ग़ज़ल

खुशी तलाश की, तो मिल ही गई……

खुशी तलाश की, तो मिल ही गई दर्द के नीचे दब गई थी कहीं। छेड़ बैठे वो अपना ही किस्सा बीच में बात मेरी, रह ही गई। एक दीवार सी थी दोनों में गिराने बैठे, तो फिर गिर भी गई। मुद्दतों बाद वो घर आये मेरे चलो अपनी दुआ भी, सुन ली गई। सारी यादों की खूब कस कर के गठरी बांधी थी,मगर खुल ही गई। कश्ती तूफां से निकल ही आई किसी तरह भी चली, चल ही गई। ………..सतीश कसेरा »

वो नदी सी थी, मैं किनारा सा….

वो नदी सी थी, मैं किनारा सा कुछ ऐसा ही मिलन, हमारा था। खुद में बस डूबते, उतरते रहे न समन्दर था, न किनारा था। उसने शायद, सुना नहीं होगा मैने शायद, उसे पुकारा था। कसूर ये नहीं कि किसका था सवाल ये है, क्या तुम्हारा था। बिना देखे, गुजर गए दोनों मुड़ के फिर देखना गवारा था। ———सतीश कसेरा »

इतना लंबा तो नहीं होता है चिट्ठी का सफर…………

हरे-भरे से थे रस्ते पहाड़ होने लगेनदी क्या सूखी, इलाके उजाड़ होने लगे।कौन से देवता को खुश करें कि बारिश होरोज चौपाल में ये ही सवाल होने लगे। लकीरे खिंचने लगी रिश्तों में तलवारों से जमीं के टुकड़ों को लेकर बवाल होने लगे। इतना लंबा तो नहीं होता है चिट्ठी का सफर कि आते-आते महीने से साल होने लगे। कमर के साथ लचकती थी और छलकती थी प्यासी उस गगरी में मकड़ी के जाल होने लगे। नाम तक लेता नहीं है कभी उतरने का... »

सोचता हूं अभी पाजेब बजी है उसकी………..

सोचता हूं अभी पाजेब बजी है उसकी……….. दूर अपने से उसे होने नहीं देता हूं मैं ख्यालों में उसके साथ-साथ रहता हूं। मैने दीवार पे टांगें हुए हैं फ्रेम कई उसको मैं सोच के तस्वीर लगा लेता हूं। खोल देता हूं कई बार खिड़कियां सारी किसी झोंके में हवा के उसे पा लेता हूं। कमरे में आती हुई धूप की चुटकी लेकर उसकी तस्वीर पे बिंदिया सी सजा देता हूं। सोचता हूं अभी पाजेब बजी है उसकी फिर कई चाबियां ... »

घुल गया उनका अक्स

घुल गया उनका अक्स

घुल गया उनका अक्स कुछ इस तरह अक्स में मेरेआईने पर भी अब मुझे न एतबार रहा हमारी मोहब्बत का असर हुआ उन पर इस कदरनिखर गयी ताबिश1-ए-हिना, न वो रंग ए रुख़्सार रहा हमारी मोहब्बत पर दिखाए मौसम ने ऐसे तेवरन वो बहार-ए-बारिश रही, न वो गुल-ए-गुलजार रहा भरी बज्म2 में हमने अपना दिल नीलाम कर दियाकिस्मत थी हमारी कि वहां न कोई खरीददार रहा तनहाईयों में अब जीने को जी नहीं करतादिल को खामोश धडकनों के रूकने का इंतजार र... »

फिर किताबों की याद आने लगी…..

जिन्दगी जब जरा घबराने लगी फिर किताबों की याद आने लगी। कितना जागा हुआ था रातों का अब किताबें मुझे सुलाने लगी। उसकी तस्वीर अचानक निकली तो वो किताब मुस्कराने लगी। धूल का रिश्ता था किताबों से जब उड़ाई, वहीं मंडराने लगी। फूल सूखा हुआ मिला लेकिन उसी खुश्बू की महक आने लगी कुछ किताबें थी जिंदगी जैसी जरा सा खोला तो कराहने लगी। थूक से पन्ने कुछ ही पलटे थे जुबां लफ्जों को गुनगुनाने लगी। मैली जिल्दों सी जिंदग... »

उनके लब कांप गए, मेरी आंख भर आई……

मिले थे फिर से तो, पर बात न होने पाई उनके लब कांप गए, मेरी आंख भर आई। बुझ गए थे सभी चिराग मगर इक न बुझा तो हवा जा के आंधियों को साथ ले आई। जंहा से दूर निकल आये थे, वहीं पहुंचे मेरे सफर में हर इक बार उसकी राह आई। अपने हालात पे खुद रोये और खुद ही हंसे हमीं तमाशा थे और हम ही थे तमाशाई। मेरे हर दर्द से वाकिफ है आस्मां कितना हम न रोये थे तो बरसात भी नहीं आई। जिंदगी भर उनकी हर याद संभाले रक्खी उम्र भर इ... »

जो आँख देख ले उसे

जो आँख देख ले उसे वो वहीं ठहर जाती हैदेखते देखते उसे शाम ओ सहर बीत जाती है फ़लक से चाँद भी उसे देखता रहता है रातभरउसकी रूह चाँदनी ए नूर में खिलखिलाती है महकते फूल भी उससे आजकल जलते हैतसव्वुर से उसके फिजा सारी महक जाती है मदहोश हो जाता है मोसम लहराए जो आचॅल उसकाजुल्फें जो खोल दे वो तो घटाऍ बरस जाती है तनहाइयों में जब सोचता हूं उनकोशब्द ओ शायरी खुद ब खुद सज जाती है »

वरना कौन अपनी नाव देता है………………

पत्ता-पत्ता हिसाब लेता है तब कहीं पेड़ छांव देता है। भीड़ में शहर की न खो जाना ये दुआ सबका गांव देता है। हम भी तो डूबने ही निकले थे वरना कौन अपनी नाव देता है। किसी उंगली में जख्म देकर ही कोई कांटा गुलाब देता है। जहां बिकेगा बेच देंगे ईमां कौन मुहमांगा भाव देता है। जान देने का हौंसला हो अगर फिर समंदर भी राह देता है। जिंदगी दे के ले के आया हूं कौन यूं ही शराब देता है। प्यार खिलता है बाद में जाकर पहल... »

कौन सा दर्द सुनाया जाए……….

कौन सा दर्द सुनाया जाए………. नींद को ढूंढ के लाया जाए चलो कुछ देर तो सोया जाए। जल गई इंतजार में आंखें अब जरा अश्क बहाया जाए। आ के फिर बैठ गईं हैं यादें कौन सा दर्द सुनाया जाए। हमने जाना है दर्द जलने का इन चरागों को बुझाया जाए। रात को टूटेंगे कितने तारे ये जमीं को भी बताया जाए। अपनी तकदीर में रोना है अगर सबको हंस-हंस के बताया जाए। ~~~~~~~~~~~सतीश कसेरा »

ऐसे महसूस हम इक दूसरे को करते रहे………

वो जमीं आसमां भी दूर रह के मिलते रहे हम अपने फासिलों में रहके बस तड़पते रहे। हमारे बीच खामोशी की नदी बहती रही हम किनारों की तरह वैसे साथ चलते रहे। जरा सा जिक्र ही छेड़ा था उनके वादों का वो सर झुका के बेबसी से हाथ मलते रहे। लबों तक आ के बर्फ हो गई कितनी बातें लफ्ज अंगारे से बनकर जुबां पे जलते रहे। हवा हम दोनों के जिस्मों की छुअन लाती रही ऐसे महसूस हम इक दूसरे को करते रहे। उदास नजरों से उठकर चले गए ... »

दूर से कब वो समझ आता है……..

कुछ तो होता जरुर नाता है ऐसे कोई नहीं मिल जाता है। उसी के सामने दिल को खोलें जिसे कुछ हाल पढऩा आता है। फिर कोई भीड़ ही नहीं लगती भीड़ में जब वो नजर आता है। किसको रख लें, किसे गिरा दें वो ये तो नजरों को खूब आता है। साथ चलती रहे दुनिया सारी साथ कोई एक ही निभाता है। उसके दिल में उतर के देखेंगे दूर से कब वो समझ आता है। साथ उनका तो बस बहाना था रास्ता तो हमें भी आता है। ………….सतीश... »

कहीं बेघर ने इक छत का सहारा कर लिया होता…….

कहीं बेघर ने इक छत का सहारा कर लिया होता तो फिर हर हाल में उसने गुजारा कर लिया होता। मुसाफिर का सफर थोड़ा जरा आसान हो जाता अगर रस्तों ने मंजिल का इशारा कर दिया होता किनारे पर ही आकर के अगर हर बार डूबेगी तो तूफां में ही कश्ती ने किनारा कर लिया होता। अभी बाकी तुम्हारी दास्तां थी, क्या पता उनको वो रुक करके चले जाते, इशारा कर दिया होता। तेरी रंगीन दुनियां देखने को वो भी तरसे हैं जो आंसू सूख पाते तो नज... »

चांद पे चरखा चलाती रही……..

चांद पे चरखा चलाती रही…….. खुदा की दुनिया है, इसमें तो क्या कमी होगी हमारी आंख ही में ठहरी कुछ नमी होगी। जितना जीने के लिये चाहिये वो सब कुछ है नहीं लगता है कि ऐसी कहीं जमीं होगी। फिर से कोई सुना के हो सके तो बहला दे वो सब कहानियां बचपन में जो सुनी होंगी। चांद पे चरखा चलाती रही बुढिया कब से इतना काता है तो कुछ चीज भी बुनी होगी। आईना बन के चमकती है आस्मां के लिये वो बर्फ आज भी पहाड़ पर ... »

कि दिल का हाल चेहरे से कुछ ब्यां न हो…

वो जब गली से गुजरें तो, कोई वहां न हो घर के सिवाय मेरे कोई, घर खुला न हो। बेहतर है कि दीवारों से, कुछ दूर ही मिलें दीवारों के भी कान कहीं दरम्यां न हों। मुमकिन है मिल रहीं हों, हाथों की लकीरें पर बीच में तो कोई बुरा, ग्रह पड़ा न हो। अब ये भी अदाकारियां, देता है इश्क ही कि दिल का हाल चेहरे से कुछ ब्यां न हो। ये डर भी साथ हो कि मोहब्बत की राह में खाई तो पार कर लें, आगे कुआं न हो। कितने ही दर्द इश्क ... »

कोई खिड़की नहीं, झरोखा नहीं….

उसने जब उठते हुए रोका नहीं मैने भी चलते हुए सोचा नहीं। सामने सबके गले लग के मिले कभी तन्हाई में तो पूछा नहीं। इतना हंसना, ये मुस्कराना तेरा कहीं जमाने से तो धोखा नहीं। कैसे आऊं बता तेरे दिल में कोई खिड़की नहीं, झरोखा नहीं। नींद आ जाए, अश्क बहते रहें वैसे इस तरह कोई सोता नहीं। आप हीं बदलें खुद अपना चेहरा आईने में तो हुनर होता नहीं। …….सतीश कसेरा »

मैं प्यार दूंगा .

भुला सकोगे न तुम कभी भी , की  तुमको इतना मैं प्यार दूंगा . जो होगा चुलमन वो  होंगी  आँखे , उसी से तुमको निहार लूंगा . मगर रहे याद तुम्हे सदा ये,  उसी में नज़रें उतार लूंगा . तू मेरा साकी मैं रिन्द तेरा,  ये मयकदा ही तेरा बसेरा , पिला कभी तो मेरे हमनफ़स , तुम्हारे दर पे खड़ा हु बेबश , नज़र न फेरो , पिला के जाओ, कसम है दिल में उतार लूंगा .. भुला सकोगे न तुम कभी भी, की तुमको इतना मैं प्यार दूंगा.. …... »

दिल का धुंआ भी तो देखा जाये….

  कोई तो रंग मिलाया जाये दिल का धुंआ भी तो देखा जाये। बेबसी ये कि रोक भी न सको और कोई पास से चला जाये। जहां सेे भूले थे घर का रस्ता फिर उसी मोड़ पे जाया जाये। आईने और कितने बदलोगे अक्स अपना कभी बदला जाये। जिदंगी की किताब देखें जरा कोई तो लफ्ज समझ में आये। वक्त की तरह मिला हूं उनसे क्या पता लौटकर न हम आये। …………सतीश कसेरा »

कौन किस्मत से भला जीता है……

कौन किस्मत से भला जीता है………. ये उसके खेल का तरीका है कौन किस्मत से भला जीता है। पहुंच न पाते कभी मंजिल तक रास्तों को भी साथ खींचा है। सुबह दिल खूब लहलहायेगा रात भर अश्क से जो सींचा है। कोई दुआ या बद्दुआ तो नहीं कौन करता ये मेरा पीछा है। सुबह उठ जाये वो ऐसे-कैसे रात भर बैठ कर तो पीता है। लकीरें हाथ की न गिर जाएं कस के मुट्ठी को जरा भींचा है। ……………... »

उसके चेहरे से …

उसके चेहरे से …

उसके चेहरे से नजर हे कि हटती नहींवो जो मिल जाये अगर चहकती कहीं जिन्दगी मायूस थी आज वो महका गयीजेसे गुलशन में कोई कली खिलती कहीं वो जो हंसी जब नजरे मेरी बहकने लगीमन की मोम आज क्यों पिगलती गयी महकने लगा समां चांदनी खिलने लगीछुपने लगा चाँद क्यों आज अम्बर में कहीं भूल निगाओं की जो आज उनसे टकरा गयीवो बारिस बनकर मुझ पे बरसती गयी कुछ बोलना ना चाहते थे मगर ये दिल बोल उठाधीरे- धीरे मधुमयी महफिल जमती गयी आँ... »

एक मुलाकात की तमन्ना मे

आपकी यादो को अश्कों में मिला कर पीते रहेएक मुलाकात की तमन्ना मे हम जीते रहे आप हमारी हकीकत तो बन न सकेख्वाबों में ही सही हम मगर मिलते रहे आप से ही चैन ओ सुकून वाबस्ता दिल काबिन आपके जिंदगी क्या, बस जीते रहे सावन, सावन सा नहीं इस तनहाई के मौसम मेंहम आपको याद करते रहे और बादल बरसते रहे जब देखा पीछे मुडकर हमने आपकी आस मेंएक सूना रास्ता पाया, जिस पर तनहा हम चलते रहे »

खुदा का घर है आसमान, वो रहे रोशन——————-

खुदा का घर है आसमान, वो रहे रोशन——————- पता करो कि कहां, किसने जाल फैलाया सुबह गया था परिन्दा वो घर नहीं आया। रोशनी में ही चलेगा वो साथ—साथ मेरे कितना डरता है अंधेरों से ये मेरा साया। मेरी आहट को सुनके बंद रही जब खिडकी बडी खामोशी से मैं उसकी गली छोड आया। धूप में जलते हुए उससे ही देखा न गया पेड मेरे लिये कुछ नीचे तलक झुक आया। मुझे पता था कि तूफान यूं न मानेगा मैं... »

जिंदगी मेरी जिंदगी से परेशान है

जिंदगी मेरी जिंदगी से परेशान है

जिंदगी मेरी जिंदगी से परेशान है बात इतनी है कि लिबास मेरे रूह से अनजान है­­ तारीकी है मगर, दिया भी नहीं जला सकते है क्या करे घर में सब लाक के सामान है ऐसा नहीं कि कोई नहीं जहान में हमारा यहां दोस्त है कई मगर, क्या करें नादान है कोई कुछ जानता नहीं, समझता नहीं कोई यहां जो लोग करीब है मेरे, दूरियों से अनजान है घर छोड बैठ गये हैं मैखाने में आकर कुछ नहीं तो मय के मिलने का इमकान है ढूढ रहा हूं खुद को, क... »

मैं सूरज को किसी दिन……………….

मोहब्बत करके पछताने की खुद को यूं सजा दूंगा तुम्हें यादों में रक्खूंगा मगर दिल से भूला दूंगा। रहो बेफ्रिक तूफानों तुम्हारा दम भी रखना है किनारा आने से पहले मैं कश्ती को डूबा दूंगा। ऐ लंबी और अकेली रातों इतना मत सताओ तुम मैं सूरज को किसी दिन वक्त से पहले उगा दूंगा। यूं ही घुट—घुट के रोने की मुझे आदत नहीं यारो किसी दिन टूट कर बरसूंगा, सब आंसू बहा दूंगा। कहानी कहने में भी हुनर की होेती जरुरत है यूं अ... »

गीत मेरे..

नैनो के सूखे मेघो से मैं आज अगर बरसात करूँ , हल करुँ ज़मीन ए दिल में मैं नीर कहाँ से मगर भरूँ? है सूख चुका अब नेत्र कूप न मन का उहापोह बचा , न मेघ रहा न सावन है ,मिट गया जो कुछ था पास बचा . एक बार हौसला करके मैंने बीज प्रेम के बोये थे , न मौसम ने रखवाली की ,सावन ने पात न धोये थे . अब न मन है , न मौसम है ,न उर्वर क्षमता धरती की , न नैनो में अब पानी है ,न दिल में इच्छा खेती की . रोते है मेघ और कूप सभ... »

तो अच्छा हो

ज़रा कुछ देर रहमत हो सके तो अच्छा हो , ज़रा मन शांत होकर सो सके तो अच्छा हो.  . ख़तो के ज़ाल में उलझे हुए है मीर हम ,  ज़रा कुछ देर खुद में खो सके तो अच्छा हो .   . गुज़र गया है मुसाफिर फिर शहर से तेरे ,  तेरा कुछ राब्ता दिल हो सके तो अच्छा हो .   . न कह पाया जुबा से हाल दिल का अब तलक,  ज़रा अब हर्फ़ मेरे कह सके तो अच्छा हो.   . सुना है हिज़्र के किस्से ,विरह की दास्ताँ समझी,  ज़रा अपना भी दिल अब रो सके तो ... »

मुक्तक 5

जिंदगी बीत जाती है किसी को चाह कर कैसे?  कोई  बतलाये  तो मुझको मैं जीना भूल बैठा हूँ… अदा भी तुम ,कज़ा भी तुम ,मेरे दिल की सदा भी तुम, तुम्ही  अब चैन हो मेरे ,मेरे दिल की दुआ भी तुम.. तुम्हारे प्यार की उल्फत मेरे दिल की ये तन्हाई, तुम्हारे प्यार की आहट मुझे जब शाम को आई सुबह तक सो न पाया मैं, बस यही याद थी दिल में, कि मैं तूफ़ान में अटका ,नहीं हो तुम भी साहिल में… …atr »

मुक्तक 4

यहाँ हर शख्स है तेरा, वहां हर कब्र है मेरी, जहाँ कैसा बनाया है खुद ने क्या इरादा था? अब तो हालात भी मुझसे मिचौली आँख करते है, को सपनो में आता है ,किसी को याद करते है. मुझे है डर कहीं फिर से किसी हूरों की महफ़िल में, उड़ाया फिर से न जाये ,ये कुचला जिगर मेरा.. …atr »

तेरी चाहत

तेरी चाहत में इतना  मैं पराया हो गया खुद  से , कि दिल मेरा है फिर भी बात  करता है सदा तेरी.. कभी वो चांदनी मेरी थी, अब पावस की है यह रात, नहीं दिल में मेरे अब वो, नहीं हाथो में उसका हाथ.. न वो मेरी न मैं उसका तो फिर ये बीच का क्या है, नहीं देखूंगा अब उसको जो चेहरा चाँद जैसा है… …atr »

मेरी हार …

मोहब्बत में हारे, क़यामत  में हारे की ये ज़िंदगी हम शराफत में हारे.. न कोई है अपना ,न कोई पराया, अब जियें किसलिए  और किसके सहारे.. न है यामिनी आज जीवन में मेरे , मिटे, मिट गए आज हम फिर किनारे.. कभी  लए  से सांसे जो चलती  थी  मेरी , मगर अब खड़े आज बेबस बेचारे.. मिला भी नहीं कुछ ,बचा  भी नहीं कुछ, जो था पास में सब तुम्हारे  पे हारे… मोहब्बत में हारे ,क़यामत  में हारे, की ये जिंदगी  हम शराफत में हा... »

तुम्हे पाने की खातिर.

वो मंज़र याद है तुमको ,जुदा हम तुम हुए थे जब, समंदर याद है तुमको जहाँ पत्थर चलाया था.. कभी जब याद आ जाये ,ज़रा हमको भी करना याद , किसी के साथ जो तुमने वहां कुछ पल बिताया था. नहीं दिल से अभी वो शाम जाती है , नहीं होता सवेरा, की जब से तुम गए हो मीर, मेरा जीवन अँधेरा. ख़ुदा कैसी तमन्ना है,की मैं अब भी तरसता हूँ, पता मुझको , यकीं मुझको, मगर फिर भी मचलता हूँ…    तुम्हे पाने की खातिर,तुम्हे पाने की ख... »

छुपा है चाँद बदली में…

छुपा है चाँद बदली में ,अमावस आ गयी है क्या? नहीं देखा कभी जिसको वही शर्मा गयी है क्या? मिलन की रात में ये घुप्प अँधेरा क्यों सताता है ? वो मेरा और उसका छुप छुपाना याद आता है.. अभी तो थी फ़िज़ा महकी , क़यामत आ गयी है क्या? कभी वो थी कभी मैं था, कभी चंचल चमकती रात,  न वो कहती ,न मैं कहता मगर आँखे थी करती बात.. जिन आँखों में हया भी थी,कज़ा अब आ गयी है क्या? वो नदियों के किनारो पर जहाँ जाता था मिलने को, व... »

तेरे शहर में..

आज हम भी है मेहमान तेरे शहर में,  दिखता नहीं मकान तेरे शहर में. ग़ुम हो गयी है शाम  की मस्ती  भी अब यहाँ, ग़ुम  हो गया करार तेरे शहर में.. आते  राहों  में मिल  गया तेरा आशिक, कहने लगा  न जाओ तेरे शहर में. जब से तुमने छोड़ा है दस्त ए गुलाब को, वन हो गया वीरान ,तेरे शहर में. बन्दों का हाल ऐसा मैं कह न सकता मीर, पागल हुए जवान   तेरे शहर में. दिन भर उठी है धूल,पैरों में आ लगी, मैंने कहा  सलाम है,तेरे शहर... »

एक मुलाकात की तमन्ना मे

आपकी यादो को अश्कों में मिला कर पीते रहे एक मुलाकात की तमन्ना मे हम जीते रहे आप हमारी हकीकत तो बन न सके ख्वाबों में ही सही हम मगर मिलते रहे आप से ही चैन ओ सुकून वाबस्ता दिल का बिन आपके जिंदगी क्या, बस जीते रहे सावन, सावन सा नहीं इस तनहाई के मौसम में हम आपको याद करते रहे और बादल बरसते रहे जब देखा पीछे मुडकर हमने आपकी आस में एक सूना रास्ता पाया, जिस पर तनहा हम चलते रहे »

तुझसे रुबरु हो लूं मेरे दिल की आरजू है

तुझसे रुबरु हो लूं मेरे दिल की आरजू है

तुझसे रुबरु हो लूं मेरे दिल की आरजू है तुझसे एक बार मैं कह दू, तू मेरी जुस्तजु है भॅवरा बनकर भटकता रहा महोब्बत ए मधुवन में चमन में चारो तरफ फैली जो तेरी खुशबु है जल जाता है परवाना होकर पागल जानता है जिंदगी दो पल की गुफ्तगु है दर्द–ए–दिल–ए–दास्ता कैसे कहे तुझसे नहीं खबर मुझे कहां मैं और कहां तू है शायर- ए- ग़म तो मैं नहीं हूं मगर मेरे दिल से निकली हर गज़ल में बस तू है »

इस कफ़स में वो उडान, मैं कहॉ से लाऊं

इन परों में वो आसमान, मैं कहॉ से लाऊं इस कफ़स में वो उडान, मैं कहॉ से लाऊं   (कफ़स  = cage) हो गये पेड सूने इस पतझड के शागिर्द में अब इन पर नये पत्ते, मैं कहॉ से लाऊं जले हुए गांव में अब बन गये है नये घर अब इन घरों में रखने को नये लोग, मैं कहॉ से लाऊं बुझी-बुझी है जिंदगी, बुझे-बुझे से है जज्बात यहॉ इस बुझी हुई राख में चिन्गारियॉ, मैं कहॉ से लाऊं पथरा गयी है मेरे ख्यालों की दुनिया अब इस दुनिया में ... »

अब न चांदनी रही न कोई चिराग रहा

अब न चांदनी रही न कोई चिराग रहा राहों में रोशनी के लिए न कोई आफताब रहा उनकी महोब्बत के हम मकरूज़ हो गए उनका दो पल का प्यार हम पर उधार रहा वेवफाई से भरी दुनिया में हम वफा को तरस गए अब तो खुद पर भी न हमें एतबार रहा शम्मा के दर पर बसर कर दी जिंदगी सारी परवाने को शम्मा में जलने का इंतजार रहा उन्हे देख देख कभी गज़ल लिखा करते थे हम अब न वो गजल रही और न वो हॅसी गुबार रहा »

वो आये कभी पतझङ कभी सावन की तरह

वो आये कभी पतझङ कभी सावन की तरह जिंदगी हमें मिली हमेशा बस उनकी तरह फूलों के तसव्वुर में भी हुआ उनका अहसास आये वो मेरी जिंदगी में खिलती कली की तरह जब से दी जगह खुदा की उनको दिल में हमने याद करना उनको हो गया इबादत की तरह डूब गया दिल दर्द ए गम ए महोब्बत में बहा ले गयी हमें साहिल ए इश्क में लहरो की तरह हुई जब रुह रुबरु उनसे जिंदगी ए महफिल में समा गयी वो मेरी रुह में सांसो की तरह »

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