कतरा कतरा लहूँ का जिस्म में सहम गया चलो इसी बहाने रगों में बहने का वहम गया वो कोई हिस्सा था मेरे ही जिस्म का जुदा हुआ वो तोड़ कोई कसम गया मेरे मिटने की […]
कतरा कतरा लहूँ का जिस्म में सहम गया चलो इसी बहाने रगों में बहने का वहम गया वो कोई हिस्सा था मेरे ही जिस्म का जुदा हुआ वो तोड़ कोई कसम गया मेरे मिटने की […]
हम लुत्फ़ कुछ बारिशों का यूँ उठा रहे है अपने आंसुओं को बारिशों में छुपा रहे है उसी को याद करना और हमेशा याद रखना किसी को भूलने की क्या अदावत निभा रहे है हम […]
मेरे तस्सवुर के रंग क्यों फीके होने लगे है मेरे सायें भी अब मुझसे दूर होने लगे है मैंने गिन गिन के सजाये थे जो मेरी वसीयत थी वो लम्हे क्यों मेरी ज़िंदगी से कम […]
रिश्तों का सत्य जो लगता यथार्थ से परे सदा मानते हुए छलावा हम जुड़े रहना चाहते है सदा ये रिश्तें जो खून से बनते ,खून में ही पनपते है अंत होता है खून में ही […]
फूलों की हसरत की ,यही कसूर है मेरा काटें ही काटें मिले ये नसीब है मेरा सोचा था तूफां से कस्ती पार निकल जाएगी तूफां का क्या कसूर, निकला नाखुदा नासेह मेरा कल तक जो […]
रेत के महलों की तरह ,हरदम ढहती है ये ख्वाइशें फिर भी हर पल क्यों सजती सवरती है ये ख्वाइशें उम्मीदे इन्ही ज़िंदा रखती सांसों में रचती -बसती पलती-बढ़ती सब चुपचाप सहती है ये ख्वाइशें […]
चलो चुप लफ्जों को मिल के बाँट लेते है चल निकले लफ्जों को मिटटी से पाट देते है वो तेरा कहना मुझे मौसम की तरह चल तीर को किसी शाख पे गाड़ देते है वो […]
गर वाबस्ता हो जाता रूहे-अहसास से जमाना न कोई शायरी होती न कोई ग़ज़ल होती गर वफ़ा करने की आदत होती जहाँ में न कोई शायरी होती न कोई ग़ज़ल होती गर न तेरे शिकवे […]
बिखरे बिखरे ख्वाब सुलगते सुलगते आंसूं सीने में तूफ़ान दिल में बस कशिश काफिले यादों के लम्बे कोई शै मुकम्मल नहीं तनहा तनहा सफर लम्बी लम्बी रातें न वफ़ा का इल्म न जफ़ा का तजुर्बा […]
फरियाद बन के निकली मेरी वफ़ा तेरी गली में कौन सुनता मेरे दिल की सदा तेरी गली में यूँ तो बस आवाज़ हूँ एक बुतखाने की कौन बख्सेगा यूँ मेरी खता तेरी गली में दरो-दीवार […]
आँखों में रखा बुलंदिओं का जोश है यहाँ हर इंसा खुद में मदहोश है वहां से निकल तो आया था जहाँ शोर था कैसे निकलू जो अपने ही अंदर सरफ़रोश है कौन सी दुनिया को […]
aankhon mein rakha bulandion ka josh hai yahan har insaa khud mein madhosh hai wahan se nikal to aaya tha jahan shor tha kaise nikaloon jo apne hi ander sarfarosh hai kaun si duniya ko […]
अब भी मेरा नाम उनके अपनों में शुमार है उनके हाथों के पत्थर को मेरा इंतज़ार है ये चादर जरा आहिस्ते से संभल कर ही हटाना ये फूलों से नहीं ,चुभते काटों से सजी मजार […]
सब कुछ है जहाँ में ,बस यहाँ किल्लत कुछ और है ज़िंदगी तुझे जीने के लिए ,बस जिल्लत का दौर है आईने ने कब माफ़ की है ख़ता किसी गुनाहगार की और हमें सच बोलते […]
आराईश अपने अंदर की तो हम अब खो चुके है तलाश आलम की करते फिरते रहने को नासबूर है परस्तिश बन्दे की हो या फिर ख़ुदा की हो बस कुछ न कुछ मांगने का अजीब […]
आए न रास किश्तों के क़त्ल ,क़त्ल हो तो एक बार हो मेरे क़ातिल दुआ मेरी ,तेरे खंजर की न खत्म कभी धार हो देते है खुद को धोखा ,औरो के फरेब से क्या बच […]
वो इतना ही कह सका था तुझसे रुखसत पे जान हाज़िर है तेरे वास्ते तेरी निस्बत पे बाग़ की रौनके पूछिए उस बागबाँ से जिसने खिलाये है फूल तेरी चाहत पे कौन समझा है इन […]
दर्द के चरागों को बुझने का कोई बसेरा दे दो ग़ुम हुए लोगों को कोई इक नया चेहरा दे दो इन सुर्ख आँखों का कसूर तुम्हारा हिस्सा है इन आँखों को तुम कोई ख्वाब सुनहरा […]
दर्द के चरागों को बुझने की कोई हवा दे दो ग़ुम हुए लोगों को लौटने का कोई पता दे दो इन सुर्ख आँखों का कसूर इतना तुम्हारा हिस्सा है इन आँखों को तुम कोई ख्वाब […]
है तो इंसा ही हम कोई खुदा नहीं है, गुस्ताखिओं की और कोई वज़ह नहीं है गिरते झरने से, अच्छे लगते है उड़ते परिंदे पर मेरा अक्स ये जमीं है कोई आस्मां नहीं है यूँ […]
हम भी है तुम भी हो ,पर ये सहारे बदल गए लहरें तो वही है मगर ये किनारे बदल गए लोग पत्थर के बन गए है , ,दिल हमारे है आईने हम तो अब भी […]
मेरे ज़ख्मों का खाता इक दिन नीलाम हो गया दुश्मनों को मिला न हिसाब और इन्तेक़ाम हो गया वाबस्ता थे जिन चेहरों से ,जो थे मेरे रात दिन उनके चेहरों का रंग सारे शहर में […]
टूटे अल्फ़ाज़ों को नसीहत की जरूरत क्या बिखरे ख्वाबों को किस्मत की जरूरत क्या जो बिक गया खुद ही सरेआम बाज़ारों में फिर इंसान की कीमत की जरूरत क्या हर इक शै का […]
उठे जब भी सवाल ज़िंदगी की तरफ उठे है हाथ मेरे तेरी बंदगी की तरफ महज इत्तफ़ाक़ था या और कुछ मेरा इशारा है दिल्लगी की तरफ वो हर जगह जो मोज़ू था मगर नज़र […]
हर मुसीबत को न्योता दिया नहीं जाता ,, जरुरत न पड़े तब तक सर ओखली में नहीं जाता …..!! सम्मान लौटा रहे हो तो वो पूछेंगे नहीं ,,जिनसे नेताओं के बदजुबानी का सवाल पुछा नहीं […]
मेरे जज्बात अब पत्थर हो गए है अब फूलों की बातें पहरों में सिसक रही है अब लहरें समुन्दर की सांसें बन गई है अब हवाओं में फैल गए है नग्मे दर्द भरे अब जमाने […]
जिधर का रुख करें इन फ़िज़ाओं को साथ रख लेना इन फ़िज़ाओं में बसी अपनी साँसों को साथ रख लेना वक़्त मिलता कहाँ कभी खुद से रुबरूं होने का कभी हाथों में तुम एक टूटा […]
खौफ आईने का हर शक्ल पर भारी है हर शक्ल आईने के सामने आकर बिखर जाती है कुछ तो रहस्य छिपा है आईने में शक्ल जो सिहर जाती है आईने को तोड़ के देखा शक्लों […]
मुसाफिर अपनी राह से भटक रहा है मृग जाने किस चाह से भटक रहा है रहस्य दर्पण में नहीं आकृति में नहीं दर्पण किस गुनाह से भटक रहा है किस सत्य की खोज में मन […]
ज़िक्र तिरी वफ़ा का मसला था , जो अब न रहा मैं कब तिरी आँखों में बसा था, जो अब न रहा इक बुतखाने की तिश्नगी से बढ़कर कुछ नहीं कभी बुलंद जमाना मैं था […]
गुज़ारिश गुज़ारिश गुम हुआ अपने शहर की गलिओं मेँ अपना साया है मैंने भी कब अपने शहर का कोई क़र्ज़ चुकाया है अब तो हो गए वो रास्ते भी किसी अजनबी से जिन रास्तों ने […]
जो यादों में बसा है ,उसे वहीँ रहने दो मेरी दी हुई हिचकिओं में, उसे रहने दो आज साकी तू रुख से पर्दा नहीं नक़ाब उठा मैखाने के बातें बस मयखानों तक रहने दो किसने […]
कोई शाम फिर रात की बाँहों में दम तोड़ गई रात भर वो शाम दरवाज़े पे देती रही दस्तक कुछ धुँधले से साये करीब आकर छूते तो है अपना पता पूछते है मुझ अजनबी से […]
तेरे सायें से लिपटना मेरी आदत भी नहीं प्यार तो दूर बहुत मैं तेरी नफरत भी नहीं क्या दबा रखा है अंदर किसी खंजर की तरह अब मरासिम न सही मगर ऐसी अदावत भी नहीं […]
ग़ज़ल : अनुपम त्रिपाठी इक शख्स कभी शहर से ; पहुँचा था गाँव में । अब रास्ते सब गाँव के ; जाते हैं शहर को ।। खेत–फ़सल–मौसम ; खलिहान हैं उदास । ग़मगीन चुभे पनघट […]
मुझको मिले हैं ज़ख्म जो बेहिस जहान से फ़ुरसत में आज गिन रहा हूँ इत्मिनान से आँगन तेरी आँखों का, न हो जाये कहीं तर डरता हूँ इसलिए मैं वफ़ा के बयान से साहिल पे […]
मन बहलाने को कोई निशानी भेज दो नींद नहीं आती कोई कहानी भेज दो ….. संजीदा रहूँ हमेशा तेरी यादों में मेहरबान बन कोई मेहरबानी भेज दो…. भा गया कुछ यूँ दिल को तेरा अपनापन […]
पछताओगे तुम, रुसवाईयां करोगे गर छोड दिया हमने तेरी गलियों मे आना कभी तुझसे मुश्ते-मोहब्बत मांगी थी, कोई कोहिनूर नहीं बस तेरे दीदार की दरकार थी चश्मेतर को कभी भर गये पांव आबलो […]
इक नज़्म है जिसे हरपल गुनगुनाता हूँ कोरे कागज पै स्याही सा बिखर जाता हूँ हर्फ़ हालातों में ढलकत कुछ कह देते है कोई सुनता है तो मैं संवर जाता हूँ कोई साखी है तेरे […]
मेरी सांसो में तू महकता हैँ क़ायनात – ए – ग़ैरों में तू ही अपना लगता हैँ 1 . होंठों की ख़ामोशी समझा ना सके नैनों में इश्क़ मेरा झलकता हैँ ( 2 […]
चाहे कितनी नफ़रत कर लो हमसे तेरे दिल को अपना बनाकर रहेगें बहुत रो चुकी है आंखे हमारी तेरी आंखों से आंसू हम गिराकर रहेंगे चाहे कितनी भी अंधेरी हो जिंदगी की रातें शम्मां महोब्बत […]
मौत करती है नए रोज़ बहाने कितने ए – अप्सरा ये देख यहाँ तेरे दीवाने कितने मुलाक़ात का इक भी पल नसीब ना हुआ कोई मुझ से पूछे बदले आशियाने कितने तेरे इंतजार […]
कुछ अश्कों की महफिल जमी और वो याद आये रुखसार कुछ नम से हुए और वो याद आये एक जमाने की मोहब्बत वो चंद लम्हो में भुला बैठे हम भूलकर भी उन्हे भूला ना पाये […]
रह – रह कर ज़ेहन में बस यही ख्याल आ रहा हैं मुझे तनिक बदलने दो , नया साल आ रहा हैं ….. बेचैन धड़कन हो गयी है शायद संग अपने ख़ुशियां बे-मिसाल ला […]
चलो आज बात करे गुज़रे जमाने की मैंने जरूरत समझी आप सबको बताने की ….. संग उसके मुस्कुराकर समझते थे क्या बेनज़ीर रौनक है मेरे काशाने की …. इक मरतबा भुला ही दिया […]
वो पूछते है हमसे कि आजकल हम क्या करते है क्या बताएं कि उनके इंतजार में किस कदर मरते है अपने अहसास, अपनी आरजू दिल में दबाए रखे है वो कहते है कि आजकल हम […]
kya bataye kese din maan chalte h mere.. bahut hi kharab haalat par har pal machalte h mere. mein jhuti hasi hasu toh bhi mera hi kasoor… ke dusman to dusman dost bhi jalte h […]
थोड़ा रंज में , थोड़ी ख़ुशी में , साल ये बीता …. ख़ुद की मोहब्त को हारा , लेकिन फिर भी जीता …… मुसलसल हैं आज भी यादों का कारवाँ …. थोड़ा तन्हा , […]
मोहब्बत से नफरत तक आने में, वक़्त तो लगता है; जागती आँखों को सुलाने में वक़्त तो लगता है!! . इतनी जल्दी कहाँ से सीखा, तुमने रक़ीबों-सा हुनर; अपने महबूब को रुलाने में, वक़्त तो […]
सम्भाल ले ऐ – ख़ुदा , एक लम्हे के लिए मुझे…. अब मैं हार रहा हूँ ….. तू ही बता मेरे साहिब , मैं क्यों ये जिंदगी तन्हा गुजार रहा हूँ … तूने साज़ […]
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