मे मै शीश झुकाता हूँ
    माँ रणचंडी के झंकृत की मै झनकार सुनाता हूँ

    मै गायक हू नही किसी प्रेमी के अमर कहानी
    नही किसी लैला , मंजनू के अधरो भरी जवानी का
    न ही कवि हू मै , रांझा के अमर प्रेम कुर्बानी का
    मै तो चारण हूँ झाँसी की रानी की कुर्बानी का

    मै यथार्थ कवि हूँ, भारत के अमर वीर नवदूतो का
    मै कवि हूँ राजस्थानी उस राणा के करतूतो का
    मै तो कवि हूँ बीर शिवा सम जंगी अमर सपूतो का
    मै कवि हूँ तलवारो का, कुर्बानी के राजपूतो का

    कर्जदार हूँ , गुरू गोबिंद की बलिदानी परिपाटी का
    मेरा गीत चरण रज है बस , भारत माँ की माटी का
    मेरा गीत चरण रज है बस, भारत माँ की माटी का

  • “मैं ढूंढता रहा”

    “मैं ढूंढता रहा”
    ::::::::::::::::::
    मैं ढूंढता रहा,
    उस शून्य को,
    जो मिलकर असंख्य गणना बनते ।
    मैं ढूंढता रहा ,
    उस गाथा को ,
    जिस की अमर प्रेम हर दिशाओं में गूंजते ।
    और मैं ढूंढता रहा ,
    उस मेघ चंचल मन को
    जो अमृत बन वर्षा है करते ।
    मैं ढूंढता रहा ,
    उस पवन को
    जो कलियों की महक ले उन्मुक्त बिचरते ।
    मैं ढूंढता रहा ,
    उस बावरी चंचल मन को ,
    जो मन में बसा प्रीत है करते ।
    अंततः
    मैं ढूंढता रहा स्वयं को,
    जो स्वयं से हर वक्त दूर है रहते।
    मिला न,
    अब तलक कोई,
    जो मेरे सवालों को समझते ?
    मैं ढूंढता रहा।
    :::::::::::::::::::

    स्वरचित,मौलिक
    योगेन्द्र कुमार निषाद
    घरघोड़ा (छ ग) 496111
    7000571125

  • हे!री सखी कैसे भेजूं

    “गीत”
    ::::::::::::
    हे!री सखी कैसे भेजूं ,
    प्रिय को प्रणय निवेदन।
    दूर देश विदेश भय हैं
    वो मन का मेरे प्रिय साजन।
    हे! री सखी कैसे करू मै,
    स – श्रृंगार मन यौवन।
    हे!री सखी कैसे भेजूं ,
    प्रिय को प्रणय निवेदन।
    सावन आ कर बहक गया,
    दामनि लगे है मोहे डरावन।
    हे! री सखी कैसे पाऊँ मै,
    साजन का वो प्रिय आलिंगन।
    हे!री सखी कैसे भेजूं ,
    प्रिय को प्रणय निवेदन।
    जब – जब देखूं मैं दर्पण
    होता मन में है स्पंदन।
    हे! री सखी कैसे कहूं मैं
    भौरों का है गीत मनभावन।
    हे!री सखी कैसे भेजूं ,
    प्रिय को प्रणय निवेदन।
    पतझड़ आकर जिया जलाएं
    सूना हो गया है उप वन।
    हे ! री सखी कैसे बतलाऊं
    प्रीत मिलन बिन सूना जीवन।
    हे!री सखी कैसे भेजूं ,
    प्रिय को प्रणय निवेदन।

    ::::::::::::::::::::::

    योगेंद्र कुमार निषाद ,
    घरघोड़ा ,छत्तीसगढ़,४९६१११
    मो.७०००५७११२५

  • प्रणय निवेदन मेरे तू ही प्रीत है

    ✍?गीत ?✍

    प्रणय निवेदन मेरे तू ही प्रीत है।
    तू ही आरजू है तू ही मीत है।।
    रस्मे वफा की कसम
    तेरी याद है इस दिल मे
    सिवा नही कोई मेरे
    चाहत-ए-महफिल मे मेरे ख्वाहिश है तू तू ही गीत है । प्रणय निवेदन मेरे तू ही गीत है।।
    मेरी मुस्कान जानेजां
    मेरा तू ही नसीब है
    मन मे जो बसाया हूं
    वही ख्याले हबीब है
    मेरे नगमा-ए-नूर तू संगीत है।
    प्रणय निवेदन मेरे तू ही गीत है।।
    उम्मीद की किरण मेरी
    मेरी नयन का सुकून तू
    तू ही ख्वबो-खयाल मेरे
    ऊमंगो का नव जुनून तू
    मेरी महबूबा दिलबर मनमीत है।
    प्रणय निवेदन मेरे तू ही गीत है।।

    श्याम दास महंत
    घरघोडा
    जिला-रायगढ (छग)
    ✍??????✍

  • तुम देह नहीं तुम देहाकार हो

    तुम देह नहीं तुम देहाकार हो
    देह में हो देह से मगर पार हो

    क्या दिखायेगा रूप दर्पण तुम्हारा
    देखो अंतर में, खुलेगा राज सारा
    शाश्वत सौंदर्य ज्योति पारावार हो
    देह में हो देह से मगर पार हो.

    क्षणिक मौजों सा देह का उभार है
    मुखडे में देखे क्यों सौंदर्य-सार है
    भूले तुम, आत्मा का कैसे श्रंगार हो
    देह में हो देह से मगर पार हो.

    देख दर्पण ना जीवन गवां प्राणी
    ह्दय नगरी में उतर हो जा फानी
    ज्ञान रत्नों पूर्ण तेरे उदगार हो
    देह में हो देह से मगर पार हो.

    परख स्वयं को आत्मा खुद को मान
    आत्माओं का पिता, परमात्मा को जान
    ईश्वर स्वरूप  गुणों का भंडार हो
    देह में हो देह से मगर पार हो.

  • गीत

    “गीत”
    ::::::::::::
    हे!री सखी कैसे भेजूं ,
    प्रिय को प्रणय निवेदन।
    दूर देश विदेश भय हैं
    वो मन का मेरे प्रिय साजन।
    हे! री सखी कैसे करू मै,
    स – श्रृंगार मन यौवन।
    हे!री सखी कैसे भेजूं ,
    प्रिय को प्रणय निवेदन।
    सावन आ कर बहक गया,
    दामनि लगे है मोहे डरावन।
    हे! री सखी कैसे पाऊँ मै,
    साजन का वो प्रिय आलिंगन।
    हे!री सखी कैसे भेजूं ,
    प्रिय को प्रणय निवेदन।
    जब – जब देखूं मैं दर्पण
    होता मन में है स्पंदन।
    हे! री सखी कैसे कहूं मैं
    भौरों का है गीत मनभावन।
    हे!री सखी कैसे भेजूं ,
    प्रिय को प्रणय निवेदन।
    पतझड़ आकर जिया जलाएं
    सूना हो गया है उप वन।
    हे ! री सखी कैसे बतलाऊं
    प्रीत मिलन बिन सूना जीवन।
    हे!री सखी कैसे भेजूं ,
    प्रिय को प्रणय निवेदन।

    ::::::::::::::::::::::

    योगेंद्र कुमार निषाद ,
    घरघोड़ा ,छत्तीसगढ़,४९६१११
    मो.७०००५७११२५

  • Sapna

    Ek Sapne Ke Piche Bhaag Rahi Hu Main,
    Na Jane Yeh Sach Hoga Bhi Ya Nahi,
    Phir Bhi Umeed Ka Man Me Deep Jalaye,
    Chali Ja Rahi Hu Main,
    Ek Sapne Ke Piche…………………..

    Mera Yeh Sapna Sirf Sapna Nahi,
    Meri Khwaish Hai Yeh, Hai Yeh Meri Tamanna,
    Ya To Banega Mere Jivan Ka Sach,
    Ya Rahegi Sirf Ek Kalpana,
    Is Sapne Ko Na Jane Kitne Dino Se,
    In Ankho Me Paal Rahi Hu Main,
    Ek Sapne Ke Piche……………………….

    Andheri Rat Dekhi Hain Maine,
    To Ujale Savere Ko Bhi Dekha Hain,
    Jalte Diye Se Faili Roshni Dekhi Hain,
    To Uske Tale Chipe Andhere Ko Bhi Dekha Hain,
    Usi Roshni Ki Ek Kiran Ke Liye,

  • सावन का मुग्ध फुहार तू है

    सावन का मुग्ध फुहार तू है ।

    बूंदो की रमणीक धार तू है ।।

    कोमल वाणी मे खिली,

    आह! लचक सुरीली ।

    खनकती बोली मे ढली,

    ओह!आवाज सजीली

    सावन झड़ी मस्त बहार तू है ।

    सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।

    हवा की मादकता मधुर,

    सरसराहट मे निखरी अजब,

    बदन मे ऊमंग की सजी,

    कशमकशाहट अजब।।

    सावन की बेला साकार तू है ।

    सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।

    पानी मे नहाया यौवन,

    सांसो मे रफ्तार बढाये।

    दृश्य सावन मे लाजवाब,

    मन मे चाहते प्यार जगाये ।

    सावनी बारिशकी रसधार तू है ।

    सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।

     

  • क्षणिका

    क्षणिका ?:–

    जब गम सताता है,
    गाने मैं गुनगुनाता हूं ।
    जब ददं रुलाता है,
    तराने मैं सजाता हूँ ।।
    (1)
    जब रंज बढ आता है,
    रंगीला मन मै हो जाता हूं ।
    जब जख्म गहराता है,
    मस्ती मगन मै बो जाता हूँ।।
    (2)
    देती है पीड़ा जब चुभन,
    चुप्पी का राग बन जाता हूं ।
    व्यथा करती है जब भी आहत,
    प्यार का पराग बन जाता हूँ ।।
    (4)
    मालूम है मुझे इंसान हूँ मैं!
    मानवेत्तर ताग बन जाता हूँ ।
    मिलती है चुनौती जब संघर्ष की करमो का आग बन जाता हूँ।।
    ????
    ✍✍✍✍✍✍
    श्याम दास महंत
    घरघोडा (रायगढ )
    दिनांक 08 -03 -2018 ✍

  • गीत

    –:?गीत ?:-

    सावन का मुग्ध फुहार तू है ।
    बूंदो की रमणीक धार तू है ।।
    कोमल वाणी मे खिली,
    आह! लचक सुरीली ।
    खनकती बोली मे ढली,
    ओह!आवाज सजीली
    सावन झड़ी मस्त बहार तू है ।
    सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।
    हवा की मादकता मधुर,
    सरसराहट मे निखरी अजब,
    बदन मे ऊमंग की सजी,
    कशमकशाहट अजब।।
    सावन की बेला साकार तू है ।
    सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।
    पानी मे नहाया यौवन,
    सांसो मे रफ्तार बढाये।
    दृश्य सावन मे लाजवाब,
    मन मे चाहते प्यार जगाये ।
    सावनी बारिशकी रसधार तू है ।
    सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।
    ????
    ✍✍✍✍✍
    श्याम दास महंत
    घरघोडा (रायगढ )
    ✍✍✍✍
    दिनांक 09-03-2018
    —“”?”—

  • गीत

    –:?गीत ?:-

    सावन का मुग्ध फुहार तू है ।
    बूंदो की रमणीक धार तू है ।।
    कोमल वाणी मे खिली,
    आह! लचक सुरीली ।
    खनकती बोली मे ढली,
    ओह!आवाज सजीली
    सावन झड़ी मस्त बहार तू है ।
    सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।
    हवा की मादकता मधुर,
    सरसराहट मे निखरी अजब,
    बदन मे ऊमंग की सजी,
    कशमकशाहट अजब।।
    सावन की बेला साकार तू है ।
    सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।
    पानी मे नहाया यौवन,
    सांसो मे रफ्तार बढाये।
    दृश्य सावन मे लाजवाब,
    मन मे चाहते प्यार जगाये ।
    सावनी बारिशकी रसधार तू है ।
    सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।
    ????
    ✍✍✍✍✍
    श्याम दास महंत
    घरघोडा (रायगढ )
    ✍✍✍✍
    दिनांक 09-03-2018
    —“”?”—

  • स्वच्छ भारत

    स्वच्छ्ता हो प्राथमिकता
    स्वयं से शुरुआत करिए।

    स्वच्छ हो घर-बार अपना
    स्वच्छता हो सार अपना
    ग़र नहीं मिलता समय तो
    दीजिए इतवार अपना
    मामला सबसे जुड़ा है
    इसलिए फिर बात करिए,
    स्वयं से शुरुआत करिए।

    स्वच्छ्ता का ध्यान रखिए
    स्वच्छ्ता का ज्ञान रखिए
    इसलिए ही पाठ्यक्रम में
    इसका अब स्थान रखिए
    एक के बस की नहीं है
    मिल के सब ही साथ करिए,
    स्वयं से शुरुआत करिए।

    स्वच्छ भारत को बनाएं
    मान भारत का बढ़ाएं
    आइए मिलकर करें यह
    हाथ सबका हम बटाएं
    गंदगी न के बराबर
    या तो कम अनुपात करिए,
    स्वयं से शुरुआत करिए।

    ठा. कौशल सिंह✍️

  • Swach bharat banyenge

    गांधी जी का सपना सच करके हम दिखाएंगे
    अपने भारत को हम स्वच्छ भारत बनाएंगे

    साफ-सुथरी गलियां होगी साफ सुथरा होगा गांव
    साफ सफाई करने में कभी ना रुकेंगे हमारे पांव
    हमने वादा कर लिया है वादा हम यह निभाएंगे
    अपने भारत को हम स्वच्छ भारत बनाएंगे

    गांधी जी का सपना सच करके हम दिखाएंगे
    अपने भारत को हम स्वच्छ भारत बनाएंगे

    घर का कचरा गली का कचरा कूड़ेदान में डालेंगे
    गांव से लेकर शहर तक नियम हम यह पा लेंगे
    कचरा ना डालेंगे सड़क पर ना गंदगी फैलाएंगे
    अपने भारत को हम स्वच्छ भारत बनाएंगे

    गांधी जी का सपना सच करके हम दिखाएंगे
    अपने भारत को हम स्वच्छ भारत बनाएंगे

    देश हमारा घर है यारों देश को स्वच्छ बनाना है
    स्वच्छ भारत का सपना हमें दिल में बसाना है
    स्वच्छ भारत की ज्वाला” संगम” हम ना कभी बुझाएंगे
    अपने भारत को हम स्वच्छ भारत बनाएंगे

    गांधी जी का सपना सच करके हम दिखाएंगे
    अपने भारत को हम स्वच्छ भारत बनाएंगे

  • mera tera saath sanam

    Zindagi me tera saath dungi sanam chahe aa jaye kitne hi mujhpe gam,na hi chuuta hai aur na hi chuutega jab tak hai,mera tera saath sanam
    Meri duniya basi tujhme o sathiya teri duniya basi mujhme o sathiya,ek ibaadat yahi hai rab se sanam meri sansen ho bas teri o sathiya,
    Meri duniya tujhi par shuru aur khatam,hai tamanna mile tu hi saaton janam,
    Na hi chuuta hai aur na hi chuutega jab tak hai mera tera saath sanam.

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