Teri bo najr jo ek ham par mehrban hui ham to lela ban gaye tere chaht mai ham fakir ho gaye
Teri bo najr jo ek ham par mehrban hui ham to lela ban gaye tere chaht mai ham fakir ho gaye
बेवजह, बेसबब सी खुशी जाने क्यों थीं? चुपके से यादें मेरे दिल में समायीं थीं, अकेले नहीं, काफ़िला संग लाईं थीं, मेरे साथ दोस्ती निभाने जो आईं थीं। दबे पाँव गुपचुप, न आहट ही की […]
मीठी सी है वो हँसी तेरी, आँसू तेरा भी खा़रा है, उन उम्र-दराज़ नज़रों का तू ही तो एक सहारा है। मेंहंदी से सजी हथेली भी करती तुझको ही इशारा है, कानों में गूँजी किलकारी […]
गहरा है ये मेरा प्यार, बहना करती है इंतज़ार जा बसे तुम विदेश भैया कैसे बांधूंगी अब राखी राखी के धागों में पिरोये प्यार के मोती तेरा सुखी रहे संसार मत भूलना मेरा प्यार आया […]
प्रेम की डोरी से,यशोदा की लोरी से बंध गए नन्द किशोर छल कीन्हे बड़े कान्हा,प्यारी मईया से, बहुत प्रेम है इनको, ग्वाल औ गैया से माखन चोरी से,ब्रज की होरी से बंध गए नन्द किशोर […]
मेरा देश प्रेम,मन है बेचैन कब शांति सन्देश मिलेंगे माटी से प्रेम, इसकी सुगंध में रमे हैं होऊं निहाल, जब भारत दर्श किये हैं -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
तुम साज दो,में स्वर मिलाऊ आवाज़ दो ,संग संग आ जाऊँ लहर लहर आभास तेरा कश्ती दो तो पार हो जाऊँ तुम साज दो,में स्वर मिलाऊ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
उमड़ घुमड़ कर छाये घटा देखो चहुँ ओर पंख फैलाय,नाचे वन में मोर ये मधुमास है प्यारा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
अम्बर बरसे धरती भींगे नाचे श्रष्टि सारी सावन की बरखा प्यारी -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
“आधी रात की आज़ादी की सुबह अभी तक मिली नही थी, दीवारें कई बार हिली, बुनियादें अब तक हिली नहीं थीं , गोरों की गुलामी से निकले तो, कुछ दीमक ऐसे लिपट गये, समझ सके […]
बरखा जरा प्यार बरसा दे कब से प्यासा अंतर है तू प्यास बुझा दे बरखा जरा प्यार बरसा दे बरस बरस बरखा मेरी कितने तुमको बरस गए सिंधु की एक बूँद को हम कबसे तरस […]
मैं गा रहा हूं, तुम स्वर मैं स्वर मिलाओ मैं जा रहा हूँ , तुम संग संग आजाओ जाऊंगा न छोड़ कर, गाऊंगा न बिन तेरे मैं भवर मैं, तुम पतवार बनके आओ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा […]
संसार मैं रहना है, संसार मैं जीना है मिलती हैं कुछ खुशियां, कुछ गम भी पीना है कभी होंठों पर मुस्कान कभी आंसू पीना है संसार मैं रहना है संसान मैं जीना है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा […]
मैं गीत क्या रचूंगी, तुम प्रेरणा न बनते मेरे निष्ठुर उर मैं, वन वेदना न उठते मैं गीत क्या रचूंगी तुम प्रेरणा न बनते -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
तुम नहीं, तो…… ! : अनुपम त्रिपाठी तुम नहीं; तो ग़म नहीं । ये भी क्या कुछ कम नहीं ।। तुम जो थे, तो ये भी था और वो भी था हर तरफ पसरी पड़ी […]
चल वहां जहाँ नहीं गम तुम हो वहां और बस हम सागर सी गहरी जीवन गाथा अम्बर तक है ,प्रीत हमारी साथ चलेंगे हर पल हर दम ऐसे चलेंगे संग तुम्हारे अम्बर संग जैसे हो […]
चल वहां जहाँ नहीं गम तुम हो वहां और बस हम सागर सी गहरी जीवन गाथा अम्बर तक है ,प्रीत हमारी साथ चलेंगे हर पल हर दम ऐसे चलेंगे संग तुम्हारे अम्बर संग जैसे हो […]
जब तक है जीवन तब तक इस की सेवा ही आधार रहे विष्णु का अतुल पुराण रहे नरसिंह के रक्षक वार रहे हे प्राणनाथ! हे त्रयंबकम! शिव शंभू के शिव सार रहे हम रहे कभी […]
क्या था क़सूर मेरा????? (पीड़ित बेटी आसिफ़ा के सवाल) 1.गहन गिरवन सघन वन में बहुत खुश अपने ही मन मे मूक पशु पक्षी के संग में था बसा परिवार मेरा….. पूछना में चाहती हु क्या […]
क्या था क़सूर मेरा????? (पीड़ित बेटी आसिफ़ा के सवाल) 1.गहन गिरवन सघन वन में बहुत खुश अपने ही मन मे मूक पशु पक्षी के संग में था बसा परिवार मेरा….. पूछना में चाहती हु क्या […]
अभय गान अपने वाणी का मै स्वर आज सुनाता हूँ ले समसीर लेखनी की मै रण नवगीत सुनाता हूँ माँ वीणा पाणी के चरणो मे मै शीश झुकाता हूँ माँ रणचंडी के झंकृत की मै […]
“मैं ढूंढता रहा” :::::::::::::::::: मैं ढूंढता रहा, उस शून्य को, जो मिलकर असंख्य गणना बनते । मैं ढूंढता रहा , उस गाथा को , जिस की अमर प्रेम हर दिशाओं में गूंजते । और मैं […]
“गीत” :::::::::::: हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। दूर देश विदेश भय हैं वो मन का मेरे प्रिय साजन। हे! री सखी कैसे करू मै, स – श्रृंगार मन यौवन। हे!री सखी […]
✍?गीत ?✍ ✍ प्रणय निवेदन मेरे तू ही प्रीत है। तू ही आरजू है तू ही मीत है।। रस्मे वफा की कसम तेरी याद है इस दिल मे सिवा नही कोई मेरे चाहत-ए-महफिल मे मेरे […]
तुम देह नहीं तुम देहाकार हो देह में हो देह से मगर पार हो क्या दिखायेगा रूप दर्पण तुम्हारा देखो अंतर में, खुलेगा राज सारा शाश्वत सौंदर्य ज्योति पारावार हो देह में हो देह से […]
“गीत” :::::::::::: हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। दूर देश विदेश भय हैं वो मन का मेरे प्रिय साजन। हे! री सखी कैसे करू मै, स – श्रृंगार मन यौवन। हे!री सखी […]
Ek Sapne Ke Piche Bhaag Rahi Hu Main, Na Jane Yeh Sach Hoga Bhi Ya Nahi, Phir Bhi Umeed Ka Man Me Deep Jalaye, Chali Ja Rahi Hu Main, Ek Sapne Ke Piche………………….. Mera Yeh […]
सावन का मुग्ध फुहार तू है । बूंदो की रमणीक धार तू है ।। कोमल वाणी मे खिली, आह! लचक सुरीली । खनकती बोली मे ढली, ओह!आवाज सजीली सावन झड़ी मस्त बहार तू है । […]
क्षणिका ?:– ✍ जब गम सताता है, गाने मैं गुनगुनाता हूं । जब ददं रुलाता है, तराने मैं सजाता हूँ ।। (1) जब रंज बढ आता है, रंगीला मन मै हो जाता हूं । जब […]
–:?गीत ?:- ✍ सावन का मुग्ध फुहार तू है । बूंदो की रमणीक धार तू है ।। कोमल वाणी मे खिली, आह! लचक सुरीली । खनकती बोली मे ढली, ओह!आवाज सजीली सावन झड़ी मस्त बहार […]
–:?गीत ?:- ✍ सावन का मुग्ध फुहार तू है । बूंदो की रमणीक धार तू है ।। कोमल वाणी मे खिली, आह! लचक सुरीली । खनकती बोली मे ढली, ओह!आवाज सजीली सावन झड़ी मस्त बहार […]
स्वच्छ्ता हो प्राथमिकता स्वयं से शुरुआत करिए। स्वच्छ हो घर-बार अपना स्वच्छता हो सार अपना ग़र नहीं मिलता समय तो दीजिए इतवार अपना मामला सबसे जुड़ा है इसलिए फिर बात करिए, स्वयं से शुरुआत करिए। […]
गांधी जी का सपना सच करके हम दिखाएंगे अपने भारत को हम स्वच्छ भारत बनाएंगे साफ-सुथरी गलियां होगी साफ सुथरा होगा गांव साफ सफाई करने में कभी ना रुकेंगे हमारे पांव हमने वादा कर लिया […]
Zindagi me tera saath dungi sanam chahe aa jaye kitne hi mujhpe gam,na hi chuuta hai aur na hi chuutega jab tak hai,mera tera saath sanam Meri duniya basi tujhme o sathiya teri duniya basi […]
*मन थिरक उठो…”* *********** कभी पुराने नहीं रहेंगे ये रसभरे , सुरीले गीत । सदा नयापन। देंगे मन को , यह है इन गीतों की रीत। आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश
बोल दू ! जो बातें दबी है इस दिल में बोल दू! जो साँसे महसूस होने लगी है। मोड़ दू! इन नगमों का रुख तेरी तरफ। जैसे कड़ी धूप में पिघलती बर्फ के पानी मे […]
मैं आसमां की ऊंचाइयों को छू लूंगी, तू पिंजरा तो खोल ज़रा। मैं दिल की गहराइयों को छू लूंगी, तू1मुझे वक्त तो दे ज़रा। मैं हर कदम पर तेरा साथ दूंगी, तू मुझे समझ तो […]
अवसाद का विक्षोभ नीरव, चपल मन का क्लांत कलरव देखता पीछे चला है लगा मर्मित स्वरों के पर । शुष्क हिम सा विकल मरु मन, भासता गतिशील सा अब, भाव ऊष्मा जो समेटे बह चला […]
sloth goti cholchey gari ajo thomkey daraye eye mon amari khub chena akta goli diye jekhaney hetey chilam bhalobashar sopno niye abujh se mon ajo korey smirti charon soney na kono baron moner ki esechey […]
मैं अकेला था अकेला हूँ अकेला रह गया, ज़िन्दगी की धूप छाँव सब खुशी से सह गया। टूटा हूँ पत्ते सा क्यूँकि मेरी सूखी डाली है, न खता हवा के झोंकों की न दोसी कोई […]
*ओ बाबुजी…* बहुत याद आते हो ओ बाबूजी दिल को रुलाते हो ओ बाबुजी ।। जीना तुम्हारे बिन गवारा नहीं धड़कते हो सीने में ओ बाबुजी।। अंधेरी है दुनिया अंधेरी है राहें अंधेरी है खुशियां […]
भूल जाना मोहब्वत को मुमकिन नही भूल जाने की तुम यूँ ही जिद्द न करो अश्को को तुम छुपा लोगे माना मगर इन नजरों को कैसे संभालोगे तुम ये होठो की लाली झूटी सही इन […]
रंग क्या होंगे—? ————————- लिखेगी लेखनि कौन सा अक्षर स्याही के रंग क्या होंगे–? लफ़्जें कहेंगी कहानी कौन सी कथाओं में उमंग क्या होंगे—? झलकेगा इनमें कौन सा रूप झूठ बोलेगा,सच होगा चुप उपहासें या […]
तन वदन मन खिलखिलाता , जब किसी का पत्र आता । पत्र के उर में बसे हैं , प्रेमियों के भाव गहरे । दूर हों चाहे भले वे , पत्र से नजदीक ठहरे । पत्र […]
आ गया अब शीत का मौसम कंपकंपी के गीत का मौसम । झील सरिता सर हैं खामोश अब न लहर में तनिक भी जोश वृक्ष की शाखें नहीं मचलें लग रहा अब है न तनिक […]
सर्दियों में धूप मनको जिस तरह प्यारी लगे । आपकी छवि व्यथित मन को परम सुखकारी लगे । मौन रह.अनकही बातें , शेष कहने को रहीं । जिस जगह से भी गुजरते , आप मिल […]
ऊपर से कुछ दिख न पाए , अंदर अंदर होता है गहराई में नप न पाए , प्रेम समंदर होता है लोगो ने है कितना लूटा प्रेम तो फिर भी पावन है जिसमे आंख से […]
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