Category: गीत

  • एहसास

    मैंने भी एहसास किया ,मैं देख दृश्य वो रोया हूँ। तम्बू में रहते परिवारों के बच्चों में कितना खोया हूँ।। वो नन्हे मासूम से चेहरे जो कितने भोले भाले है, बचपन में सर ले लिया बोझ, वो कोमल पग वाले है। उनके चेहरे की मासूमी में प्यारी सी किलकारी है, उनकी कुटिया उनके जीवन में इस जी जगत से प्यारी है। उनका बचपन कितना सा अंजाना है, देख कोठियों के बच्चों को मन ही मन सकुचना है,।। उनको मिलते पैसे बेटे कुछ मेले में जाकर खा लेना, कुछ उनको वहा नही मिलता मा का चिमटा बस ले चलना।। यह देख दृश्य उन झोपड़ियों का फिर लेख आज यह लिखता है, उन ऊचे महलो वाले से घर गरीब का अच्छा लगता है।

  • गीत लिखूं

    देख कर आज मौसम की ये मस्तिया, दिल में हलचल सी कुछ अब होने लगी। देख कर नूर सा तेरा मुखडा प्रिये, मन में बेताबिया सी है उठने लगी। इस पवन ने शरारत कुछ ऐसी की है, तेरी जुल्फो से उलझने की कोसिस की है। बूंद पानी ने भी कुछ गलतिया की है, तेरी होठों पे आने की कोसिस की है। तेरी आँखो में काज़ल की है घटा, तेरे मुखड़े पे है छायी सावन की घटा। तेरे श्रृंगार के गीत को मैं लिखूं, तुझे देखूँ तो देखता ही रहूँ। तेरी साँसों में ऐसे सम जाउ मैं, छोड़ कर सब तेरा हो जा मैं। तुझको मैं सार जीवन का लिखु प्रिये, गीत लिखु तो लिखु मैं तुझको प्रिय।।

  • गीत कोई

    गीत कोई गा रही हूँ
    छेड़ कर तार दिल के
    प्रीत के धागे है सुन्दर
    अश्क के मोती पिरोकर
    मन-गगन महका रही हूँ ।

  • वीर गीत

    एक हाथ में ध्वजा तिरंगा, काँधे पर बन्दूक हैं।
    भारत माँ का वीर सिपाही, लक्ष्य बड़ा अचूक है।।
    कदम चाल में चलते हमसब, भारत माँ की रक्षा में।
    रहे सुरक्षित शरहद अपनी, वैरी न आए कक्षा में।।
    देश धर्म पे बलि-बलि जाऊँ, शपथ बड़ा अटूट है।
    भारत माँ का वीर सिपाही……………………………….।।
    चाह नहीं अपनी है वीरों, दुनिया पर अधिकार करें।
    लेकिन अंगुल एक धरा का, कभी नहीं हम हार करें।।
    “विनयचंद “इस दिल में केवल देश प्रेम अटूट है।
    भारत माँ का वीर सिपाही……………………….।।

  • अधूरे हैं

    तुम्हारे होंठों की सरगम बिन
    मेरे गीत अधूरे हैं।
    मेरी नजरों से रहते दूर तुम
    मेरे प्रीत अधूरे हैं।
    तुम्हें खोकर सारी दुनिया जीतूँ
    मेरे जीत अधूरे हैं।
    ‘विनयचंद ‘ वफा के बिन
    मनमीत अधूरे हैं।।

  • आखिर माँ तो माँ होती है

    हम प्रेम लुटाये कोई जान न पाए
    पेट भर के हमारा भूखा सोती है
    आखिर माँ तो माँ होती है-2
    कोई आंच न आये,हम युही मुस्कुराये
    दुख में दिखे हमे तो छुप के रोती है
    आखिर माँ तो माँ होती है-2
    हमको चलना सिखाये पाठ आचरण का पढ़ाये
    ममता के आंचल में हमको संजोती है
    आखिर माँ तो माँ होती है-2
    सपने पूरे हो जाये यही मांगे वो दुवाएं
    हमारी खशियो के खतिर,अपना सब खोती है
    आखिर माँ तो माँ होती है-2
    मुश्किल कितनी भी आये छोड़ के वो न जाये
    छोटी-छोटी खुशियों से घर को पिरोती है
    आखिर माँ तो माँ होती है-2
    ऐसा कर्म कर जाए सलामत माँ को रख पाए
    सबके जीवन की एक ही ज्योति है
    आखिर माँ तो माँ होती है-2
    माँ को शीश झुकाये,सदा जन्नत ही पाए
    वो तो ईश्वर का ही रूप होती है
    आखिर माँ तो माँ होती है-2

  • भारत देश

    बाल गीत:-‘भारत देश हमारा है’

    यह भारत देश हमारा है,

    हमे प्राणो से भी प्यारा है।

    हम तो नन्हे मुन्ने बच्चे है,

    हम मन के बड़े सच्चे है।

    हम मिल जुलकर रहते है,

    हम देश की गाथा कहते है।

    यह भारत देश हमारा है,

    हमे प्राणो से भी प्यारा है।।

  • गणपति वंदना

    आओ मनाएँ गणपति गणेश को।
    गौड़ी नन्दन पुत्र महेश को।।
    लम्बोदर गजवदन विनायक।
    प्रथम पूज्य सब देव सहायक।।
    करुणाकर करुणेश को, आओ मनाएँ……।।
    सिद्धि बुद्धि को देने वाले।
    संकट सबके हरने वाले।।
    वरदायक मंगलेश को, आओ मनाएँ…….।।
    ऋद्धि सिद्धि के प्रीतम प्यारे।
    खड़ा “विनयचंद “तेरे द्वारे।।
    मेरे काटो कठिन कलेश को, आओ मनाएँ…..।।

  • हौसला

    हौसला

    ‘बिन मेहनत के रोटी नही मिलती,गरीब के घर मे खुशियाँ नही सजती।

    हौसलों के पंख से उड़ान कितनी भी भर लो,पर पेट की भूख नही मिटती। 

    फौलादी इरादों से साँसो का दामन थाम रखा है,वरना यहाँ मौत भी आसान नही मिलती। 

    सुना है सारा संसार रंगोत्सव मना रहा है,पर यहाँ कोरी किस्मते कहाँ रंगती। 

    जद्दोजहद है जिन्दगी मे कि किसी दिन सुकून मिलेगा,उसी दिन सतरंगी यह चेहरा भी सजेगा। 

    मजबूरी मे मजदूरी कर मजबूरी से निपटते है,हम गरीब होली पर भी पसीने से ही रंगते है।’ 

  • कड़वाहट

    कड़वाहट

    दुनिया मे जो है कड़वाहट वह मिर्च पर भारी है,

    मेरे जीने का हुनर मेरी मौत पर अब भारी है। 

    दिन भर मजदूरी करके अपना परिवार पालता हूँ, 

    इस तरह आराम पर मेरी मेहनत बहुत भारी है। 

    सुख की अनुभूति हो इतनी कभी फुरसत ही नही मिलती, 

    सुकून नही मिलता क्योंकि मुझ पर जिम्मेदारियां बहत भारी है। मुझे आराम के लिए घर या मुलायम बिस्तर नही चाहिये, 

    तुम्हारे चैन,सुकून पर मेरी बेपरवाह नींद बहुत भारी है। 

    उम्र है ढ़लान पर फिर भी अजीब सा जूनून रखता हूँ, 

    ये दुनियावालो तुम्हारी जवानी पर मेरा बुढ़ापा बहुत भारी है। 

  • Apne ban payenge

    वही है चाँद पर अब उससे ख्वाहिशे बदल गयी,जिन्दगी ने लिए इतने मोड़ कि मायने बदल गये। 

    बचपन में जिस चाँद को मामा कहते थे,अब महबूब की सूरत मे उसको ढूँढने लगे। 

    जिन पगडंडियो पर आवाजें लगाकर चलते थे,आज उन्हे छोड़ शहर की ओर चल दिये। 

    अब कोई बड़ा बुजुर्ग गलती पर डांटता नही,क्योंकि हम खुद को बहुत बड़ा समझने लगे। 

    छुट्टियों मे अपनी टोली संग खूब धूम मचाते थे,पर अब हम चहारदीवारी मे रहने लगे। 

    नानी,बुआ और मौसी के वहाँ अब न आना जाना होता है,हम तो अब खुद मे व्यस्त रहने लगे। 

    जो रूठ जाता था सब मिलकर उसे मनाते थे,बड़ी सादगी से सारे रिश्ते नाते निभाते थे। 

    अब अगर गलती से भी कोई हमसे रूठ गया,तो पक्का मानो उससे रिश्ता नाता टूट गया। 

    अब फुर्सत ही नही मिलती कि सबकी फिक्र कर सके,कुछ अपनी कहे और दूसरों की भी सुन सके। 

    हम सब अपनी मस्ती मे रहते है,उसे फिक्र नही,तो मुझे क्या?बस यही सोचते रहते है। 

    हमने खुद को एक दायरे मे समेट लिया,जो न चल सका साथ उसे हमने छोड़ दिया। 

    बचपन सा प्यारा मन अब हम कहाँ से लायेगे?क्या रिश्तों की कीमत हम सब समझ पायेंगे? 

    क्या फलक पर चांद तारे सज पायेंगे,जो है अपने क्या अपने बन पायेंगे? 

  • उदन्त मार्तण्ड

    उदन्त मार्तण्ड

    ‘उदंत मार्तण्ड’ है हिन्दी पत्रकारिता की आधारशिला,

    ‘प्रथम हिन्दी समाचार पत्र’ होने का इसको मान मिला।

    पण्डित युगुल किशोर शुक्ल ने था इसको प्रारंभ किया,

    अपनी प्रतिभा व निजी संसाधनो से इसका सम्मान किया।

    ’30 मई 1826′ को इसका प्रथम अंक प्रकाशित हुआ,

    इसमे ‘मध्यदेशीय भाषा’ का ओज प्रस्फुटित हुआ।

    यह पत्र ‘पुस्तकाकार’ मे कलकत्ता से छपता था,

    पूरे देश मे लगभग 500 प्रतियों मे बिकता था।

    डेढ़ वर्ष मे ‘उदंत मार्तण्ड’ के 79 अंको का प्रकाशन हुआ,

    यह पत्रकारिता क्षेत्र मे ‘मील का पत्थर’ साबित हुआ।

    ‘उदंत मार्तण्ड’ के कारण पण्डित युगुल किशोर शुक्ल याद किये जाते है,

    ’30 मई’ को हम सब मिलकर ‘हिन्दी पत्रकारिता दिवस’ मनाते है।”

  • Kadar kar lo

    कदर कर लो यारो

    “ईश्वर ने जो दिया है उसकी कदर कर लो यारो,

    सम्भाल लो जिन्दगी इसकी फिकर कर लो यारो।

    सबको सब कुछ नही मिलता पर कुछ तो सोचो,

    तुमको जो मिला वो बहुतों को नसीब नही होता।

    कभी खुशी कभी गम तो आते रहते है जिन्दगी मे,

    पर खुद को हर हालात मे सम्भाले रखना यारो।

    कभी भूल से भी मुकद्दर को कोई दोष मत देना,

    क्योंकि सभी खाली हाथ यहाँ आते है दोस्तों।

    मेहनत से भी किस्मत की लकीरें बदलती है यहाँ,

    इसलिये अपने हुनर को आजमाना तुम दोस्तो।

    बुराई का रास्ता गलती से भी न अपनाना यारो।

    क्योंकि सिकन्दर भी खाली हाथ जाते है दोस्तो।।”

  • तिरंगे के दीवाने

    तिरंगे के दीवाने

    मिट गये तेरे दीवाने वतन के लिए-2
    आंख दिखा के न जाये,आंच आने न पाए
    सर कटाते रहेंगे इसके क़फ़न के लिए
    मिट गये तेरे दीवाने वतन के लिए-2
    हिन्दू-मुस्लिम हो भाई,क्या सिक्ख क्या ईसाई
    सब मिलके खड़े है इसके जतन के लिए
    मिट गये तेरे दीवाने वतन के लिए-2
    रंग हरा है हरियाली जैसे फैली खुशहाली
    श्वेत रंग है हमारे अमन के लिए
    मिट गये तेरे दीवाने वतन के लिए-2
    केसरिया रंग बलिदानी,वीरता की निशानी
    शरहदो पे खड़े है दुश्मन के पतन के लिए
    मिट गये तेरे दीवाने वतन के लिए-2

  • मेरी मेहनत

    मेहनतकश औरत

    खुशियाँ किसी तख्तोताज की मोहताज़ नही होती,

    धन दौलत ही खुशियों का प्रतिमान नही होती। 

    होठों पर मुस्कान गरीब के भी सज सकती है, 

    खुशियाँ सिर्फ अमीरो की जागीर नही होती। 

    मेहनतकश औरत के चेहरे पर पसीना भी जंचता है, 

    खूबसूरती सिर्फ पाउडर और लिपिस्टिक मे नही होती। 

    सुनहरे ख्वाबों के समन्दर बसते है चमकीली आँखो मे, 

    बह न जाये इसी डर से बेवक़्त इनसे बरसात नही होती। 

    पसीने की बूंदे सजती है ललाट की लालिमा बनकर, 

    माथे की बिन्दिया ही केवल सच्चा श्रृंगार नही होती।
    खुशियाँ किसी तख्तोताज की मोहताज नही होती।।

  • माई का लाल

    ” देशहित में जो प्राण हते, वही माई का लाल हैं।
    सीमा पर करे सुरक्षा,जागे दिन हर रात है।
    उन सपूतो को वन्दन करता,मेरा देश महान है।
    उन्ही के कारण हम है सुरक्षित, उन्ही से अपना मान है।
    सर्दी,गर्मी ,बारिश में भी वो हमेशा तैनात है।
    और हर हाल दुश्मन को देता मात है।
    उन रण बांकुरों को “अभिषेक” दिल से करता सम्मान है।
    उन्ही से पावन धरा का पल पल बढ़ता मान हैं। ”

  • Dosti

    “रिश्तो में छाँव सा है दोस्ती का मान,
    इससे मिलता है हर पल अभिमान।
    मित्र हर परिस्थिति में बढ़ाता है हाथ,
    कर्ण ने दिया समर में दुर्योधन का साथ।
    श्रीकृष्ण ने सुदामा संग मित्रता निभाई,
    क्षण भर में ही दरिद्रता मिटाई।
    हजारो की भीड़ में कोई ऐसा होना चाहिए,
    जो आपको समझे और आप सा होना चाहिए।
    दोस्ती की परिभाषा श्रीकृष्ण व कर्ण ने समझाई,
    सम्पूर्ण विश्व को इस रिश्ते की सच्चाई समझाई।
    मित्र हो श्रीकृष्ण व कर्ण समान,
    इन्ही से बढ़ता है मित्रता का मान।।”

  • आओ सीखे

    प्यारे बच्चों,प्यारे बच्चों आओ मेरे पास,
    दूर वहाँ क्यो बैठो हो तुम हो क्यो इतने उदास?
    आओ मिलकर पाठ पढ़े कुछ सीखे नयी बात,
    मिल जुलकर हम साथ रहे और मन में हो विश्वास।
    प्यारे बच्चो…..
    सुबह उठो जल्दी से तुम और बोलो सबको शुभ प्रभात,
    बस्ता लेकर स्कूल चलो तुम सब ले हाथों मे हाथ।
    प्यारे बच्चों…..
    नित्य कर ईश्वर की प्रार्थना कर्त्तव्य मार्ग पर डटे रहो,
    कोई भी कठिनाई आये पर तुम पीछे न कभी हटो।
    प्यारे बच्चों……
    पढ़ लिखकर रोज ही सीखो अच्छी-अच्छी बात,
    जीवन मे खूब आगे बढ़ो तुम सच्चाई के साथ।
    प्यारे बच्चों,प्यारे बच्चों आओ मेरे पास,
    दूर वहाँ क्यो बैठो हो तुम हो क्यो इतने उदास?

  • माँ

    जो नज़रो से परख ले
    वो माँ होती है।
    दर्द को दिल में
    जो रख ले
    वो माँ होती
    है।
    कर कोई काम
    तू बुरा खुदा से
    चाहे हो छुपा
    जो तेरा चेहरा
    भांप ले
    वो माँ होती है।

  • तुम्हे मालूम है

    तुम्हें मालूम है
    हमको मानना खूब
    आता है ।
    तो आखिर ये बताओ
    तुम क्यूँ हमसे हमेशा
    रूठ जाते हो।

  • रंग डालेगे

    आपको रंग डालेगे
    हाँथ में रंग है
    पीला।
    पहले सूखा लगायेंगे
    भर के पिचकारी में
    गीला।
    आप जब गुस्से में
    आकर के हमपे
    तिलमिलओगे
    आपका साँवला
    मुखड़ा कर देंगे
    बैंगनी-नीला।

  • हम सब भारतवासी हैं

    सौभाग्य हमारा है बंधु, हम सब भारतवासी हैं।
    सुखी रहे सब लोग यहाँ, इसके हम अभिलाषी हैं।।
    धरती को हम माता कहते
    गैया पूजी जाती हैं।
    वृक्ष सभी यहाँ देव रूप हैं
    नदियाँ पूजी जाती हैं ।।
    नाहर बैल हंस नहीं केवल, काग श्वान भी सुखरासी हैं।
    सौभाग्य हमारा है बंधु हम सब भारतवासी हैं।।
    जाति धर्म का भेद नहीं है ।
    काले गोरे का खेद नहीं है।।
    शब्द ब्रह्म का आदर करते, बेशक हम बहुभाषी हैं।
    ‘विनयचंद ‘रे भूप यहाँ पर होता एक सन्यासी है।।

  • भजन

    भज ले राम राम तू राम।
    योग यज्ञ व्रत देव न ऐसा, न हीं तारक धाम।
    सेवा पूजा ध्यान न लावे, जप ले मात्र सुनाम।। भज…..
    निश दिन पाप करे बड़ प्राणी. उल्टे सीधे काम।
    राम राम गा राम को पावे. जीवन में आराम।। भज….
    राम नाम ने सबरी ताड़े, ताड़े भगत तमाम।
    ध्रुव प्रह्लाद विभीषण मीरा,ताड़े तुकाराम।।भज…..
    विप्र अजामिल नारि अहिल्या, पहुँचें हरि के धाम।
    ‘विनयचंद ‘नर देही को तू, मत करना बेकाम।। भज ले राम

  • सावन बीता जाये।

    सावन बीता जाये
    प्रियतम तुम न आये।

    मस्त पवन संग डोले किसलय
    ताल – तलैया, सागर में लय,
    बादल नभ पर छाये
    प्रियतम तुम न आये।

    कलियों पर है छायी लाली
    झूमे बेसुध कोमल डाली,
    मधुकर तान सुनाये
    प्रियतम तुम न आये।

    चूमें धरती चंचल – किरणें
    महकी हवा लगी मन हरने,
    रुत आये रुत जाये
    प्रिमतम तुम न आये।

    सावन की ये काली रातें
    गरजे घटा घोर बरसातें,
    विरह बहुत तड़पाये
    प्रियतम तुम न आये।

    सूना आँगन , सूने झूले
    जा परदेश पिया तुम भूले,
    कजरा बह- बह जाये
    प्रियतम तुम न आये।

    अनिल मिश्र प्रहरी।

  • किया प्यार तुमसे

    किया प्यार तुमसे, मैं करता रहूँगा।
    रस्म- ए-वफा को निभाता रहूँगा।। किया…….
    सूरत तुम्हारी मैं दिल में बसाई ।
    अपना बनाने की चाहत है आई।।
    मिलो न मिलो मुझसे बुलाता रहूँगा।
    किया प्यार तुमसे मैं करता रहूँगा।। किया…..
    छुप-छुप के देखूँ यही चाह मेरी।
    कहीं भी रहो खुश नहीं आह मेरी।
    हरेक गम मैं तेरा उठता रहूँगा।
    किया प्यार तुमसे मैं करता रहूँगा।। किया,,,,
    ‘विनयचंद ‘लग जा गले यार मेरे।
    किया मैं कबूल अब तो तुझे यार मेरे।।
    सातो जनम तक संग-संग रहूँगा।
    किया प्यार तुमसे मैं करता रहूँगा।। किया……
    मैं भी अब तेरे संग संग रहूँगी।
    किया प्यार तुमसे करती रहूँगी।। किया……

  • राम -हनुमान

    साथ जुड़े है
    उनके नाम
    राम के संग- संग
    बोलो जय हनुमान
    प्यार मे खोए
    है हनुमान
    जय हनुमान
    जय श्री राम
    पतित पावन
    सीता राम
    काज बनाओ
    हे प्रभु राम
    राम के संग संग
    बोलो जय हनुमान.

  • ना जाने किस दिन आ जाए काल तोहार

    राम नाम का जाप करो रे मुख से बारम्बार।
    ना जाने किस दिन आ जाए काल तोहार। ।
    लख चौरासी चक्कर खाया।
    फिर कहीं जाके नर तन पाया। ।
    मानुष का तन विषय भोग में मत करना बेकार।
    ना जाने किस दिन आ जाए काल तोहार।।
    नरक यमालय नदी बैतरणी।
    गर्भवास व जीवन मरनी।।
    दुख दुनिया है मेरे भैया दुखों का भण्डार।
    ना जाने किस दिन आ जाए काल तोहार।।
    भजन बिना कुछ काम न आए।
    धन – दौलत सब यहीं रह जाए।।
    विनयचंद रे राम नाम का सदा करो ब्योपार।
    ना जाने किस दिन आ जाए काल तोहार।।
    ……………….पं़विनय शास्त्री………………

  • हनुमान भजन

    हनुमान गदाधारी श्रीराम के प्यारे हैं।
    करते हैं सदा भक्ति सीता के दुलारे हैं।।
    सुग्रीव पे विपति पड़ी।
    रिशमुक पे चरण धड़ी।।
    श्रीराम मिलाए हैं दुखरे को मिटाए हैं।
    हनुमान गदाधारी श्रीराम के प्यारे हैं।।
    रीछपति नल नील।
    दक्षिण को गए सब मिल।।
    अंगद के संंग संग ये सिय खोज में धाए हैं।
    हनुमान गदाधारी श्रीराम के प्यारे हैं।।

  • नन्दकिशोर

    रक्तिम अधर रक्तिम कपोल
    श्याम वरण था उसका।
    कजरारी नयना थी उसकी
    नरम चरण था उसका।
    घुंघरे घुंघरे बाल थे उसके
    मेरा वो चितचोर था।
    विनयचंद वो रसिया जिसका
    नाम नन्दकिशोर था।

  • वीर जवान

    हम हैं वीर जवान साथियों
    शरहद पे लड़नेवाले।
    हमसे देश सुरक्षित हम
    नहीं किसी से डरनेवाले।।
    भूख-प्यास को छोड़ा
    छोड़ा घर परिवार।
    देश भक्ति का जज्बा
    दिल में छोड़ेगे संसार।।
    विनयचंद हम देश के खातिर
    वीर लड़ाकू मरनेवाले।
    हमसे देश सुरक्षित हम
    नहीं किसी से डरनेवाले।।

  • भजन

    मेरी ज़िन्दगी बदल गई तेरे द्वार आके।
    हो गया मैं प्यारा सबका तेरा प्यार पाके।।
    चला जा रहा था दिशाहीन पथ पर।
    उदसीन होकर मैं दुनिया के रथ पर।।
    तूने सम्हाला मुझको अपने द्वार लाके।
    हो गया मैं प्यारा सबका तेरा प्यार पाके।।
    दुनिया में अब तो कुछ भी नहीं है।
    तुझे पा लिया फिर मुझे क्या कमी है।।
    तुझको रिझाए आज “विनयचंद”गाके।
    हो गया मैं प्यारा सबका तेरा प्यार पाके।।
    ज़िन्दगी बदल गई तेरे द्वार……………. पं विनय शास्त्री

  • भजन

    सिर्फ एक बार दर्शन तू दे दो
    और कोई भी दिल की तमन्न।नहीं है।
    साथ कितना मिला जगत में मुझे।
    सारे नातों के दीपक पलक में बुझे।।
    मुझे अपनी शरण में तो ले लो
    और कोई दिल की तमन्न ।नहीं है।
    हर कदम पर मैं ठुकराया गया हूँ।
    गैर क्या अपनों से भी रुलाया गया हूँ।।
    मुझे अपनी शरण में तो ले लो
    और कोई दिल की तमन्न।नहीं है।।

  • भजन

    ब्रजरज का मस्तक पे चन्दन करू।
    मैं श्रीराधे के चरणों में वन्दन करू।।
    मैंने जीवन किए अब हवाले तेरे।
    आके इसको सम्हालो दाता मेरे।
    सामने किसके जाने क्रंदन करू।
    मैं श्रीराधे के चरणों में वन्दन…..

  • भजन

    मुझ शरणागत की रख ले लाज प्रभु।
    मैं दर तेरे पे आया हूँ देखो आज प्रभु।।
    तुमने कितने पापी तारे नाम गिनाया जा नहीं सकता।
    जो भी तेरे दर पे आता खाली झोली जा नहीं सकता।।
    तेरा रंक भगत भी पाया तख्त- ओ-ताज प्रभु।
    मैं दर तेरे पे आया हूँ देखो आज…………
    ना मांगू मैं धन और दौलत ना चांदी न सोना।
    विनयचंद को देदे दाता मन मंदिर का कोना।।
    नहीं निज भक्तों से होते नहीं नाराज प्रभु।
    मैं दर तेरे पे आया हूँ देखो आज……….

  • मेंने पीना छोड़ दिया

    गाना न कोई अब रिन्दाना
    मैंने पीना छोड़ दिया।
    बोतल तोड़ी जाम मैं तोड़ा
    साकी से नाता तोड़ लिया।
    मैंने पीना’……… . ….. . ।।
    पीबाकों से नहीं अब याराना
    नहीं अपने रहे अब बेगाना
    मयखाने की डगर अब छोड़ दिया।
    मैंने पीना छोड़ दिया।।

  • श्याम की मुरली

    श्याम ने मुरली बजाई कि घर से गोपियाँ निकली।
    इधर से गोपियाँ निकली
    उधर से गोपियाँ निकली
    श्याम ने मुरली बजाई कि घर से गोपियाँ निकली।।
    पीलाती दूध बच्चे को कलेबा कर रही कोई।
    लगी परिजन की सेवा में मीठी नींद में सोई।।
    सुनकर वंशी की धुन को घर से गोपियाँ निकली।।
    श्याम ने मुरली बजाई कि घर से गोपियाँ निकली।।

  • Radha ke dukh

    तुझे मेरी याद न आई,
    ओ कान्हा तूने कैसी ये प्रीत निभाई,
    छोड वृंदावन चले गए तुम,
    लौट के फिर आए नहीं तुम,
    हमजोली संग रास रचाया,
    गोपियों को भी खूब सताया,
    ,तूझ बिन मै तो सूझ बुझ खोई,
    अंखियो मे अब नीद नही है,
    नयनो से आसू बहते है,
    वादे जो मुझसे किये थे,
    फिर क्यों हमें भूल गए बनवारी,
    ओ कान्हा तूने कैसी ये प्रीत निभाई,
    तुझ बिन सूनी वृंदा की गलियां,
    कैसे बीतेगे दिन ये रतिया
    लौट के तुम आए न एक बार,
    भेज दिए उद्धव को मेरे पास,
    तुम्हें मेरी याद न आई,
    ओ कान्हा तूने कैसी प्रीत निभाई |

  • दीपावली

    दिल का दीप जलाओ सजनी
    आई मधुर दिवाली रे।
    प्रेम भाव का तेल भरो और
    सेवा सत्य की बाती।
    संकल्प ज्योति से प्रज्ज्वलित कर
    जगमग कर सुखरासी।।
    वीर सपूत को अर्पण करो अबकी
    मधुर दिवाली रे।।
    दिल का दीप जलाओ सजनी
    आई मधुर दिवाली रे।।

    शुभकामनाओं के साथ
    पं़विनय शास्त्री

  • विनती

    मिले काँटे या मुझको फूल।
    पर हो मेरे अनुकूल।।

    इतना सुख न देना स्वामी जो मुझ में अभिमान जगाए।
    इतना दुख न देना मालिक जो मुझको पल पल तड़पाए।।
    सुख दुःख में ये विनयचंद कभी जाए न तुमको भूल।
    मिले काँटे या मुझको फूल ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

    थन सम्पत्ति का ठाठ मिले या टूटी फूटी खाट मिले।
    भोजन मधुर दिन रात मिले या निराहार दिन आठ मिले।।
    पर विनयचंद की झोली में प्रभु मिले तुम्हारी चरण धूल।
    मिले काँटे या मुझको फूल,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, =
    पं़विनय शास्त्री

  • कृष्ण दीवानी

    तोसे प्रीत लगाई कान्हा रे!
    जोगन बन आई कान्हा रे।
    तोसे प्रीत लगाई कान्हा रे।

    १. लाख विनती कर हारी,
    राधा तेरी दीवानी,
    तेरे दरस की प्यासी
    मैं हूं तेरी कहानी,
    कान्हा मुझ में समा जा!
    बंसी की धुन सुना जा।
    मोहे कृष्णा बना जा!
    आजा कान्हा!
    तोसे प्रीत लगा,…
    २. तू है मेरा कन्हाई!
    फिर काहे यह लड़ाई।
    तेरी याद करूं मैं,
    आठों प्रहर मरूं मै।
    क्यों ना समझे तू कृष्णा ?
    मन में तेरी है तृष्णा।
    क्यूकी!
    तोसे प्रीत लगा…
    ३. डोर खींचे तेरी ओर,
    चले मेरा ना ही जोर।
    सुन मोरे चितचोर,
    मोरी बईया ना मरोड़।
    सपनों में तू ही कान्हा,
    आंखों में तू ही कान्हा।
    मेरे मन में तू ही कान्हा,
    बंसी की धुन सुनाना।
    सुना कान्हा!
    तो से प्रीत…..
    ४. तेरी बंसी बजी है ,
    राधा मगन भई है।
    आजा मुझ में समा जा,
    कृष्ण राधे कहां जा।
    कान्हा,कान्हा,कान्हा,कान्हा,
    माखन खाने तो आजा।
    नटखट कान्हा
    तोसे प्रीत लगाई……. ।
    निमिषा सिंघल

  • भजन

    कर ले राम भजन रे भाई।
    राम भजन की महती महिमा वेदों ने है गाई ।
    तड़े अजामिल गणिका तड़ गई तड़ा सदनकसाई।।
    ध्रुव प्रह्लाद विभीषण सबरी सतानंद की माई।
    राम राम कह जरठ जटायु परम गति को पाई।।
    दुख दुनिया में मनका मेरे सुख की आग लगाई।
    राम नाम के गान बिना यह जीवन है दुखदाई।।
    मानव तन अनमोल तुम्हारे ना कर पाई -पाई।
    ‘विनयचंद ‘रे राम भजन कर रट ले कृष्ण कन्हाई।।
    पंडित विनय शास्त्री

  • कामना

    हे अहोई अष्टमी माता
    अपने पुत्र के लिए मै
    करती हूँ तुमसे यही कामना
    रक्षा उसकी सदा करना
    मुश्किलों से हो जब भी उसका सामना

    हे अहोई अष्टमी माता
    अपने पुत्र के लिए मै
    करती हूँ तुमसे यही कामना.

    सदा सुखी वो रहे
    कमी ना हो खान पान की
    राह उसे उज्वल देना
    जग ख्याति हो मान सम्मान की.

    हे अहोई अष्टमी माता………
    ………………
    लम्बी उम्र वो जिये
    देना उसे अच्छा स्वास्थ्य
    माँ मै चाहूँ तुमसे यही
    तुम हो मेरी आराध्य.

    हे अहोई अष्टमी माता…. ..
    ………..
    सुन्दर चरित्र, स्वच्छ वाणी
    अच्छी मिले उसे संगती
    कृपा माँ उसपर अपनी करना
    देना उसे तीव्र सम्मति.

    हे अहोई अष्टमी माता…….

  • विनती

    हे घनश्याम गोपाल मुरारी।
    मेरी सुधि लो गिरिवरधारी।।

    दीनबंधु करुणा के सागर।
    भगतबच्छल प्रभु आरतहर।।
    जगतपति जगतारनहारी,
    मेरी सुधि लो गिरिवरधारी।।

    तेरी कृपा बरस रही निश-दिन।
    बाहर-भीतर किनमिन किनमिन।।
    दो बूंद का चातक ‘विनयबिहारी’,
    मेरी सुधि लो गिरिवरधारी ।।

  • हो तुम कहाँ

    बारिश कि बूंदे
    दिल का ऐ आलम
    हो तुम कहाँ..हो तुम कहाँ
    फूलों की डाली,भवरों का मंडर
    महकती ये वादी,सावन की ये हरियाली
    हो तुम कहाँ..हो तुम कहाँ

    खींचा चला जा रहा हूँ तेरी खुशबू पर
    तुम हो जाने कहाँ किस मोड़ पर
    लिपट के तेरी जूल्फों से आज मैं खेलूँगा
    भीगी पलकों से काजल चूराऊंगा
    हो तुम कहाँ..हो तुम कहाँ

    मुश्किलें हैं इस कदर क्या मैं बयां करू
    दिल मेरा तरसे तुम्हें देखने को आंहे भरू
    निगांहे तरकश गई है तुम्हें देखने को
    अब आ भी जाओ वफा की है तुम से
    हो तुम कहाँ..हो तुम कहाँ

  • Mere manmit

    तुझ में सब कुछ पाया मैंने,
    तू ही तो मेरा सवेरा,
    ओ मेरे मनमीत कहां हो तुम
    तुझे ढूंढे यह दिल मेरा,
    आने से होती है तेरे
    शम्मा ये गुलजार ये रौशन बहारा,
    तेरे ही लिए मैंने खुद को है संवारा,
    तू जो चले तो, झुक जाए फूलों की डाली,
    मंडराए मन का भंवरा,
    तू ही तो दुनिया हो मेरी,
    तू ही हो मेरा सहारा,
    गर आ जाओ तुम तो,
    खिल जाए, इन होठों की कलियां |

  • बुद्धू सा मन

    बुद्धू सा मन चंचल सा यह तन
    बहका बहका सा लगे
    सांसो का भी चलन।
    १.
    दर्पण बनी तेरी आंखें मेरे सनम
    सरगोशियां तेरी सीने में दे जलन।
    बतियां तेरी मुझे बहका ना दे सनम,
    बुद्धु सा मन…..
    २.
    सांसों में मेरी तेरे ही सुर बसे
    धड़कन बनी घड़ी भागे समयसे परे।
    शर्मो हया मेरे गालों पर फिर सजे
    बुद्धु सा मन…

    निमिषा सिंघल

  • Tera sahara

    काश ! मुझे सहारा तेरा मिल गया होता,
    तूफा नहीं आता तो किनारा मिल गया होता,
    मेरे दिल की धड़कन तुझे दस्तक देती है,
    यह तन्हाई काटे नहीं कटती है,
    बिखर के रह गया है तेरे बिन मेरा यह आशियाना,
    चले आओ ये आंखें रास्ता देखती हैं तेरी,
    तेरे बिन लगता है, सुना जहां मेरा,
    न जाने कब यह बात तुझे समझ में आएगी,
    वह नजारे याद आते हैं, जब हम मिला करते थे,
    वह मंजर भूल नहीं सकती, जब तुम मुस्कुराते थे,
    फूलों की कलियां खिलती थी, जब तुम मुस्कुराते थे |

  • Tera sahara

    काश!मुझे सहारा तेरा मिल गया होता,
    तूफा नहीं आता तो किनारा मिल गया होता,
    मेरे दिल की धड़कन तुझे दस्तक देती है,
    यह तन्हाई काटे नहीं कटती है,
    बिखर के रह गया है तेरे बिन मेरा यह आशियाना,
    चले आओ ये आंखें रास्ता देखती हैं तेरी,
    तेरे बिन लगता है सुना जहां मेरा,
    न जाने कब यह बात तुझे समझ में आएगी,
    वह नजारे याद आते हैं जब हम मिला करते थे,
    वह मंजर भूल नहीं सकती जब तुम मुस्कुराते थे,
    फूलों की कलियां खिलती थी जब तुम मुस्कुराते थे |

  • O manmit mere

    ओ मनमीत मेरे,
    मैंने दिल से तुझे पुकारा,
    मैं नदिया की धारा,
    तुम हो मेरा किनारा,
    बिन तेरे जीना मेरा,
    होगा नहीं गवारा,
    चाहे किस्मत रूठे मुझसे,
    या रुठे यह जग सारा,
    तुम धूप तो मैं हूं छाया,
    तू अंबर तो मैं धरती,
    कब तक मिलन होगा हमारा,
    अब तक कितने मौसम बीते,
    क्या मिलन होगा न ये हमारा,
    बीच भंवर में फंसी है मेरी नैया,
    तुम आकर कर दो इसे किनारा |

  • गीत

    नौ दिन क कलशा रखले बाडी माई
    होके शेरवा पर सवार आई जइतु गऊआ हमार
    चमचम चमकेला बिंदिया ए माई
    सुनर सुनर पऊआ में लागल बा महावर
    हाथवा में सोहेल गंदा चक्र ए माई
    महेश इन्द्रशेन करत बा पुजनवा तोहार
    दुखवा से ऊबारी कवनो जादू चलाई
    कई द हमनो के नईया पार ए माई

    नौ दिन क कलशा रखले बाडी माई
    होके शेरवा पर सवार आई जइतु गऊआ हमार
    बढल जात बांटे बहुत ए पाप ये माई
    कई देतु कलयूग के सत्यानाश ए माई
    हमनी बांटी तोहरा सरनवा में ये माई
    नयन के कटारी लागत बांडू बड़ी दयालू
    दिव्य ज्योति कवनो जला दी ये माई
    करी कवनो हमनी पर चमत्करवा ये माई

    नौ दिन क कलशा रखले बाडी माई
    होके शेरवा पर सवार आई जइतु गऊआ हमार
    महिमा तोहरा हमनी बखानी का माई
    करेलू सबके मनोपूर्ण ये माई
    हमनी बानी अनाथ रख दि सरवा पे हाथ
    हमनी क बिगड़ी बना दि ए माई
    नौ दिन क बांटी भूखल प्यासल ये माई
    भगतन क करि जा कल्याण ए माई

    महेश गुप्ता जौनपुरी

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