Category: गीत

  • मेरे अल्फाज अब कहाँ रहें, ये तो तेरी मुहब्बत की जहागीर हुई ।

    मेरे अल्फाज अब कहाँ रहें, ये तो तेरी मुहब्बत की जहागीर हुई ।
    ये तो तेरे हुश्न-शबाब में खोया है, तेरी मुहब्बत में ये कुछ कहता है ।
    ये मेरे अल्फाज़ रहे अब कहाँ, ये तो तेरी हुश्न की जहागीर हुई ।
    तेरे दर्द को समझे तेरे हँसने पे ही कुछ कहें ये तो तेरी जहागीर हुई ।।1।।

    मेरे अश्क अब बहते कहाँ ये तो सागर की लहरों में गुम हुई ।
    ऊँची तरंगे, लहर-तुफानी, चक्रवात-बवंडर सी बनी जिन्दगानी हमारी ।
    तुझसे मुहब्बत क्या हुई सारी दुनिया यूँ मुझसे नजर चुराने लगी ।
    मेरे अल्फाज़ तेरी मुहब्बत की जहागीर हुई ।।2।।

    अल्फाज़ बयां करते है सबकी ये अपनी-अपनी बात है ।
    मगर ये दिल मेरा कोई अल्फाज नहीं तेरी मुहब्बत में ये तो सिर्फ तुझे चाहा है ।
    कभी दिन में सुरज जो दिखते थे आज वो क्यूँ मातम में खोया है ?
    मेरे अल्फाज़ तेरी मुहब्बत की अब तो जहागीर हुई ।।3।।
    कवि विकास कुमार

  • बीच भवर मैं तुने छोड़ा साथ हमारा ।

    बीच भवर मैं तुने छोड़ा साथ हमारा ।
    कभी याद आया कभी दिल को दुखाया ।
    ओ जाना-2 कहाँ खोया-खोया जरा तो बताना ।
    बीच भवर मैं तुने छोड़ा साथ हमारा ।।1।।

    वफा की रंगी दुनिया में रंगा था हमारा घर-आँगन ।
    अब सावन की झुला भी तेरे बिन लगे है सुना-सुना ।
    अब तो जा झलक दिखा जा कहाँ है खोया-खोया ।
    बीच भवर मैं तुने छोड़ा साथ हमारा ।। 2। ।

    न मैं माँगु तुझसे अब कोई वो कसमें पुराना ।
    तुम तो मुझे भुल चुकी पर मैं क्यूँ मजनूँ मारा-फिरता ।
    सदा तेरे ख्यालों में, मैं क्यूँ खोया रहता ।
    बीच भवर मैं तुने छोड़ा साथ हमारा ।।3।।
    कवि विकास कुमार

  • मैं जानता नहीं हूँ

    मैं जानता नहीं हूँ, तु कौन है तु मेरा ?
    किसी राह पे मिली मंजिल है या तुम कोई किनारा ।
    मगर दिल इतना मेरा अब टूटा किसी पे एख्तियार रहा ना मेरा ।
    ये सदियों से किसी राह पे भटका मन है,
    ये माने कैसे कोई मेरा भी आज हमसफर है ?
    मैं जानता नहीं हूँ, तु कौन है तु मेरा ।।1।।

    जग में भीड़ बहुत है, पर तन्हा सब नर है ।
    प्रेमी प्रेमवियोग में रम है, दुखियाँ दुःखों से तंग है ।
    सुख भी कहाँ रहती नरों के संग सबदिन है ।
    आज सुख का मेला तो कल फिर दुःख यार बना है मेरा ।
    मैं कैसे कह दूँ तु मंजिल है या तुम कोई किनारा ।
    मैं जानता नहीं हूँ, तु कौन है तु मेरा ।।2।।

    सबके संग वफा होती है कुछदिन,
    फिर लोग तन्हा रह जाते है सबदिन ।
    कैसे किसी राह पे मिलते नर बिछड़ते है ।
    सब-के-सब एक दिन अपनी मंजिल में खो जाते है ।
    किसे किसी की याद रही ये बात वक्त बताता है ?
    मैं जानता नहीं हूँ, तु कौन है तु मेरा ।।3।।
    कवि विकास कुमार
    17:43 30/06/2020

  • तेरे संग मैंने ख्याब जो देखे

    तेरे संग मैंने ख्याब जो देखे वो ख्याब नहीं जिन्दगी है मेरी ।
    ख्याब के सहारे कटते नहीं दिन, रात भी है बोझिल दिन भी है सुना ।
    भूले है सपने, फूटी किस्मत, टूटे है रिश्ते, बिखड़े सहारे ।
    तेरे……. ।।1।।
    आ देख जरा तुम इन वादियों को, लगते है रिश्ते अपने सदियों पुराने ।
    मगर तुम न जाने मुश्किल हमारी, राहें कठिन है, चलना तेरे संग है ।
    तेरे संग ही जिन्दगी, मौत से डर नहीं, रहनुमा तेरा प्यार है ।
    तेरे संग… ।।2।।
    तेरे प्यार का पुजारी हूँ मैं, राधा की कृष्ण हुँ मैं, मीरा की मुरलीमोहन हुँ मैं ।
    वफा निभाई हमने कई बेवफाओं संग कहीं तुम धोखा न देना मेरे यार ।
    बदलते मौसम की तरह तुम भी बदल न जाना मेरे यार ।।
    तेरे संग … ।।3।।
    उन रिश्तों को उन कसमों उन वादियों अब कौन भुले?
    जिये जो हमने संग तेरे वो वापस कैसे आये हम?
    वफा थी सच्ची कोमल दिल तेरा सह न सका मुकद्दर हमारी ।।
    तेरे संग … ।।4।।
    कवि विकास कुमार

  • बाबुल की दुआ है साथ तेरे, आशीष है मां का पास तेरे ।

    बाबुल की दुआ है साथ तेरे, आशीष है मां का पास तेरे ।
    दुनिया की न लगे बला तुझे , ईश्वर की रहमत साथ तेरे ।।
    जा-जा री बहना प्रातःबेला है संग तेरे -2

    छाँव-छाँव में बीते जिन्दगी तेरी, चुँभे न काँटे तेरे किस्मत ।
    हर दुखःतकलीफ हर ले ईश्वर तेरी, ईश्वर की साया है साथ तेरे ।।
    जा-जा री बहना गरीबी न झाँके तेरे दर पे कभी-2

    तु दीन-दुःखी के स्वामिनि बने, तेरे दर पे लगे संतों की जमघट ।
    तेरे घर में सदा हो रामकथा , तु मीरा प्रभु दीवानी हो ।।
    जा-जी री बहना तेरी धाम इस धरा पे स्वर्ग समान हो ।।

  • मुझसे ये हाल दिल का (गीत)

    मुझसे ये हाल दिल का कहीं कहा नहीं जाता है ।
    पास तुम होते मगर तुमको ये बताया नहीं जाता है ।
    जानता हूँ कि तुझे प्यार है मुझसे बेपनाहं सनम ।
    ये तुमसे भी बयां नहीं किया जाता है ।।

    तपड़ते है ये दिल तुझसे बिछु़ड़के ।
    रात कटती है तारे गिन-गिन के ।
    सुबह होती है नई आश लेके ।
    तेरे बैगैर जिये न जिन्दगी यहीं ख्याल रहता है ।।

    दुनिया में एक तेरे सिवा कुछ भाता नहीं ।
    जहां की सारी खुशियाँ तेरे बेगैर अधुरी-सी लगती है ।
    हर सपने पूरे हो मेरी यही दुआ रब से माँगते हैं ।
    मुझसे ये हाल दिल का कहीं कहा नहीं जाता है ।।
    गीतकार विकास कुमार बिहारी ।।

  • आया राखी का पावन त्योहार भैया

    आया राखी का पावन त्योहार भैया।
    तुझको पुकारे बहना का प्यार भैया।।
    फूल अक्षत चंदन से मैं थाली सजाई।
    मेवा मधुर और घी की ज्योति जगाई।।
    आंगन में अहिपन बनाई दो-चार भैया।
    आजा, तुझको पुकारे बहना का प्यार भैया।।
    आया राखी का पावन त्योहार भैया……।।
    सब मंगल भरे हैं इन धागों में यार।
    ना मामूली है इसमें बहना का प्यार।
    दिल से दिल का ये है आधार भैया।
    जरा सुन ले ‘विनयचंद ‘ पुकार भैया।
    आजा, तुझको पुकारे बहना का प्यार भैया।।
    आया राखी का पावन त्योहार भैया ………..।।

  • बारिश

    मन किसी सूखी नदी सा हो रहा
    आप कहती हो कि बारिश आ गई,
    जो ये छींटे पड़ रहे हैं उनसे बस
    एक सूनापन सा मन में गड रहा,
    कब तलक यूँ ही घिरेगा आसमाँ
    बूंदाबांदी ही रहेगी प्यार की,
    कब तलक बिछुड़े रहेंगे आप हम
    कब तलक बरसेगा खुलकर आसमाँ,
    —————- Dr. सतीश पांडेय

  • आत्महत्या न कर

    आत्महत्या न कर
    जिन्दगी को बचा,
    कोई दुख तेरे जीवन ज्यादा नहीं।
    देख चारों तरफ
    जो घटित हो रहा
    ढूंढ खुशियां उसी में, दुखों को नहीं।
    दुःख तो आते रहेंगे
    जाते रहेंगे।
    तेरा आना न होगा दुबारा यहां।
    रूठ जाये भले
    तुझसे संसार यह,
    पर स्वयं से कभी रूठ जाना नहीं।
    भोग ले सारे संसार के
    सुख व दुख
    पर दुखों स्वयं को डराना नहीं।
    आस मत रख किसी से
    जी बिंदास बन
    अपने जीवन ऐसे डुबाना नहीं।
    और बुझदिल न बन
    कर ले संघर्ष तू
    आत्महत्या से खुद को गंवाना नहीं।
    —– डॉ0 सतीश पाण्डेय,

  • जुदाई का दर्द

    जुदाई का दर्द

    कांटों से ही प्रेम हो गया ,कलियां दिल में चुभती है
    दर्द भारी यादों में तेरी मेरी अखियां जगती हैं
    ज्यादा जुल्म किया फूलों ने कांटे बस बदनाम हुए
    जो चुभते रहते थे वो ही जख्मी दिल के बाम हुए।
    अपने हुए पराए जैसे जो इस दिल में रहते थे
    बने गैर मेरे अपनों से, जिनको दुश्मन कहते थे
    उर में गहरा घाव हुआ है पीर नहीं रोका जाता
    बाढ़ असीमित है दृग में ये नीर नहीं रोका जाता
    एक नहीं सौ बार तुम्हारी यादों में ही जलता हूं
    उगने का है नाम नहीं अब सदा शाम सा ढलता हूं
    प्रेम वृक्ष की डाली से मैं पत्ते जैसा बिछड़ गया
    सच्चा था मेरे दिल लेकिन तेरे गम से बिगड़ गया
    मेरे इस नाजुक दिल में तुम आग लगाकर चले गए
    करके वादा पावनता का, दाग लगाकर चले गए
    लाखों दोष लगा लो मुझ पर किन्तु सनम ये ध्यान रहे
    प्रेम भले ना दो लेकिन मानवता का सम्मान रहे
    शायद मैं ही मूर्ख मिला था खरबों की जनसंख्या में
    धोखा दे दोगी मुझको तुम, ना था मैं इस शंका में
    पढ़ लेता तेरा दिल तो मैं वक्त नहीं जांया करता
    तुझे मनाने के खातिर मैं रक्त नहीं जांया करता
    प्रेम महज इक धोखा है मेरे दिल को एहसास हुआ
    तड़प तड़प तेरी यादों में ,मैं अब जिंदा लाश हुआ।
    ✍️शक्ति त्रिपाठी देव
    बस्ती , उत्तर प्रदेश
    भारत

  • Hariyali teej

    Har ang hai jaise khila khila …
    Jabse piya tera pyar mila ..
    Khud mai he simte ,khud mai he khoye ..
    Jaise Chanda ki baho mai chandni hai soye ..
    Rup nikharu ..khud ko sawaru ..
    Aaja piya tere raah niharu ..
    Bechain hai din simatne ko Tere baho mai…
    Nigahe kab se tike hai Tere raho Mai ….
    Aaja ab to sawan aaya …
    Pyar bhara mosam hai laya .

  • मौसम सुहाना सावन का

    मौसम सुहाना सावन का आया,
    संग अपने उत्सवों का पिटारा लाया
    ठंडी ठंडी ये बहती पवन,
    बागों में खिले हैं कितने सुमन
    आए जब बरखा की फुहार,
    पिया भी करे हैं मनुहार
    अंगना में भीगे मेरी धानी चुनर,
    पिया को भाएं मेरे सारे हुनर
    गीत लिखूं या खिलाऊं मैं खाना,
    वो हंस के बोलें एक और तो लाना
    सखियां सारी दिखाएं मेहंदी वाले हाथ,
    मां गौरी से मांगू मैं सदा “उनका”साथ

  • स्वतंत्रता दिवस (Independence day

    ले के तिरंगा नारा लगाया, जय जवान जय किसान।
    देश के ख़ातिर मरना सिखाया, वाह रे वीर इन्सान।।
    पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण में आज़ादी के डंका बाजे।
    धरती से लिपटा तिरंगा तीन रंग में देखो कैसे साजे।।
    कई वर्षों बाद माँ का सपना आज हो गया साकार ।
    तभी तो मनाया स्वतंत्रता दिवस भारत में पहली बार।।

  • ….. तभी तो (Independence day)

    हिमालय से गंगा के मिलन ,यही तो देश की पहचान है।
    तभी तो हम सब, गर्व से कहते हैं मेरा भारत महान है।।
    शास्त्री गोखले मौलाना राजेन्द्र, सभी देश के शान है।
    तभी तो हजारों वीर, हिन्दुस्तान पे आज भी कुर्बान है।।
    सरोजनी लक्ष्मी उषा इंदिरा, सभी आर्यावर्त के वरदान है।
    तभी तो धरती माँ को, अपने वीरांगनाओ पे अभिमान है।। जो कर गुजर गए उन पर ही, आज भारत मेहरबान है।
    तभी तो हम उन क्रान्तिकारियों के आज भी कदरदान है।।

  • गीत

    रिमझिम बरसे सावन सजना।
    झूले लगे हैं मोरे अंगना।।
    सब सखियों के आए सजना।
    क्यों है सूना मेरा अंगना।।
    आजा अंगना के भाग जगा दे।
    बमल मोहे झूला झूला दे़……बलम मोहे झूला झूलादे।।
    लहगा चुनरी ले के आऊँ।
    हरी चुड़ियाँ साथ में लाऊँ।।
    हाथों में मेंहदी लगा के रखना।
    सनम आऊँगा मैं तेरे अंगना।।
    सारे लाज शरम तू भगा दे…. सनम मोहे झूला झूला दे।।

  • राखी बंधन

    अब के बरस भैया पीहर ना आऊं,
    बांधन को राखी तोय रे
    रस्ते में बैरी कोरोना खड़ा है,
    नजर वो रखे है मोए पे
    डाक से भेजी है भैया को राखी,
    भतीजी से लियो बंधवाए रे
    अगले बरस बैरी कोरोना का अंत होगा,
    फिर बांधूंगी राखी ,तोए आए के

  • झूला लगाय दऽ पिया मोर अंगनमा में

    रिमझिम बरसे फुहार देखऽ सवनमा में।
    झूला लगाय दऽ पिया मोर अंगनमा में।।
    हरियर चुनरी हरियर चोलिया
    हरियर हरियर पहिरनी चूड़िया कलईया में।
    हथवा में मेंहदी रचैली सनम
    नाम ले ले के तोहरे पियाजी बलईया में।।
    गोरवा के पायलिया बोले झनाझन सवनमा में।
    झूला लगाय दऽ पिया मोर अंगनमा में।।

  • सावन

    चला शावर है अंबर से
    भिगोने धरती का आंगन
    खिला हर पात डाली का
    बही गंगधार भी कलकल

    करे कलरव हर पंछी
    चली है नाव कागज की
    समेटे ख्वाहिशें मन भर
    हुआ है बालमन उच्छृंखल

    खिला हर पात डाली का
    बही गंगधार भी कलकल

    बड़ी गूंजें जय भोले की
    बुझी चिंगारी शोले की
    डले झूले भी सावन के
    हुआ गौरी का मन चंचल

    खिला हर पात डाली का
    बही गंगधार भी कलकल

    कहीं पायल बुलाती है
    मिलन की राह दिखाती है
    कहीं चूड़ी के शिकवे हैं
    हुई हर आस जो धूमल

    खिला हर पात डाली का
    बही गंगधार भी कलकल

    अजब इस बार का सावन
    नहीं कहीं दिख रहा कावड़
    मगर उपवास से नर नार
    करें इस माह को उर्मिल

    खिला हर पात डाली का
    बही गंगधार भी कलकल

    स्वरचित
    रचना निर्मल
    दिल्ली

  • स्वप्न में ही

    हमारी ओर से शुभरात्रि
    कह देना उन्हें कविता,
    साथ ही यह भी कह देना कि
    सपने में चले आना।
    कहीं पर बैठ करके
    प्यार की दो बात कर लेंगे।
    जागते में हमें संसार
    मिलने ही नहीं देगा।
    इसलिए स्वप्न में ही
    प्यार की दो बात कर लेंगे।
    —डॉ0 सतीश पाण्डेय, चम्पावत।

  • बूंद बूंद बूंदें।

    बूंद बूंद बूंदें
    बूंद बूंद बूंदें

    बूंद बूंद बरसती है ,
    आंखों से मेरी ।
    तूने क्यों की रुसवाई ,
    जज्बातों से मेरे।
    बूंद बूंद बूंदें
    बूंद बूंद बूंदें

    तू धूप सा चुभता रहा,
    मैं बर्फ सी पिंघलती रही।
    तू गाज सा गिरा मुझ पर ,
    मैं सब्र सी सहती गई।
    नैना ये तरसते हैं,
    यादों में तेरी।
    कितनी नींद गवाही ,
    यादों में तेरी ।
    बूंद बूंद बूंदें
    बूंद बूंद बूंदें

    पागल मनवा ढूंढे तुझको,
    पर तू तो मिलता नहीं।
    बेबसी का जाम है तू ,
    जाम ये  चढ़ता नहीं।
    जाम ये मिलता नहीं।
    दिल का बहम मिटा नहीं,
    कि तू बेवफा नहीं।
    फिर वफा तो की ही नहीं,
    हालातों से मेरे।
    बूंद बूंद बूंदें
    बूंद बूंद बूंदें

    बूंद बूंद बरसती है ,
    आंखों से मेरी ।
    तूने क्यों की रुसवाई ,
    जज्बातों से मेरे।
    बूंद बूंद बूंदें
    बूंद बूंद बूंदें
                  ——मोहन सिंह मानुष

  • मीत मेरे

    सावन की बूंदें मन में हलचल कर रहीं
    तुम कहाँ हो मीत मेरे आओ ना,
    मत रहो यूँ दूर मुझसे आओ ना,
    मैं मनोहर ऋतु में आखें भर रही,
    बाढ़ मत आने दो मेरे नैन में
    मत बहाओ आस मेरी, आओ ना,
    इस भरी बरसात में बेचैन हूँ
    तुम कहाँ हो मीत मेरे आओ ना,

  • मां का सर्मपण

    एक बार मां बीमार पड़ी हफ्तों उपवास
    जब जिद करके मैंने एक निवाला उठाया
    मेरे हाथ बीच में ही थाम के
    उसने पूछा दबी आवाज में
    पापा ने खाना खाया?
    पापा को आदत है अक्सर थाली में छोड़ने की
    मां उसे प्रसाद समझ शिद्दत से खा जाती

    मैंने कभी कभी उनको लड़ते देखा है
    माँ को मीठी घुडकियां देते देखा है

    देखा नहीं पापा को कभी
    मां की थाली से खाते हुए
    सुनो मैं वादा करती हूं
    हमारा होगा
    एक घरौंदा
    एक थाली
    एक दर्द
    एक हंसी
    और
    एक हम

    वादा👩‍❤️‍👨

    पूजा मिश्रा मध्यप्रदेश

  • देश के वीर जवानों के लिए

    🍀🌷🌹🙏नमन् है मेरे देश के वीर सिपाही को 🍀🌹🙏
    ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
    कोटी कोटी प्रणाम है मेरे देश के वीर सिपाहियों को जो अपनी जान की परवाह किए बिना मेरे देश की जान बचाने के लिए कोई कसर नही छोडंते बारम्बार प्रणाम आपको,,,,
    🍀🌸🌷🌹 वीर तुम बढ़े चलो,,,,
    धीर तुम बढ़े चलो,,,,,🍀🙏
    जान है जहान है आपने ये ना देखा कभी ,,,
    दुश्मनों की नजरें जब भी गडीं अपने देश में
    तुमने कदमों को ना खींचा जी जान लगा दी देश में🙏
    मुरझाने लगी जो बगिया मेरे देश की तुमने सीचें उसके उपवन,,🙏
    कही गोलियां बरसाई तुम पर कही वार सहें सीने में,,
    लगी देश की शान मुरझाने तो तुमने ना खीचें पीछें अपने कदम,, 🍀🌹🙏
    दिन का पहरा ना देखा ना देखा रात का वो पहर
    बस बन चले तुम मेरे वीरों मेरे देश के लिए एक प्रहर,, 🍀🌹🙏
    कही गोलियां चली तुम पर तुम फिर भी सेवा करते चलें,
    कितनी रातें कितने दिन थे ना जाने कितनी जान बचातें गए,,, मेरे देश के लिए तुम ना जाने कितने दुख सहते गए 🍀🌸🌹🙏
    त्याग के इतिहास में जब नाम तुम्हारा आएगा ,,
    देश बचाने वालों तुम्हारा भी नाम इतिहास में लिखा है और लिखा जायेंगा,,, 🍀🌹🙏
    अपना घर छोड़कर तुमने देश के परिवार को बचाया,,
    वास्तव में सेवा क्या है तुमने ही यह कर दिखाया ,,🍀🙏
    क्या लिखू मेरे शब्द कम है तेरी तपस्या
    को बया करने को तुमने जो किया मेरे देश के लिए उस तपस्या को बया करनें को,,,,, कोटि कोटि प्रणाम हैं मेरे देश के वीर सिपाहियों को,,, 🙏पी सी जोशी हल्लदानी
    ,🙏🍀🍀🍀🍀🌸🌸🌸🌸🌹🌹🌹🌹🙏

  • मन की पतंग

    मीठे मीठे सपने संजोने दो
    होता है जो उसे होने दो
    कल का पता नहीं क्या होगा
    बाहों में और थोड़ा सोने दो ।………..
    जागी है अखियां हम सो गए हैं
    यादों में उनके हम खो गए हैं
    रोको ना रस्ता उनकी निगाहों का
    प्यार के बीज और बोने दो ।
    मीठे मीठे सपने संजोने दो ………….
    कैसे बुझाए अब दिल की लगी को
    खिलने से कौन रोके मन की कली को
    प्यार की राहों में छिप जाए अगर
    ढूंढना न मुझको और खोने दो
    मीठे मीठे सपनों संजोने दो …………
    मन की पतंग बिन डोर उड़ी
    जहां भी चाहा न, उस ओर मुड़ी
    यौवन भी लेने लगा अंगड़ाई
    दिल ने कहा मेरे मन से, होता है जो और होने दो।
    मीठे मीठे सपने संजोने दो …………
    होता है जो उसे होने दो
    कल का पता नहीं क्या होगा
    बाहों में और थोड़ा सा दो।
    वीरेंद्र

  • पथ के राही न भटक

    =राही पथ से न भटक=योगेश ध्रुव”भीम”
    ×××××××××××××××

    अडिग मन राह शांत हो,
    निश्छल जीवन लेकर चल,
    चाहे भटके मन: चंचल,
    जीवन नाथ के तू चल,
    पथ के राही न भटक
    ऐसे पथ में तू चल ||

    न डिगा अपना नियत,
    ऐसे नियति बना कर चल,
    मिला जीवन सौभाग्य पूर्ण यह,
    दुर्भाग्य गर्त में न डाल के चल,
    पथ के राही न भटक,
    ऐसे पथ में तू चल ||

    लक्ष्य ऐसा अडिग कल्पना ,
    ऐसे मूरत बना के चल,
    कल्पना की कामयाबी,
    सकार जीवन लेकर चल,
    पथ के राही न भटक,
    ऐसे पथ में तू चल ||

    अंतिम पड़ाव उस जीवन की,
    ऐसा मूरत बना कर चल,
    जन मानस की मन:पटल पर,
    ऐसे चित्र उकेर कर चल,
    पथ के राही न भटक ,
    ऐसे पथ में तू चल ||

  • सम्बन्ध

    रिश्तों की डोर मे मजबूरियों का यह क्या सिला है,
    अपनों के बीच यह कैसा नफ़रत का फूल खिला है

    गुलिस्तां महकता था कभी जिनकी किलकारियों से,
    खुश्बू बिखरती थी कभी बागीचे की फुलवारियों से
    सींचता था जो प्यार से उसे बिखरा चमन मिला है,
    रिश्तों की डोर मे मजबूरियों का यह क्या सिला है

    सच्ची चाहतों के भंवर मे फंसी यह कैसी जिंदगी है,
    इन पत्थर दिलो के लिए यह कैसी बंदिगी है
    मुझको भी क्यों ना बनाया उनसे यह गिला है,
    रिश्तों की डोर मे मजबूरियों का यह क्या सिला है

    बढ़ते फासले दरमियान के कहाँ तक जायेंगे
    दूर होकर भी एक दूजे को बहुत याद आयेंगे
    देख कर दुनिया के दावों को ऊपर वाला भी हिला है,
    रिश्तों की डोर मे मजबूरियों का यह क्या सिला है

    अनसुलझे सवालों के साथ पहेली यह जीवन रेखा,
    जवाबो को ढूंढ़ती मैंने अपनी ज़िन्दगी को देखा
    दांव पर लगी ज़िंदगियों का यह क्या सिलसिला है,
    रिश्तों की डोर मे मजबूरियों का यह क्या सिला है
    अपनों के बीच यह कैसा नफ़रत का फूल खिला है

    पंकज प्रिंस

  • करुणाकर श्रीराम

    दशरथ के घर जन्मे राम
    पर आनन्द अवध में छाया है।
    केवल कौशल्या कैकेयी नाहीं
    हर घर हर नर मंगल गाया है ।।
    हुआ विवाह राम का जब से
    घर-घर मधुर सुमंगल छाया है।
    वनवासी हो गए राम जी
    हर जन मन घबराया कल्पाया है।।
    वापस आए राम अवध में
    जगर-मगर जग सब हर्षाया है।
    ‘विनयचंद ‘उस करुणाकर के
    करुणा का पद एक गाया है।।

  • भजन

    प्रभु का नाम जप ले प्राणी।
    तेरी दो दिन की जिन्दगानी।।
    एक दिन बीता खाते-पीते।
    रात भी बीती सोते-सोते।।
    नया सबेरा पाकर भैया
    क्यों करता रे आनाकानी।। तेरी़़़़
    दिन दुपहरिया साँझ बीतते
    ना देर लगेगी भैया।
    धन दौलत कुछ काम न आवे
    नाहीं बापू मैया।।
    ‘विनयचंद ‘हर सांस से गाओ
    राम नाम निर्वाणी।। तेरी दो़़़़़़

  • हे कान्हा! मैं तेरी जोगन

    हे कान्हा ! मैं तेरी जोगन
    जोग ना छूटत मेरो
    ………………..
    रोम-रोम में बसत है तेरो
    प्रेम अनमोल रतन
    ………………….
    हे कान्हा ! मैं तेरी जोगन
    जोग ना छूटत मेरो
    ………………….
    माखनचोर चोर तू है चीतचोर
    बंसी मधुर बजायो
    ………………….
    प्रीत में तेरी राधा नाचत
    ये कैसो रोग लगायो
    …………………..
    मोहे रिझा कर गोपिन के संग
    काहे रास रचायो
    ……………………….
    कित मेरी गई चूनर धानी
    कित नथुनी हेरायो
    ………………………
    सुध-बुध खोकर नाचत
    ब्रजवासी कैसो जोग लगायो?????

  • कल किसने देखा कल आये या ना आये

    जीवन संदेश
    कल किसने देखा कल आये या ना आये
    आज की तू परवाह कर ले कही यह भी चला न जाये

    देख दुनिया की हालत अब तो तू संभल जा
    कहे रही तुझसे जो सरकार वह तू मान जा
    कल के लिए तू आज घर पर ही रहे जाये
    कल किसने देखा कल आये या ना आये

    साफ सफाई हाथ की धुलाई है जीवन आधार
    कर लो यह सब जो खुद के जीवन से है प्यार
    निकल कर बाहर तू कोरोना क्यों फैलाये
    कल किसने देखा कल आये या ना आये

    वक़्त है देश के लिए कुछ कर गुजरने को
    बना के रखो दूरी अपनों से आगे जीने को
    ऐसा न हो कोरोना तुझे या अपनों को खा जाये
    कल किसने देखा कल आये या ना आये

    आओ करें यह वायदा खुद से आगे बढ़ कर
    हराएंगे हम सब कोरोना को इस पर चढ़ कर
    दुआ है ईश्वर से अब किसी की जान न जाये
    कल किसने देखा कल आये या ना आये
    पंकज प्रिंस

  • कोरोना वायरस खाए जाति है

    🇮🇳सीतापुरिया अवधी भाषा:-🇮🇳

    घर ते निकरई मा जियरा डेराति हई
    कोरोना वायरस खाए जाति है।😩😩

    हरि घंटा हम हाँथ धोइति हन
    खाना- पीना हम संतुलितई खाईति हन
    खाँसी आवई मा जियरा डेराति है
    कोरोना वायरस खाए जाति है।

    संतरा-निम्बू हम खातई रहिति हन
    गिलोय घिसि कई हम कात्ता पीति हन
    तुलसी कि पाती सब दिनु भरि चबाति हई
    कोरोना वायरस खाए जाति है।

    दूरई ते सब ते नमस्ते करिति हन
    हाथ हम कोई ते नाई मिलाइति हन
    मुँह का अपने हम ढाकि के रहति हैं
    कोरोना वायरस खाए जाति है।

    स्वस्थ रहें मस्त रहें और व्यस्त रहें

  • तोहरे प्यार में

    तोहरे प्यार में होखे दीवानी
    बड़ा नीमन लागेले
    कवने जतन से तोहका मनावे
    कुछ ना समझ में आवेले

  • अपमान

    अपमान करें कोई तेरा सम्मान उसे ही तुम देना
    जो कोई बुराई तेरी करें बदला ना बुराई से लेना

    गीता मैं यही और रामायण मैं और धर्म सभी यह कहते है
    जो त्यागी है वह त्याग करें हंस हंस कर सौ दुख सहते है
    त्याग का दीप जले मन मैं पल एक नहीं बुझने देना
    जो कोई बुराई तेरी करें बदला ना बुराई से लेना

    जो प्रभु ने दिया ने दिया संतोष लेकर
    कुछ और मिले यह लोभ ना कर
    लोभ का दीप जले मन मे पल एक नहीं जलने देना
    जो कोई बुराई तेरी करें बदला ना बुराई से लेना

    अपमान करें कोई तेरा सम्मान उसे ही तुम देना
    जो कोई बुराई तेरी करें बदला ना बुराई से लेना

    पंकज प्रिंस

  • कल किसने देखा कल आये या ना आये

    कल किसने देखा कल आये या ना आये
    आज की तू परवाह कर ले कही यह भी चला ना जाये
    देख परायी चुपड़ी तेरा मन क्यों ललचा जाय
    पास तेरे जो है तू उससे मन को समजाये
    रुखा सूखा जो कुछ है कही वह भी छूट ना जाए
    कल किसने देखा कल आये या ना आये

    आज तेरा है जो वह कल था और किसी का
    आने वाले कल मैं वह होगा और किसी का
    फिर उस जगह पर अपना हक़ क्यों जताये
    कल किसने देखा कल आये या ना आये

    करम किये जो तूने उसका फल भी यही मिलेगा
    आज नहीं तो कल सब कुछ यही मिलेगा
    बोया पेड़ बबूल का तो आम कहा से खाये
    कल किसने देखा कल आये या ना आये

    जैसी करनी वैसी भरनी रीति तो है यह पुरानी
    अंत समय सब याद करते अपनी भूली कहानी
    गुजर गया जो वक़्त अब लौट कभी ना आये

    कल किसने देखा कल आये या ना आये
    आज की तू परवाह कर ले कही वह भी चला जाए

    पंकज प्रिंस

  • कभी-कभी

    कभी कभी तो वक्त
    मिलता है हमें
    अपने ज़ज्बात
    बयां करने का
    बाकी फुर्सत कहां
    होती है हमें उनकी यादों से।

  • साथी हाथ बढ़ाएं

    चल साथी हाथ बढ़ाएं ,मिलकर सबको पार लगाएं
    क्या हुआ जो कोई छोटा क्या हुआ जो कोई रूठा
    हम अपना कर्तव्य निभाएं मिलकर सबको पार लगाएं।
    कर्म पथ पर चलने वाले मन में बैर न रखते हैं
    अपनी जिम्मेदारी को ही अपना तप समझते हैं।
    उम्मीदों का दामन थामे सपनों का संसार पड़ा है
    छोटे छोटे सपने थामें खुशियों का अंबार खड़ा है
    खुशियां बांटे खुशियां पाएं क्यों दोष को मन में लाएं।
    चल साथी हाथ बढ़ाएं मिलकर सबको पार लगाएं।

  • दिलों का खेल।

    दिलों का खेल मत खेलो
    न कोई इसमें जीता है।
    सभी बदनाम होते हैं,
    दर्द-ए-जाम पीते हैं
    मुनासिब अब यही होगा कोई दिल को लगाए ना,
    दिलों की दिल्लगी करके खुद को यूं सताए ना।

  • खेल रंग वाला

    सजनी है गौर और
    सजना क्यों काला?
    आओ हम खेलें
    खेल रंग रंग वाला।
    लाल से रंग दो
    हरे से रंग दो।
    नीला और पीला
    गुलाबी से रंग दो।
    रंग डालो अज बेनीआहपीनाला।
    आओ हम खेलें खेल रंग वाला।।
    तन को रंगो सब दिलवर के रंग से।
    मन को रंगो आज प्रेम के रंग से।।
    विनयचंद मिटा दे भाव नफरत वाला।
    आओ हम खेलें खेल रंग वाला।।

  • हिन्दुस्तान

    करते हैं बहुत प्यार
    हम हिन्दुस्तान से अपने
    रहता है बहुत फक्र हिन्दुस्तान पर अपने
    इसकी एकता अखंडता पर
    हमको नाज़ है
    लहराता है तिरंगा हिन्दुस्तान पर अपने ।

  • जटायु अंत में आंखें खोले

    जटायु अंत में आंखें खोले
    हाथ जोड़ के करे वंदना रोता रोता बोली
    जटायु अपनी आंखें खोले
    जल जो पीले तो वह नहीं पीता राम बचा लो दुखी है सीता
    भक्ति रस में डुबके देखो अशू नयन बोले
    जटायु अंत में आंखें खोले
    खेल रहा जो मौत से क्रीड़ा देखी ना जाती उसकी पीड़ा हरि की गोद में पड़ा हुआ वो माटी का तन डोले
    जटायु अंत में आंखें खोलो
    अनंत समय हरी पास है मेरे अंधकार आंखों को घेरे
    क्या करें कि मैं हरी दर्शन कर लूं एक रट मन में डोले जटायु अंत में आंखें खोलें

  • जटायु अंत में आंखें खोले

    जटायु अंत में आंखें खोल
    हाथ जोड़ के करे वंदना रोता रोता बोली
    जटायु अपनी आंखें खोली
    जली जो पीले तो वह नहीं पीता राम बचा लो दुखी है सीता
    भक्ति रस में डुबके देखो देखो अशू नयन बोले
    जटायु अंत में आंखें खोली
    खेल रहा जो मौत से क्रीड़ा देखी ना जाती उसकी पीड़ा हरि की गोद में पड़ा हुआ वो माटी का तन डोले
    जटायु अंत में आंखें खोलो
    चलते समय हरी पास मेरे

  • गाना

    पदम्
    गाना🎶🎵🎤🎶🎤 गाना🎶🎵🎶🎤🎵🎶🎤🎵🎶🎤🎵🎶🎤

  • क्या बदलना

    मंच भी बदल जायेंगे,किरदार भी बदल जायेंगे, 

    वक्त के साथ चलते रहो,मंजर भी बदल जायेंगे। 

    हमेशा अपनी हिम्मत और हुनर पर भरोसा रखना, 

    जो ठीक लगे दिल को वही काम जूनून से करना। 

    हाथ की लकीरें का क्या?बनती है और बिगड़ जाती है, 

    कर्म हो अच्छे तो भाग्य भी खुद ही सुधर जाती है। 

    बेफिक्र होकर हमेशा बुलंदियों पर निगाह रखना, 

    उठ गये जो कदम तो अब पीछे क्या हटना।।

  • कोहिनूर

    कभी हीर ने मुझे राँझा कहकर पुकारा था,
    इश्क़ मे मैने खुद को हीरे- सा तराशा था।
    दुनिया की खातिर वह तो मुझे ठुकरा गये,
    जीते जागते इन्सान को पत्थर-सा बना गये।
    कौन यहाँ इस पत्थर को अब भगवान मानता है,
    तू भी तो नही कोहिनूर की कीमत को जानता है।

  • Tum bin

    तुम बिन मैं एक बूँद हूँ,
    तुम मिलो तो सागर बन जाऊँ…
    तुम बिन मैं एक धागा हूँ,
    तुम मिलो तो चादर बन जाऊँ…
    तुम बिन मैं एक कागज हूँ,
    तुम मिलो तो किताब बन जाऊँ…
    तुम बिन मैं इक चिंगारी हूँ,
    तुम मिलो तो ज्योति बन जाऊँ…
    तुम बिन मैं एक सुर हूँ,
    तुम मिलो तो संगीत बन जाऊँ…
    तुम बिन मैं एक मोती हूँ,
    तुम मिलो तो माला बन जाऊँ…
    तुम बिन मैं एक सांस हूँ,
    तुम मिलो तो जीवन बन जाऊँ…
    तुम बिन मैं केवल शब्द हूँ,
    तुम मिलो तो प्रेमग्रंथ बन जाऊँ…

  • ज़िन्दगी

    तेरे मुखड़े में मुझको रब की तस्वीर दिखती है, तेरे माथे पे बिंदिया चाँद सी खूब सजती है, तेरी आँखो में तारों का बड़ा सुंदर नजारा है, तेरे चेहरे पे सूरज का बड़ा अच्छा उजाला है।। मैं रब से तुझको पाने की इबादत रोज़ करता हूँ, हो दिन या रात तेरे चाँद से चेहरे को तकता हूँ, तू मुझसे दूर है तो क्या हुआ ये मेरे हमसफर, तेरी तस्वीर से तो रात दिन मैं बात करता हूँ।। खुली हो आँख तो तेरे चेहरे को ही पाउ, अगर नींद आ जाए तेरे सपनो में खो जाउ, भुला तुझको तो मैं अब एक पल भी नही सकता, तमन्ना दिल की है मेरे महबूब तुझे देखू तुझे पाउ।। तेरे हाथो में मेहंदी रंगों वाली खूब सज़ती है, तेरे पैरो की पायल छन् छन् खूब करती है, तेरी आवाज़ से खिलते हो जैसे फूल उपवन के, तेरी जुल्फो के उड़ने से हवाएं खूब चलती है।। तेरी आँखो के काज़ल से घटा सावन की छाती है, तेरे उड़ते दुपट्टे से बिजलिया तड़क जाती है, अगर छलके तेरी आँखो से एक भी बूंद अस्को की, बिना मौसम गगन से बारिशे हो ही जाती है। तेरी मुस्कान से खिलते न जाने पुष्प कितने है, तुझे देखने को घर तेरे आते पंछी कितने है, तेरी आँखो के खुलते ही निकलती सूर्य की किरणे , तेरी याद में दिलवर मेरी अँखिया बरसती है।।

  • Tera hua mai

    प्यार फूलों से कितना किये जा रहा, दूर रहके भी तेरा हुआ जा रहा। तुम अपने उपवन में हर दम महकते रहो, भौरा बनकर मैं तेरा हुआ जा रहा। प्यार के राग को तुम छुपाती हो क्यो, फूलों की डालियों सी शर्माती हो क्यों। खिलती कलियो के जैसे है तेरी हँसी, खुशबू होकर चमन में ना आती हो क्यो। माली बनकर तुम्हे तोड़ लूंगा प्रिये, दिल में तुझको सजोकर रखूँगा प्रिये। तुम आओ तो दिल मेरा सज़ जायेगा, गीत शृंगार का एक नया गायेगा

  • साईं भजन

    “एक मालिक सभी का “कहने वाले।
    सुन साईंं मेरे शिरडी वाले ।।
    राम को पूजा कृष्ण को पूजा।
    अल्ला ईसा देव नहीं दूजा।।
    एक मस्जिद को द्वारका कहने वाले।
    सुन साईंं मेरे शिरडी वाले।।
    पानी भर -भर दीप जलाया।
    दुखियों का सब कष्ट मिटाया।।
    अपना सबको कहने वाले।
    सुन साईंं मेरे शिरडी वाले।।

  • Raajdulara

    है इस जगत की सारी खुसिया, मातृभूमि के चरणो में। माँ ही है इस जग की जननी , है सारा ही जा उससे। उसकी एक प्यारी लोरी में ,सातों स्वर मुझको मिलते है। उसके मीठे बोल मुझे, इस जीवन से अच्छे लगते है। माँ का आँचल तो ,मुझको इस जीव जगत से प्यारा है। हर बेटा इस जग में अपनी माँ का राजदुलारा है।

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